-दिलीप कुमार शर्मा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुयान सरमा का नाम पीपीई किट की आपूर्ति से जुड़े एक कथित घोटाले से जोड़ने के बाद प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा गया है.
दरअसल कोविड-19 महामारी के दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुयान सरमा की कंपनी जेसीबी इंडस्ट्रीज ने असम के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी एनएचएम को पीपीई किट की आपूर्ति की थी. उस दौरान हिमंत बिस्व सरमा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे.
रिंकी भुयान सरमा ने एक बयान जारी कर एनएचएम को क़रीब 1,500 पीपीई किट की आपूर्ति करने की बात स्वीकार को किया लेकिन भ्रष्टाचार से जुड़े तमाम आरोपों को निराधार बताया है और कहा कि पीपीई किट सीएसआर कार्यक्रम के तहत दिए गए थे.
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आम आदमी पार्टी की असम इकाई ने सोमवार को पीपीई किट की खरीद में कथित विसंगतियों के ख़िलाफ़ लतासिल पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई है.
इस दौरान गुवाहाटी में विरोध प्रदर्शन कर रहे पार्टी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से तत्काल इस्तीफ़ा देने की मांग की है.
क्या है पीपीई घोटाला?
असम में एक तरफ जहां प्रमुख विपक्ष कांग्रेस समेत रायजर दल और असम जातीय परिषद (एजेपी) जैसी राजनीतिक पार्टियां इस पीपीई किट की आपूर्ति में कथित अनियमितताओं की सीबीआई, ईडी या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी से अलग-अलग जांच करवाने की मांग कर रहें है, वहीं अब इस पीपीई किट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की चर्चा दिल्ली तक पहुंच गई है.
दो दिन पहले दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने जब पीपीई किट मामले में मुख्यमंत्री हिमंत के परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए तो मुख्यमंत्री ने सिसोदिया पर आपराधिक मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दे डाली.
ऐसे में यह सवाल उठता है कि आख़िर क्या है ये पीपीई यानी पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट किट से जुड़ा कथित घोटाला और यह कैसे सामने आया?
दरअसल समाचार वेबसाइट द वायर और गुवाहाटी स्थित न्यूज़ पोर्टल द क्रॉस करंट ने 1 जून को कई आरटीआई के जवाबों के आधार पर एक साझा रिपोर्ट प्रकाशित की जहां यह दावा किया गया कि असम सरकार ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी और उनके परिवार के व्यापारिक सहयोगी के स्वामित्व वाली तीन कंपनियों को कोविड-19 संबंधित चार आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति करने के ऑर्डर दिए थे.
द क्रॉस करंट ने कहा है कि इन तत्थों को आरटीआई के जरिए एनएचएम से प्राप्त करने में छह महीने से अधिक समय लग गया क्योंकि एनएचएम किसी भी सूरत में ये जानकारियां देने को इच्छुक नहीं था.
इन दोनों मीडिया संस्थानों ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की संभावना भी जताई कि इन तीन फर्मों को बिना निविदा और कोटेशन प्रक्रिया का पालन किए बगैर ये ऑर्डर दिए गए.
अपनी रिपोर्ट में मीडिया संस्थानों ने ख़ासतौर पर जेसीबी इंडस्ट्रीज का जिक्र किया जिसकी मालिक मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुयान सरमा हैं. जेसीबी इंडस्ट्रीज को राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय से तत्काल आपूर्ति आदेश उस समय मिला था जब हिमंत बिस्वा सरमा स्वास्थ्य मंत्री थे.
पीपीई किट वितरित करने का यह 'तत्काल' कार्य आदेश जेसीबी इंडस्ट्रीज को 18 मार्च, 2020 को जारी किया गया था और उसके छह दिन बाद यानी 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी.
एनएचएम से मिले आरटीआई के जवाबों के हवाले से इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि उस समय सरमा के नेतृत्व वाले स्वास्थ्य विभाग ने लॉकडाउन से पहले न केवल उनकी पत्नी की कंपनी को बल्कि जीआरडी फ़ार्मास्युटिकल्स और मेडिटाइम हेल्थकेयर नामक दो कंपनियों को भी 'तत्काल आपूर्ति' आदेश जारी किया था.
ये कंपनियां मुख्यमंत्री के परिवार के व्यापारिक सहयोगी घनश्याम धानुका की बताई गई हैं.
वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार घनश्याम के पिता अशोक धानुका आरबीएस रियल्टर्स (अब वशिष्ठ रियल्टर्स) के निदेशक हैं, इस कंपनी में वर्तमान में मुख्यमंत्री सरमा के बेटे नंदिल बिस्वा सरमा बहुसंख्यक शेयरधारक हैं.
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री की पत्नी की कंपनी और धानुका की एक कंपनियां मेडिटाइम हेल्थकेयर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के समय सरकार द्वारा 'तत्काल' दिए गए आपूर्ति आदेशों को पूरा करने में विफल रही. फिर भी बाद के दिनों में धानुका की फर्मों ने पहले के मुक़ाबले बहुत अधिक दर पर राज्य सरकार से अधिक महामारी संबंधी आपूर्ति ऑर्डर प्राप्त किए.
एनएचएम के प्रबंध निदेशक एस. लक्ष्मण के कार्यालय से द क्रॉस करंट को 10 मार्च, 2022 को प्राप्त एक आरटीआई जवाब के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि असम सरकार ने 24 मार्च 2020 से देशव्यापी लॉकडाउन के मद्देनजर नामांकन/ कोटेशन/निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सभी उपलब्ध स्रोतों से आपातकालीन खरीद के उद्देश्य के लिए राज्य स्तर, जिला स्तर और मेडिकल कॉलेज स्तर की खरीद समिति को तत्काल अधिसूचित किया था.
आरटीआई के जवाब में एनएचएम के 14 आपूर्ति ऑर्डरों की प्रतियां शामिल हैं, जिनमें कुछ 'अत्यावश्यक' के तौर पर चिह्नित हैं. राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने 18 मार्च, 2020 और 23 मार्च, 2020 के बीच पीपीई किट और हैंड सैनिटाइज़र की खरीद के लिए चार 'तत्काल' आदेश जारी किए थे. इन ऑर्डरों में कहीं भी ऐसा उल्लेख नहीं था कि काम के लिए कोई कोटेशन मांगा गया था.
लेकिन देशव्यापी लॉकडाउन के बाद जारी किए गए 14 महामारी संबंधी कार्य आदेशों में से एक में यह उल्लेख किया गया था कि अनुमोदन उस बोली लगाने वाले के क्वोटेशन पर आधारित था.
इस रिपोर्ट के अनुसार एनएचएम ने 18 मार्च, 2020 को जेसीबी इंडस्ट्रीज को 5,000 पीपीई किट 990 रुपये प्रति किट के लिए 'तत्काल' आपूर्ति आदेश जारी किया था, जबकि उसी दिन उसने एनई सर्जिकल इंडस्ट्रीज नामक असम की एक अन्य फर्म से 600 रुपये की दर से प्रति किट खरीदे थे.
सीएम की पत्नी की कंपनी नहीं कर पाई पीपीई की डिलीवरी
इसके बाद मेडिटाइम हेल्थकेयर को 22 मार्च, 2020 को 10,000 पीपीई किटों की 'तत्काल' आपूर्ति करने के लिए भी कहा गया था. इसके एक दिन बाद 23 मार्च को मेडिटाइम से 10,000 किट की एक और खेप मांगी गई.
इन दोनों आपूर्ति आदेश में प्रति किट की कीमत 990 रुपए निर्धारित थी. लेकिन पीपीई किट की खरीद के लिए बहुत अधिक मूल्य निर्धारित करने के बाद भी जेसीबी इंडस्ट्रीज और मेडिटाइम हेल्थकेयर अपने तत्काल आपूर्ति आदेशों को पूरा नहीं कर सके.
जबकि 600 रुपये प्रति किट के हिसाब से 1,790 किट का ऑर्डर प्राप्त करने वाली एनई ईस्टर्न सर्जिकल इंडस्ट्रीज ने अपना ऑर्डर समय पर सफलतापूर्वक पूरा किया.
लिहाजा रिंकी भुयान सरमा की पत्नी की कंपनी को सौंपा गया तत्काल कार्य आदेश 4 अप्रैल, 2020 को रद्द कर दिया गया था और 6 अप्रैल, 2020 के एक पत्र के माध्यम से जेसीबी इंडस्ट्रीज को इस बात से अवगत करा दिया गया.
इन मीडिया रिपोर्टों में भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद 1 जून की शाम रिंकी भुयान सरमा ने ट्विटर पर एक बयान जारी किया उससे यह बात तो स्पष्ट हो गई कि जेसीबी इंडस्ट्रीज उनकी ही है.
उन्होंने अपने बयान में मीडिया संस्थानों के तमाम आरोपों को निराधार बताते हुए कहा, "कोविड महामारी के शुरूआती सप्ताह के दौरान असम में एक भी पीपीई किट उपलब्ध नहीं था. इसका संज्ञान लेते हुए मैं एक परिचित व्यावसायिक के पास पहुंची और लगभग 1,500 पीपीई किट एनएचएम-असम को 'काफी कोशिशों के बाद' वितरित किया. मैंने एनएचएम को लिखा था कि वह इसे हमारी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के हिस्से के रूप में स्वीकार करें. मैंने इस आपूर्ति में से एक पैसा भी नहीं लिया."
अपने दावों के समर्थन में रिंकी भुयान सरमा ने 27 मार्च 2020 को एनएचएम-असम के मिशन निदेशक एस लक्ष्मणन द्वारा जेसीबी इंडस्ट्रीज को जारी एक प्रशंसा पत्र भी ट्वीटर पर साझा किया, जिसमें एनएचएम ने 1,485 पीपीई किट की आपूर्ति के लिए उनका "हार्दिक आभार" किया है.
दोगुने दाम पर मिले नए ऑर्डर
उधर भले ही मेडिटाइम हेल्थकेयर स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपने मौजूदा आदेश को पूरा नहीं कर सका लेकिन फिर भी फर्म को पिछली कीमत 990 रुपए के मुकाबले 1680 रुपये प्रति किट पर पीपीई किट के लिए लॉकडाउन के बाद भी भविष्य के तत्काल आपूर्ति आदेशों के लिए प्राथमिकता दी गई थी. इस फर्म ने नई दिल्ली स्थित असम भवन में सामान पहुंचाने की शर्त पर ऑर्डर प्राप्त किया था.
दोनों मीडिया संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार धानुका के मेडिटाइम हेल्थकेयर ने 23 मार्च, 2020 और 11 अप्रैल, 2020 के बीच राज्य के स्वास्थ्य विभाग को 1,680 रुपये प्रति किट की दर से 66,035 पीपीई किट की आपूर्ति की जिसकी कुल लागत 10 करोड़ 84 लाख,85 हजार,850 रुपये थी.
विपक्ष ने की जांच की मांग, बीजेपी ने खारिज़ की रिपोर्ट
असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबव्रत सैकिया का कहना है कि पीपीई किट का यह मामला संवेदनशील है. चूंकी इस मामले में आरटीआई के जरिए कुछ तत्थ सामने आए है इसलिए हम चाहते है कि असम विधानसभा की सदन कमेटी का गठन कर इस पूरे मामले की जांच करवाई जाए.
हालांकि असम सरकार के प्रवक्ता पीयूष हजारिका हाल ही में कह चुके है कि पीपीई किट की आपूर्ति में कोई घोटाला नहीं हुआ है और मुख्यमंत्री के परिवार का कोई भी सदस्य कोविड-19 महामारी से संबंधित किसी भी सामग्री की आपूर्ति में शामिल नहीं है.
राज्य सरकार के प्रवक्ता हजारिका ने रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले दोनों मीडिया संस्थान के लिए कहा था, "दोनों संगठन झूठे और निराधार आरोप लगाने के बजाय सबूत लेकर अदालत में क्यों नहीं जा रहे हैं?"
द वायर ने अपनी एक और रिपोर्ट में दावा किया है कि 15 अप्रैल 2020 के दिन मुख्यमंत्री हिमंत ने चीन के गुआंगज़ो से ब्लूडार्ट कार्गो कंपनी के एक विशेष विमान 50 हजार पीपीई किट गुवाहाटी लाने की जो बात कही थी दरअसल आरटीआई में वह पूरी तरह झूठी निकली.
क्योंकि इस संदर्भ में आरटीआई के जरिए पूछे गए सवाल के जवाब में एनएचएम ने स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऐसी कोई खरीद नहीं की गई थी. (bbc.com)