भारत में लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फ़ेसबुक इन दिनों विवादों में है.
भारत की चुनावी राजनीति में लोगों को गोलबंद करने में जैसे-जैसे सोशल मीडिया की भूमिका बढ़ रही है उसी हिसाब से कई विवाद भी पैदा हो रहे हैं.
कांग्रेस आरोप लगाती है कि फ़ेसबुक भारत में बीजेपी के दबाव में काम कर रही है.
हालिया विवाद हिन्दूवादी संगठन बजरंग दल के कॉन्टेंट को फ़ेसबुक से नहीं हटाने को लेकर है. अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने हाल में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी और इसमें बताया था कि आतंरिक मूल्यांकन में बजरंग दल को फ़ेसबुक पर प्रतिबंधित करने की बात सामने आई थी लेकिन फ़ेसबुक ने वित्तीय हितों और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए ऐसा नहीं किया.
बुधवार को सूचना तकनीक पर बनी संसदीय समिति के सामने इसी मामले को लेकर फ़ेसबुक इंडिया के प्रमुख अजित मोहन पेश हुए. इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार दो घंटे तक अजित मोहन से पूछताछ हुई.
अख़बार के अनुसार आईटी पर संसदीय समिति के प्रमुख शशि थरूर के अलावा इसके सदस्य कार्ती चिदंबरम और सैयद नासीर हुसैन ने फ़ेसबुक इंडिया के प्रमुख से पूछा कि बजरंग दल से जुड़े कॉन्टेंट को हटाने से क्यों इनकार किया गया? ये तीनों कांग्रेस के सांसद हैं.
अख़बार के अनुसार इस पर फ़ेसबुक इंडिया के प्रमख ने कहा, ''बजंरग दल ने फ़ेसबुक पर जो भी कॉन्टेंट पोस्ट किए हैं, उनमें हमें कुछ भी आपत्तिजनक या भड़काऊ नहीं मिला. फ़ेसबुक टीम का कहना है कि इसीलिए बजरंग दल के कॉन्टेंट नहीं हटाए गए और भविष्य में भी उनके कॉन्टेंट नहीं हटाए जाएंगे.''
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ट्वीट कर फ़ेसबुक आरोप लगा चुके हैं कि उसे बीजेपी और आरएसएस से नियंत्रित किया जा रहा है. राहुल ने अपने ट्वीट में कहा था, ''भाजपा-RSS भारत में फ़ेसबुक और व्हाट्सएप का नियंत्रण करती हैं. इस माध्यम से ये झूठी ख़बरें और नफ़रत फैलाकर वोटरों को फुसलाते हैं. आख़िरकार, अमेरिकी मीडिया ने फ़ेसबुक का सच सामने लाया है.''
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आईटी पर संसदीय समिति के सदस्य बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और राज्यवर्धन सिंह राठौर ने अजित मोहन से पूछा कि कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट पर ट्वीट किया था. दोनों बीजेपी सासंदों ने कहा कि अगर बजरंग दल के कॉन्टेंट में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है तो इन आरोपों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे.
कई सांसदों ने कहा कि चुनाव के दौरान आपत्तिजनक पोस्ट के ख़िलाफ़ फ़ेसबुक स्वतः संज्ञान नहीं लेता है और इस वजह से बड़ा नुक़सान होता है. इस पर फ़ेसबुक ने कहा कि वो हर पोस्ट की निगरानी नहीं कर सकता.
फेसबुक ने बजरंग दल को ख़तरनाक संगठन मानने से इसलिए किया इनकार - प्रेस रिव्यू
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि शादी का वादा कर सेक्स करना रेप नहीं है अगर महिला लंबे समय तक अपनी मर्ज़ी से शारीरिक संबंध के लिए सहमत है.
महीनों तक एक व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद महिला ने व्यक्ति पर बलात्कार का केस किया था.
दिल्ली हाई कोर्ट ने बलात्कार के केस को ख़ारिज करते हुए कहा, "शादी के वादे को सेक्स के लिए लालच नहीं क़रार दिया जा सकता है अगर यह लंबे और अनिश्चितकालीन समय तक चलता रहे."
जस्टिस विभु बाखरू ने कहा कि शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने को लालच कहा जा सकता है अगर पीड़िता किसी एक क्षण के लिए इसका शिकार होती है.
उन्होंने कहा, "कुछ मामलों में शादी का वादा शारीरिक संबंध बनाने का लालच हो सकता है. हालांकि लालच देने वाला अपनी बात पर क़ायम रहने की इच्छा नहीं रखता है. इस तरह की लालच देने से किसी एक पल में हो सकता है कि सहमति मिल जाए जबकि दूसरी पार्टी (महिला) सेक्स के लिए मना करना चाहती हो."
अदालत ने कहा कि महिला को सेक्स के लिए तैयार करने की नीयत से शादी का झूठा वादा करना महिला की सहमति का दुरुपयोग है और सिर्फ़ वो मामले भारतीय पीनल कोड के सेक्शन 375 के तहत रेप के अंतर्गत आते हैं.
अदालत ने आगे कहा कि अगर इस तरह के क़रीबी संबंध लंबे समय तक रहे हैं जिनमें शारीरिक संबंध भी शामिल हैं तो यह नहीं माना जा सकता है कि इसमें महिला की मर्ज़ी और प्यार शामिल नहीं था और केवल शादी का झूठा वादा कर महिला को सेक्स के लिए तैयार किया गया था.
जस्टिस बाखरू ने ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को सही ठहराया जिसने व्यक्ति को रेप के चार्ज से बरी कर दिया था.
महिला का आरोप था कि व्यक्ति ने उसे शादी का झूठा वादा कर लंबे समय तक उससे शारीरिक संबंध बनाया और फिर एक दूसरी महिला के लिए उसे छोड़ दिया.
हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बिल्कुल साफ़ है कि महिला ने अपनी मर्ज़ी से उस व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाया क्योंकि महिला को उस व्यक्ति से सचमुच प्यार था.
निचली अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा था कि महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए शादी का वादा कर उसकी रज़ामंदी नहीं ली गई थी, शादी के बारे में बातचीत भी बहुत बाद में हुई थी.
हाई कोर्ट ने कहा कि महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि अभियुक्त के साथ उसके शारीरिक संबंध थे और तीन-चार महीनों के बाद उस व्यक्ति ने शादी का वादा किया था और महिला उसके साथ भाग गई थी.
अदालत के अनुसार महिला का यह बयान कि शादी का वादा कर सेक्स के लिए उसकी रज़ामंदी हासिल की गई थी, उसे सही नहीं माना जा सकता है.
नवभारत टाइम्स अख़बार के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना से वर्चुअल मीटिंग करेंगे जिनमें हो सकता है कि क़रीब 55 साल बाद भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा-पार रेलवे लाइन बहाल करने पर सहमति बन जाए.
अख़बार के अनुसार असम और पश्चिम बंगाल का बांग्लादेश से बेहतर संपर्क के लिए चिलहाटी-हल्दीबाड़ी रेलव मार्ग के उद्घाटन की भी उम्मीद है. इसके अलावा दोनों देशों के बीच पाँच अन्य समझौते भी हो सकते हैं.
अख़बार के अनुसार बांग्लादेश के राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख़ मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में दोनों प्रधानमंत्री एक स्मारक डाक टिकट भी जारी कर सकते हैं.
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में मोदी होंगे मुख्य अतिथि
हिंदुस्तान अख़बार के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सौ साल पूरे होने के अवसर पर 22 दिसंबर को आयोजित ऑनलाइन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी इस कार्यक्रम को संबोधित करेंगे.
एएमयू की तरफ़ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि एएमयू के कुलपति प्रोफ़ेसर तारिक़ मंसूर ने एएमयू का निमंत्रण स्वीकार करने के लिए प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि शताब्दी समारोह में उनकी उपस्थिति से देश और दुनिया में फैले एएमयू समुदाय को एक महत्वपूर्ण संदेश मिलेगा.
प्रोफ़ेसर तारिक़ मंसूर ने कहा कि सर सैयद द्वारा स्थापित मोहम्मडन एंग्लो-ओरियंटल कॉलेज को 1 दिसंबर 1920 को राजपत्र अधिसूचना के द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रोन्नत किया गया था और 17 दिसंबर को तत्कालीन कुलपति मोहम्मद अली मोहम्मद ख़ान राजा महमूदाबाद ने विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया था.
विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा के एक अग्रणी संस्थान के रूप में देश को सरहदी गांधी ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार और डा. ज़ाकिर हुसैन के रूप में दो भारत रत्न दिए हैं. (bbc.com)