राजनीति

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Date : 22-Sep-2019

एबीपी न्यूज/सी-वोटर के ओपिनियन पोल के मुताबिक, 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को दो तिहाई से भी अधिक सीटें मिलती दिख रही हैं।

नई दिल्ली, 22 सितंबर । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद आए एक ओपिनियन पोल के मुताबिक राज्य में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन फिर से सरकार बनाते दिख रही है। वहीं, कांग्रेस और एनसीपी के लिए एक बार फिर मुश्किलें हो सकती हैं। अगर बीजेपी-शिवसेना एक साथ चुनाव लड़ते हैं तो 205 सीटों पर जीत की संभावना है। वहीं, देवेंद्र फडणवीस अभी भी मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद बने हुए हैं। राज्य में पानी और बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है।
एबीपी न्यूज/सी-वोटर के ओपिनियन पोल के मुताबिक, 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को दो तिहाई से भी अधिक सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। इस गठबंधन को 205 सीटें मिल सकती हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस-एनसीपी को 55 और अन्य के खाते में 28 सीटें जा सकती हैं। वहीं, वोट प्रतिशत की बात करें तो बीजेपी-शिवसेना को 46, कांग्रेस को 30 और अन्य को 24 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं।
अगर राज्य में बीजेपी और शिवसेना साथ में चुनाव नहीं लड़ती हैं तो इस स्थिति में उद्धव ठाकरे की पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है। ओपिनियन पोल के मुताबिक, सभी दल अकेले चुनाव में जाते हैं तो बीजेपी को 144, शिवसेना को 39, कांग्रेस को 21, एनसीपी को 20 और अन्य को 64 सीटों पर जीत मिल सकती है।
सीएम के तौर पर फडणवीस पहली पसंद
मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस अभी भी पहली पसंद बने हुए हैं। ओपिनियन पोल के आकड़ों के मुताबिक, फडणवीस 39, उद्धव ठाकरे 6, अशोक चव्हाण 5 और शरद पवार 5 प्रतिशत लोगों की पसंद हैं। वहीं, इस विधानसभा चुनाव में महराष्ट्र में सबसे बड़ा मुद्दा पानी का है। इसके बाद बेरोजगारी, किसानों की समस्या और सड़क प्रमुख मुद्दा है।
पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन नहीं हो पाया था। दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़े थे, वहीं कांग्रेस-एनसीपी भी अकेले मैदान में थे। साल 2014 के चुनाव में महाराष्ट्र की 288 सीटों में से बीजेपी 122, शिवसेना 63, कांग्रेस 42, एनसीपी 41 और अन्य 20 सीट जीतने में कामयाब रहे थे। इस बार महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को मतदान होगा और इसके तीन दिन बाद 24 अक्टूबर को नतीजे आएंगे। (न्यूज18)


Date : 20-Sep-2019

मुंबई, 20 सितंबर । महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और शिवसेना के बीच सीट बंटवारे को लेकर लंबी माथापच्ची के बाद अंतिम मुहर लग गई है। सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार देर रात सीएम देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना नेता व उद्योग मंत्री सुभाष देसाई के बीच मैराथन मीटिंग में तय हुआ कि बीजेपी 162 सीटों पर और शिवसेना बाकी बची हुई 126 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 2014 के विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बनने की वजह से दोनों पार्टियों के बीच 25 साल पुराना गठबंधन टूट गया था और दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। 
महाराष्ट्र में अन्य सहयोगी और छोटे दलों को बीजेपी 162 सीटों के अपने कोटे से ही जगह देगी। ऐसी भी चर्चा है कि बीजेपी कमल के चिह्न पर चुनाव लडऩे के लिए छोटे सहयोगियों को साधने की कोशिश करेगी। एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि सीटों के बंटवारे को लेकर आधिकारिक घोषणा एक या दो दिन में हो जाएगी। 
इससे पहले शिवसेना 50-50 के फॉम्र्युले पर जोर दे रही थी। शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने गुरुवार को कहा था कि बीजेपी को 50-50 फॉम्र्युले का सम्मान करना चाहिए। बीजेपी को नसीहत देते हुए शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा था, अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में जो 50-50 फॉर्म्युला तय हुआ था, बीजेपी को उसका सम्मान करना होगा।
इससे पहले भी चर्चा थी कि बीजेपी शिवसेना को 120 से ज्यादा सीटें देने को राजी नहीं है। जबकि शिवसेना विधानसभा में 135 सीटों पर लडऩा चाहती है और बीजेपी के हिस्से में भी इतनी ही सीटें देना चाहती है। वहीं, बाकी बची 18 सीटें सहयोगियों के लिए रखने के फॉम्युर्ले पर वह राजी है, लेकिन अब बीजेपी इसे स्वीकार नहीं कर रही। 
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी का तर्क है कि 2014 के चुनाव के मुकाबले इस साल आम चुनाव में पार्टी का वोट शेयर बढ़ गया है और पीएम नरेंद्र मोदी की छवि के बूते ही लोकसभा में शिवसेना के 18 नेता अपनी सीटों को सुरक्षित रख पाए। इसलिए शिवसेना के मुकाबले बीजेपी ज्यादा सीटों पर दावा ठोक रही है। (टाईम्स न्यूज)
 


Date : 19-Sep-2019

नई दिल्ली, 19 सितंबर । झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए हैं। गुरुवार को दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की उपस्थिति में उन्होंने आप की सदस्यता ली। अजय कुमार ने पिछले महीने ही कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। अजय कुमार ने पिछले महीने ही पार्टी के नेताओं पर परिवारवाद, भ्रष्टाचार और गुटबाजी करने का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद मीडिया से बात करते हुए अजय कुमार ने कहा, आप ही सच्चे अर्थों में ‘आम आदमी’ की पार्टी है जिसमें कोई भी शामिल हो सकता है और विकास के प्रति अपना योगदान दे सकता है।। हमारे जैसे सभी आम आदमी को ईमानदार राजनीति में आगे आने चाहिए और सहयोग देना चाहिए।आज की राजनीति का जवाब सिर्फ आम आदमी पार्टी है। 
वहीं दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण साथी, देश के प्रशासन तंत्र के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर डॉ. अजय कुमार जी आज हमारे साथ जुड़ रहे हैं, मैं तह-ए-दिल से अजय कुमार जी का आम आदमी पार्टी में स्वागत कर रहा हूँ।
पूर्व आईपीएस अधिकारी अजय कुमार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके इशारे पर मेरी गाड़ी पर हमला किया गया और प्रदेश कांग्रेस के दफ्तर में किन्नरों द्वारा उत्पात कराया गया। कांग्रेस को सलाह देते हुए अजय कुमार ने तब कहा था कि कांग्रेस अपनी मूल जड़ों की तरफ लौटे वरना मुश्किल होगी।(एनडीटीवी) 
 


Date : 19-Sep-2019

बेंगलुरु, 19 सितंबर। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार सुबह स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस से उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। ऐसा पहली बार है जब देश के किसी रक्षामंत्री ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान भरी है।
तीन साल पहले ही वायुसेना में शामिल हुआ तेजस का बहुत जल्द अपग्रेड वजर्न भी आने वाला है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक तेजस भारतीय वायुसेना की 45वीं स्क्वॉड्रन ‘फ्लाइंग ड्रैगर्स’ का हिस्सा है। लड़ाकू विमान को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने डिजाइन और विकसित किया है। तेजस ने 4 जनवरी 2001 में पहली बार उड़ान भरी थी।
वायुसेना ने दिसंबर 2017 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को 83 अप्रेड तेजस जेट बनाने का जिम्मा सौंपा था। इन विमान की अनुमानित लागत 50 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान (डीआरडीओ) ने इसी साल 21 फरवरी को बेंगलुरु में हुए एयरो शो में इसे फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस जारी किया था। डीआरडीओ के क्लियरेंस के बाद जल्द ही तेजस युद्ध के लिए भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो जाएगा।
तेजस को भारत में डिजाइन किया गया है। इसकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह पाकिस्तान और चीन के संयुक्त प्रयास से बनाए गए थंडरबर्ड से कई गुना ज्यादा दमदार है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब तेजस की प्रदर्शनकी की बात की गई थी उस वक्त पाकिस्तान और चीन ने अपने थंडरबर्ड को हटा लिया था। तेजस को चौथी पीढ़ी का विमान है और इसमें मिग 21 की सभी खामियों को दूर किया गया है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए इस विमान का आधिकारिक नाम तेजस पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने दिया था। इसे संस्कृत के शब्द से लिया गया है। इसका अर्थ होता है अत्यधिक ताकतवर ऊर्जा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इसे हल्के युद्धक विमान प्रोजेक्ट के तहत बनाया है। (न्यूज18) 
 

 


Date : 19-Sep-2019

मुंबई, 19 सितंबर। महाराष्ट्र में सभी दल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटा है, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच जारी तल्खी लगातार बढ़ती ही जा रही है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी बराबरी की स्थिति में ही बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि बराबरी पर ही गठबंधन किया जाएगा। संजय राउत ने साफ शब्दों में कहा कि 144 सीटें नहीं मिलेंगी तो बीजेपी के साथ विधानसभा चुनावों में गठजोड़ भी नहीं किया जाएगा। महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और शिवसेना के बीच राज्य में सीट बंटवारे को लेकर स्थिति साफ होती नहीं दिख रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में भजपा बड़े भाई की भूमिका निभाना चाहती है। वहीं, शिवसेना बराबरी का दर्जा चाहती है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर रस्साकशी चल रही है। ऐसे माहौल में संयज राउत के बयान की अहमियत बढ़ जाती है।
दरअसल, संजय राउत से पहले महाराष्ट्र के मंत्री और शिवसेना नेता दिवाकर राउते ने कहा था कि 144 सीटें नहीं मिलने पर बीजेपी के साथ चुनावी गठजोड़ टूट सकता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा, जब अमित शाह और मुख्यमंत्री (देवेंद्र फड़णवीस) के बीच बातचीत के दौरान 50-50 का फॉर्मूला अपनाने का फैसला कर लिया गया तो यह बयान (दिवाकर राउते का बयान) गलत नहीं है। चुनाव साथ (बीजेपी के) लड़ेंगे, क्यों नहीं लड़ेंगे।
सीट बंटवारे से पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अनुच्छेद 370 को लेकर केंद्र सरकार की तारीफ की थी। साथ ही उन्होंने राम मंदिर बनाने की मांग भी की थी। उन्होंने कहा था कि अब राम मंदिर के लिए इंतजार करने का कोई मतलब नहीं बनता है। ठाकरे ने कहा था कि हमनें शिवसेना कार्यकर्ताओं से कहा है कि वह तैयार रहे हैं। अब समय आ गया है जब राम मंदिर की आधारशिला अयोध्या में रखी जाएगी। यह वह मुद्दा है जिसे हमारे संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने देखा था। (न्यूज18)
 


Date : 19-Sep-2019

नई दिल्ली, 18 सितंबर । कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है। राहुल ने भारत की अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि यह सही आकार में नहीं है। उन्होंने उस रिपोर्ट को भी शेयर किया जिसमें कहा गया है कि जून के बाद से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों द्वारा 45 बिलियन डॉलर के शेयर बेचे गए हैं, क्योंकि अर्थव्यवस्था में विश्वास खत्म हो गया है। राहुल ने ट्वीट करते हुए यह भी कहा, हाउडी इकोनॉमी कैसी चल रही है मिस्टर मोदी ऐसा लगता है कि यह बहुत अच्छा नहीं है। ह्यूस्टन में 22 सितंबर को हाउडी मोदी नाम से एक कार्यक्रम होने वाला है जिसमें पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शामिल होंगे।
वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी बुधवार को पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, अब निवेशक भी मोदी सरकार से दूर होने लगे हैं। प्रियंका ने कहा, चकाचौंध दिखाकर रोज 5 ट्रिलियन-5 ट्रिलियन बोलते रहने या मीडिया की हेडलाइन मैनेज करने से आर्थिक सुधार नहीं होता। विदेशों में प्रायोजित इवेंट करने से निवेशक नहीं आते। निवेशकों का भरोसा डगमगा चुका है। आर्थिक निवेश की जमीन दरक गई है।
उन्होंने कहा, मगर भाजपा सरकार इस सच्चाई को स्वीकर नहीं कर रही है। आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में मंदी स्पीड ब्रेकर है, इसको सुधारे बिना सब रंग-रोगन बेकार है।(एनडीटीवी)
 


Date : 17-Sep-2019

लखनऊ/ जयपुर, 17 सितंबर । सोमवार को राजस्थान में एक बड़े राजनैतिक घटनाक्रम के तहत बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के सभी छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे। अपने विधायकों के दल-बदल को लेकर बीएसपी सुप्रीमो मायावती कांग्रेस पर जमकर बरसी हैं। मायावती ने कहा कि कांग्रेस उन पार्टियों को हमेशा चोट पहुंचाती है जो उसे समर्थन देती हैं। सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए मायावती ने कांग्रेस के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। 
मायावती ने ट्वीट में कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा, राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार ने एक बार फिर बीएसपी के विधायकों को तोडक़र गैर-भरोसेमंद व धोखेबाज पार्टी होने का प्रमाण दिया है। यह बीएसपी मूवमेन्ट के साथ विश्वासघात है, जो दोबारा तब किया गया है जब बीएसपी वहां कांग्रेस सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन दे रही थी। 
माया ने कांग्रेस पर उसका मदद करने वाली पार्टियों को चोट पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा, कांग्रेस अपनी कटु विरोधी पार्टी/संगठनों से लडऩे के बजाए हर जगह उन पार्टियों को ही सदा आघात पहुंचाने का काम करती है जो उन्हें सहयोग/समर्थन देते हैं। कांग्रेस इस प्रकार एससी, एसटी, ओबीसी विरोधी पार्टी है तथा इन वर्गों के आरक्षण के हक के प्रति कभी गंभीर व ईमानदार नहीं रही है।
बीएसपी सुप्रीमो ने कांग्रेस को आंबेडकर का विरोधी बताते हुए कहा, कांग्रेस हमेशा ही बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर व उनकी मानवतावादी विचारधारा की विरोधी रही। इसी कारण डॉ. आंबेडकर को देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। कांग्रेस ने उन्हें न तो कभी लोकसभा में चुनकर जाने दिया और न ही भारतरत्न से सम्मानित किया। अति-दु:खद व शर्मनाक।
सोमवार को बीएसपी के सभी छह विधायकों ने कांग्रेस जॉइन की थी। सभी विधायकों के पार्टी छोडऩे से उनपर दल-बदल विरोधी कानून भी लागू नहीं हो सकेगा। सभी छह विधायकों ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को इसके संबंध में एक पत्र भी सौंपा। विधानसभा अध्यक्ष ने इसकी पुष्टि की है। राजेन्द्र गुढा (उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (नदबई), वाजिब अली (नगर), लाखन सिंह मीणा (करौली), संदीप यादव (तिजारा) और दीपचंद खेरिया ने कांग्रेस की सदस्यता ली है। 
बीएसपी विधायकों के कांग्रेस में विलय से प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार और अधिक मजबूत और स्थिर हो गई है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा, विधायक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लगातार संपर्क में थे।' प्रदेश की 200 सीटों वाली विधानसभा में अब कांग्रेस के पास 106 विधायक हो गए हैं और उसके सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल के पास एक विधायक है। सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को 13 निर्दलीय विधायकों में से 12 का बाहर से समर्थन प्राप्त है जबकि दो सीटें खाली हैं। 
राज्य में 2009 में भी अशोक गहलोत के पहले कार्यकाल के दौरान, बीएसपी के सभी छह विधायकों ने कांग्रेस का दामन थामा था और तत्कालीन कांग्रेस सरकार को स्थिर बनाया था। उस समय सरकार स्पष्ट बहुमत से पांच कम थी।(नवभारतटाईम्स)

 


Date : 17-Sep-2019

लखनऊ/जयपुर, 17 सितंबर । बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कांग्रेस को गैर-भरोसेमंद और धोखेबाज पार्टी करार दिया है। दरअसल, राजस्थान में 6 बसपा विधायक सोमवार को कांग्रेस में शामिल हो गए। इस पर मायावती ने कहा कि यह धोखा है। उन्होंने कहा, बीएसपी मूवमेंट के साथ ऐसा विश्वासघात दोबारा तब किया गया है जब बीएसपी वहां कांग्रेस सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन दे रही थी।
मायावती ने कहा कि कांग्रेस अपनी विरोधी पार्टियों और संगठनों से लडऩे की बजाए हर जगह उन पार्टियों को नुकसान पहुंचाने का काम करती है जो उन्हें सहयोग और समर्थन देती हैं। कांग्रेस अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा विरोधी पार्टी है। कांग्रेस हमेशा ही बाबा साहेब डॉ। भीमराव अंबेडकर और उनकी मानवतावादी विचारधारा की विरोधी रही।
मायावती ने कहा, कांग्रेस की वजह से ही बाबा साहब को कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था और कांग्रेस की वजह से ही बाबा साहब कभी लोकसभा में चुनकर नहीं आ सके, न ही कांग्रेस ने उन्हें भारत रत्न दिया।
राजस्थान में बसपा प्रमुख मायावती को बड़ा झटका देते हुए उनके सभी छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। इसके साथ ही विधानसभा में कांग्रेस के कुल विधायकों की संख्या 106 हो गई है।
सोमवार रात हुए इस विलय पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा, यह अशोक गहलोत के मन की असुरक्षा दिखाता है। उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कानून व्यवस्था की स्थिति पर उन पर सवाल उठाया है।
राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 100 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इससे पहले कांग्रेस राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के एक विधायक, बसपा के छह और 12 निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार चला रही थी।(एजेंसी)
 

 


Date : 14-Sep-2019

नई दिल्ली 14 सितंबर। महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को शनिवार को बड़ा झटका लगा जब उसके नेता छत्रपति शिवाजी के वशंज उदयनराजे भोंसले ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया।  
श्री भोंसले आज सुबह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के घर पर आयोजित कार्यक्रम में पार्टी में शामिल हुए। इस मौके पर भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के अलावा अन्य नेता मौजूद थे। महाराष्ट्र में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। (वार्ता)
 


Date : 12-Sep-2019

मंजरी चतुर्वेदी
नई दिल्ली, 12 सितंबर । लंबे अरसे बाद मध्य प्रदेश की सत्ता में लौटी कांग्रेस के लिए कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा है। एक तरफ पार्टी जहां आपसी गुटबाजी और उठापटक से गुजर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के पूर्व सीएम और दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह लगातार पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। दरअसल, पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर जो भी आपसी आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं, वह वहां के दिग्गजों की आपसी गुटबाजी का नतीजा हैं। यह सारी गुटबाजी सरकार और पार्टी में पकड़ को लेकर है। 
दरअसल, असली संघर्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह के बीच माना जा रहा है। ये खींचतान नई न होकर सालों पुरानी है। प्रदेश में एक धड़ा सिंधिया का है तो दिग्विजय और सीएम कमलनाथ एक गुट के माने जाते हैं। हाल के दिनों में दोनों गुट अपने-अपने समर्थकों के जरिए ताकत की आजमाइश में लगे हैं। उल्लेखनीय है कि असली मामला प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भी है। जहां सिंधिया की नजरें अध्यक्ष पद पर हैं, वहीं दिग्विजय नहीं चाहते कि सिंधिया के हाथों में कमान हो। दिग्विजय के खिलाफ हाल में सरकार में दखलंदाजी का आरोप लगाने वाले वन मंत्री उमंग सिंघार सिंधिया समर्थक समझे जाते हैं। 
गौरतलब है कि राज्य में सीएम कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच भी विवाद सतह पर आ चुके हैं। सोनिया गांधी ने इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी को सौंपा है। एंटनी की अध्यक्षता वाला पैनल जल्द ही सोनिया गांधी को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। ऐसे में मंगलवार को ज्योतिरादित्य की कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ होने वाली बैठक टलने को लेकर एक कयास ये भी लगाया जा रहा है कि सोनिया गांधी इस रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं। इसलिए उन्होंने अपनी ये बैठक रद्द की है। 
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में पार्टी के भीतर जारी इस उठापटक से कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व बेहद नाराज है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रदेश के नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी न करने की हिदायत दी। सभी नेताओं के लिए गाइडलाइन जारी कर कहा कि कोई भी नेता बिना किसी ठोस सबूत के अपने किसी सहयोगी या साथी नेता पर आरोप नहीं लगाएगा। 
सूत्रों के मुताबिक, सिंघार के हमले के बाद सिंह ने तय कर लिया है कि वे सिंधिया के हाथ में प्रदेश की कमान नहीं जाने देंगे। चर्चा तो यहां तक है कि अगर सिंधिया के हाथों में कमान जाती है तो पार्टी में टूट-फूट हो सकती है। हालांकि, दिग्विजय का वरदहस्त और मार्गदर्शन लेकर मध्य प्रदेश के सीएम बनने वाले कमलनाथ भी सिंह की दखलंदाजी से असहज हैं, लेकिन सिंधिया के मुद्दे को लेकर वह भी सिंह के साथ हैं। कहा, यह भी जाता है कि मध्य प्रदेश के प्रशासन और अधिकारियों पर आज भी दिग्विजय सिंह की पकड़ काफी मजबूत है। यह बात कमलनाथ से लेकर कांग्रेस आलाकमान तक जानता है, इसलिए इस बात की संभावना कम ही है कि सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई हो। दिग्विजय सिंह और सिंघार विवाद के बाद यह पूरा मामला फिलहाल कांग्रेस अनुशासन समिति के सामने है। (नवभारत टाईम्स)
 


Date : 11-Sep-2019

अमन शर्मा
नई दिल्ली, 11 सितंबर । समाजवादी पार्टी (एसपी), बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और कांग्रेस में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ मुख्य विपक्षी का तमगा अपने नाम करने की होड़ लगी है। अभी विधानसभा की 13 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। इससे पहले ये पार्टियां बिजली की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव, उन्नाव और शाहजहांपुर के बीजेपी नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामलों समेत प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति, हाल में पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों, एसपी लीडर आजम खान जैसे विपक्षी नेताओं के खिलाफ राजनीतिक विद्वेष की भावना से हो रही कार्रवाई और कैबिनेट में हुए हालिया फेरबदल में कुछ मंत्रियों को हटाने जैसे मुद्दे उठा रही हैं। 
एसपी चीफ अखिलेश यादव ने 2022 का विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लडऩे का ऐलान करते हुए एसपी को विपक्ष की सबसे मजबूत पार्टी बताने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में उनकी पार्टी राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन करेगी। अखिलेश ने मुख्यंत्री को आम नागिरकों को पीड़ा देने वाला बताया जो किसी योगी को नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह योगी आदित्यनाथ को एसपी सरकार में लॉन्च किए गए प्रॉजेक्ट्स की एक लिस्ट देंगे जिनका उद्घाटन मौजूदा सरकार कर सकती है। एसपी मुखिया ने कहा कि सरकार की विफलता उजागर करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, एसपी को खुद के नेता ही तगड़ा झटका दे रहे हैं। पार्टी छोडऩे वाले नेताओं में राज्यसभा सदस्यों के नाम शामिल हैं। कहा जा रहा है कि बीजेपी समाजवादी पार्टी के कुछ एमएलसी को भी तोडऩे में जुटी है। 
उधर, बीएसपी प्रमुख मायावती ने पहली बार विधानसभा का उपचुनाव लडऩे का ऐलान किया। हालांकि, बीएसपी की ओर से गठबंधन तोडऩे से दुखी एसपी, मायावती के नेताओं को अपने पाले में लाने की जद्दोजहद कर रही है। एसपी पिछले हफ्ते प्रतापगढ़ के 17 बीएसपी लीडर्स को तोडऩे में कामयाब भी रही थी। हालांकि, मायावती एसपी और बीजेपी की सरकारों को कानून-व्यवस्था के मामले में एकसमान विफल बताती हैं, लेकिन उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर प्रभावी आर्टिकल 370 को हटाए जाने पर बीजेपी का साथ दिया था। समाजवादी पार्टी के एक नेता ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि मायावती का यह कदम यूपी के मुस्लिम मतदाताओं को पसंद नहीं आएगा। 
वहीं, कांग्रेस भी यूपी में अपनी खोई जमीन वापस पाने की जीतोड़ कोशिश कर रही है। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी लगातार दौरे कर रही हैं। उन्होंने सोनभद्र जिले में आदिवासियों की हत्या को अन्य विपक्षियों से ज्यादा भुनाया। कांग्रेस ने बिजली दरें बढ़ाने के प्रस्ताव के विरोध में जिला स्तरीय हस्ताक्षर अभियान भी छेड़ा। एक कांग्रेसी नेता ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा, बीजेपी के खिलाफ एसपी, बीएसपी का कैंपेन ट्विटर और फेसबुक तक ही सीमित है। सरकार ने आपत्ति जताई तो अखिलेश ने रामपुर का दौरा रद्द कर दिया जबकि प्रियंका गांधी सोनभद्र की सीमा तक गईं। हालांकि, कांग्रेस ने अखिलेश के रामपुर दौरे पर टिप्पणी करने वाले अपने नेताओं की फटकार लगाई थी। (इकॉनॉमिक टाईम्स)
 

 


Date : 10-Sep-2019

मुंबई, 10 सितंबर। बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी है। उर्मिला ने नाखुशी जताते हुए कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार उर्मिला ने कहा कि मेरी राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का एक बड़े लक्ष्य पर काम करने के बजाय मुंबई कांग्रेस में कुछ लोग आपसी लड़ाई के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
45 वर्षीय उर्मिला इसी साल मार्च में कांग्रेस में शामिल हुई थीं। कांग्रेस ने उन्हें लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर मुंबई से अपना उम्मीदवार बनाया था। हालांकि वो बीजेपी के गोपाल शेट्टी से चुनाव हार गई थीं।
उर्मिला ने कांग्रेस में शामिल होते वक्त कहा था कि राजनीति में वो ग्लैमर की वजह से नहीं आई हैं बल्कि विचारधारा के कारण कांग्रेस में शामिल हुई हैं। उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व पर कहा था, देश को सबको साथ में लेकर चलने वाला नेता चाहिए, ऐसा नेता जो भेदभाव नहीं करता हो। राहुल एकमात्र ऐसे नेता हैं जो सबको साथ लेकर चल सकते हैं।

 


Date : 09-Sep-2019

चंडीगढ़, 9 सितंबर। हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ी खबर आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आगामी हरियाणा चुनाव में कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी साथ मिलकर बीजेपी को चुनौती देने की तैयारी में है। इसके लिए दोनों दलों के बीच बातचीत भी शुरू हो गई है। सूत्रों ने बताया कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस की नव नियुक्त अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती से मुलाकात की है। इसके साथ ही प्रचार समिति के प्रमुख भूपिंदर सिंह हुड्डा भी मायावती से मिले हैं।
हरियाणा में बीएसपी का दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी से गठबंधन था। हालांकि कुछ ही दिन पहले मायावती ने अपना गठबंधन जेजेपी से खत्म कर लिया। छह सितंबर को ट्विटर पर इसका ऐलान करते हुए मायावती ने लिखा था कि बीएसपी एक राष्ट्रीय पार्टी है और सीट बंटवारे में जेजेपी का रवैया ठीक नहीं था इसलिए स्थानीय नेताओं के सुझाव पर गठबंधन खत्म किया जाता है। यह गठबंधन एक महीने भी नहीं चला था।
लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मायावती ने आईएनएलडी से गठबंधन किया था लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी से गठबंधन तोड़ लिया। बाद में बीजेपी से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले राजकुमार सैनी से बीएसपी ने हाथ मिला लिया। लेकिन चुनावों में कोई सफलता नहीं मिलने पर यह गठबंधन भी लंबा नहीं चल सका। अब चर्चा चल रही है कि मायावती कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमा सकती हैं।
बीजेपी के लिए दलित वोट एक चिंता का विषय है। कांग्रेस ने अशोक तंवर की जगह कुमारी शैलजा को प्रदेश की कमान सौंपी है। राम रहीम के खिलाफ खट्टर सरकार के फैसले भी परेशानी का सबब बन सकते हैं, क्योंकि राम रहीम के ज्यादातर फॉलोवर दलित ही हैं। ऐसे में कांग्रेस की कोशिश है कि मायावती को अपने साथ लाकर दलित वोट बैंक को साधा जाए।
बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बीजेपी की कोशिश नॉन जाट वोट बैंक को अपने तरफ करने पर है। फिलहाल जाटों का वोट हुड्डा, आईएनएलडी और दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के बीच बंटा हुआ है। कांग्रेस की रणनीति दलित वोट को साधने की है। हुड्डा की पकड़ जाट वोट पर है और मायावती के आने से दलित वोट बैंक पर भी असर पड़ेगा। (न्यूज18)
 


Date : 06-Sep-2019

नयी दिल्ली, 6 सितंबर । अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में एक बार फिर बहुमत की उम्मीद लगाए आम आदमी पार्टी (आप) को शुक्रवार को एक और झटका लगा जब लंबे समय से खिन्न चल रही चांदनी चौक से विधायक अल्का लांबा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
सुश्री लांबा ने ट््िवटर पर अपने इस्तीफे की खबर दी। उन्होंने मंगलवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी और इसके बाद से ही उनके आप छोडऩे की अटकलें लगनी शुरु हो गई थीं।
आप की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे की खबर देते हुए विधायक ने लिखा, ‘‘समय आ गया है कि आप को ‘गुड बाय’ बोलूं और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दूं। पिछले छह साल की राजनीतिक यात्रा में काफी सीखने को मिला। सबको धन्यवाद।’’ 
सुश्री लांबा कांग्रेस के साथ पहले भी 20 साल तक जुड़ी रही थी और 2013 में आप में शामिल हुई थीं। पिछले विधानसभा चुनाव में वह आप की टिकट पर चांदनी चौक से विजयी हुई थीं।
 गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निकटस्थ सहयोगी रहे पूर्व मंत्री और करावल नगर से विधायक कपिल मिश्रा, बिजवासन से देंवेंद्र सहरावत और गांधी नगर विधायक अनिल वाजपेयी के अलावा कुछ और विधायक भी आप से बागी हो चुके हैं।
सुश्री लांबा की आप से दूरियां पिछले साल उस समय और गहरा गई थीं जब पार्टी ने एक प्रस्ताव पारित कर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी को मिले देश के सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न को वापस लेने की मांग की थी।(वार्ता)
 


Date : 06-Sep-2019

नई दिल्ली, 6 सितंबर । दस जनपथ के अंदर सोनिया गांधी की बैठकें बढऩे लगी हैं और राहुल गांधी के घर पर प्रियंका गांधी का आना-जाना बढ़ा है। राहुल गांधी फिलहाल वायनाड के सांसद तक ही अपनी भूमिका सीमित रखना चाहते हैं, लेकिन सोनिया गांधी कांग्रेस को जिंदा करने का फैसला कर चुकी हैं। उनके सामने जिस भी नेता ने कहना चाहा कि पार्टी में निराशा है, उसे सोनिया ने 1999 की हार का उदाहरण दिया।
दस जनपथ में बैठक के बाद एक पुराने कांग्रेसी नेता बताते हैं कि मैडम उतनी फिट नहीं हैं लेकिन दिमाग उसी अंदाज में चल रहा है। अब फैसला सिर्फ मैडम ही कर रही हैं। कांग्रेस के नेताओं की बात मानें तो सोनिया गांधी ने वही 1999 वाला फॉर्मूला 2019 में भी अपनाना शुरू किया है। देश में जहां-जहां कांग्रेस के नेता घर बैठे हुए हैं, पार्टी से अलग हो चुके हैं या फिर दुखी हैं उन्हें पार्टी में जगह मिलेगी। इसलिए दिल्ली की विधायक अलका लंबा से भी सीधे सोनिया की मुलाकात हो रही है। वरना एक विधायक से इस तरह की मुलाकात कांग्रेस संस्क़ृति का हिस्सा कहां रही है!
सोनिया गांधी एक-एक कर हर राज्य में पार्टी को मजबूत करना चाहती हैं। इसलिए दिल्ली, मध्य प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे राज्यों के नेताओं से बैठक हो चुकी है। लेकिन असल मसला उत्तर प्रदेश का है। यहां अब फैसला यह हुआ है कि प्रियंका गांधी अकेले दम पर उत्तर प्रदेश संभालेंगी।
कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण सूत्र बताते हैं कि पिछले दो महीने में प्रियंका गांधी और उनकी टीम ने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के लगभग छह हजार से ज्यादा लोगों की बातें सुनी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के सभी मौजूदा विधायकों और पूर्व विधायकों से भी मुलाकात की है। इसके अलावा प्रियंका की टीम प्रखंड और गांव के स्तर तक कांग्रेस के पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच भी पहुंची। इनमें से कइयों को दिल्ली लाया गया या फिर प्रियंका गांधी अपनी उत्तर प्रदेश यात्रा के दौरान इनसे मिलीं। पुराने सांसदों से भी उन्होंने बात की। फिर यह फैसला हुआ कि उनकी टीम में 40 से 50 साल के लोग होंगे और महिलाओं को प्रमुखता मिलेगी। सोनिया गांधी बाकी देश देखेंगी और प्रियंका फिलहाल सिर्फ उत्तर प्रदेश।
प्रियंका गांधी की नजर 2022 के विधानसभा चुनाव पर है जहां वे भाजपा का विकल्प बनना चाहती हैं। उनकी करीबी एक महिला नेता बताती हैं कि प्रियंका गांधी रिएलिटी समझने वाली नेता हैं। उन्होंने साफ कहा है कि अभी किसी को मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बनने का सपना नहीं देखना चाहिए। अभी हमसे दिल्ली और लखनऊ दोनों बहुत दूर है। लेकिन हम इतना तो जरूर कर सकते हैं कि जनता में जाकर भरोसा दिला सकें कि भाजपा को कोई रोक सकता है तो वह कांग्रेस है। जब कांग्रेस के नेताओं ने प्रियंका के मुंह पर कह दिया कि ‘दीदी अगर अखिलेश या मायावती से समझौता करेंगे तो जनता हमें चार नंबर की ही पार्टी समझेगी’ तो इसका जवाब प्रियंका ने यह कहकर दिया कि जब तक उत्तर प्रदेश उनके हाथ में है कांग्रेस किसी भी पार्टी से समझौता नहीं करेगी।
इसके बाद कार्यकर्ताओं की एक और मांग थी कि प्रियंका गांधी को अब पूरा वक्त उत्तर प्रदेश में देना होगा। इस पर उन्होंने वादा किया कि एक महीने के अंदर नई टीम का ऐलान हो जाएगा फिर वे अपनी टीम के कहने पर चलेंगी। यह नई टीम उन्हें जहां बुलाएगी वे वहां मौजूद होंगी। पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक के प्रदर्शन में वे शरीक हो सकती हैं।
इस प्रयोग का पहला इम्तिहान उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपचुनाव में होने वाला है। प्रियंका गांधी ने अपनी पसंद के पांच उम्मीदवारों को टिकट दे दिया है। अकेले दम पर कांग्रेस विधानसभा की इन पांच सीटों पर चुनाव लड़ेगी। प्रियंका के एक करीबी नेता कहते हैं कि बहुत सोच-समझकर यह उपचुनाव लड़ा जाएगा इसलिए पांचों जगहों पर मजबूत उम्मीदवार उतारे गए हैं। प्रियंका गांधी खुद इन उपचुनावों की कमान संभालेंगी। पार्टी इनमें जीतने से ज्यादा नंबर दो बनने के लिए लडऩे वाली है। जिस दिन जनता को भरोसा हो गया कि उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी की कांग्रेस योगी-मोदी और शाह की तिकड़ी को रोक सकती है उस दिन से कांग्रेस जि़ंदा हो जाएगी। इस बार मौका अच्छा है, सिर्फ पांच सीटें हैं। पांचों अलग-अलग क्षेत्रों में है इसलिए बाकी के जिले के कांग्रेस कार्यकर्ता भी यहां पहुंच सकते हैं। प्रियंका गांधी ने अभी थ्योरी में सबको समझा दिया है लेकिन इन उपचुनावों में प्रैक्टिकल टेस्ट होना है। जो कांग्रेस नेता दम लगाएगा, पार्टी को वक्त देगा वह प्रियंका की टीम में आगे चलेगा जो ऐसा नहीं करेगा टीम से बाहर हो जाएगा।
प्रियंका गांधी की टीम में काम करने वाले एक सूत्र बताते हैं कि उनकी शख्सियत एकदम अलग है। बैठकों के दौरान प्रियंका सबकी सुनती हैं, शुरू में टोकती तक नहीं हैं। जब सामने वाला अपनी बात खत्म कर लेता है तब अपनी तरफ से समझाती हैं, बातें सहज होती है लेकिन मतलब की होती हैं।
प्रियंका गांधी अब हवाबाजी पर लगाम लगाना चाहती हैं। इसलिए नेता बड़ा हो या छोटा सबको एक ही बात कही जा रही है - रिजल्ट आना चाहिए। जनता के बीच जाइए, आप माहौल बनाइए। मुद्दे बहुत हैं, जनता खुद उन मुद्दों पर सोच रही है। लेकिन कांग्रेस पार्टी कहीं दिखती नहीं है इसलिए जनता उसे वोट नहीं देती। सिर्फ प्रेस कांफ्रेंस करने और पार्टी दफ्तर चले जाने से पार्टी मजबूत नहीं होगी। मौका अच्छा है, उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा अभी शांत है। इसलिए कांग्रेस को अभी से मुखर और ताकतवर बनकर भाजपा का मुकाबला करना होगा।
प्रियंका गांधी का प्रयोग कितना सफल होता है इसी पर यह निर्भर करेगा कि कांग्रेस का भविष्य कैसा होगा। सोनिया गांधी ने अब करीब-करीब उन अटकलों को खारिज कर दिया है कि अगला कांग्रेस अध्यक्ष गांधी परिवार के बाहर से होगा। दस जनपथ में मिलने वाले नेता भी यही मांग कर रहे हैं कि पार्टी को 1996 की तरह नहीं 1999 की तरह चलाना होगा। यानी सोनिया के बाद उनके बेटे या बेटी में से किसी एक का अध्यक्ष बनना तय है। राहुल गांधी इसके लिए साफ-साफ मना कर चुके हैं और ज्यादातर कांग्रेसी भी 2024 में फिर से उन्हें मौका देना नहीं चाहते। इसलिए सोनिया के बाद प्रियंका लाओ की मुहीम जोर पकड़ रही है।
सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी ने कहा है कि वे पहले उत्तर प्रदेश में कुछ कर दिखाना चाहती हैं और उसके बाद ही आगे की राजनीति पर फैसला करेंगी। अगर उत्तर प्रदेश में वे 2022 में कामयाब हो गईं तो फिर 2024 में खुलकर आमने-सामने की लड़ाई लड़ेंगी।(सत्याग्रह ब्यूरो)


Date : 04-Sep-2019

मुंबई, 4 सितंबर । शिवसेना ने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। अनुच्छेद 370 हटाने और आर्थिक मंदी पर मुखपत्र सामना में लिखा है कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना और आर्थिक मंदी दो अलग विषय हैं। कश्मीर में विद्रोहियों को बंदूक के जोर पर पीछे धकेला जा सकता है लेकिन बेरोजगार सडक़ों पर आएंगे तो उन्हें भी गोली मारोगे क्या?
वहीं गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए बयान का शिवसेना ने समर्थन किया है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल उठाया है। सेना की ओर से कहा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अर्थशास्त्र और देश की अर्थनीति की अच्छी समझ है।
सामना में लिखा गया है कि डॉ. मनमोहन सिंह ने बेवजह मुंह नही खोला है। मंदी के भयंकर हालात सरकार को नजर नहीं आ रहे हैं, ये बात हैरान करने वाली है। वित्त मंत्री मंदी के सवाल पर चुप्पी साधे ही नजर आती हैं। शिवसेना ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी टिप्पणी की और कहा कि महिला होना और देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में फर्क है। अभी तक नोटबंदी और जीएसटी पर सवाल उठाने वालों को मूर्ख कहा गया।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने जीडीपी दर (5 फीसद) में गिरावट को लेकर मोदी सरकार को घेरा था। उन्होंने अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार पर चिंता जताते हुए कहा था कि जून तिमाही में जीडीपी दर 5 फीसद होना यह दर्शाता है कि भारत दीर्घकालीन आर्थिक सुस्ती की गिरफ्त में है। पूर्व पीएम ने कहा था कि भारत में ज्यादा तेजी से विकास करने की क्षमता है, लेकिन मोदी सरकार के कुप्रबंधन के कारण सुस्ती का दौर आ गया है। उन्होंने कहा था कि आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार को सभी पक्षों से बात करनी चाहिए।(न्यूज18)
 

 


Date : 01-Sep-2019

मुंबई, 1 सितंबर । राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने शनिवार को कहा कि उन्होंने मजाक में पार्टी प्रमुख और पिता शरद पवार से कहा कि वह सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें बेटा नहीं है जो करियर बनाने के लिए अपने पिता के साथ पार्टी छोडक़र किसी अन्य दल में चला जाए। राकांपा के कुछ नेता हाल में भाजपा और शिवसेना में शामिल हो गए और ऐसी हर घटना में इस तरह के कयास लगाए गए कि उनके पिता भी सत्तारूढ़ दल में शामिल होने वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि राकांपा नेता पद्म सिंह पाटिल के कथित तौर पर भाजपा में शामिल होने के बारे में एक पत्रकार के सवाल पर उनके पिता क्रोधित हो गए।
सुले ने कहा कि बेटे के बारे में समझा जाता है कि वह परिवार की विरासत संभालता है। सांसद ने कहा कि उन्होंने पवार से हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वह सौभाग्यशाली हैं कि उनका कोई बेटा नहीं है। उन्होंने कहा, मैं महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रचलन देख रही हूं कि बेटे अपने करियर के लिए अपने पिता को दूसरे दलों में ले जा रहे हैं। इस तरह के विरासत संभालने वालों से बेटियां अच्छी हैं।
बहरहाल यह पता नहीं चला कि उनकी टिप्पणी किसके लिए थी। विधायक संदीप नाइक और वैभव पिचाड हाल में भाजपा में शामिल हुए जो राकांपा के वरिष्ठ नेता क्रमश: गणेश नाइक और मधुकर पिचाड के बेटे हैं। वैभव जब भाजपा में शामिल हुए तो उनके पिता भी वहां मौजूद थे जबकि कयास हैं कि गणेश नाइक भी भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। पवार के निकट सहयोगी पद्मसिंह पाटिल के बेटे राणा जगजीत सिंह ने भी शनिवार को भाजपा में शामिल होने की योजना का खुलासा किया। (एनडीटीवी)
 


Date : 28-Aug-2019

नयी दिल्ली, 28 अगस्त । कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है तथा इसमें पाकिस्तान और किसी भी अन्य देश को हस्तक्षेप करने की कोई जरुरत नहीं है। 
श्री गांधी ने आज कश्मीर को लेकर ट््वीट किया, ‘मेरी इस सरकार के साथ कई मसलों पर असहमति है, लेकिन मैं यह पूरी तरह से स्पष्ट करना चाहता हूं कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान अथवा किसी भी अन्य देश के इसमें दखल देने का कोई स्थान नहीं है।’
कांग्रेस जम्मू-कश्मीर के विभाजन और राज्य का विशेष दर्जा खत्म करने के नरेन्द्र मोदी सरकार के फैसले का लगातार विरोध कर रही है। संसद के दोनों सदनों में भी कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया था। 
गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को रद्द कर राज्य को दो केन्द्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने का फैसला किया था। इस फैसले के तहत लद्दाख केन्द्रशासित प्रदेश बनाया गया है जो प्रशासक के अधीन रहेगा जबकि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी।  
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने एक अन्य ट््वीट में जम्मू-कश्मीर में हिंसा के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, ‘पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में हिंसा को बढ़ावा देता है। पूरे विश्व में पाकिस्तान को आतंकवाद के सबसे बड़े समर्थक के रूप में जाना जाता है।’
जम्मू-कश्मीर के संबंध में मोदी सरकार के फैसले के बाद पाकिस्तान पूरी तरह बौखलाया हुआ है, प्रधानमंत्री इमरान खान कई बार दोनों देशों के पास परमाणु हथियार होने का उल्लेख कर युद्ध की धमकी दे चुके हैं। 
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी कश्मीर का मसला उठाया था जहां उसे मुंह की खानी पड़ी थी। 
इससे पहले कश्मीर घाटी की स्थिति का जायजा लेने के लिए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी तथा कुछ अन्य विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को गया था जिसे हवाई अड्डे पर ही रोक दिया गया था। श्री गांधी की अगुवाई में नौ विपक्षी दलों का यह प्रतिनिधिमंडल वहां की जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए गया था। (वार्ता)
 


Date : 27-Aug-2019

कर्नाटक, 27 अगस्त । कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार  गिरने के बाद बीएस येदियुरप्पा ने सरकार तो बना ली, लेकिन इस सरकार को बचाने के लिए अब तक जूझ रहे हैं। दरअसल, मंत्रीपद नहीं मिलने से कई विधायकों में असंतोष है। ऐसे में मजबूरन येदियुरप्पा को एक नहीं, बल्कि तीन डिप्टी सीएम बनाने पड़े। येदियुरप्पा ने लक्ष्मण सावदी, गोविंद एम करजोल और अश्वथ नारायण को डिप्टी सीएम बनाया है। येदियुरप्पा ने तीन डिप्टी सीएम समेत 17 नए मंत्रियों को विभाग भी सौंप दिए हैं। जिन विधायकों को मंत्रीपद नहीं दिया गया, उनकी नाराजगी भी सामने आने लगी है। ऐसे में येदियुरप्पा के सामने सरकार बचाने की बड़ी चुनौती है।
येदियुरप्पा कैबिनेट में लिंगायत समुदाय से 7, ओबीसी से 2, ब्राह्मण समाज से एक, वोक्कालिगा समुदाय से 3 और एससी-एसटी समुदाय से 4 लोगों को मंत्री बनाया गया है। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय से आते हैं। उन्हें लेकर सरकार में 8 लोग लिंगायत समुदाय से हो गए हैं। मंत्रीपद नहीं मिलने पर वोक्कलिगा नेता और चिकमगलुर से विधायक सीटी रवि ने कई ट्वीट्स किए और पार्टी के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की।
बीजेपी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में केएस ईश्वरप्पा और आर. अशोक डिप्टी सीएम रह चुके थे, लेकिन इस बार उन्हें डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया। ईश्वरप्पा को ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग दिया गया है, जबकि आर. अशोक राजस्व विभाग संभालेंगे।
ईश्वरप्पा के समर्थक उन्हें डिप्टी सीएम नहीं बनाए जाने से खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि ये उनके नेता का अपमान है। ईश्वरप्पा के समर्थकों ने इशारों-इशारों में येदियुरप्पा सरकार को इसकी कीमत चुकाने की चेतावनी भी दी है। वहीं, सीटी रवि के समर्थक अपने नेता को दरकिनार कर अश्वथ नारायण को डिप्टी सीएम बनाए जाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं।
चार बार के विधायक सीटी रवि ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि उन्होंने कभी कोई पोर्टफोलियो की मांग नहीं रखी थी। लेकिन, उन्हें टूरिज्म मिनिस्ट्री के साथ साथ कन्नड़ और कल्चर विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। रवि आगे बताते हैं, मैंने कभी कोई मंत्रीपद नहीं मांगा। मैं पार्टी के साथ और पार्टी के लिए काम करना चाहता हूं। जब बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष शपथ ले लेंगे, तब मैं उनके साथ अपनी बात रखूंगा। येदियुरप्पा के सीएम बनने के बाद बीजेपी ने अब नलिन कुमार कटील को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।
हालांकि, सोमवार देर रात किए गए ट्वीट्स में सीटी रवि ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने ट्वीट किया- न तो मैं असंतुष्ट हूं और न ही बागी। मेरी वफादारी सिर्फ बीजेपी के प्रति है। लेकिन मैं अपने सिद्धांतों के प्रति भी उतना ही वफादार और प्रतिबद्ध हूं। अगर मेरा अभिमान आहत होगा, तो मेरे अंदर का योद्धा बाहर आएगा और चीजों का सामना करेगा।
कर्नाटक सरकार के पोर्टफोलियो बांटने को लेकर सिर्फ बीजेपी नेताओं में ही नाराजगी नहीं है, बल्कि जेडीएस-कांग्रेस विधायक भी खासे नाखुश हैं। इस बीच मोलकलमुरु विधायक और दलित नेता बी। श्रीरामालु को लेकर सोशल मीडिया पर कैंपेन भी चलाया जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि श्रीरामालु दलित समुदाय के जाने-माने नेता हैं, लिहाजा उन्हें डिप्टी सीएम पद मिलना चाहिए। बहरहाल बीजेपी सरकार इन असंतुष्ट विधायकों को संतुष्ट करने के उपाय खोज रही है। ताकि, सरकार को सुचारू रूप से चलाया जा सके।(न्यूज18)
 


Date : 26-Aug-2019

भोपाल, 26 अगस्त । पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबुलाल गौर की श्रद्धांजलि सभा मे सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने विपक्ष द्वारा भाजपा के नेताओं पर मारक शक्ति के इस्तेमाल की आशंका जाहिर की है। भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि जब मैं चुनाव लड़ रही थी तो एक महाराज मेरे पास आए और उन्होंने कहा कि बहुत बुरा समय चल रहा है। विपक्ष एक मारक शक्ति का प्रयोग आपकी पार्टी और उसके नेताओं के लिए कर रहा है। ऐसे में आप सावधान रहें। यह भाजपा को नुकसान पहुंचने के लिए किया जा रहा है 
ठाकुर ने साथ ही बताया कि बाबा ने कहा कि यह भाजपा के कर्मठ, योग्य और ऐसे लोग जो पार्टी को संभालते हैं, उन पर असर करेगा। उनको यह हानि पहुंचा सकता है। आप निशा हैं, इसलिए ध्यान रखिएगा। उन महाराज की बात मैंने इतनी भीड़ में चलते-चलते सुना और भूल गई। लेकिन आज यह देखती हूं कि वास्तव में हमारा शीर्ष नेतृत्व सुषमा जी, गौर जी, जेटली जी पीड़ा सहते हुए जा रहे हैं। यह देखकर मन में आया कि कहीं ये सच तो नहीं है। सच यह है कि हमारे बीच से हमारा नेतृत्व लगातार जा रहा है। भले आप विश्वास करे या ना करें, पर सच यही है और ये ही हो रहा है।
66 वर्षीय जेटली का शनिवार को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज के दौरान निधन हो गया था। उन्हें नौ अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया था। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का रविवार को रिश्तेदारों, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं, सैकड़ों प्रशंसकों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ यहां निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जेटली के बेटे रोहन ने जैसे ही चिता को मुखाग्नि दी तो आसमान भी रो पड़ा और पानी बरसने लगा। भाजपा के कद्दावर नेता को अंतिम विदाई देने के लिए सैकड़ों शोकाकुल लोग यमुना नदी के किनारे बने निगमबोध घाट पर एकत्रित हुए। वरिष्ठ नेताओं ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और अंतिम संस्कार से पहले उन्हें बंदूकों से सलामी दी गई। इनके अलावा हालही पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबुलाल गौर का भी निधन हुआ है।(एनडीटीवी)

 


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