राजनीति

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Date : 22-Jul-2019

कोट्टायम/कोच्चि, 22 जुलाई । केरल के वरिष्ठ विधायक और राजग सहयोगी पी सी जॉर्ज ने दावा किया कि राज्य से कांग्रेस के छह सांसद और तीन विधायक भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के साथ संपर्क में हैं और वहां दल-बदल संभव है। कांग्रेस ने पूंजर क्षेत्र से विधायक के इस दावे को खारिज किया है और उन्हें बड़बोला बताते हुए कहा है कि वह सिर्फ मीडिया का ध्यान पाने के लिये ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं। जॉर्ज की केरल जनपक्षम सेक्युलर पार्टी हाल में राज्य में भाजपा नेतृत्व वाले राजग का हिस्सा बनी। उन्होंने ऐसे समय में यह दावा किया है जब कर्नाटक और गोवा में अपने विधायकों के दल-बदल से कांग्रेस को झटका मिला है।

अपनी पार्टी की प्रदेश कमेटी की बैठक के बाद कोट्टायम में जॉर्ज ने पत्रकारों से कहा, मुझे पता चला है कि राज्य में कांग्रेस के छह सांसद और तीन विधायक भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के साथ बातचीत कर रहे हैं। बहरहाल उन्होंने इस संबंध में और जानकारी देने से इनकार कर दिया।
बाद में, पीटीआई, द्वारा संपर्क किये जाने पर वरिष्ठ विधायक ने कहा कि इस बातचीत के बारे में वह विस्तृत जानकारी नहीं दे सकते हैं लेकिन उन्होंने दावा किया कि केरल में कांग्रेस खेमे से भाजपा में लोग जायेंगे। जॉर्ज ने कहा कि उनका दावा जल्द सही साबित होगा।
उनके दावों को खारिज करते हुए केपीसीसी उपाध्यक्ष वी डी सतीसन ने कहा कि कोई भी जॉर्ज को गंभीरता से नहीं लेता है क्योंकि वह बड़बोले हैं। सतीसन ने बताया कि केरल से कोई कांग्रेस नेता भाजपा में शामिल नहीं होगा।

कर्नाटक में कांग्रेस के 13 विधायक बागी हो गए हैं, जिससे कुमारस्वामी सरकार पर संकट बन आया है। इसके अलावा जेडीएस के भी तीन विधायक बागी हो गए हैं। इन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। अभी ये बागी विधायक मुंबई के एक होटल में ठहरे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर कुमारस्वामी विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का सामना कर रहे हैं। (भाषा)

 


Date : 22-Jul-2019

बेंगलुरू, 22 जुलाई । कर्नाटक में कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार के फ्लोर टेस्ट को लेकर अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने बागी विधायकों को मंगलवार सुबह 11 बजे अपने कार्यालय में मिलने के लिए बुलाया है। वहीं फ्लोर टेस्ट को आज खत्म करने की मांग की याचिक पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है।
गठबंधन नेताओं की बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग को लेकर याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया गया है। वहीं कर्नाटक में गहराते राजनीतिक संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दो स्वतंत्र विधायकों द्वारा दायर याचिका पर जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जो आज विधानसभा में फ्लोर टेस्ट को खत्म करने के लिए निर्देश देने की मांग कर रहे हैं।
कर्नाटक विधानसभा में शुक्रवार को कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार के फ्लोर टेस्ट असफल होने के बाद आज यानि सोमवार को फिर से इसकी कार्यवाही तय की गई है। इसको लेकर सोमवार को विधानसभा के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और राजभवन रोड पर पर्याप्त सुरक्षा बल की तैनाती की गई है।
वहीं इसको लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों नेताओं ने रविवार को बेंगलुरू में एक साथ विधायक दल की बैठकें कर चुके हैं।
इसके अलावा, विश्वास मत को लेकर भाजपा आज एक और संसदीय दल की बैठक बुलाने वाली है। बेंगलुरू के रामदा होटल में ठहराए गए बीजेपी विधायकों को आज योगा करते हुए देखा गया।
बागी विधायकों को मनाने की कोशिश में, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने रविवार को उन्हें विधानसभा सत्र में भाग लेने की अपील की और समझाने की कोशिश की कि कैसे भाजपा ने कथित रूप से लोकतांत्रिक संस्थाओं को तहस-नहस किया है और ‘इसकी पवित्रता को नष्ट किया है।’
कर्नाटक विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव को लेकर सोमवार को सभी की निगाहें अब दिन की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं, विशेष रूप से भाजपा को लेकर जिसने अध्यक्ष केआर रमेश कुमार पर विश्वास मत परीक्षण में उसकी टांग खींचने का आरोप लगाया है।
वहीं इससे पहले विश्वास मत को पूरा करने के लिए शुक्रवार को राज्यपाल वजूभाई वाला द्वारा निर्धारितदो समय सीमा को पूरा करने में विधानसभा विफल रही थी। उसके बाद, मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने सरकार को राज्यपाल के निर्देश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह अदालत द्वारा निर्धारित कानून का उल्लंघन है।
दूसरी ओर, कर्नाटक के दो निर्दलीय विधायकों ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और सोमवार शाम 5 बजे से पहले राज्य विधानसभा में फ्लोर टेस्ट खत्म करने के निर्देश देने की मांग की है।
13 महीने पुरानी कांग्रेस-जेडीएस सरकार इस महीने की शुरुआत में कई असंतुष्ट विधायकों के इस्तीफे के बाद अल्पमत में आ गई थी। तेरह कांग्रेस और जेडी (एस) के तीन विधायकों सहित सत्तारूढ़ गठबंधन के सोलह विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था।
गौरतलब है कि एक नामित सदस्य सहित विधानसभा में कुल 225 सदस्य हैं। किसी भी दल को आधी संख्या के लिए 113 विधायक चाहिए होते हैं। (एएनआई)

 

 


Date : 22-Jul-2019

बेंगलुरु, 22 जुलाई । कर्नाटक में सोमवार को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होना है, लेकिन इससे पहले पूरे सियासी घटनाक्रम में एक नया मोड़ आया है। कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार का कहना है कि जेडीएस सरकार बचाने के लिए किसी भी तरह के त्याग के लिए तैयार है। इतना ही नहीं एचडी कुमारस्वामी की पार्टी कांग्रेस की ओर से किसी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए भी तैयार है।
डीके शिवकुमार के मुताबिक, उन्होंने (जेडीएस) ने इसके बारे में हमारे हाईकमान को भी बता दिया है। विश्वास मत पर वोटिंग से पहले डीके शिवकुमार का ये बयान क्या सरकार को बचा पाएगा, इस पर हर किसी की नजर है।(आजतक)

 

 


Date : 21-Jul-2019

बेंगलुरु, 21 जुलाई। कर्नाटक में बीजेपी नेताओं का मूड इन दिनों बेहद खुशनुमा है। बीजेपी नेताओं की इस खुशी की वजह भी है। लंबे अरसे बाद विधानसभा में विश्वासमत के बाद उन्हें सरकार बनाने का मौका मिल सकता है। यही नहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए शुरुआती चर्चा भी शुरू हो गई है। सरकार बनाने की कवायद शुरू होते ही बीजेपी के कई नेता टेंशन में आ गए हैं। बता दें कि इन दिनों कुमारस्वामी सरकार सियासी संकट से घिरी है और सोमवार को सदन में सीएम को शक्ति परीक्षण का सामना करना पड़ सकती है। ऐसे में इन बागी विधायकों की भूमिका बेहद अहम है। अभी तक ये विधायक विश्वासमत प्रस्ताव में शामिल नहीं होने का ऐलान कर चुके हैं। 
बीजेपी नेताओं के टेंशन की वजह 15 कांग्रेस-जेडीएस विधायकों की भूमिका है। यदि इन विधायकों को भगवा खेमे में शामिल किया जाता है तो उन्हें सरकार में शामिल करना पड़ सकता है। टेंशन में चल रहे बीजेपी नेताओं ने बताया कि बीजेपी जब राज्य में सरकार बनाने के नजदीक पहुंच जाएगी तो कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायक मंत्री बनाए जाने की मांग कर सकते हैं। सभी विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करना नई सरकार के लिए बेहद मुश्किल होगा। 
एक पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक ने कहा, बागियों से बड़े-बड़े वादे किए गए होंगे लेकिन जब कल ये लोग मंत्री बनाए जाने की मांग करेंगे तो आप क्या करेंगे? अपना अस्तित्व बचाना भी मुश्किल होगा। सीएम एचडी कुमारस्वामी सत्ता में आने को बेताब दिख रही बीजेपी को पहले ही इस स्थिति के लिए चेतावनी दे चुके हैं। शुक्रवार को विधानसभा में उन्होंने कहा, क्या मैं यह खेल नहीं जानता हूं? चलिए देखते हैं कि (बागी विधायकों के सहयोग से) आप कितना दिन चलते हैं। 
बीजेपी के अपने कई वरिष्ठ नेता हैं और मंत्रिपरिषद बनाने में जातियों के गणित का भी ध्यान रखना होगा। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक बीजेपी की सरकार बनने पर 15 बागियों में से केवल एक या दो को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। सूत्रों ने कहा, बागियों में से हरेक व्यक्ति मंत्री बनने का इच्छुक नहीं है। कुछ लोग अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए ज्यादा पैसा चाहते हैं। यदि यह स्वीकार कर लिया जाता है तो वे दोबारा चुनाव लड़ सकते हैं।
बीजेपी के प्रवक्ता एन रवि कुमार कहते हैं कि बागियों को लेकर पार्टी चिंतित नहीं है। बीजेपी अपने से सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा, हम तैयार हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है। माना जा रहा है कि कुछ बागी विधायकों को खुश करने के लिए राज्य के विभिन्न बोर्डों और निगमों में शीर्ष पद दिया जा सकता है। (टाईम्स न्यूज)
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Date : 21-Jul-2019

रचना सरन
लखनऊ, 21 जुलाई ।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की सोनभद्र के पीडि़तों से मिलने की 26 घंटे तक चली जद्दोजहद हताश-नाउम्मीद कांग्रेसियों में उत्साह भरने में कामयाब रही है। साथ ही, भाजपा सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों में कांग्रेस को फिलहाल बढ़त भी दिला गई है। 
प्रियंका गांधी ने चुनार के किले में शनिवार को सोनभद्र में मारे गए लोगों के परिवार से मिलने के बाद कहा कि वह अपने मकसद में कामयाब रहीं। खुद राष्ट्रीय स्तर पर उनको मिली सुर्खियों को छोड़ भी दिया जाए तो नि:संदेह यूपी में करीब 30 साल से हाशिए पर चल रही कांग्रेस को संजीवनी देने की उनकी कोशिश इस मायने में कामयाब होती दिखी कि दो दिन प्रदेश के कई जिलों में कांग्रेसी सड़क पर उतरते दिखे। नेताओं में प्रियंका के संघर्ष में शामिल होने की होड़ दिखी। 
लोकसभा चुनाव में प्रदेश में हुई शर्मनाक हार और उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद से कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता लगभग कोमा में हैं। हताश और निराश पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए यह जरूरी भी था कि प्रियंका खुद सड़क पर उतर कर सरकार के खिलाफ मोर्चा लें। ट्विटर और बयानों से तो वह सरकार के खिलाफ लोहा पहले से ही ले रही थीं लेकिन सोनभद्र की घटना ने उन्हें सड़क पर उतरने का अवसर दिया और वह पूरे दमखम से उतरीं भी। नतीजतन, उत्साहित कांग्रेसी देखते-देखते सोनभद्र, मिर्जापुर ही नहीं प्रदेश के दूसरे जिलों में भी नारेबाजी करते और पुतला फूंकते सड़कों पर उतर गए। 
दूसरे, प्रियंका जानती हैं कि भाजपा से अगली चुनावी लड़ाई के लिए जरूरी है कि पहले बतौर विपक्षी दल कांग्रेस मुख्य मुकाबले में आए। फिलहाल प्रियंका सोनभद्र प्रकरण पर दूसरों पर भारी होती दिखीं। लेकिन मजबूत संगठन के अभाव में प्रियंका और कांग्रेस यह माहौल कब तक बनाये रखते हैं, यह उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं। (लाइव हिंदुस्तान)


Date : 21-Jul-2019

तिरुवनंतपुरम, 21 जुलाई । केरल में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की युवा सांसद राम्या हरिदास को कार देने के लिये क्राउड फंडिंग के जरिये धन जुटाने का फैसला किया है। राज्य से इस बार राम्या एकमात्र महिला लोकसभा सांसद हैं। पहली बार सांसद बनीं राम्या हरिदास संसद के निचले सदन में राज्य के अलाथुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। युवा कांग्रेस के अलाथुर इकाई के अध्यक्ष पलायम प्रदीप ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा, हमलोग आम जनता से नहीं बल्कि खासतौर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच क्राउड फंडिंग की योजना बना रहे हैं।  हालांकि अगर कोई इसमें योगदान करना चाहता है तो वह कर सकता है। उन्होंने बताया कि केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता नौ अगस्त को सांसद को वाहन की चाबी सौपेंगे। इस बीच राम्या हरिदास ने कहा कि इस फैसले से वह खुश हैं और गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। (भाषा)


Date : 20-Jul-2019

लखनऊ, 20 जुलाई । कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बाद तृणमूल कांग्रेस के सांसदों को भी यूपी सरकार ने सोनभद्र जाने से रोक दिया है। शनिवार को टीएमसी सांसदों को यूपी पुलिस ने बनारस एयरपोर्ट से बाहर आने की अनुमति नहीं दी। यूपी प्रशासन के इस रवैये से खफा टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन अपने साथियों के साथ बनारस एयरपोर्ट पर ही धरने पर बैठ गए। डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि एडीएम और एसपी ने हमें बताया कि हमें हिरासत में लिया जा रहा है क्योंकि यहां धारा 144 लागू है। लेकिन हमनें उन्हें कहा कि हम तीन लोग हैं और धारा 144 लागू होने की सूरत में पांच या पांच से  ज्यादा लोग अगर साथ जाएं तभी उसका उल्लंघन माना जाता है। लेकिन हम तो सिर्फ हैं। हम यहां से बीएचयू ट्रामा सेंटर जाने की कोशिश करेंगे जहां सोनभद्र की घटना में घायल हुए लोगों को रखा गया है। (एनडीटीवी)
 


Date : 20-Jul-2019

मिर्जापुर, 20 जुलाई । यूपी के सोनभद्र जाने की जिद पर अड़ीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने 24 घंटे के धरने के बाद चुनार गेस्ट हाउस के बाहर पीडि़तों से मुलाकात की। गेस्ट हाउस के बाहर पीडि़तों ने कहा कि उन्हें गेस्ट हाउस आने से रोका जा रहा है, वे 15 लोग हैं और सिर्फ प्रियंका से मिलने आए हैं। महिलाएं भी आई हैं। प्रियंका ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, प्रशासन न हमें मिलने दे रहा है और पीडि़त परिवारों को भी यहां आने से रोक रहा है। इसी के साथ वह दोबारा धरने पर बैठ गई हैं। बता दें कि गेस्ट हाउस में धरना देते हुए प्रियंका ने कहा था कि अगर प्रशासन चाहे तो कहीं और भी पीडि़तों को उनसे मिलवा सकता है। 
प्रियंका ने कहा, पीडि़तों के सिर्फ दो रिश्तेदारों ने मुझसे मुलाकात की, 15 लोगों को मुझसे मिलने नहीं दिया गया। न ही मुझे उनसे मिलने की अनुमति दी गई। भगवान जाने इनकी मानसिकता क्या है? आप थोड़ा दबाव बनाइए, उन्हें आने दीजिए। प्रियंका ने आगे कहा, प्रशासन की मानसिकता मेरे समझ से परे हैं। वे लोग इतने दर्द में मुझसे मिलने आए हैं लेकिन प्रशासन ने मुझे जाने दे रहा है और न उन्हें आने दे रहा है। जिनसे मिलने मैं आई थीं, उन्हें मुझसे मिलने आना पड़ रहा है। कुछ लोगों को मिलने से रोका जा रहा है। पीडि़त परिवारों से बात करते हुए प्रियंका भावुक भी हो गईं। प्रियंका ने कहा कि वह धारा 144 का उल्लंघन नहीं करना चाहतीं, फिर भी सरकार उन्हें पीडि़तों से मिलने नहीं दे रही है। 
भूपेश बघेल पहुंच रहे हैं मिर्जापुर 
इससे पहले प्रियंका ने कहा था कि अगर सोनभद्र नहीं जाने दिया जा रहा तो मिर्जापुर या कहीं भी प्रशासन हमें पीडि़त परिवारों से मिलवा दे, लेकिन मिले बिना नहीं जाएंगे। दूसरी ओर, कांग्रेस के कई बड़े भी मिर्जापुर के चुनार गेस्ट हाउस पहुंच रहे हैं। प्रियंका के समर्थन में छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश सिंह बघेल, जितिन प्रसाद और दीपेंद्र हु़ड्डा भी चुनार पहुंच रहे हैं। 
सिर्फ दो रिश्तेदारों से मिलीं-प्रियंका
पीडि़तों के सिर्फ दो रिश्तेदारों ने मुझसे मुलाकात की, 15 लोगों को मुझसे मिलने नहीं दिया गया। न ही मुझे उनसे मिलने की अनुमति दी गई। भगवान जाने इनकी मानसिकता क्या है?
आप गाड़ी में ही मुझे बैठाकर ले चलिए
प्रियंका गांधी ने चुनार गेस्ट हाउस से सुबह कहा था, जब मुझे कल रोका गया तो मैंने कहा था कि मैं धारा 144 का उल्लंघन नहीं करना चाहती हूं और आप गाड़ी में ही मुझे बैठाकर ले चलिए, मैं अपने साथ दो लोगों को ही लेकर सोनभद्र चलने के लिए तैयार हूं लेकिन मैं पीडि़तों से किसी भी सूरत में मिलना चाहती हूं। मुझे पीडि़तों से मिलना है मिलवा दें। मैं परिवार के सदस्यों से मिले बिना नहीं जाऊंगी। अगर सोनभद्र के बाहर भी मिलवाना चाहे तो मिलवा दें।
क्या इन आंसुओं को पोंछना अपराध है?
प्रियंका ने कहा था कि वह सोनभद्र के बाहर भी पीडि़तों से मिलने के लिए तैयार हैं। प्रियंका ने सरकार से कहा, आप इंतजाम कीजिए मैं कहीं और मिल लेती हूं। 24 घंटे हो चुके हैं। मैं यहां से नहीं जाने वाली जब तक कि हमें सोनभद्र के पीडि़त परिवारों से मिलने नहीं जा रहा। इससे पहले प्रियंका ने शनिवार सुबह अपने ट्विटर हैंडल से सोनभद्र हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों का विडियो शेयर करते हुए लिखा, क्या इन आंसुओं को पोंछना अपराध है? 
बीजेपी ने कहा- राजनीतिक रोटियां न सेंके प्रियंका 
दूसरी ओर बीजेपी ने प्रियंका के धरने को राजनीतिक ड्रामा करार दिया है। यूपी के मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, श्रीमती वाड्रा को लगता है कि सोनभद्र में टूरिज्म चल रहा है। इसलिए वे घूमने जा रहे हैं। बीएचयू गईं पीडि़त परिवारों से मिलने किसी ने आपको रोका नहीं लेकिन यहां पर धारा 144 लगाया है और अगर आप शांति भंग करने जाएंगी तो कोई सरकार अनुमति नहीं देगी।
1955 में आपकी सरकार ने वनवासियों की जमीनें बेची, सिद्धार्थ नाथ सिंह ने आगे कहा, जो प्रशासन है अपना काम किया, आप दखलअंदाजी करेंगे, रोटियां सेकेंगे, रोड पर लेट जाएंगे तो इससे चुनाव में जो हार मिली है उस पर कोई लाभ नहीं मिलेगा। 1955 में आपकी ही (कांग्रेस) सरकार थी और आपने यही वनवासियों की जमीन बेच दी थी इसलिए इतने भू-माफिया पैदा हो गए हैं जिनका हम निस्तारण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज ये रेकॉर्ड सामने आ रहे हैं। उस समय इतने आदिवासियों की जमीनें बेची गईं जिससे विवाद हो रहा है। (नवभारतटाईम्स)
 

 


Date : 20-Jul-2019

बेंगलुरु, 20 जुलाई । भारत की सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बेंगलुरु शहर में इन दिनों राजनीतिक तापमान अपने चरम पर है। राज्य की जेडीएस-कांग्रेस सरकार पर संकट के घने बादल मंडरा रहे हैं। पिछले 14 दिनों से कुमारस्वामी सरकार को गिराने और उसे बचाने का नाटक चल रहा है। राज्य के नेता सरकार को गिराने और बचाने के लिए विधायकों की जोड़तोड़ के साथ अब भगवान की पूजा और टोटकों का सहारा ले रहे हैं। यही नहीं ज्योतिषियों की राय भी ली जा रही है। 
सत्तारूढ़ जेडीएस के नेताओं ने ज्योतिषियों के हवाले से दावा किया है कि कर्नाटक विधानसभा में अगर विश्वासमत पर चर्चा मंगलवार तक खिंच जाएगी तो एचडी कुमारस्वामी सरकार बच जाएगी। जेडीएस के एक सदस्य ने कहा, जेडीएस सुप्रीमो एचडी देवगौड़ा, कुमारस्वामी, उनके भाई एचडी रेवन्ना और उनका परिवार सरकार बचाने के लिए विशेष पूजा कर रहा है। 
जेडीएस सदस्य ने बताया कि पार्टी के शीर्ष नेताओं ने पुजारियों और ज्योतिषियों से सलाह ली है। ज्योतिषियों ने सलाह दी है कि यदि विश्वासमत पर वोटिंग अगर मंगलवार तक टल जाएगी तो सरकार बच जाएगी। उधर, सूत्रों ने बताया कि जेडीएस के वरिष्ठ नेताओं के घरों पर पुजारी विशेष पूजा और हवन कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुमारस्वामी के भाई एचडी रेवन्ना पिछले कई दिनों से नंगे पैर चल रहे हैं ताकि दुष्ट शक्तियां दूर रहें और कांग्रेस-जेडीएस सरकार बच जाए। 
गुरुवार को रेवन्ना विधानसभा में भी नंगे पैर आए थे। यही नहीं बुधवार को रेवन्ना गौड़ा परिवार के साथ बेंगलुरु स्थित श्रृंगेरी शारदा पीठम गए थे। उधर, बीजेपी ने आरोप लगाया कि टोटके के लिए एचडी रेवन्ना शुक्रवार को सदन में नींबू लेकर आए थे। हालांकि कुमारस्वामी ने दावा किया कि ऐसा कुछ नहीं है। बताते हैं कि रेवन्ना मुसीबत के समय अपने हाथ में नींबू लिए रहते हैं। 
रेवन्ना का मानना है कि इससे मुसीबत टल जाती है। उधर, टोटके के आरोपों पर सफाई देते हुए कुमारस्वामी ने बीजेपी पर हमला बोला। सीएम ने कहा कि आप एक तरफ हिंदू संस्कृति पर विश्वास करते हैं और दूसरी तरफ काला जादू का आरोप लगाते हैं। इस दौरान कुमारस्वामी ने बीजेपी से यह भी पूछा कि क्या काले जादू से सरकार बचाना संभव है? 
वैसे, सत्ता पाने के लिए प्रार्थना, पूजा-पाठ का दौर बीजेपी में भी जारी हैं। बीजेपी सांसद शोभा करंदलजे येदियुरप्पा के सीएम बनने के लिए अनुष्ठान कर रही हैं।मैसूर स्थित श्री चामुंडेश्वरी देवी मंदिर में वह 1001 सीढिय़ां चढक़र पहुंचीं। उन्होंने समर्थकों के साथ मंदिर में प्रार्थना की कि येदियुरप्पा कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनें। (टाईम्स न्यूज)
 


Date : 19-Jul-2019

बेंगलुरु, 19 जुलाई । कर्नाटक में गवर्नर के आदेश के बाद भी विधानसभा में एचडी कुमारस्वामी सरकार के बहुमत साबित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। सीएम ने साफ कहा कि राज्यपाल के निर्देश के अनुसार दोपहर 1.30 बजे तक ट्रस्ट वोट को पूरा नहीं किया जा सकता है। ऐसे में कर्नाटक का राजनीतिक संकट और गहरा गया है। दरअसल, राज्यपाल ने कहा था कि दोपहर तक बहुमत साबित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या गवर्नर विधानसभा में स्पीकर के अधिकार से आगे बढक़र आदेश दे सकते हैं। वास्तव में इस पर सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश है, जिसके आधार पर गठबंधन सरकार गवर्नर का आदेश मानने से बच सकती है। 
कर्नाटक की सरकार ने गवर्नर के आदेश के तहत डेढ़ बजे तक बहुमत हासिल नहीं किया। हालांकि बीजेपी इसके खिलाफ कुछ नहीं कर सकती है। दरअसल, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश महत्वपूर्ण है। कांग्रेस-जेडीएस सरकार को लगता है कि गवर्नर का यह आदेश स्पष्ट तौर से 2016 में अरुणाचल प्रदेश की नबाम टुकी सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के दिए आदेश का उल्लंघन है। 
तब बेंच ने फ्लोर टेस्ट को लेकर तत्कालीन गवर्नर जेपी राजखोवा के फैसले को असंवैधानिक करार दिया था। अरुणाचल केस में टुकी के वकील ने कहा था कि असेंबली का सत्र चलने के दौरान गवर्नर के पास दखल देने और आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। इसी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था। ऐसे में सोमवार से पहले कर्नाटक असेंबली में विश्वास मत पर वोटिंग की संभावना नहीं है।  हालांकि बीजेपी ने रातभर सदन में धरना देकर दबाव बढ़ाने की कोशिश जरूर की । पार्टी नेता येदियुरप्पा ने भी तंज कसा कि आज मुख्यमंत्री अपना विदाई भाषण देंगे और हम उसे ध्यान से सुनेंगे। फिलहाल लंच के लिए सदन की कार्यवाही 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। 
सीएम पद जाने का कोई डर नहीं- कुमारस्वामी 
सदन में सीएम एचडी कुमारस्वामी ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए सरकार को टारगेट करने का आरोप लगाया है। कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें सीएम पद जाने का कोई डर नहीं है। खबर यह भी आ रही है कि राज्यपाल द्वारा बहुमत साबित करने को लेकर दी गई समयसीमा खत्म होने के बाद दोनों पक्ष कोर्ट का रुख कर सकते हैं। 
येदि सीएम बनें... 1001 सीढिय़ां चढ़ीं बीजेपी सांसद 
उधर, सदन से दूर बीजेपी सांसद शोभा करंदलाजे पार्टी के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा के कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री बनने के लिए प्रार्थना कर रही हैं। शुक्रवार को वह अनुष्ठान के तहत मैसूर स्थित श्री चामुंडेश्वरी देवी मंदिर में 1001 सीढिय़ां चढक़र दर्शन के लिए पहुंचीं। 
बहुमत साबित करने से बचने का प्लान? 
विधानसभा में डिबेट के दौरान आज कई सदस्यों को अपने विचार रखने हैं पर बीजेपी चाहती है कि जल्द से जल्द मुख्यमंत्री बहुमत साबित करें। बीजेपी का दावा है कि बहुमत उसके पास है और मौजूदा सरकार अल्पमत में आ चुकी है। दोनों ही पक्ष 'विक्टिम कार्ड' खेल रहे हैं। ऐसे में साफ है कि संख्याबल को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद भी कांग्रेस और जेडीएस सरकार बहुमत साबित करने से बच रही है। 
संख्याबल का खेल 
कर्नाटक विधानसभा में 225 सदस्य (एक मनोनीत समेत) हैं। अगर 16 विधायकों का इस्तीफा होता है तो कुल संख्याबल 209 पहुंच जाएगा। बागी विधायकों को साथ लेते हुए कुल 225 सीटों में संख्या बल देखें तो कांग्रेस+जेडीएस+बीएसपी के पक्ष में 117 सदस्य हैं जबकि 16 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद बीजेपी का पलड़ा भारी हो जाएगा। तब 209 सीटों वाले सदन में बीजेपी के पास 105 सदस्य होंगे और कांग्रेस+जेडीएस+बीएसपी के पास संख्याबल 101 ही रह जाएगा। यही वजह है कि राज्य सरकार की पूरी कोशिश है कि विश्वास मत को टाला जाए। 
रातभर चला कर्नाटक का नाटक
कर्नाटक विधानसभा में गुरुवार रात एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। बीजेपी विधायकों ने सदन में ही रात भर धरना दिया। बीजेपी विधायक तकिया और चादर लेकर पहुंचे और विधानसभा के अंदर कोई सोफे पर तो कोई जमीन पर जहां जगह मिली वहीं पर सो गया। सुबह विधानसभा में ही नेताओं ने नाश्ता किया और मॉर्निंग वॉक के लिए भी निकले। अस्तित्व के संकट से जूझ रही एचडी कुमारस्वामी सरकार को राज्यपाल वजुभाई आर वाला की ओर से दोहरा झटका मिला। राज्यपाल ने विश्वासमत पर चल रही बहस को शुक्रवार दोपहर तक खत्म करने का स्पीकर को आदेश दिया है और मुख्यमंत्री को दोपहर 1.30 बजे तक विश्वासमत हासिल करने के लिए कहा है।
सदन में ही चादर तकिया लेकर सो गए येदियुरप्पा
बीजेपी नेताओं ने विधानसभा स्थगित किए जाने के विरोध में विश्वास मत तय होने तक सदन में धरना देने का फैसला किया है। इसी विरोध के सिलसिले में नेताओं ने पूरी रात सदन में गुजारी। कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष येदियुरप्पा सदन में ही सो गए।
जिसे जहां जगह मिली, वह वहीं सो गया
येदियुरप्पा के साथ रातभर धरना देने वाले अन्य बीजेपी नेता भी चादर-तकिया लेकर सदन में ही सोते नजर आए। देश की किसी विधानसभा में शायद ही ऐसा नजारा पहले कभी देखने को मिला हो।
नाश्ता लेकर पहुंचे कर्नाटक के डेप्युटी सीएम
रात भर धरना देने के बाद बीजेपी नेताओं की सुबह नींद खुली तो डेप्युटी सीएम को सामने देख चौंक गए। दरअसल, कर्नाटक के डेप्युटी सीएम जी. परमेश्वर सुबह उनके लिए नाश्ता, पानी लेकर पहुंचे हुए थे।
मॉर्निंग वॉक पर निकले नेता
रातभर धरना देने के बाद सुबह उठकर बीजेपी नेता मॉर्निंग वॉक के लिए बाहर निकले। उधर, कर्नाटक के बीजेपी विधायकों ने शुक्रवार को असेंबली सत्र शुरू होने से पहले येदियुरप्पा के साथ बैठक की।
विधानसभा में ही डिनर भी
मीटिंग के बाद नेताओं ने रात में सदन के लाउंज में ही डिनर भी किया। बता दें कि 16 बागी विधायकों के इस्तीफे के कारण कर्नाटक की जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ये सभी विधायक सदन से नदारद रहे।
कांग्रेस नेताओं के मनाने पर भी नहीं मानी बीजेपी
कर्नाटक के मंत्री एमबी पाटिल और डीके शिवकुमार ने बीजेपी नेताओं के धरने के फैसले के बाद उनसे बातचीत की लेकिन बीजेपी नेता अपने फैसले पर अड़े रहे।
कर्नाटक विधानसभा का नजारा
आंकड़ों के खेल में कुमारस्?वामी यह जंग लगभग हार चुके हैं लेकिन वह अभी पराजय को मानने के मूड में नहीं दिखाई दे रहे हैं। जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार राज्?यपाल के आदेश के खिलाफ आज सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। उधर, बीजेपी भी सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।
सिद्धारमैया का तर्क भी समझिए 
कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस बयान से भी सरकार के प्लान का पता चलता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि जब तक हमें सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश पर स्पष्टीकरण नहीं मिल जाता, इस सत्र में बहुमत परीक्षण कराना उचित नहीं होगा। यह संविधान के खिलाफ होगा। सिद्धारमैया ने कहा है, 'अगर हम विश्वास प्रस्ताव के साथ आगे बढ़ते हैं और विप लागू होता है तो वे (बागी कांग्रेस और जेडीएस विधायक) सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वजह से सदन में नहीं आएंगे। यह गठबंधन सरकार के लिए बड़ा नुकसान होगा।
उधर, विपक्ष के नेता येदियुरप्पा विश्वास मत में देरी के विरोध में अपने पार्टी विधायकों के साथ पूरी रात सदन में रहे। सत्तारूढ़ गठबंधन और विधानसभा अध्यक्ष पर समय निर्धारित होने के बावजूद विश्वास मत में देरी की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए बीजेपी नेता ने कहा, उन्होंने बृहस्पतिवार को हमें उकसाने का प्रयत्न किया लेकिन हम चुप रहे, हम शुक्रवार को भी ऐसा ही करेंगे। (नवभारतटाईम्स)
 


Date : 19-Jul-2019

नई दिल्ली, 19 जुलाई । कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को विधानसभा में बहस जारी रखते हुए विश्वासमत के दौरान यह आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी उनकी सरकार को गिराना चाह रही थी। उन्होंने कहा कि सीट मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं है।
राज्यपाल वजुभाई वाला की तरफ से शुक्रवार की दोपहर डेढ़ बजे तक बहुमत साबित करने के दिए अल्टीमेटम के बाद कुमारस्वामी ने कहा- मैं यह देखूंगा कि इस प्रयास के बाद आखिर कब तक आप यह रहते हो।
इससे पहले, गुरूवार को विधानसभा में गुरूवार को उस वक्त हाई ड्रामा शुरु हुआ जब राज्यपाल वजुभाई वाला का यह आदेश आया कि कुमारस्वामी शुक्रवार डेढ़ बजे तक अपना बहुमत साबित करे।
कर्नाटक में जारी राजनीतिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में कांग्रेस और सहयोगी दलों के सदस्यों ने शुक्रवार को लोकसभा में हंगामा किया और सत्तारूढ़ भाजपा पर चुनी हुई सरकारों को गिराने का आरोप लगाते हुए सदन से वाकआउट किया।सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और द्रमुक के सदस्यों ने कर्नाटक के विषय पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया। कांग्रेस एवं द्रमुक के सदस्यों ने आसन के निकट पहुंचकर नारेबाजी की।
विधानसभा में कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि विधायकों को 40-50 करोड़ रूपये की पेशकश की गयी, यह पैसा किसका है। कुमारस्वामी ने भाजपा से पूछा कि अगर वह अपने संख्या बल को लेकर इतनी आश्वस्त है तो उसे विश्वासमत पर चर्चा को एक ही दिन के भीतर खत्म करने की जल्दबाजी क्यों है। कुमारस्वामी ने भाजपा पर दल-बदल रोधी कानून को दरकिनार करने के तरीके अपनाने का आरोप लगाया।
जद (एस) के विधायक श्रीनिवास गौड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार गिराने के लिए उससे अलग होने को लेकर भाजपा की ओर से उन्हें पांच करोड़ रुपये की पेशकश की गई।
कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने शुक्रवार को उन टिप्पणियों को खारिज कर दिया कि वह मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी की सरकार के भविष्य पर फैसला करने के लिए उनके द्वारा लाए विश्वास मत प्रस्ताव पर मतदान कराने में देरी करने की कोशिश कर रहे हैं। 
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी। राज्यपाल वजुभाई वाला ने कुमारस्वामी को अपना बहुमत साबित करने के लिए शुक्रवार को दोपहर डेढ़ बजे की समयसीमा तय की है। कुमार ने विश्वास मत पर मतदान में देरी करने की कोशिश की टिप्पणियों पर आक्रोश जताते हुए कहा, मैं पक्षपात नहीं कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि ऐसी चर्चा और अप्रत्यक्ष टिप्पणियां की गई कि वह प्रक्रिया (विश्वास मत पर मतदान) में देरी कर रहे हैं।
गुरुवार को कर्नाटक विधानसभा में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की ओर से पेश विश्वास प्रस्ताव पर बहस शुक्रवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई है। सदन में इस प्रस्ताव पर बहस के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोंकझोक देखने को मिली।
विधानसभा के उपाध्यक्ष कृष्ण रेड्डी ने भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के सदस्यों की नारेबाज़ी की वजह से सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया। कुमारस्वामी को अभी प्रस्ताव पर अपना भाषण देना है।
सदन की कार्यवाही स्थगित करने से पहले, भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी के सदस्य रातभर सदन में ही रहेंगे और विश्वास प्रस्ताव पर फैसला हो जाने तक सदन में ही डटे रहेंगे।
येदियुरप्पा ने कहा, हम विश्वास प्रस्ताव पर फैसला होने तक रूके रहेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वास प्रस्ताव पर ठीक तरह से 15 मिनट भी चर्चा नहीं हुई है और सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्य अन्य मुद्दों को उठा रहे हैं ताकि विश्वास प्रस्ताव पर विलंब कराया जा सके। उन्होंने कहा,  संवैधानिक रूपरेखा का उल्लंघन हुआ है। येदियुरप्पा ने कहा, इसका विरोध करने के लिए हम यहीं सोएंगे। (लाइव हिन्दुस्तान)

 


Date : 18-Jul-2019

विरोध में रात भर धरने पर भाजपा विधायक

बेंगलुरु, 18 जुलाई। कर्नाटक में सियासी ड्रामा जारी है। गुरुवार को विश्वासमत परीक्षण किए बिना स्पीकर रमेश कुमार ने विधानसभा की कार्रवाई स्थगित कर दी। इसका विरोध जताते हुए बीजेपी विधायकों ने विधानसभा में धरने पर बैठने का ऐलान कर दिया। बीजेपी विधायकों ने मांग की है कि स्पीकर राज्यपाल के पत्र का जवाब दें और विश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराएं। मांगे न मानने की स्थिति में विधायकों ने रात भर विधानसभा परिसर में ही धरने पर बैठने की घोषणा की है। 
राज्य के सीएम एचडी कुमारस्वामी ने गुरुवार को सदन में विश्वासमत परीक्षण के लिए तारीख तय की थी। गुरुवार सुबह विश्वासमत प्रस्ताव पर बहस के दौरान बजेपी और कांग्रेस विधायकों के बीच जमकर बहस हुई। इस दौरान बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल वजुभाई वाला से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। उन्होंने राज्यपाल से अपील की कि वह स्पीकर को विश्वासमत पर बहस जारी रखने के लिए कहें।
इसके बाद राज्यपाल ने स्पीकर को पत्र लिखकर गुरुवार को ही विश्वासमत परीक्षण कराने पर विचार करने को कहा था। इसे लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि चाहे रात के 12 ही क्यों न बज जाएं लेकिन विश्वासमत का परीक्षण आज ही होना चाहिए। इन सबके बावजूद स्पीकर रमेश कुमार ने बिना विश्वासमत परीक्षण कराए विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। स्पीकर के फैसले के विरुद्ध बीजेपी विधायकों ने विधानसभा परिसर में रात भर धरना देने का ऐलान किया है।  (नवभारतटाईम्स)


Date : 18-Jul-2019

बैंगलुरु, 18 जुलाई । कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की कुर्सी बची रहेगी या फिर जाएगी, इसका फैसला थोड़ी ही देर में होने वाला है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में विश्वासमत पेश कर दिया है जिस पर फिलहाल चर्चा चल रही है।
एचडी कुमारस्वामी ने भाजपा पर उनकी सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा इतनी जल्दी में क्यों है। इससे पहले भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने कहा था कि विश्वास मत पर चर्चा के लिए समय निर्धारित हो। एचडी कुमारस्वामी का आगे कहना था, ‘मैं सभी मुद्दों पर चर्चा और चुनौती के लिए तैयार हूं। भाजपा सरकार को अस्थिर करने में लगी हुई है। लोकतांत्रिक सरकार के खिलाफ ड्रामा किया जा रहा है। आयाराम-गयाराम विधायकों का सिलसिला चल रहा है। हमें कड़े कानून लाने की जरूरत है ताकि दलबदल को रोका जा सके।’
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा, ‘यहां ऐसे विधायक भी हैं जो एक दिन में 3-3 पार्टियां बदल रहे हैं। देश का राजनीतिक माहौल दूषित हो गया है।’ उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा देश और अदालत को गुमराह कर रहे हैं।

इससे पहले एचडी कुमारस्वामी के सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश करने से पहले ही जेडीएस ने अपने तीन बागी विधायकों पर कार्रवाई करते हुए उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू किया है। अगर विधानसभा अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की शरण लेने वाले सभी 15 बागी विधायकों को अयोग्य ठहरा देते हैं तो सदन में संख्याबल और नतीजे में बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा भी घट जाएगा। इसके बाद 209 विधायकों के पास ही बहुमत परीक्षण में हिस्सा लेने का अधिकार होगा और बहुमत के लिए जरूरी संख्या 105 हो जाएगी। (सत्याग्रह ब्यूरो)

 


Date : 18-Jul-2019

बेंगलुरु, 18 जुलाई । कर्नाटक में सरकार के भविष्य का फैसला करने के लिए सबकी नजरें आज विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट पर टिकी हैं। इस बीच जेडीएस ने अपने तीन बागी विधायकों पर दल-बदल विरोधी कानून लागू कर दिया है। अब इसके आधार पर इन विधायकों को सदन में वोटिंग के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है। उधर जेडीएस के विप जारी करने के बावजूद बागी विधायकों ने सदन में उपस्थित न रहने के अपने फैसले से पीछे हटने से साफ इनकार किया है। 
सीएम कुमारस्वामी के सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश करने से पहले ही जेडीएस ने अपने तीन बागी विधायकों एच विश्वनाथ, गोपालैया और नारायण गौड़ा पर कार्रवाई करते हुए उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू किया है। यही नहीं, जेडीएस कुछ और विधायकों को अयोग्य ठहराने का विचार भी कर रही है। 
कांग्रेस विधायक ने वापस लिया इस्तीफा कांग्रेस के बागी विधायक रामलिंगा रेड्डी ने अपनी इस्तीफा वापस ले लिया है जिससे सत्ताधारी गठबंधन के विधायकों की संख्या अब 102 हो गई है, जिसमें नामित सदस्य भी हैं। हालांकि फिर भी यह सरकार बनाए रखने के जादुई आंकड़े 106 से दूर है और अगर स्पीकर केआर रमेश कुमार 15 बागियों के इस्तीफे स्वीकार कर लेते हैं तो सरकार के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। 
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कुछ समय बाद ही जेडीएस ने अपने विधायकों को विप जारी कर सदन में विश्वास मत के दौरान उपस्थित रहने को कहा था। जेडीएस ने यह भी कहा कि जो विधायक इस दौरान अनुपस्थित रहेगा, उसे अयोग्य साबित करने के लिए दल-बदल कानून लगाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि बागी विधायकों को सदन की कार्यवाही का हिस्सा लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। 
अपने फैसले पर अडिग हैं बागी विधायक दूसरी ओर कांग्रेस ने इस बात पर जोर दिया सुप्रीम कोर्ट ने पार्टियों को विप जारी करने से नहीं रोका है। जबकि बीजेपी का कहना है कि बागी विधायक सदन कार्यवाही का हिस्सा बनने या शामिल न होने के लिए स्वतंत्र हैं। जेडीएस के विप जारी करने के बावजूद मुंबई में ठहरे बागी विधायकों ने विडियो जारी करते हुए कहा कि वह विधानसभा की कार्यवाही में शामिल न होने के लिए अपने फैसले पर दृढ़ हैं। 
सदन से दूर रहने वाले जेडीएस विधायक को अयोग्य ठहराए जाने की चर्चा के बीच स्पीकर ने कहा कि पार्टियों द्वारा जारी किए गए विप और अवज्ञा के लिए अयोग्यता के मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट बाद में देखेगी। उन्होंने कहा, आज का फैसला सिर्फ अंतरिम फैसला होगा और कोर्ट शेड्यूल 10 से संबंधित सभी मुद्दों पर अंतिम फैसला देगी।
गुरुवार को मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी 11 बजे विश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं और इसी के साथ सदन की कार्यवाही शुरू होने की संभावना है। इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि सदन में जेडीएस-कांग्रेस स्पीकर से उन सभी सदस्यों को इजाजत देने की गुहार लगाएंगी जो अविश्वास प्रस्ताव पर बोलना चाहते हैं। इससे विश्वास मत की तारीख एक दिन आगे बढ़ सकती है और कांग्रेस-जेडीएस को बागी विधायकों को अपने खाते में लाने की एक और कोशिश के लिए शुक्रवार तक का समय मिल जाएगा। वहीं बीजेपी की योजना एक ही दिन में बहस और वोटिंग करने की रहेगी। (नवभारतटाईम्स)
 


Date : 17-Jul-2019

नई दिल्ली, 17 जुलाई । कर्नाटक में 12 दिनों से जारी सियासी उठापटक के बीच बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की अर्जी पर अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने जेडीएस-कांग्रेस के 16 बागी विधायकों की इस्तीफे पर फैसला स्पीकर पर छोड़ दिया है। चीफ जस्टिस (सीजेआई) रंजन गोगोई ने कहा कि विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार बागी विधायकों के इस्तीफे पर नियम के मुताबिक फैसला करें। इसके लिए कोई डेडलाइन नहीं दी जा रही है। कोर्ट के इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी गुरुवार को विधानसभा में विश्वास मत पेश करेंगे। कोर्ट ने ये भी कहा कि बागी विधायक विधानसभा में आने या न आने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन, उनपर कोई दबाव नहीं डाला जा सकता।
इससे पहले मंगलवार को चीफ जस्टिस (सीजेआई) रंजन गोगोई ने इस मामले में सभी पक्षों की ओर से जोरदार दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस दौरान कुमारस्वामी और विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों की याचिका पर विचार करने के न्यायालय के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया। वहीं, बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार बहुमत खो चुकी गठबंधन सरकार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब नजऱें विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार पर हैं। अगर विधानसभा अध्यक्ष इन बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लेते हैं तो उनकी सरकार उससे पहले ही गिर सकती है।
मंगलवार को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, हम ये तय नहीं करेंगे कि विधानसभा स्पीकर को क्या करना चाहिए, यानी उन्हें इस्तीफा स्वीकार करना चाहिए या नहीं। हालांकि, हम सिर्फ ये देख सकते हैं कि क्या संवैधानिक रूप से स्पीकर पहले किस मुद्दे पर निर्णय कर सकता है। सीजेआई ने कहा कि कोर्ट ये तय नहीं करेगा कि स्पीकर को क्या करना है। (न्यूज18)
 


Date : 16-Jul-2019

नई दिल्ली, 16 जुलाई । इस गुरुवार को कर्नाटक में चल रहे नाटक का एक अध्याय पूरा हो जाएगा कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को उस दिन विश्वासमत हासिल करना है। जिसको लेकर वह काफी आश्वस्त दिखे। कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने बिजनेस एडवाइजरी समिति की करीब एक घण्टे चली बैठक के बाद घोषणा की कि मुख्यमंत्री कुमारस्वामी वृहस्पतिवार 11 बजे विश्वासमत हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने विश्वासमत हासिल करने की पहल की थी। उन्हें गुरुवार को 11 बजे विश्वासमत हासिल करने का समय दिया गया है। इससे पहले बीजेपी ने कुमारस्वामी सरकार के खि़लाफ़ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता  बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के लिए कहा था। हम विश्वास मत की बात क्यों करें जब हमें उनकी सरकार में भरोसा ही नही हैं। फिलहालज जो सूरत है, उसमें सरकार संकट में है। 
क्या है विधानसभा का समीकरण
225 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में 16 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इन्हें हटाने से विधानसभा की संख्या 209 पर आ टिकती है यानी तब  बहुमत के लिए 105 विधायक चाहिए।  बीजेपी के पास 105 विधायकों के अलावा 2 निर्दलीय हैं जो मिलाकर कुल 107 विधायक हो जाते हैं। जबकि जेडीएस कांग्रेस के पास स्पीकर को छोडक़र 101 विधायक विधायक होंगे। जोड़ तोड़ की कोशिश सरकार बचाने और गिराने के लिए दोनों तरफ से चल रही है।
गुरुवार को अगर कर्नाटक सरकार गिरती है तो कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका होगा क्योंकि लोकसभा चुनाव में मिली हार से पार्टी पहले ही पस्त है और इसी बीच एक और सत्ता जाने पर पार्टी के लिए बड़ी रणनीतिक हार होगी। इसके साथ ही गठबंधन की राजनीति पर भी सवाल उठ जाएगा क्योंकि उत्तर प्रदेश में पहले ही सपा-बसपा करारी हार के बाद अलग-अलग हो गए हैं।
कुमारस्वामी सरकार का भविष्य अब गुरुवार को तय होगा। विश्वासमत जीतने के लिए जो नम्बर चाहिए वो उनके साथ फिलहाल नहीं दिख रहे। लेकिन पहले सुप्रीम कोर्ट और अब स्पीकर के फैसले से मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को थोड़ा वक्त और मिल गया जो इस नाजुक घड़ी में उनके लिए ऑक्सीजन से कम नहीं है।
कांग्रेस से निलंबित चल रहे विधायक रोशन बेग को कल रात बेंगलुरु एयरपोर्ट से स्पेशल टास्क फोर्स ने हिरासत में ले लिया है। उन्हें आईएमए घोटाले को लेकर हिरासत में लिया गया है। एसआईटी के मुताबिक रोशन बेग चार्टर्ड फ्लाइट से कहीं जा रहे थे। उनसे पूछताछ की जा रही है। आईएमए मामले की जांच कर रही एसआईटी ने उन्हें इस मामले में पूछताछ के लिए समन किया था। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने ट्वीट कर आरोप लगाया है कि जब रोशन बेग को हिरासत में लिया गया उस समय येदियुरप्पा के पीए संतोष भी साथ थे लेकिन वो वहां भागने में सफल रहे। कुमारस्वामी ने ये भी ट्वीट किया है कि बेग को हिरासत में लेने के समय बीजेपी के विधायक योगेश्वर भी वहां मौजूद थे और वो उन्हें भागने में मदद कर रहे थे। कुमारस्वामी के आरोप का जवाब कर्नाटक बीजेपी ने दिया है।
कर्नाटक बीजेपी की ओर ट्वीट किया गया है कि रोशन बेग के साथ येदियुरप्पा के पीए संतोष के साथ होने की बात गलत है। जिस समय एसआईटी ने बेग को हिरासत में लिया उस समय बीजेपी के विधायक योगेश्वर भी वहां मौजूद थे। यह बेहद शर्मनाक है कि बीजेपी पूर्व मंत्री को बेंगलुरु से भगाने में मदद कर रही थी। यह साफ करता है आखिर किस तरह से बीजेपी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को तोडऩे की कोशिशें कर रही है। वहीं, कुमारस्वामी द्वारा बीजेपी पर लगाए गए आरोपों का कर्नाटक बीजेपी ने जवाब दिया। उन्होंने एक ट्वीट कर कहा कि यह पूरी तरह से गलत है कि येदियुरप्पा के पीए संतोष बेग के साथ थे।  सीएम कुमारस्वामी पूरी तरह से अफवाह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हम बताना चाहते हैं बेग अगले सफर कर रहे थे, उनके साथ कोई और दूसरा पैसेंजर नहीं था। हम मांग करते हैं कि बोर्डिंग पास और सीसीटीवी फुटेज को सबूत के तौर पर रखा जाए। (एनडीटीवी)
 


Date : 16-Jul-2019

नई दिल्ली, 16 जुलाई। कर्नाटक में विधायकों के इस्तीफे से पैदा हालात पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। इस्तीफा देने वाले 15 विधायकों की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट स्पीकर को उनके इस्तीफे स्वीकार करने का निर्देश दे। विधायकों का कहना है कि स्पीकर इस मामले में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। सदन का विश्वास खो चुकी कांग्रेस-जेडीएस सरकार को बचाने के लिए विधायकों को अयोग्य करार देने का डर दिखाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि फिलहाल न इस्तीफे पर फैसला लिया जाएगा, न विधायकों को सदस्यता अयोग्य ठहराया जाएगा।
कर्नाटक से कांग्रेस के पांच बागी विधायकों ने 13 जुलाई को शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि विधानसभा अध्यक्ष उनके त्यागपत्र स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इन विधायकों में आनंद सिंह, के सुधाकर, एन नागराज, मुनिरत्न और रोशन बेग शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने 12 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार को कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायकों के इस्तीफे और उन्हें अयोग्य घोषित करने के लिये दायर याचिका पर 16 जुलाई तक कोई भी निर्णय लेने से रोक दिया था।
सत्ता में बने रहने के लिये जरूरी आंकड़ों को लेकर जहां कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन उलझन में है वहीं बीजेपी की कर्नाटक इकाई के प्रमुख बी एस येदियुरप्पा ने सोमवार को कहा कि उन्हें अगले चार-पांच दिन में सरकार बनाने का पूरा भरोसा है। येदियुरप्पा का दावा ऐसे वक्त आया है जब विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार ने मुख्यमंत्री कुमारस्वामी द्वारा दिये गए विश्वास मत के प्रस्ताव पर 18 जुलाई को चर्चा का वक्त दिया है। (एबीपी न्यूज)
 


Date : 16-Jul-2019

नई दिल्ली, 16 जुलाई । समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर ने आज (सोमवार) राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बीते कुछ समय से अखिलेश यादव और नीरज शेखर के बीच तनाव चल रहा था।
दरअसल, लोकसभा चुनाव में वह अपने परिवार की परंपरागत सीट बलिया से टिकट मांग रहे थे, लेकिन समाजवादी पार्टी ने टिकट नहीं दिया था, जिसके बाद से वो नाराज चल रहे थे।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि नीरज शेखर कल (मंगलवार) दोपहर 12:30 बजे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो सकते हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि 2020 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में भेज सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है, बताया जा रहा है कि राज्यसभा अध्यक्ष ने नीरज शेखर के इस्तीफा को स्वीकार भी कर लिया है।
गौरतलब है कि 8 बार बलिया से सांसद रहे चंद्रशेखर के निधन के बाद उपचुनाव कराया गया था, जिसमें उनके बेटे नीरज शेखर ने जीत हासिल की थी।  2009 के लोकसभा चुनाव में भी नीरज को जीत मिली लेकिन 2014 के चुनाव में नीरज हार गए थे। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उन्हें बलिया से चुनाव मैदान में नहीं उतारा था। (आजतक)
 

 


Date : 15-Jul-2019

नई दिल्ली, 15 जुलाई । सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के पांच और बागी विधायकों की याचिका को 10 बागी विधायकों की लंबित याचिका के साथ सुनने पर सहमति जता दी है। ये विधायक कोर्ट से उनका इस्तीफा स्वीकार करने के लिए कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देने की मांग कर रहे हैं। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में एक पीठ ने बागी विधायकों की तरफ से पेश होने वाले वरिष्ठ वकिल मुकुल रोहतगी की अर्जी पर संज्ञान लिया। याचिका में कहा गया है कि इन पांच विधायकों को भी उन 10 बागी विधायकों की लंबित याचिका में पक्षकार माना जाए जिनकी सुनवाई मंगलवार को होनी है। कांग्रेस के पांच और बागी विधायकों ने 13 जुलाई को सुप्रीम उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इन बागी विधायकों की मांग है कि उच्चतम न्यायालय इनका इस्तीफा स्वीकार करने का निर्देश कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष को दे। ये विधायक आनंद सिंह, के सुधाकर, एन नागराज, मुनिरत्न और रोशन बेग हैं। कोर्ट ने 12 जुलाई को कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष केआर रमेश कुमार को 16 जुलाई तक कांग्रेस - जेडीएस गठबंधन के 10 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले में किसी भी तरह के निर्णय लेने से रोका था। 
उधर मुंबई के एक होटल में रूके हुए बागी विधायकों ने शहर के पुलिस प्रमुख को पत्र लिखकर कहा है कि वह मल्लिकार्जुन खडग़े या कांग्रेस के किसी भी अन्य नेता से मिलना नहीं चाहते हैं।  ऐसी अटकलें हैं कि खडग़े कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के साथ पोवई में स्थित रिनेसां होटल में उनसे मिलने जा सकते हैं। मुंबई के पुलिस प्रमुख को लिखे पत्र में बागी विधायकों ने कहा, उनकी इच्छा मल्लिकार्जुन खडग़े या गुलाम नबी आजाद या कांग्रेस के किसी भी नेता से मिलने की नहीं है। विधायकों ने पत्र में कहा है कि उन्हें खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने पुलिस से आग्रह किया है कि कांग्रेस नेताओं को उनसे मिलने से रोका जाए। कर्नाटक में कांग्रेस - जेडीएस गठबंधन के नेताओं ने रविवार को सरकार बचाने के लिए भविष्य के कदमों पर चर्चा की। ये नेता लगातार कुछ बागी विधायकों का दिल जीतने की कोशिश में लगे हैं क्योंकि इसी सप्ताह कुमारस्वामी सरकार का विश्वासमत होने जा रहा है। 
हालांकि, बागी विधायकों ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे लोग एकजुट हैं और अपने इस्तीफे पर अडिग हैं। कर्नाटक सरकार गिरने के कगार है क्योंकि इसके 16 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है जिनमें से 13 विधायक कांग्रेस के हैं और तीन विधायक जद (एस) के हैं। दो निर्दलीय उम्मदीवारों ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। (एनडीटीवी)
 


Date : 15-Jul-2019

नई दिल्ली, 15 जुलाई। एमडीएमके पार्टी के जनरल सेक्रेटरी वाइको ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसकी वजह से विवाद हो सकता है। एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में वाइको ने कहा कि संसद में हिंदी में दिए जाने वाले भाषणों की वजह से सदन में बहस का स्तर गिर गया है। उन्होंने देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना पहाड़ और छछून्दर के बनाए मिट्टी के ढेर के बीच करके की।
द हिंदू को दिए इंटरव्यू के दौरान वाइको से पूछा गया कि सदन में भाषण के गिरते स्तर की क्या वजह है? इसके जवाब में एमडीएमके प्रमुख ने कहा, पहले संसद में विभिन्न विषयों पर गहरी जानकारी रखने वालों को भेजा जाता था। आज डिबेट का स्तर हिंदी की वजह से गिर गया है। वे बस हिंदी में चिल्लाते हैं। यहां तक कि पीएम नरेंद्र मोदी भी सदन को हिंदी में संबोधित कर रहे हैं।
नेता ने आगे कहा, वाजपेयी अंग्रेजी में बात करते थे। मोरारजी देसाई अंग्रेजी में बात करते थे लेकिन आप यह नहीं कह सकते कि वे हिंदी प्रेमी नहीं थे। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह ने दोनों सदनों में अंग्रेजी में भाषण दिया। सिर्फ मोदी हिंदी के लिए अपनी दीवानगी जाहिर करते हैं। वह हिंदी, हिंदू और हिंदू राष्ट्र स्थापित करना चाहते हैं।
वाइको का बयान ऐसे वक्त में सामने आया है, जब उनके सहयोगी डीएमके ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर हिंदी भाषा थोपने का आरोप लगाया है। डीएमके ने रविवार को एक टीम की घोषणा की, जो केंद्र सरकार के नैशनल एजुकेशन पॉलिसी ड्राफ्ट की समीक्षा करेगी। तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता एमके स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गैरहिंदी भाषी राज्यों में हिंदी टीचरों की भर्ती के लिए बजट में फंड का प्रावधान किया गया है।
स्टालिन के मुताबिक, केंद्र का यह कदम ड्राफ्ट पॉलिसी से हिंदी की अनिवार्यता हटाने से जुड़े प्रावधानों से बिलकुल उलट है। स्टालिन ने कहा कि डीएमके शिक्षा जगत के एक्सपर्ट्स से नैशनल एजुकेशन पॉलिसी पर राय जुटा रही है। डीएमके नेता ने ड्राफ्ट पॉलिसी को तमिल भाषा के लिए खतरा बताया। डीएमके की टीम में पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री के पोन्मुदी समेत 9 लोग हैं। यह टीम 10 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी, जिसे डीएमके केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को देगी।

 


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