राजनीति

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Date : 11-Nov-2019

नई दिल्ली, 11 नवंबर। शरद पवार और उद्धव ठाकरे की किसी अज्ञात जगह पर मुलाकात हुई है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस सैद्धांतिक तौर पर समर्थन को तैयार है। सिर्फ सरकार में रहकर या बाहर से ये फैसला होना बाकी है। एनसीपी चाहती है कि कांग्रेस सरकार में शामिल हो। वहीं केंद्रीय कैबिनेट में शामिल के एक मात्र मंत्री अरविंद सावंत ने मंत्रिमंडल से अपना त्यागपत्र दे दिया है। बात करें कांग्रेस की तो कांग्रेस के एक खेमे का कहना कि पार्टी को बाहर से समर्थन करना चाहिए जबकि एक दूसरे गुट का कहना है सरकार में शामिल होना चाहिए जिससे राज्य में नेताओं और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा। इससे पहले कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक खत्म हो गई है और अब शाम 4 बजे महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं की बैठक में अंतिम फैसला लिया जाएगा।
वहीं एनसीपी ने सारा फैसला कांग्रेस पर छोड़ दिया है। पार्टी के नेता नवाब मलिक ने कहा है कि एनसीपी ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है और बिना कांग्रेस को वह कोई फैसला नहीं करेगी। दरअसल एनसीपी शिवसेना की सरकार बनाने में अकेले में कोई भूमिका अदा करने का रिस्क लेना नहीं चाहती है। क्योंकि बीजेपी के पास अब यह कहने का पूरा मौका होगा कि सत्ता के लिए तीनों पार्टियां एकसाथ हो गई हैं।
वहीं शिवसेना की दलील है कि जब बीजेपी, पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बना सकती है तो शिवसेना एनसीपी-कांग्रेस के साथ क्यों नहीं। आपको बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मे बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं। बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर बहुमत का 145 का आंकड़ा पार कर लिया था। लेकिन शिवसेना ने 50-50 फॉर्मूले की मांग रख दी जिसके मुताबिक ढाई-ढाई साल सरकार चलाने का मॉडल था। शिवसेना का कहना है कि बीजेपी के साथ समझौता इसी फॉर्मूले पर हुआ था लेकिन बीजेपी का दावा है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ। इसी लेकर मतभेद इतना बढ़ा कि दोनों पार्टियों की 30 साल पुरानी दोस्ती टूट गई। (एनडीटीवी)

 


Date : 11-Nov-2019

नई दिल्ली, 11 नवंबर । महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस ने पार्टी वर्किंग कमेटी की बैठक अब खत्म हो गई है। बैठक से निकलने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा कि सुबह दस बजे से चली इस बैठक में सही पहलुओं पर बात की गई है। आखिर में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने यह तय किया है कि हम महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक करने के बाद ही किसी फैसले पर पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि पार्टी ने महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को शाम चार बजे बैठक के लिए बुलाया है। 
महाराष्ट्र में भाजपा सरकार नहीं बनाएगी यह अब साफ हो गया है। ऐसे में अब सभी की निगाहें शिवसेना-कांगे्रस और एनसीपी की तरफ हैं। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शिवसेना के साथ सरकार बनाने की संभावनाओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हम सरकार बनाने को लेकर कोई भी फैसला कांग्रेस से बात किए बगैर नहीं करने जा रहे हैं। उधर, कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी शिवसेना को समर्थन को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करने के बाद ही कोई फैसला लेगी। 
इन सब के बीच, केंद्र की मोदी सरकार में शामिल शिवसेना के इकलौते मंत्री अरविंद सावंत ने इस्तीफे का ऐलान किया है। ट्विटर पर इस्तीफे के फैसले की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि शिवसेना का पक्ष सच्चाई है। झूठे माहौल के साथ नहीं रहा सकता है। अरविंद सावंत ने कहा कि 11 बजे इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। यह फैसला ऐसे में उन्होंने किया है जब महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की सरकार बनाने की खबरें हैं। अरविंद सावंत के इस्तीफे के ऐलान के साथ ही तय हो गया है कि शिवसेना एनडीए से बाहर हो गई है।(एनडीटीवी)
 

 


Date : 11-Nov-2019

मुंबई, 11 नवंबर । महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिवसेना के बीच 30 साल पुराना गठबंधन टूटने की कगार पर है। मुख्यमंत्री पद पर सहमति नहीं बनने के बाद शिवसेना और बीजेपी के रास्ते अलग-अलग हो गए हैं।
सरकार बनाने के लिए शिवसेना ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की शर्तों को मानते हुए केंद्र में बीजेपी के साथ अपना गठबंधन तोडऩे का फैसला किया है। शिवसेना कोटे से मोदी सरकार में मंत्री अरविंद सावंत ने सोमवार को इस्तीफा देने का ऐलान किया।
शिवसेना नेता और केंद्रीय मंत्री अरविंद सावंत ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले सत्ता के बंटवारे का फॉर्मूला तैयार किया गया था। शिवसेना और बीजेपी दोनों आश्वस्त थे। अब इस फॉर्मूले को नकारना शिवसेना के लिए गंभीर खतरा है। महाराष्ट्र में बीजेपी ने झूठ का माहौल बना रखा है। शिवसेना हमेशा सच्चाई के पक्ष में रही है। ऐसे में इतने झूठे माहौल में दिल्ली सरकार में क्यों रहें? और इसीलिए मैं केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे रहा हूं।
शिवसेना नेता अरविंद सावंत ने ट्वीट के जरिए इस्तीफे का ऐलान करते हुए सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फे्रंस करने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि मैं मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं और आज सुबह 11 बजे मीडिया के सामने अपना पक्ष रखूंगा।
महाराष्ट्र के राज्यपाल ने रविवार शाम शिवसेना को सरकार बनाने का न्योता देते हुए पूछा कि क्या वह सरकार बनाना चाहती है और उसके पास राज्य में अगली सरकार बनाने की क्षमता है। राज्यपाल की तरफ से शिवसेना को सरकार बनाने का न्योता बीजेपी की ओर से सरकार बनाने से इनकार करने के बाद दिया गया। बता दें कि बीजेपी नवनिर्वाचित विधानसभा में 105 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि शिवसेना 56 विधायकों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है।
शिवसेना राज्य में सरकार बनाने के लिए एनसीपी और कांग्रेस से समर्थन ले सकती है। बता दें कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (55 विधायक) और कांग्रेस (44 विधायक) से बाहर से समर्थन हासिल कर सकती है। एनसीपी और कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि कि उनका समर्थन इस शर्त पर होगा कि शिवसेना-बीजेपी के साथ अपना गठबंधन खत्म कर दे। साथ ही यह शर्त भी रखी कि शिवसेना के केंद्रीय मंत्रिमंडल में उसके एकमात्र मंत्री अरविंद सावंत इस्तीफा दे दें।(आजतक)
 


Date : 11-Nov-2019

नई दिल्ली, 11 नवंबर । मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने राज्य के उन नेताओं की आलोचना की जो महाराष्ट्र में अगली सरकार गठन के लिए शिवसेना को समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं। महाराष्ट्र में सरकार गठन का मामला अभी भी उलझा हुआ है। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बहुमत न होने के चलते सरकार बनाने से इंकार कर दिया है। वहीं, बीजेपी के इंकार के बाद राज्यपाल भरत कोश्यारी ने दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना को सरकार गठन का निमंत्रण दिया है। शिवसेना को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस-एनसीपी के समर्थन की जरूरत है और दोनों पार्टियों के नेता भी इस समर्थन के पक्ष में बोलते नजर आ रहे हैं। इस बीच संजय निरुपम ने अपनी पार्टी कांग्रेस और सहयोगी पार्टी एनसीपी को आगाह करते हुए कहा कि भाजपा और उसकी सहयोगी शिवसेना के बीच चल रही जुबानी जंग कुछ और नहीं बल्कि नाटक है और कांग्रेस को इससे दूर रहना चाहिए।
मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ट्वीट किया, उन्हें क्या हो गया है? कोई कांग्रेसी नेता शिवसेना को समर्थन के बारे में सोच भी कैसे सकता है? निरुपम ने कहा, कांग्रेस को शिवसेना के नाटक में नहीं उलझना चाहिए। यह झूठा है। यह सत्ता में ज्यादा साझेदारी के लिए उनका अस्थायी झगड़ा है। हाल में हुए विधानसभा चुनावों में टिकट बंटवारे को लेकर निरुपम पार्टी से नाखुश थे। कांग्रेस में शामिल होने से पहले शिवसेना से जुड़े रहे निरुपम ने कहा, मेरी समझ के मुताबिक शिवसेना कभी भी भाजपा के साए से बाहर नहीं आएगी।
इसके साथ ही उन्होंने अपनी पार्टी को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ गलबहियां करने को लेकर आगाह भी किया। उन्होंने कहा, यह एक निरर्थक कवायद होने जा रही है। उम्मीद है कि राज्य के नेता इस सच को समझेंगे। इसके बजाए हमें 2014 के विधानसभा चुनावों की तुलना में इस बार अपनी पार्टी का मत प्रतिशत दो फीसद कम होने को लेकर आत्ममंथन करना चाहिए। निरुपम ने कहा, हम 17 फीसद से गिरकर 15 फीसद पर पहुंच गए हैं (मत प्रतिशत के मामले में)। एक दल के तौर पर हम तीसरे से चौथे स्थान पर खिसक गए हैं। 
कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण व पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा था कि अगर शिवसेना उनकी पार्टी के समर्थन से सरकार बनाना चाहती है तो उसे भाजपा से अलग होना होगा। वहीं मल्लिकार्जुन खडग़े और सुशील कुमार शिंदे जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता शिवसेना के साथ किसी भी तरह के रिश्ते के खिलाफ हैं। शिंदे कहा कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष दल है। उन्होंने कहा, कांग्रेस और शिवसेना विचारधारा के स्तर पर बिल्कुल अलग हैं और मल्लिकार्जुन खडग़े पहले ही कह चुके हैं कि दोनों दलों के साथ आने का सवाल ही नहीं है।(एनडीटीवी)
 


Date : 11-Nov-2019

नई दिल्ली, 11 नवंबर। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि बीजेपी के मुख्यमंत्री पद साझा ना करने के अहंकार के कारण मौजूदा स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि यह बीजेपी का अहंकार ही है कि वह समझौते की बात न मानकर विपक्ष में बैठने को तैयार है लेकिन सरकार बनाने के लिए राजी नहीं है। वहीं एनडीए में रहने के सवाल पर उन्होंने साफ किया कि अगर बीजेपी अपना वादा पूरा नहीं करना चाहती तो गठबंधन में रहने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए 72 घंटे मिले, हमें 24 घंटे दिए गए। वहीं कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाने के सवाल पर संजय राउत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ हाथ मिला सकती है तो शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ क्यों नहीं।  राउत ने कहा कि कांग्रेस, एनसीपी को मतभेद भूल कर महाराष्ट्र के हित में एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम के साथ आना चाहिए।
मोदी सरकार में शिवसेना के एकमात्र मंत्री अरविंद सावंत ने भी इस्तीफे का ऐलान कर दिया है और इसके साथ ही बीजेपी-शिवसेना की 30 साल पुरानी दोस्ती टूट गई है। वहीं सरकार बनाने की कवायद के बीच महाराष्ट्र में एनसीपी की तो दिल्ली में कांग्रेस की बैठक है। शरद पवार ने कहा है कि शिवसेना के साथ सरकार बनाने का फैसला कांग्रेस से विचार करने के बाद किया जाएगा। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा है कि पार्टी की बैठक में आलाकमान जो निर्देश देगा उसके हिसाब से फैसला लिया जाएगा।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मे बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं। बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर बहुमत का 145 का आंकड़ा पार कर लिया था। लेकिन शिवसेना ने 50-50 फॉर्मूले की मांग रख दी जिसके मुताबिक ढाई-ढाई साल सरकार चलाने का मॉडल था। शिवसेना का कहना है कि बीजेपी के साथ समझौता इसी फॉर्मूले पर हुआ था लेकिन बीजेपी का दावा है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ। इसी लेकर मतभेद इतना बढ़ा कि दोनों पार्टियों की 30 साल पुरानी दोस्ती टूट गई। (भाषा)
 


Date : 10-Nov-2019

नई दिल्ली, 10 नवंबर। महाराष्ट्र में सरकार गठन की कवायद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। बीजेपी की बैठक के बाद देवेंद्र फडणवीस राजभवन पहुंचे, जहां बीजेपी ने राज्यपाल को सरकार बनाने के बारे में असमर्थता के बारे में सूचित किया। महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने प्रेस कांफे्रंस कर शिवसेना पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने शिवसेना व अन्य दलों के साथ मिलकर महायुति बनाई थी। जनता ने महायुति को जनादेश देकर सरकार चलाने की जिम्मेदारी दी लेकिन शिवसेना ने जनादेश का अनादर किया है। लिहाजा हम राज्यपाल को जानकारी देने के लिए आए हैं कि हम सरकार नहीं बनाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने हमे सरकार बनाने का आमंत्रण भेजा था लेकिन बहुमत की संख्या नहीं होने की वजह से हम सरकार नहीं बनाएंगे। 
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 105 सीटों पर जीत मिली थी वहीं शिवसेना 56 सीटें जीतकर दूसरे नंबर की पार्टी बनी थी। महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला था लेकिन किन्हीं कारणों से दोनों दलों के मनमुटाव सामने आ गए, जिस कारण राज्य सरकार के गठन का मामला अधर में लटक गया। राज्यपाल की तरफ से सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का न्योता दिया गया था, जिसके जवाब में बीजेपी ने सरकार बनाने पर अपनी असमर्थता जता दी है। लिहाजा अब राज्यपाल दूसरे सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का आमंत्रण देंगे। (एनडीटीवी)


Date : 10-Nov-2019

नई दिल्ली, 10 नवंबर । महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद अभी तक यह स्थिति साफ नहीं है कि राज्य में कौन सी पार्टी या कौन सा गठबंधन सरकार बनाएगी। राज्य में बीजेपी और शिवसेना के बीच आपसी खींचतान के बीच एनसीपी के नेता नवाब मलिक ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर शिवसेना विधानसभा में खुदको बीजेपी से अलग कर ले और बीजेपी के पक्ष में मत न दे तो हम वैकल्पिक सरकार बनाने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि एनसीपी ने 12 नवंबर को अपने सभी विधायकों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष शरद पवार भी मौजूद रहेंगे। 
कुछ दिन पहले ही कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने बुधवार को कहा कि अगर भाजपा और शिवसेना महाराष्ट्र में सरकार नहीं बनाती हैं तो उनकी पार्टी और राकांपा संयुक्त रूप से आगे की कार्रवाई का फैसला करेंगी। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा 21 अक्टूबर के चुनाव में कांग्रेस और राकांपा को विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला था। चव्हाण ने कहा था कि विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला और यही वजह है कि कांग्रेस का मानना है कि भाजपा को सत्ता में नहीं होना चाहिए।
नांदेड़ जिले में भोकर से नवनिर्वाचित विधायक ने कहा था पिछले पांच साल में राज्य को बहुत नुकसान हुआ है। किसान संकट में हैं। आर्थिक हालत ठीक नहीं है। उनकी पार्टी के शिवसेना नीत सरकार को समर्थन देने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर पूर्व एमपीसीसी अध्यक्ष ने कहा था कि अगर आने वाले दिनों में भाजपा और शिवसेना सरकार नहीं बना पाती हैं तो कांग्रेस और राकांपा साथ मिलकर मुद्दे पर फैसला लेंगी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) लगातार कह रही है कि राकांपा और कांग्रेस को विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है।
चव्हाण ने कहा था कि महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन के संबंध में कोई भी फैसला उनकी पार्टी और उसकी सहयोगी राकांपा साथ मिलकर लेगी। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक कांग्रेस और राकांपा एक साथ राजी नहीं होती है, मुद्दे पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। 21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला और यही वजह है कि कांग्रेस का मानना है कि भाजपा को सत्ता में नहीं होना चाहिए।
वहीं,  महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना को जल्द से जल्द सरकार बनाने का सुझाव देने के साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने कहा कि उनकी पार्टी और सहयोगी पार्टी कांग्रेस जिम्मेदर विपक्ष की तरह काम करेंगी। पवार ने शिवसेना के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय राउत से बुधवार सुबह मुलाकात के बाद संवाददाता सम्मेलन में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की अटकलों को खारिज कर दिया। (न्यूज 18)
खरीदबिक्री का डर, आधी रात के बाद विधायकों से मिलने पहुंचे आदित्य ठाकरे, रात भर होटल 
में ही ठहरे
मुंबई, 10 नवंबर ।
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया है। इसके बाद से महाराष्ट्र में विधायकों की खरीद-फरोख्त का डर बढ़ गया है। शिवसेना ने अपने विधायकों को एक होटल से दूसरे होटल में शिफ्ट कर दिया है। शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे आधी रात को होटल में अपने विधायकों से मिलने पहुंचे हैं।
जानकारी के मुताबिक, भाजपा द्वारा हॉर्स ट्रेडिंग के डर को देखते हुए शिवसेना ने अपने सभी विधायकों को बांद्रा के रंगशरदा होटल से मलाड के रिट्रीट होटल में शिफ्ट कर दिया है। शनिवार को आधी रात के बाद तकरीबन एक बजे युवा सेना अध्यक्ष और वर्ली से विधायक आदित्य ठाकरे अपने आवास मातोश्री से सभी विधायकों से मुलाकात करने रिट्रीट होटल पहुंचे। आदित्य पूरी रात होटल में ही रुके रहे और विधायकों से बातचीत की। इसके पहले कांग्रेस ने भी बीजेपी पर अपने विधायकों की खरीद-फरोख्त करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
महाराष्ट्र में सरकार गठन का संकट बरकरार है। वहीं, शिवसेना के बाद कांग्रेस ने भी बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया है। इसी डर से कांग्रेस ने अपने विधायकों को मुंबई से जयपुर भेज दिया है। सभी कांग्रेस विधायकों को जयपुर के एक रिसॉर्ट में ठहराया गया है। इन सभी को शुक्रवार सुबह ही मुंबई से जयपुर रवाना किया गया था।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस को सूचना मिली थी कि बीजेपी उसके कुछ विधायकों के संपर्क में है और उन्हें तोडऩे का प्रयास कर रही है। इसके बाद अपने विधायकों को टूट से बचाने के लिए कांग्रेस ने इन्हें राज्य से बाहर भेजने का फैसला लिया। (न्यूज18)
भाजपा को मिला सरकार बनाने का न्यौता तो शिवसेना ने कहा-कांग्रेस राज्य की दुश्मन नहीं
नई दिल्ली, 10 नवंबर ।
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शनिवार शाम राज्य में सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने के लिये अपनी इच्छा और क्षमता से अवगत कराने को कहा। इससे सरकार बनाने को लेकर पिछले 15 दिनों से चल रहे गतिरोध के खत्म होने की उम्मीद बनी है। वहीं संजय राउत ने एक बार फिर बीजेपी अगर कोई सरकार बनाने को तैयार नहीं है तो शिवसेना ये जिम्मा ले सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य की दुश्मन नहीं है। सभी दलों में कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं।
शिवसेना नेता संजय राउत ने ट्विट करके कहा है कि जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई-नई है। भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल ने बताया कि पार्टी की कोर कमेटी रविवार को बैठक करेगी और भविष्य के कदम पर फैसला करेगी। सरकार गठन को लेकर भाजपा के साथ चल रही खींचातानी के बीच शिवसेना ने कोश्यारी के इस कदम का स्वागत किया है। सूत्रों ने बताया कि इससे पहले दिन में एडवोकेट जनरल आशुतोष कुंभकोनी राजभवन में राज्यपाल कोश्यारी से मिले। 
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र की 13वीं विधानसभा का कार्यकाल शनिवार मध्यरात्रि को समाप्त हो रहा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने पीटीआई-भाषा को बताया, हमें राज्यपाल से पत्र मिला है। उन्होंने कहा, हमारी कोर कमेटी कल बैठक करेगी और आगे के कदमों पर चर्चा करेगी। राजभवन के बयान के मुताबिक, राज्यपाल ने भाजपा विधायक दल के नेता फडणवीस को सरकार बनाने के लिये अपनी पार्टी की इच्छा और क्षमता से अवगत कराने को कहा है। बयान में कहा गया, महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव 21 अक्टूबर को हुआ और परिणाम की घोषणा 24 अक्टूबर को हुई। हालांकि, 15 दिन बीतने के बावजूद कोई भी एक पार्टी या गठबंधन सरकार बनाने के लिए आगे नहीं आयी है। 
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शनिवार शाम राज्य में सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने के लिये अपनी इच्छा और क्षमता से अवगत कराने को कहा।
इसमें आगे कहा गया है कि चूंकि सरकार बनाने के लिए कोई भी पार्टी आगे नहीं आयी है, ऐसे में राज्यपाल ने शनिवार को सरकार के गठन की संभावना का पता लगाने का फैसला किया है और आज सबसे बड़ी पार्टी, भाजपा के निर्वाचित सदस्यों के नेता को इच्छा और क्षमता से अवगत कराने को कहा है। इस बीच, शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने शनिवार को कहा कि राज्यपाल का यह फैसला निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप है और शिवसेना इसका स्वागत करती है।
राउत ने कहा, कम से कम राज्यपाल ने सरकार गठन के लिए संभावना तलाशने का काम शुरू कर दिया है। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और सबसे पहले सरकार बनाने के लिए सही दावेदार है।        
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में 105 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि शिवसेना को 56 सीटों पर जीत हासिल हुई है। दोनों को मिलाकर 161 सीटें हैं जो जरूरी बहुमत के आंकड़े 145 से बहुत ज्यादा है, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर खींतचान की वजह से अब तक सरकार का गठन नहीं हुआ है। 
फडणवीस ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और राज्यपाल ने उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा।  कांग्रेस के 44 में से 35 विधायक कांग्रेस शासन वाले राजस्थान में है। पार्टी के एक विधायक ने पहचान उजागर नहीं करने का अनुरोध करते हुए बताया कि जल्द ही और विधायकों के आने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि एआईसीसी महासचिव मल्लिकार्जुन खडग़े और महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोराट रविवार को जयपुर में उनसे मिलेंगे।
राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने अगले सप्ताह पार्टी के विधायकों की बैठक बुलायी है। पार्टी के एक सूत्र ने इस बारे में बताया। उन्होंने बताया, विधायक सोमवार को मुंबई आएंगे। बैठक एक दिन बाद हो सकती है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार ने शनिवार को साफ कर दिया कि जनता ने भाजपा-शिवसेना को स्थायी सरकार बनाने का जनादेश दिया है। (लाइव हिन्दुस्तान)


Date : 10-Nov-2019

इस्लामाबाद, 10 नवंबर । करतापुर कॉरिडोर के उद्घाटन के मौके पर बतौर खास अतिथि पहुंचे कांग्रेस नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने ऐसी बहुत सी बातें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तारीफ में कहीं। हालांकि दो बार उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री को भी शुक्रिया कहा।
सिद्धू अपने लतीफों और काव्यात्मक भाषणों के लिए जाने जाते हैं और इस बार भी उनका अंदाज वही था। सिद्धू पहले भी खुलकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की तारीफ करते रहे हैं और इस बार भी उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। इमरान खान को वो अपना दोस्त बताते रहे हैं और इस बार भी उनका अंदाज वैसा ही दोस्ताना था।
सिद्धू को जब मंच पर आमंत्रित किया गया तो उनका परिचय कुछ इस तरह दिया गया। यह शीर्ष बल्लेबाज रह चुके हैं। इनको सिक्सर सिद्धू के नाम से भी जाना जाता है। ये बैटिंग के साथ-साथ सियासत में भी बहुत आक्रामक हैं। इंसानों के लिए बोलते हैं। इंसानों के लिए जज़्बा रखते हैं। इन्होंने अपनी जिंदगी का पहला मैन ऑफ द मैच खिताब सियालकोट में जीता और अब ये करतारपुर के भी मैन ऑफ द मैच बन चुके हैं। इनकी पाकिस्तान से और खासतौर पर इमरान ख़ान से मोहब्बत का ये सुबूत है कि इन्होंने कुल नौ शतक बनाए हैं क्रिकेट में लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ एक भी नहीं बनाई। ये सुबूत है इनकी मुहब्बत का।
है समय नदी की बाढ़ सी अक्सर सब बह जाया करते हैं। है समय बड़ा तूफान प्रबल पर्बत भी झुक जाया करते हैं। अक्सर दुनिया के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं... पर कुछ इमरान खान जैसे होते हैं जो इतिहास बनाया करते हैं।
सिद्धू ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान में 14 करोड़ सिखों का विश्वास हैं। वो एक जीता-जागता इतिहास हैं। जिन्होंने कोई नफा-नुकसान नहीं देखा, कोई सौदा नहीं देखा, सिर्फ और सिर्फ ईश्वर के नाम पर यह कदम उठाया है।
उन्होंने पीएम खान को संबोधित करते हुए कहा कि करतापुर कॉरिडोर को खोलकर उन्होंने सिख समुदाय पर यह बहुत बड़ा एहसान किया है। लेकिन यह दावे की बात है कि अब सिख समुदाय उन्हें जिस मुकाम पर लेकर जाएगा, वो खुद भी उसकी कल्पना नहीं कर सकते।
सिद्धू ने कहा कि इस एहसान के बदले अब सिख समुदाय जहां भी जाएगा वहां वो इमरान खान की तारीफोंं के कसीदे पढ़ेगा। उनके प्रवक्ता की तरह उनकी बड़ाई करेगा। उन्होंने कहा कि मंच पर भले ही मैं अकेला खड़ा होकर ये सारी बातें कह रहा हूं लेकिन सच्चाई यही है कि जो मेरे दिल में है वही आज 14 करोड़ सिख भी महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा तेरी मोहब्बत, तेरी मुरव्वत, तेरे प्यार के तोहफे के बदले मैं मेरे कौल दी सबसे महंगी चीज शुकराना लेकर आया हूं । मैं कहया यारा सोडियां खाना... दिल दियां शहंशाह खान इमराना... तेरी खातिर दिल नजराना लेकर आया हूं।
सिद्धू के इस संबोधन का प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी इशारे से शुक्रिया अदा किया।
इस मौके पर सिद्धू ने कहा ये कहां का इंसाफ है कि कोई अपने पिता से नहीं मिल सके। मेरे अपने लोग यहां की सरजमीं को चूमने के लिए रोते रहे। बंटवारे के बाद से यह पहला मौका है जब 14 करोड़ सिख अपने इस घर आ पाएंगे। इसका सिर्फ और सिर्फ एक कारण इमरान खान हैं जिन्होंने भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया। निश्चित तौर पर ताली दोनों हाथ से बजी है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 14 करोड़ सिखों की बात सुनी है।
उन्होंने कहा सिकंदर ने लोगों को डराकर दुनिया पर राज किया था लेकिन इमरान खान वो सिकंदर हैं जो लोगों के दिल में बसते हैं और दुनिया पर राज करते हैं। सिद्धू ने इमरान खान को गले लगाने पर उठे विवाद का जवाब देते हुए कहा कि आज वो मौका है जब उस झप्पी का भी जवाब दे दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर एक बार गले लगने से ये काम हो सकता है तो एक के बाद दूसरी, दूसरी के बाद तीसरी...चौथी...पांचवी झप्पी देने में कोई हर्ज नहीं। और इसी तरह गले मिलते-मिलाते सारे मसले हल कर लेना चाहिए। सिद्धू ने कहा कि दस महीने के भीतर करतारपुर कॉरिडोर को खोलकर जो काम दोनों पक्षों ने किया है वो बँटवारे के घाव का सबसे बड़ा मरहम साबित होगा।
उन्होंने कहा कि 72 सालों से सिख समुदाय को अनुसुना किया जाता रहा था। हर कोई अपना नफा-नुकसान देखता रहा था लेकिन पीएम ख़ान ऐसे शेर-दिल पीएम हैं जिन्होंने हर नफा-नुकसान से अलग जाकर ये काम किया है। उन्होंने कहा कि इमरान खान ने जो आज एहसान किया है उसे कोई चाहकर भी नहीं भुला सकता। एकबार फिर गले लगाने वाले प्रसंग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इमरान खान को गले लगाना आज फलीभूत हो गया है।
सिद्धू ने अपने भाषण के अंत में इमरान खान से अपील की कि जिस तरह उन्होंने करतारपुर कॉरिडोर के लिए मंजूरी दे दी है, उसी तरह वो अपने बॉर्डर भी खोल दें। उन्होंने कहा बहुत से राजनेताओं को देखा है, जिनके दिल छोटे होते हैं लेकिन आपका दिल समंदर जितना बड़ा है।
करतारपुर कॉरिडोर से अलग सिद्धू ने इमरान खान को संबोधित करते हुए कहा कि ये सुनना चाहूंगा कि आप बॉर्डर खोलने की बात करें। उन्होंने कहा मेरा सपना है कि कहीं कोई सीमाएं ना हों, बॉर्डर ना हो। लोग जहां चाहें वहां आजादी से आ जा सकें। सिद्धू ने कहा कि भले ही वो राजनीतिक तौर पर कांग्रेस पार्टी के साथ हैं और भले ही वैचारिक और राजनीतिक तौर पर वो मोदी के विपक्षी हैं लेकिन करतारपुर कॉरिडोर को जोडऩे का जो काम पीएम मोदी ने किया है, उसके लिए वो उन्हें भी मुन्नाभाई वाली झप्पी देना चाहेंगे।
पाकिस्तान में मौजूद यह गुरुद्वारा सिखों और दूसरे पंजाबियों के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपनी जिंदगी के अंतिम 18 साल यहीं बिताए थे। सीमा की दोनों तरफ एंट्री पॉइंट के खुलने की शुरुआत गुरु नानक देव के 550वें जन्मदिवस पर हुई।
भारत और पाकिस्तान कॉरिडोर को लेकर पहले ही एक समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं जिसके तहत भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को गुरुद्वारा आने के लिए पाकिस्तान वीजा फ्री एंट्री देगा। डेरा बाबा नानक भारत-पाकिस्तान सीमा से एक किलोमीटर की दूरी पर और रावी नदी के पूर्वी किनारे पर है। नदी के पश्चिम की ओर पाकिस्तान में करतारपुर शहर है। करतारपुर साहिब गुरुद्वारा पाकिस्तान के नारोवाल जि़ले में है जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से 4.5 किलोमीटर दूर है। भारत के हिस्से में बन रहा डेरा बाबा नानक-श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर 4.1 किलोमीटर लंबा है जो डेरा बाबा नानक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक जाता है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग बनाई गई है। (बीबीसी)


Date : 10-Nov-2019

नई दिल्ली, 10 नवंबर । महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर शिवसेना से बात नहीं बनने के बीच भाजपा ने रविवार को कोर कमेटी की बैठक बुलाई है। फिलहाल कार्यवाहक मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के आवास पर भाजपा नेताओं की बैठक चल रही है।
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शनिवार शाम को सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था। आधी रात को राज्य विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से बमुश्किल चार घंटे पहले राज्यपाल ने कार्यवाहक मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस को यह बताने के लिए कहा है कि उनकी पार्टी सरकार बनाने में सक्षम है या नहीं। इसके बाद बीजेपी ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए पार्टी की कोर कमेटी की बैठक बुलाई है।
भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल ने बताया कि पार्टी की कोर कमेटी रविवार को बैठक करेगी और भविष्य के कदम पर फैसला करेगी। 
सरकार गठन को लेकर भाजपा के साथ चल रही खींचातानी के बीच शिवसेना ने कोश्यारी के इस कदम का स्वागत किया है। सूत्रों ने बताया कि इससे पहले दिन में एडवोकेट जनरल आशुतोष कुंभकोनी राजभवन में राज्यपाल कोश्यारी से मिले। 
उधर, संजय राउत ने एक बार फिर बीजेपी अगर कोई सरकार बनाने को तैयार नहीं है तो शिवसेना ये जिम्मा ले सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य की दुश्मन नहीं है। सभी दलों में कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं। शिवसेना नेता संजय राउत ने ट्विट करके कहा है कि जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई-नई है।
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शनिवार शाम राज्य में सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने के लिये अपनी इच्छा और क्षमता से अवगत कराने को कहा।
महाराष्ट्र विधानसभा के नतीजे 24 अक्तूबर को जारी हुए थे, लेकिन अभी तक किसी भी दल या गठबंधन ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया था। इसके मद्देनजर कमान अपने हाथ में लेते हुए राज्यपाल ने सरकार बनाने की संभावनाओं को तलाशने के लिए सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 105 तो शिवसेना के पास 56 विधायक हैं। लेकिन मुख्यमंत्री के पद को लेकर जारी खींचतान के कारण दोनों सहयोगी दलों के बीच अभी सहमति नहीं बन पाई है। शिवसेना सत्ता के बंटवारे का हवाला देकर ढाई साल तक के लिए मुख्यमंत्री पद अपने पास रखने पर अड़ी हुई है।  राजभवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते ही भाजपा को सबसे पहले न्योता दिया। कांग्रेस के पास कुल 44 तो एनसीपी के पास 54 सीटे हैं। 
  खरीद-फरोख्त की आशंका पर कांग्रेस विधायक राजस्थान भेजे गए
महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल नौ नवंबर को समाप्त हो गया है और भाजपा-शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर गतिरोध जारी है। इसी बीच खरीद-फरोख्त की आशंका के मद्देनजर महाराष्ट्र कांग्रेस के 34 विधायकों को पार्टी शासित राजस्थान भेज दिया गया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा- हमें कांग्रेस विधायकों को राजस्थान लाना पड़ा है, क्योंकि वहां बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त का खतरा था। ना केवल कांग्रेस विधायकों, बल्कि शिवसेना को भी लुभाया जा रहा था, जोकि भाजपा की गठबंधन सहयोगी है। शिवसेना को भी खतरा महसूस हो रहा है इसलिए वह भी अपने विधायकों को रिजार्ट में भेज रही है। गहलोत ने कहा कि सभी जानते हैं कि भाजपा ने गोवा और मणिपुर में सरकारें कैसे बनाई हैं। कुछ कांग्रेस विधायक आमेर किले में तो अन्य को कड़ी निगरानी में बुएना विस्टा रिजॉर्ट में ठहराया गया है। 
  शिवसेना ने राज्यपाल के फैसले का स्वागत किया
शिवसेना नेता संजय राउत ने शनिवार को कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी द्वारा भाजपा से यह पूछना कि वह सरकार बनाने में सक्षम है या नहीं, एक स्वागतयोग्य कदम है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का फैसला निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप है।राउत ने कहा-कम से कम राज्यपाल ने सरकार गठन के लिए संभावना तलाशने का काम शुरू कर दिया। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और सबसे पहले सरकार बनाने के लिए सही दावेदार वही है। लेकिन बहुमत के लिए 145 विधायक चाहिए।  (लाइव हिन्दुस्तान)


Date : 09-Nov-2019

मुम्बई, 9 नवंबर । महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर पेच सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है। शिवसेना ने एक बार फिर शनिवार को अपने सहयोगी दल बीजेपी पर निशाना साधा। पार्टी ने अपने मुखपत्र, सामना, में बीजेपी से पूछा है कि वह सरकार बनाने का दावा पेश क्यों नहीं कर रही है? 
गौरतलब है कि राज्य में 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा की गई थी, जिसके 13 दिन बाद भी कोई पार्टी सरकार गठन के लिए आवश्यक 145 सीटें नहीं जुटा पाई है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को 105 सीटें और शिवसेना को 56 सीटें मिलीं। बीजेपी और शिवसेना ने राज्य में मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों पार्टियों के बीच की नोकझोंक खुलकर सामने आ गई थी। इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच खींचतान जारी है। शिवसेना अपने लिए मुख्यमंत्री का पद मांग रही है।  शिवसेना इस पद के लिए 50:50 का फार्मूला चाहती है, लेकिन भाजपा इस पर तैयार नहीं है। कार्यवाहक मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के आमने-सामने आने पर शुक्रवार को दोनों दलों के बीच बात और बिगड़ गई थी। शिवसेना के मुखपत्र, सामना, के संपादकीय में पार्टी ने कहा, ‘गोवा और मणिपुर में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी नहीं थी लेकिन उसने सरकार का गठन किया। यह बात किसी से छुपी नहीं है कि यह सब राज्यपाल के सक्रिय सहयोग से हुआ। लेकिन महाराष्ट्र में सबसे अधिक सीटें पाने के बावजूद भी भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश क्यों नहीं कर रही? संपादकीय में पार्टी से एक बार फिर जल्द से जल्द सरकार बनाने की बात दोहरायी गई। महाराष्ट्र की मौजूदा विधानसभा का सत्र नौ नवम्बर को पूरा हो रहा है।
शिवसेना ने कहा, ‘राज्यपाल भाजपा को सरकार गठन के लिए बुला सकते हैं, क्योंकि उसके पास सबसे अधिक सीटे हैं और भाजपा को यह मौका नहीं गंवाना चाहिए। सामना में भाजपा के शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने के दावे की आलोचना भी की गई। शिवसेना ने कहा, उस वादे का क्या जो गठबंधन बनाते समय सत्ता के बंटवारे को लेकर किया गया था? भाजपा लगातार यह कह रही है कि सत्ता साझेदारी को लेकर कोई आश्वासन नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री पद साझा करने का वादा पूरा न करने को लेकर भी एकबार फिर शिवसेना ने भाजपा पर हमला बोला। उसने कहा, शिवसेना के बिना राज्य में सरकार का गठन नहीं हो सकता, लेकिन भाजपा अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने को तैयार नहीं है। यह कैसी राजनीति है। हम ऐसी गंदी राजनीति में शामिल नहीं हो सकते।(एनडीटीवी)
 


Date : 09-Nov-2019

मुंबई, 9 नवंबर। शिवसेना नेता संजय राउत ने शुक्रवार को कहा कि अगर देवेंद्र फड़णवीस को लगता है कि उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र में भाजपा की फिर से सरकार बना सकती है तो उन्हें वह शुभकामनाएं देते हैं। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार शाम राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। राज्य में विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के एक पखवाड़े बाद भी सरकार गठन को लेकर दोनों सहयोगी दलों के बीच गतिरोध नहीं दूर हो सका है।
फड़णवीस ने सत्ता साझेदारी के समझौते पर सहमति नहीं बनने के लिए सीधे तौर पर शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया है। मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद, मीडिया कर्मियों से बात करते हुए राउत ने कहा कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे जल्द ही पार्टी की स्थिति स्पष्ट करेंगे। राउत ने कहा, अगर मुख्यमंत्री को लगता है कि उनके नेतृत्व में फिर से भाजपा की सरकार बन सकती है तो, मेरी उन्हें शुभकामनाएं। लोकतंत्र में जिनके पास बहुमत होता है वे सरकार बनाते हैं और मुख्यमंत्री का पद पाते हैं।
शिवसेना नेता ने पत्रकारों से कहा, मैं अपनी पार्टी की ओर से यह भी कहता हूं कि अगर हम चाहें तो सरकार बना सकते हैं और मुख्यमंत्री भी शिवसेना का हो सकता है। उन्होंने फड़णवीस के इन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि शिवसेना नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की अनुचित आलोचना की है। राउत ने कहा, शिवसेना ने मोदी या शाह के बारे में कोई भी निजी टिप्पणी नहीं की। यह गलत बयान है। हमने हमेशा प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का सम्मान किया है। आप हमारे बयान देख सकते हैं।
उन्होंने फड़णवीस के इस आरोप का भी खंडन किया कि शिवसेना ने राकांपा और कांग्रेस के साथ बातचीत (सरकार गठन के लिये) की थी। शिवसेना नेता ने कहा कि कई राज्यों में भाजपा ने उन दलों के साथ गठबंधन किया जो वैचारिक रूप से भाजपा से भिन्न हैं। राज्य में 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए गए थे और एक पखवाड़े बाद भी सरकार गठन पर दोनों पार्टियों के बीच सहमति बनती नहीं दिख रही है। भाजपा और शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। (भाषा)
 


Date : 08-Nov-2019

नई दिल्ली, 8 नवंबर । महाराष्ट्र में विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर यानी कल ख़त्म हो रहा है लेकिन अब तक सरकार बनाने के लिए किसी एक दल या गठबंधन ने दावेदारी नहीं की है। ऐसे में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के हालात बनते दिख रहे हैं। कल बीजेपी नेताओं ने राज्यपाल से मुलाक़ात की थी, लेकिन सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया। इस बीच शिवसेना ने अपने विधायकों को जोड़तोड़ से बचाने के लिए एक होटल में भेज दिया है। ये भी ख़बर आ रही है कि कांग्रेस अपने विधायकों को इक_ा कर एक साथ रखने की तैयारी कर रही है। उधर, आज शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि बीजेपी राष्ट्रपति शासन लगाना चाहती है और अगर ऐसा हुआ तो ये जनता का अपमान होगा।  
उन्होंने ये भी कहा कि ये अस्मिता की लड़ाई है जो जारी रहेगी। संजय राउत ने कहा कि जिसके पास बहुमत है वो सरकार बनाए। जनादेश का अपमान हो रहा है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना जनता का अपमान होगा। दिल्ली के सामने महाराष्ट्र कभी नहीं झुका है। न शरद पवार झुके न उद्धव ठाकरे। ये अस्मिता की लड़ाई है और जारी रहेगी। समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, संजय राउत ने कहा कि मुख्यमंत्री पद शिवसेना को देने पर सहमत होने पर ही भाजपा को हमारे पास आना चाहिए। भाजपा को कार्यवाहक सरकार के प्रावधान का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।(एनडीटीवी)
 


Date : 08-Nov-2019

लखनऊ, 8 नवम्बर । लोकसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी से सभी रिश्ते तोडऩे वाली बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ 1995 के गेस्ट हाउस केस को वापस ले लिया है । 
सुश्री मायावती के इस कदम को उत्तर प्रदेश में पिछले महीने 11 विधानसभा सीटों पर हुये उपचुनाव में बसपा की खराब हालत के बाद उनके फिर से सपा के नजदीक जाने के रूप में देख जा रहा है। बसपा के महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र ने कहा कि लोकसभा चुनाव के वक्त जब दोनों दलों में समझौता हुआ था तब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गेस्ट हाउस केस से मुलायम सिंह यादव का नाम वापस लेने की अपील की थी। बसपा प्रमुख ने वायदा किया था कि वो केस को वापस ले लेंगी और उन्होंने अपना वायदा निभाया है। 
बसपा के सूत्रों ने कहा कि पार्टी प्रमुख ने इस मामले को महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र को देखने को कहा था। लोकसभा चुनाव के लिये सपा बसपा के बीच पिछले 12 जनवरी को गठबंधन हुआ था और इसकी भूमिका उसी दिन तैयार कर ली गई थी। (वार्ता)

 


Date : 08-Nov-2019

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर। महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर इंतजार और लंबा हो गया जहां भाजपा ने अब तक सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है, वहीं शिवसेना बारी-बारी से मुख्यमंत्री पद की साझेदारी पर अड़ी है। राज्य में नौ नवंबर तक सरकार का गठन हो जाना है। ऐसे में सबकी नजरें राज्यपाल पर टिकी हुई हैं। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के हवाले से कहा गया कि भाजपा उनसे तभी संपर्क साधे जब मुख्यमंत्री पद शिवसेना को देने के लिए तैयार हो।
ठाकरे ने गुरुवार को घंटे भर तक चली शिवसेना के नये विधायकों की बैठक की अध्यक्षता की जिस दौरान विधायकों ने दोहराया कि लोकसभा चुनाव से पहले पदों और जिम्मेदारियों के समान बंटवारे के जिस विचार पर सहमति बनी थी, उसे लागू किया जाना चाहिए।
शिवसेना विधायकों ने प्रस्ताव पारित कर उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र में सरकार गठन का अंतिम फैसला लेने के लिए अधिकृत किया। ठाकरे की अध्यक्षता में उनके बांद्रा स्थित आवास मातोश्री में हुई पार्टी के विधायकों की बैठक समाप्त होने के बाद, सभी विधायक रंगशारदा होटल गए, जो पार्टी प्रमुख के आवास के नजदीक ही स्थित है। सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता और विधायकों के दल-बदल की आशंका के बीच इन विधायकों को इस होटल में ठहराया गया।
शिवसेना विधायक सुनील प्रभु ने कहा, मौजूदा स्थिति में सभी विधायकों का साथ रहना जरूरी है। उद्धवजी जो भी फैसला लेंगे, हम सब उसे मानने के लिए बाध्य होंगे। शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने कहा कि सरकार गठन पर शिवसेना के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। सभी विधायक उद्धव का समर्थन करते हैं। 
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक अस्थिरता के लिए जिम्मेदार लोग राज्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर कहा कि मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा। शिवसेना अपने उस रुख पर कायम है कि लोकसभा चुनावों से पहले इस साल फरवरी में, यह तय हुआ था कि भाजपा और पार्टी के बीच पदों एवं जिम्मेदारियों को साझा किया जाएगा।
शिवसेना जहां मुख्यमंत्री पद को साझा करने पर जोर दे रही है वहीं भाजपा ने इससे साफ इनकार कर दिया है। भाजपा और शिवसेना मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर उलझी हुई है जिससे 24 अक्टूबर को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों में गठबंधन को 161 सीट मिलने के बावजूद सरकार गठन को लेकर गतिरोध बना हुआ है। 
288 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनावों में भाजपा को 105 सीटें, शिवसेना को 56, राकांपा को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं। इस बीच महाराष्ट्र के महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणि ने राजभवन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले किसी दल के सरकार गठन के लिए दावा पेश नहीं करने पर कोश्यारी द्वारा कार्यवाहक मुख्यमंत्री नियुक्त किये जाने की अटकलें हैं।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में कहा कि देवेंद्र फडणवीस को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया है। सरकार उनके नेतृत्व में बननी चाहिए। गडकरी ने खुद के मुख्यमंत्री बनने की अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत का नाम महाराष्ट्र में सरकार गठन संबंधी कदमों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। (लाइव हिन्दुस्तान)
 


Date : 07-Nov-2019

मुंबई, 7 नवंबर। शिवसेना के वरिष्ठ नेता और सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत ने एक बार फिर बीजेपी और खासकर देवेंद्र फडणवीस पर तीखा प्रहार किया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव  के परिणाम के 13वें दिन राउत ने कहा कि शिवसेना को देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री के तौर पर किसी भी हाल में स्वीकार नहीं हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, हां, यह जरूर है कि वो (देवेंद्र फडणवीस) चाहें तो कल ही डिप्टी सीएम बन सकते हैं। उन्होंने फडणवीस पर आरोप लगाते हुए कहा कि लंबे समय से हम लोग विरोध झेल रहे हैं लेकिन हमें खत्म करने की बात बोलने वाला कोई नहीं मिला। इन्हें शिवसेना को खत्म करना है, अपने विरोधियों समेत मित्रों को भी खत्म करना है। खुद की ही पार्टी में चुनौती दे रहे नेताओं को खत्म करना है। राउत ने कहा कि अहंकारी का अहंकार खत्म करने का यह सही समय है।
एक अखबार को दिए इंटरव्यू में संजय राउत ने कहा कि सीटों के बंटवारे के दौरान बीजेपी ने हमें कम सीटें दीं। 25 सीटों पर जीतने की संभावना काफी कम थी। 32 सीटों पर बीजेपी के बागियों ने ही हमें हराया। ये कैसा गठबंधन हुआ। वो हो सकता है कि अपनी बात भूल गए हों लेकिन हमें याद है, हमें बराबरी चाहिए।
शरद पवार को महाराष्ट्र की राजनीति का महत्वपूर्ण फैक्टर बताते हुए संजय राउत ने कहा कि पवार से बैठक क्यों नहीं होनी चाहिए। उनके पास कितने विधायक हैं यह बात नहीं है। बात है कि पवार के बिना सूबे की राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती है। उन्होंने इस दौरान कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) का जिक्र करते हुए कहा कि यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से ही दिया गया था। राज्य में राष्ट्रपति शासन की जगह पर विपरीत विचारों की पार्टियों को भी साथ में लाया जा सकता है।
इस बीच शिवसेना ने गुरुवार सुबह साढ़े 11 बजे विधायक दल की बैठक बुलाई है। सामना में एक लेख के माध्यम से पार्टी के विधायकों की खरीद-फरोख्त की भी बात कही है। कहा गया है कि विधायकों को लालच दिया जा रहा है। वहीं खबर है कि गुरुवार को ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा बीजेपी के वरिष्ठ नेता राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलने राजभवन जाएंगे। (न्यूज18)
 


Date : 07-Nov-2019

मुंबई, 7 नवंबर । महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच सरकार बनाने को लेकर खींचतान जारी है। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए बस दो दिन बचे हैं। आज बीजेपी और शिवसेना दोनों ने ही राज्यपाल से मिलने का वक्त मांगा है। माना जा रहा है कि बीजेपी राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। महाराष्ट्र में मचे घमासान के बीच शिवसेना को डर है कि बीजेपी उसके विधायकों को तोड़ सकती है और सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़े तक पहुंच सकती है।
महाराष्ट्र में जारी घमासान के बीच शिवसेना संजय राउत ने दुष्यंत कुमार का शेर ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीन नहीं, कमाल है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं। राउत के इस ट्वीट के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
खबर है कि शिवसेना अपने विधायकों को टूटने से बचाने के लिए आज फाइव स्टार होटल में शिफ्ट कर सकती है। अभी तक की जानकारी के मुताबिक, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे विधायकों के साथ आज बैठक करेंगे। शिवसेना नेता संजय राउत ने गुरुवार शाम को स्पष्ट कहा कि उद्धव ठाकरे को बीजेपी की तरफ से अभी तक सरकार बनाने के लिए किसी भी तरह का प्रस्ताव नहीं मिला है।
शिवसेना नेता संजय राउत ने ये ट्वीट शेयर किया।
शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि हम बयानबाजी में विश्वास नहीं करते हैं। जिसके पास बहुमत है वह सरकार बनाएगा। मुख्यमंत्री तो शिवसेना का होगा।
शिवसेना को इस बात का डर सता रहा है कि बीजेपी उनके विधायकों को तोड़ सकती है और सरकार बनाने के लिए जरूरी जादुई आंकड़े तक पहुंच सकती है।
24 अक्टूबर को आए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। कोई भी पार्टी 145 के जादुई आंकड़े को हासिल नहीं कर सकी।
बीजेपी और शिवसेना दोनों ने ही आज राज्यपाल भगत सिंह कोश्यिारी से मुलाकात का वक्त भी मांगा है।
शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे को बीजेपी की तरफ से अभी तक सरकार बनाने के लिए किसी भी तरह का प्रस्ताव नहीं मिला है।
बीजेपी-शिवसेना में सरकार बनाने फॉर्मूले पर सहमति नहीं बन पाई। तो वहीं कांग्रेस-एनसीपी के गठबंधन को इतनी सीटें नहीं मिलीं कि वो सरकार बनाने का दावा पेश कर सके।(न्यूज18)
 


Date : 06-Nov-2019

मुंबई, 6 नवंबर । शिवसेना नेता संजय राउत से मुलाकात के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि हम विपक्ष में बैठेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार बनाने को लेकर शिवसेना से हमें कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि मेरे पास नंबर नहीं है, कैसे सरकार बनाएं। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए दो दिन का वक्त बचा है, ऐसे में शिवसेना नेता संजय राउत ने बुधवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की थी। 
शरद पवार से मुलाकात से पहले संजय राउत ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पार्टी की मांग को दोहराया और कहा कि भाजपा के साथ अब किसी नए विकल्प पर चर्चा नहीं होगी। मुलाकात के बाद संजय राउत ने कहा, पवार साहब से मेरी आज मुलाकात हुई। पवार साहब देश के महाराष्ट्र के बड़े नेता हैं, मार्गदर्शक हैं सबके। उन्हें भी चिंता है कि राज्य में सरकार क्यूं नहीं बन रही। अभी राज्य में अस्थिरता है, उन्होंने भी बातचीत में चिंता जताई। हमने थोड़ी बहुत बातचीत की। आगे की बात आगे सोचेंगे।(एनडीटीवी)
 


Date : 06-Nov-2019

मुंबई, 6 नवंबर। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर शिवसेना और भाजपा में चल रही रस्साकशी के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार रात नागपुर जाकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। फडणवीस मंगलवार रात 9.25 बजे नागपुर स्थित संघ मुख्यालय पहुंचे और डेढ़ घंटे बाद वह वहां से रवाना हो गए।
बैठक में क्या कुछ हुआ, उस बारे में संघ के पदाधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। हालांकि ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि यह मुलाकात 21 अक्टूबर के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में पैदा हुए राजनीतिक गतिरोध पर विचार-विमर्श करने के लिए थी।
इससे पहले, दिन में राज्य में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं वित्त मंत्री सुधीर मुनगंतिवार ने कहा कि सरकार गठन को लेकर कोई शुभ समाचार किसी भी वक्त आ सकता है।
हालांकि, शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि उनकी पार्टी सत्ता साझेदारी पर भाजपा से लिखित में आश्वासन चाहती है, जिसमें ढाई-ढाई वर्ष के लिए मुख्यमंत्री पद रखना भी शामिल है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा अपने सरकारी आवास पर बुलाई गई भाजपा नेताओं की बैठक में शामिल होने के बाद मुनगंतिवार ने पत्रकारों से कहा, किसी भी समय सरकार गठन को लेकर एक अच्छी खबर आ सकती है।
बैठक में शामिल रहे भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि वे अब शिवसेना की ओर से प्रस्ताव का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, राउत ने फिर से कहा कि अगला मुख्यमंत्री उनकी पार्टी से होगा।
महाराष्ट्र बीजेपी प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने मुंबई में घोषणा करने के कुछ ही घंटों बाद कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली सरकार बहुत जल्द बनेगी, जिसमें फडऩवीस अपने नेता होंगे। इससे पहले मंगलवार को फडणवीस ने मुंबई में अपने सरकारी आवास पर भाजपा नेताओं की एक बैठक की।
राज्य में सरकार बनाने को लेकर सहयोगी दलों के बीच गतिरोध जारी है। 24 अक्टूबर को घोषित विधानसभा चुनावों के नतीजों में भाजपा ने 105 सीटें, सेना ने 56, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 54 और कांग्रेस ने 44 सीटें जीतीं। (आजतक)
 


Date : 06-Nov-2019

मुंबई, 6 नवंबर । महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद से राजनीतिक बैठकों और बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में पड़ती दरार की वजह से राजनीतिक हलचल तेज है। महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर उठापठक का दौर चल रहा है लेकिन सरकार बन नहीं पा रही। यदि ऐसी ही स्थिति आगे 9 नवंबर तक बनी रही तो उसके बाद बहुत कुछ बदल जाएगा। 
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा कि चुनाव नतीजे आने के बाद राज्यपाल का सबसे पहला काम है कि वह सरकार गठन की प्रक्रिया को पूरा करे। लेकिन किसी कारणवश सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो ऐसी स्थिति में राज्यपाल, राष्ट्रपति शासन के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश कर सकता है। 
महाराष्ट्र के संदर्भ में संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा कि राज्यपाल को महाराष्ट्र में सरकार गठन के रास्ते निकालने चाहिए। हालांकि यह राज्यपाल का विवेकाधिकार है कि वह किसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। ऐसे में यदि 9 नवंबर तक सरकार का गठन नहीं होता है तो विधानसभा भंग नहीं होगी क्योंकि नई विधानसभा गठित होकर आ गई है। ऐसे में राज्यपाल मौजूदा मुख्यमंत्री या फिर किसी को नए मुख्यमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी दे सकते हैं। हालांकि कार्यवाहक मुख्यमंत्री कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले सकते। उन्हें सिर्फ सरकार के दैनिक प्रशासनिक कामकाज देखने होते हैं। 
अगर महाराष्ट्र में सरकार गठन के कोई रास्ते नहीं निकलते हैं तो ऐसी स्थिति में राज्यपाल, राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। राष्ट्रपति को तीन धाराओं के तहत आपातकाल की घोषणा की शक्ति प्राप्त है। धारा 352 के तहत युद्ध या विदेशी आक्रमण की स्थिति में राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जा सकता है तो धारा 360 के तहत आर्थिक आपातकाल लगाया जा सकता है। लेकिन महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक स्थिति में धारा 356 के तहत आपातकाल लगाया जा सकता है।
इस आपातकाल को राष्ट्रपति शासन भी कहते हैं। संविधान में इसका वर्णन राज्य में संवैधानिक मशीनरी की विफलता के तौर पर किया गया है।
अगर आपातकाल लगता है तो राज्य की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति के हाथों में आ जाएगी। संसद, राज्य विधानसभा के सभी कार्यों को देखेगी। इन बातों का असर न्यायपालिका पर नहीं पड़ेगा। संसद को इस पर दो महीनों के अंदर सहमति देनी होती है।
इस तरह के हालात में राज्यपाल राज्य के प्रतिनिधि की तरह काम करता है और राज्य की सारी शक्तियां उसके हाथ में होती हैं। विधानसभा निलंबित हो जाती है। 
इस राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने या एक साल की होती है। अगर राष्ट्रपति शासन को एक साल पूरा होने के बाद भी आगे बढ़ाना होता है तो इसके लिए चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होती है। अगर चुनाव आयोग सहमति दे भी देता है तो राष्ट्रपति शासन तीन साल की अवधि से ज्यादा नहीं लगाया जा सकता।
राष्ट्रपति शासन के दौरान भी राज्यपाल राजनीतिक पार्टियों को बहुमत साबित करने के लिए न्योता दे सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र सरकार के कार्यवाहक मुख्यमंत्री हैं। लेकिन, संविधान में कार्यवाहक मुख्यमंत्री की अवधारणा को लेकर ज्यादा  कुछ नहीं कहा गया है। ये शब्दावली अनौपचारिक तौर पर इस्तेमाल होती है।
2014 के चुनाव के बाद महाराष्ट्र विधानसभा का गठन 10 नवंबर 2014 को हुआ था। ऐसे में विधानसभा को 9 नवंबर 2019 को भंग हो जाना चाहिए। विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं। इसके अलावा समाजवादी पार्टी को 2, एमआईएम को 2, एमएनएस व सीपीआई को एक-एक और अन्य को 23 सीटें मिली हैं। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं और बहुमत के लिए 145 सदस्यों का समर्थन चाहिए। लेकिन बहुमत की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि बहुमत साबित करते समय विधानसभा में कितने सदस्य मौजूद हैं।(आजतक)
 


Date : 06-Nov-2019

मुंबई, 6 नवंबर। महाराष्ट्र में चुनाव खत्म होने के बाद नई सरकार के गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना में तल्खियां जारी है। बीजेपी से जुड़े सूत्रों ने एक तरफ 7 या 8 नवंबर को मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण समारोह की संभावना जताई है। वहीं, दूसरी ओर बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना 50-50 फॉर्मूले पर कायम है। इस बीच कांग्रेस नेता अहमद पटेल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिलने पहुंचे हैं। अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि दोनों नेताओं की मुलाकात की असल वजह क्या रही। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए ये माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर ही ये मुलाकात हुई है।
गडकरी से मुलाकात करके निकले अहमद पटेल से पत्रकारों ने इस बाबत सवाल किया, तो उन्होंने महाराष्ट्र को लेकर किसी भी चर्चा से साफ इनकार किया और कहा कि वह किसानों की समस्या को लेकर गडकरी से मिलने उनके घर गए थे।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडग़े आज दोपहर मुंबई पहुंच सकते हैं। वहीं, दोपहर 2.30 के करीब एनसीपी प्रमुख शरद पवार प्रेस कॉन्फे्रंस कर सकते हैं।
माना जा रहा है कि अगर 9 नवंबर तक महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर कोई हल नहीं निकलता है, तो वहां पर राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन की आखिरी तारीफ 9 नवंबर है।
शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि चुनाव से पहले जो प्रस्ताव दिया गया था, हम उसी प्रस्ताव पर राजी होंगे। पार्टी को कोई नया प्रस्ताव मंजूर नहीं है। महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कोशिशों के बीच संजय राउत एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मिलने के लिए रवाना हुए है।
संजय राउत ने कहा, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी-शिवसेना के बीच 50-50 फॉर्मूले पर सहमति बनी थी। इस प्रस्ताव के बाद ही दोनों पार्टियां का गठबंधन हुआ था। अब चुनाव बाद बीजेपी अपने वादों से पीछे हट रही है।
क्या है 50-50 फॉर्मूला?
दरअसल, महाराष्ट्र चुनाव से पहले बीजेपी और शिवसेना के बीच एक राजनीतिक डील हुई थी। इसके तहत पांच साल की सरकार में ढाई साल का सीएम पद बीजेपी के पास और बाकी ढाई साल का सीएम पद शिवसेना के पास रहेगा। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद ही बीजेपी को 50-50 फॉर्मूले की याद दिलाई थी। ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा था- लोकसभा चुनाव में अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस के साथ जो तय हुआ था, उससे न कम और न ज्यादा चाहिए। उससे एक कण भी अधिक मुझे नहीं चाहिए।
विधानसभा में किसको कितनी सीटें?
महाराष्ट्र की 288 सीटों वाले विधानसभा में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54, कांग्रेस को 44 और अन्य को 29 सीटें मिली हैं। सरकार बनाने के लिए बहुमत का आकंड़ा 146 है। इस तरह से बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पास बहुमत के आंकड़े हैं, लेकिन सीएम पद और 50-50 फॉर्मूले पर बात नहीं बन पाने के कारण अभी तक नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है।
 


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