- फ्रांस ने फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप 2022 के फ़ाइनल में जगह बना ली है
- फ्रांस ने वर्ल्ड कप के दूसरे सेमीफ़ाइनल में मोरक्को को 2-0 से मात दी
- फ्रांस के लिए थियो हनांडेज़ और कोलो मुआनी ने गोल किए
- फ्रांस ने मैच के दोनों हाफ में एक-एक गोल किया.
- फ्रांस ने लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप फ़ाइनल में जगह बनाई है.
- फ्रांस का फ़ाइनल में रविवार को अर्जेंटीना से मुक़ाबला होगा
- मोरक्को की टीम तीसरे स्थान के लिए क्रोएशिया से टक्कर लेगी.
वर्ल्ड कप में नतीजे अगर आक्रामक कोशिश, हार न मानने की ज़िद और फैन्स के समर्थन से तय होते तो अफ़्रीकी टीम मोरक्को के लिए फ़ाइनल के दरवाज़े बंद नहीं होते.
लेकिन, फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप 2022 के दूसरे सेमीफ़ाइनल में किस्मत डिफेंडिंग चैंपियन फ़्रांस के साथ थी.
फ़्रांस की खूबी ये भी रही कि उसके खिलाड़ियों ने हाथ आए अहम मौकों को भुनाया भी और लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप फ़ाइनल खेलने का हक़ हासिल कर लिया.
फ़्रांस ने आखिरी लम्हों तक दिलचस्प रहे मुक़ाबले में मोरक्को को 2-0 से मात दी.
इंजरी टाइम मिलाकर करीब 99 मिनट तक मैच पर रहे दोनों टीमों के खिलाड़ियों के संघर्ष की कहानी सिर्फ़ स्कोर लाइन से जाहिर नहीं होती.
फ्रांस के लिए मैच के पांचवें मिनट में थियो हनांडेज़ और दूसरे हाफ़ के 79वें मिनट में सबस्टीट्यूट खिलाड़ी कोलो मुआनी ने गोल किए.
इसने मोरक्को के वर्ल्ड कप फ़ाइनल में पहुंचने वाली पहली अफ़्रीकी टीम होने का ख्वाब भले ही तोड़ दिया लेकिन टूर्नामेंट में इस टीम ने जिस दिलेरी के साथ फ़ुटबॉल खेला है, उसकी हर तरफ तारीफ हो रही है.
फ़्रांस के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल मैच में भी 61 प्रतिशत समय तक गेंद पर मोरक्को के खिलाड़ियों का ही कब्ज़ा रहा. फ्रांस के पास गेंद सिर्फ़ 39 फ़ीसदी वक्त तक रही.
मोरक्को का संघर्ष
रैंकिंग, रिकॉर्ड और रुतबे के पैमाने पर फ्रांस की टीम मोरक्को से काफी आगे थी. लेकिन, वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल में जगह बनाने वाली अफ़्रीका की पहली टीम ने मैच में कई ऐसे मौके बनाए जब विरोधी खेमे में खलबली मचा दी.
लेकिन फ़्रांस ने बड़े मैचों के अनुभव और खिलाड़ियों के बेहतर तालमेल से बाज़ी अपने नाम की.
मैच शुरू होने के पहले ही मोरक्को को झटका लग गया. टीम के अहम डिफेंडर नाएफ़ अगर्ड चोट की वजह से बाहर हो गए. मैच के लिए मोरक्को की शुरुआती टीम में उनका नाम था. कप्तान रोमा साइस चोटिल होने के बाद भी खेले लेकिन उन्हें पहले हाफ में ही मैदान से बाहर जाना पड़ा.
मोरक्को को झटके और भी लगे. क्वार्टर फ़ाइनल तक मोरक्को की टीम के ख़िलाफ़ कोई भी विरोधी टीम गोल नहीं कर सकी थी लेकिन फ़्रांस ने मैच के पांचवें मिनट में ही मोरक्को की रक्षा पंक्ति को भेद दिया.
पहला गोल
ये गोल करने में फ़्रांस के खिलाड़ियों की कोशिश और तेज़ी के अलावा किस्मत का भी साथ रहा. एंतवान ग्रीज़मान ने मोरक्को के खिलाड़ियों को छकाते हुए स्टार खिलाड़ी कीलियन एमबापे को पास दिया.
उन्होंने गोलपोस्ट भेदने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुए. इस बीच फुल बैक थियो हनांडेज़ ने गोल पोस्ट के दायीं ओर से कमाल की किक लगाई और गेंद कीपर यासीन बोनो को छकाते हुए मोरक्को के गोलपोस्ट में दाखिल हो गई.
बीते करीब 40 साल में फ़्रांस ने वर्ल्ड कप में पहला गोल करने के बाद कोई मैच नहीं गंवाया है और ये रिकॉर्ड मोरक्को के ख़िलाफ़ भी बरकरार रहा.
पहला गोल हुआ और स्टेडियम में सन्नाटा सा छा गया. 'गो मोरक्को गो' के नारे लगाते हुए अफ़्रीकी टीम के समर्थक सकते में आ गए.
मोरक्को टीम ने पहला गोल खाने के बाद हौसला नहीं छोड़ा लेकिन सेमीफ़ाइनल में दिन उनका नहीं था.
पहले हाफ़ में ही जवाद अल यमीक़ ने अपनी शानदार किक के जरिए मोरक्को को बराबरी दिला दी होती लेकिन फ़्रांस के गोलकीपर ह्यूगो लॉरिस ने कमाल का बचाव किया.
ख़ारिज हुई अपील
पहले हाफ के 28वें मिनट में मोरक्को ने पेनल्टी की अपील की. फ्रांस के लिए पहला गोल करने वाले थियो हनांडेज़ ने मोरक्को के सोफियान बुफाल गिरा दिया लेकिन मोरक्को की अपील मंजूर नहीं की गई और बुफाल को पीला कार्ड भी दिखाया गया.
इस फैसले को लेकर कई एक्सपर्ट बहस करते रहे.
दूसरे हाफ में मोरक्को ने फ़्रांस की बढ़त उतारने की पुरजोर कोशिश की लेकिन खिलाड़ी हाथ आए मौके भुना नहीं सके.
फ्रांस के लिए कोलो मुआनी ने दूसरा गोल किया और मोरक्को के फ़ाइनल में पहुंचने की उम्मीदें चकनाचूर हो गईं.
इतिहास रचने के करीब फ़्रांस
फ़्रांस के पास अब मौका नया इतिहास बनाने का है. फ़्रांस की टीम ब्राज़ील के 60 साल पुराने लगातार दो वर्ल्ड कप जीतने का रिकॉर्ड की बराबरी कर सकती है. बीते 20 साल में फ़्रांस पहली टीम है जिसने लगातार दो बार फ़ाइनल में जगह बनाई है. इसके पहले ब्राज़ील ने लगातार तीन बार (1994,1998 और 2002) में फ़ाइनल में जगह बनाई थी.
फ्रांस ने साल 2018 में क्रोएशिया को हराकर वर्ल्ड कप जीता था.
रविवार को होने वाले मुक़ाबले को अभी से फ्रांस के एमबापे और अर्जेंटीना के लियोनल मेसी के बीच की टक्कर के तौर पर देखा जाने लगा है.
फ्रांस को 1998 में बतौर कप्तान वर्ल्ड कप दिलाने वाले दिदिए देशाँ अब टीम के कोच हैं. उनके पास बतौर कोच टीम को दो खिताब दिलाने का मौका है.
मोरक्को का अगला मिशन
उधर, मोरक्को के कोच वलीद रिगरेगी ने कहा, "हमने पूरा ज़ोर लगाया. ये बात सबसे अहम है. हमारे कुछ खिलाड़ी चोट की वजह से बाहर हो गए लेकिन इसका बहाना नहीं बनाना चाहते हैं."
उन्होंने कहा, " छोटी ग़लतियां हमें भारी पड़ीं. हमारी शुरुआत अच्छी नहीं रही. पहले हाफ़ में सही बात नहीं बनी लेकिन जब दूसरा गोल हुआ तो हम मैच से बाहर हो गई. हालांकि, हमने पहले हासिल किया था, इससे उस पानी नहीं फिरेगा. "
मोरक्को की टीम ख़िताब की दौड़ से बाहर हो गई है लेकिन शनिवार को वो क्रोएशिया के ख़िलाफ़ तीसरे नंबर के लिए मैच खेलेगी.
'एटलस लायंस' के नाम से मशहूर इस टीम ने वर्ल्ड कप में अपने बेहतरीन प्रदर्शन से कैसा रुतबा हासिल किया है, इसकी एक झलक सेमीफ़ाइनल मैच के बाद दिखी. सेमीफ़ाइनल में हार के बाद भी मैच ख़त्म होने पर फैन्स ने मोरक्को के खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया.
मोरक्को ने टूर्नामेंट में पुर्तगाल, बेल्जियम और स्पेन जैसी मजबूत टीमों को मात दी. सेमीफ़ाइनल के पहले कोई भी विरोधी टीम मोरक्को के ख़िलाफ़ गोल नहीं कर सकी थी.(bbc.com/hindi)