राष्ट्रीय
प्रमोद कुमार झा
नइ्र्र दिल्ली, 23 दिसंबर| मोदी सरकार के एक मंत्री का कहना है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक के किसान नये कृषि कानून के पक्ष में हैं, जबकि एक क्षेत्र विशेष के किसान विपक्षी दलों के झांसे में आ गए हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी कहते हैं कि दिल्ली की सीमा पर डेरा डाले लोग पूरे देश के किसानों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं बल्कि इनके बीच किसानों के नाम पर राजनीति करने वाले लोग शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक किसान कृषि सुधार के समर्थन में हैं।
मोदी सरकार द्वारा कोरोना काल में लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर चार सप्ताह से किसानों का आंदोलन चल रहा है। प्रदर्शनकारी किसान तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।
किसान जब ऐसे कानून नहीं चाहते हैं तो सरकार फिर उन पर ये कानून क्यों थोप रही है? आईएएनएस के इस सवाल पर कैलाश चैधरी ने कहा, दक्षिण में कन्याकुमारी से लेकर उत्तर में कश्मीर तक और पश्चिम में राजस्थान की सीमा से लेकर पूरब में पश्चिम बंगाल तक पूरे देश के किसान तीनों कृषि कानूनों के पक्ष में हैं, लेकिन एक क्षेत्र विशेष के किसानों को गुमराह किया जा रहा है। लेकिन हमें उम्मीद है कि वे भी नये कानूनों के फायदे से जल्द अवगत हो जाएंगे तो फिर विरोध का सवाल ही नहीं रहेगा।
कृषि राज्यमंत्री ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा कि सुधार के क्रम में भविष्य को लेकर आशंकाएं रहती हैं, लेकिन मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए कृषि सुधार के नतीजे आने लगे हैं और देश के किसान इनसे उत्साहित हैं इसलिए इन कानूनों को लेकर नकारात्मक सोच ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी।
उधर, प्रदर्शनकारी किसान कहते हैं कि यह सिर्फ पंजाब और हरियाणा के किसानों का मसला नहीं है बल्कि पूरे देश का मसला है और देशभर के किसानों का उनको समर्थन मिल रहा है। इस संबंध में पूछे गए सवाल पर कैलाश चौधरी ने कहा, बीते 15 दिनों से हम देख रहे हैं कि देशभर के किसान लगातार केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिलकर नये कानून का समर्थन कर रहे हैं और उनका कहना है कि नये कानूनों को अगर वापस लिया गया तो वे आंदोलन पर उतर आएंगे।
मोदी सरकार के युवा मंत्रियों में शुमार कैलाश चौघरी की पहचान किसान नेता के रूप में होती है। वह राजस्थान में लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे।
उन्होंने आगे कहा, किसान अन्नदाता हैं और मोदी सरकार अन्नदाता के हितों के लिए काम कर रही है। इसलिए कानून में जिन प्रावधानों से किसानों को नुकसान हो सकता है उनको सरकार बदलने को तैयार है, लेकिन कोई यह बताए कि इससे कैसे किसान को नुकसान होगा।
कैलाश चौधरी राजस्थान के बाड़मेर से सांसद हैं और खुद खेती-किसानी के काम से जुड़े रहे हैं और किसानों व आमजनों की समस्याओं से अवगत रहने और उनका समाधान तनाशने के लिए इन्होंने हाल ही में अपने ही नाम से एक ऐप भी बनाया है।
केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) संचालित मंडियों में किसानों के उत्पादों की किस प्रकार बोली लगती है और किस तरह उन्हें मजबूरी में कम भाव पर फसल बेचना पड़ता है, इससे वह भलीभांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को उंचे भाव पर फसल बेचने के लिए सरकार ने नये कानून में उनको एक विकल्प दिया है जिससे प्रतिस्र्धा बढ़ेगी तो एपीएमसी की कार्य-पद्धति में भी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि कांट्रैक्ट फामिर्ंग से जुड़े कानून में भी जो प्रावधान हैं वे किसानों के हितों में हैं और आने वाले दिनों में इसके लाभ देखने को मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वही किया है जिसकी मांग काफी अरसे से हो रही थी। फिर विरोध क्यों हो रहा है? इस सवाल पर कैलाश चौधरी ने कहा, पहले जो सरकार में थे वो कृषि सुधार लाने में विफल रहे और मोदी सरकार ने करके दिखा दिया, इसलिए वे किसानों को आगे करके इसका विरोध कर रहे हैं।
हालांकि कृषि राज्यमंत्री किसान आंदोलन के जल्द समाप्त होने को लेकर आशावान हैं। वह कहते हैं कि नये कानून का विरोध कर रहे किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से सरकार की कई दौर की वार्ता हो चुकी है और आगे फिर वे जल्द वार्ता की मेज पर आकर किसानों से जुड़े मसलों का समाधान सुझाएंगे। (आईएएनएस)


