राजनीति

05-Dec-2020 8:48 PM 0


 पटना, 5 दिसंबर | दिल्ली के आसपास केंद्र सरकार द्वारा हाल में बनाए गए कृषि कानूनों के विरोध में होने वाले किसान आंदोलन के समर्थन में शनिवार को बिहार के विपक्षी दलों को बिना अनुमति के पटना के गांधी मैदान में प्रदर्शन करना महंगा पड़ गया। बिना अनुमति के प्रदर्शन करने को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव सहित 19 लोगों सहित कई अज्ञात लोगों के खिलाफ पटना के गांधी मैदान थाना में एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। 

पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि दंडाधिकारी राजीव दत्त वर्मा के लिखित बयान के आधार पर गांधी मैदान में दर्ज प्राथमिकी में विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, पूर्व मंत्री श्याम रजक, रमई राम, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा सहित 19 लोगों को नामजद तथा कई अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। 

गांधी मैदान के थाना प्रभारी रंजीत वत्स ने आईएएनएस को बताया कि, "इन सभी लोगों पर भादवि की धारा 188, 145, 269, 279 और 3 एपीडेमिक डिजीज एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। 

इससे पहले राजद की ओर से शनिवार को पटना के गांधी मैदान में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास धरना कार्यक्रम का आयोजन किया जाना था। कार्यकर्ताओं के पहुंचने के बाद जिला प्रशासन ने कार्यकर्ताओं को बाहर निकालकर गांधी मैदान सील कर दिया, जिससे राजद के कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए। जिला प्रशासन का कहना है कि गांधी मैदान धरना स्थल नहीं है। 

इसके बाद राजद के आक्रोशित कार्यकर्ता गांधी मैदान के गेट नंबर 4 के पास धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने गांधी मैदान का छोटा गेट खोल दिया, जिसके बाद तेजस्वी यादव सहित कई नेता महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास पहुंचे और किसान आंदोलन में साथ रहने का संकल्प लिया। (आईएएनएस)


05-Dec-2020 8:39 PM 1

जम्मू, 5 दिसंबर | राज्य चुनाव आयुक्त (एसईसी) के.के. शर्मा ने शनिवार को जानकारी दी कि शुक्रवार को जम्मू एवं कश्मीर में पंच और सरपंच की खाली सीटों पर हुए उप-चुनाव 2020 के तीसरे चरण में क्रमश: 61.1 प्रतिशत और 49.25 प्रतिशत मतदान हुआ। एसईसी ने बताया कि तीसरे चरण में 327 निर्वाचन क्षेत्रों में पंच की रिक्त सीटों के लिए उपचुनाव हुए।

पंच उपचुनावों के तीसरे चरण में कुल 52118 मतदाताओं में से 31844 ने मताधिकार का उपयोग किया, जिनमें 16600 पुरुष और 15244 महिलाएं शामिल रहीं। मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ और दोपहर दो बजे खत्म हुआ।

शर्मा ने बताया कि पंच उपचुनावों के तीसरे चरण के दौरान जम्मू संभाग में 79.47 प्रतिशत और कश्मीर संभाग में 59.63 प्रतिशत मतदान हुआ।

वहीं अगर रिक्त सरपंच निर्वाचन क्षेत्रों की बात की जाए तो 66 निर्वाचन क्षेत्रों में तीसरे चरण के दौरान 49.25 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। इनमें से कुल 80913 में से 39852 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। इनमें 21307 पुरुष और 18545 महिलाएं शामिल रहीं।

इसके अलावा, जम्मू संभाग में 74.74 प्रतिशत मतदान हुआ, वहीं कश्मीर संभाग में 42.57 प्रतिशत मतदान हुआ।

जम्मू संभाग में किश्तवाड़ जिले में पंच उपचुनावों के लिए सबसे अधिक 89.55 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इसके बाद राजौरी में 88.29 प्रतिशत और रामबन में 86.10 प्रतिशत मतदान हुआ।

इसी तरह से कश्मीर संभाग के कुलगाम जिले में सबसे अधिक 77.11 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इसके बाद बड़गाम में 74.21 प्रतिशत और बांदीपोरा में 64.88 प्रतिशत मतदान हुआ। (आईएएनएस)


04-Dec-2020 8:37 PM 15

दिल्ली, 04 दिसम्बर | रजनीकांत की राजनीति में रूचि के बारे में तमिलनाडु के लोगों को पहली बार साल 1996 में पता चला. उस समय जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री थीं. उनके दत्तक पुत्र वीएन सुधाकरण के विवाह समारोह ने देश भर में बेहिसाब ख़र्च की वजह से सुर्ख़ियां बटोरी थीं.

रजनीकांत ने तब खुलकर कहा था कि सरकार में बहुत भ्रष्टाचार है और इस तरह की सरकार को सत्ता में नहीं होना चाहिए.

वैसे साल 1995 में रजनीकांत ने पहली बार किसी राजनीतिक मुद्दे पर अपनी राय ज़ाहिर की थी. एमजीआर कड़गम पार्टी के नेता आरएम वीरप्पन की मौजूदगी में एक समारोह में रजनीकांत ने तमिलनाडु में 'बम-कल्चर' के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में फैले 'बम-कल्चर' की ज़िम्मेदारी राज्य की सरकार को लेनी चाहिए.
साल 1996 में मूपनार ने कांग्रेस छोड़कर तमिल मनीला कांग्रेस नामक पार्टी बनाई. उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी जिसकी बागडोर पीवी नरसिंह राव के हाथ में थी. कांग्रेस पार्टी तमिलनाडु में एआईएडीएमके के साथ गठजोड़ करना चाहती थी. इसके विरोध में मूपनार ने अपनी तमिल मनीला कांग्रेस पार्टी बनाई, जिसने डीएमके के साथ हाथ मिलाया.

चुनाव में समर्थन

रजनीकांत ने इस गठजोड़ का खुलकर समर्थन किया. ये पहला मौक़ा था जब रजनीकांत ने किसी पार्टी के लिए अपने समर्थन का एलान किया.

एआईएडीएमके की सरकार के प्रति उस समय लोगों के मन में काफ़ी असंतोष था. इससे डीएमके को राज्य के चुनाव में शानदार जीत मिली और वो सत्ता में आई. कहा जाता है कि इस जीत में रजनीकांत के समर्थन ने अहम भूमिका अदा की थी. उनके फ़ैंस ने चुनावों के दौरान डीएमके गठबंधन और मूपनार पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में काम किया.

साल 1998 में रजनीकांत ने संसदीय चुनावों के दौरान डीएमके गठबंधन का समर्थन किया. लेकिन उन्हें पहले जैसा समर्थन नहीं मिला. एआईएडीएमके ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की. इसके बाद धीरे-धीरे रजनीकांत ने सत्तारूढ़ एआईएडीएमके पार्टी की आलोचना करना कम कर दिया.

फिर जब साल 2002 में कावेरी जल विवाद चरम पर था, कुछ राजनीतिक दलों ने कहा कि रजनीकांत कर्नाटक से आते हैं, इसलिए इस मामले पर अपनी राय ज़ाहिर नहीं करते हैं. इस आरोप के बाद रजनीकांत ने तमिलनाडु फ़िल्म इंडस्ट्री की ओर से आयोजित भूख-हड़ताल में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और एलान किया कि उनका समर्थन तमिलनाडु के लोगों के लिए है. उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी ओर से एक करोड़ रुपये दान देने की घोषणा भी की थी.

साल 2004 में जब बाबा फ़िल्म बनी, उसमें रजनीकांत के धार्मिक नेतृत्व और पॉलिटिक्स में एंट्री को दिखाया गया. लेकिन डॉक्टर रामदॉस के नेतृत्व में पीएमके पार्टी ने इस फ़िल्म की स्क्रीनिंग में बाधा डाली.

कई जगहों पर पार्टी समर्थकों और रजनीकांत के फै़ंस के बीच झड़पें हुईं. तब रजनीकांत ने चेन्नई के राघवेंद्र मैरिज हॉल में अपने फ़ैंस के साथ बैठक की और पीएमके के ख़िलाफ़ वोट डालने के लिए कहा. लेकिन इसका असर नहीं हुआ और पीएमके उम्मीदवार चुनाव में जीत गए.

राजनीतिक राय से दूरी बनाई

यही वो समय था जब रजनीकांत ने राजनीति में दख़ल और राजनीतिक राय ज़ाहिर करने से बचना शुरू कर दिया. हालांकि साल 2004, 2006 और साल 2008 की हर प्रेस मीट में उनसे राजनीतिक हालात के बारे में पूछा गया. लेकिन उन्होंने कभी सीधा जबाव नहीं दिया और कहा- "समय आने दीजिए, समय ही हमें जबाव देगा." इससे लोगों में उम्मीदें जगीं और अगले छह साल इसी तरह बीत गए.

फिर साल 2014 में नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस ने संसदीय चुनावों में नरेंद्र मोदी का नाम प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ाया. मोदी ने चेन्नई में रजनीकांत के आवास पर मुलाक़ात की.

मुलाक़ात के बाद रजनीकांत ने कहा, "मोदी एक ग्रेट लीडर और अच्छे प्रशासक हैं. मैं उन्हें चुनाव में सफल होने के लिए शुभकामना देता हूं." हालांकि रजनीकांत ने भारतीय जनता पार्टी का नाम नहीं लिया.

साल 2014 में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता को जब आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में 14 दिन के लिए जेल भेजा गया, इस बारे में उनकी राय पूछे जाने पर रजनीकांत ने बस एक शब्द कहा और वो शब्द था- "हैप्पी".

करुणानिधि और जयललिता का निधन

पांच दिसंबर 2017 को बीमारी की वजह से जयललिता का निधन हो गया. करुणानिधि ख़राब सेहत की वजह से सक्रिय राजनीति से दूर होने लगे और सात अगस्त 2018 को उनका भी निधन हो गया.
रजनीकांत ने 31 दिसंबर 2017 को करुणानिधि से मुलाक़ात की थी और प्रेस को बताया था कि उन्होंने राजनीति में आने के बारे में करुणानिधि से चर्चा की है. उन्होंने ये भी बताया था कि करुणानिधि ने उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी हैं. तब इससे संकेत मिला था कि रजनीकांत सक्रिय राजनीति में आ रहे हैं, लेकिन फिर बात आई-गई हो गई.

साल 2019 में जब रजनीकांत से उनके राजनीतिक समर्थन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो किसी का समर्थन नहीं कर रहे हैं और उनका फ़ैन क्लब इस चुनाव में नहीं लड़ेगा. उन्होंने ये भी कहा कि वो साल 2021 में तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. लेकिन उसके बाद उनके इर्द-गिर्द पार्टी की कोई गतिविधि नज़र नहीं आई और राजनीतिक दलों ने उनकी आलोचना भी की.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ईके पलानीसामी, राज्य के मंत्री, बीजेपी नेता और डीएमके नेता भी अक्सर ये कहते रहे, "पहले उन्हें पार्टी तो बनाने दीजिए फिर हम इस बारे में बात करेंगे. पार्टी बनाने का हक़ हर किसी को है."

तमिलनाडु के कुछ मंत्री तो यहां तक कहते थे कि ये वैसा ही है जैसे कि बच्चे के पैदा होने से पहले ही उसका नाम रख दिया जाए.

साल 1991 से राजनीति में रुचि का रजनीकांत का जो सफ़र शुरू हुआ, वो वर्ष 1996 में चुनावी राजनीति में दिलचस्पी तक जा पहुंचा. लेकिन उसे परिपक्व और आधिकारिक घोषणा तक पहुंचने में साल 2020 तक का वक़्त लग गया.(bbc.com/hindi)


04-Dec-2020 5:58 PM 19

अमरावती, 04 दिसंबर | आंध्र प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पांचवें दिन यानी शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्षी तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के छह विधायकों को उपद्रव मचाने पर निलंबित कर दिया। सत्र के अंतिम दिन निम्मला रामानायडू, बुचैया चौधरी, जोगेश्वर राव, सत्य प्रसाद, अशोक और रामाराजू को निलंबित कर दिया गया, जिसके बाद विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू भी सदन से वॉक आउट कर गए।

सदस्यों के डेयरी उद्योग पर चर्चा करने के साथ-साथ सत्ताधारी और विपक्षी विधायकों में गर्मागर्मी के कारण उपद्रव शुरू हो गया।

मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने कहा कि उन्होंने डेयरी उद्योग पर चर्चा के दौरान नायडू के मौजूद रहने की उम्मीद की थी, लेकिन उन्होंने दुर्भाग्य से अपनी पार्टी के सदस्यों को स्पीकर के मंच पर चढ़ने और स्वार्थी उद्देश्यों के लिए अराजकता पैदा करने के लिए चुना।

रेड्डी ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता ने मीडिया साक्षात्कार दिए थे और सदन से बाहर निकलने के बाद झूठ फैला रहे हैं।

स्पीकर तम्मीनेनी सीताराम ने विधानसभा में विपक्षी सांसदों के आचरण पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "हर दिन, आप सदन के कामकाज को रोक रहे हैं। मैं हर दिन आपको निलंबित करने के लिए दुखी हूं। उनके व्यवहार को देखते हुए, मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।"

आईएएनएस


04-Dec-2020 1:48 PM 16

मुंबई, 4 दिसंबर। महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. 6 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी को सिर्फ एक सीट पर जीत मिल सकी है जबकि उसके प्रतिद्वंद्वी शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन ने 4 सीट पर जीत दर्ज की है. एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में जाते दिख रही है. इस बीच, महाराष्ट्र बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा कि विधान परिषद चुनाव के नतीजे हमारी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे. 

फडणवीस ने समाचार एंजेंसी एएनआई से कहा, "महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव का परिणाम हमारे उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा. हम ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन हम सिर्फ एक सीट जीत सके. हमने महा विकास अघाड़ी (शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन) की ताकत को आकलन करने में गलती की."

बीजेपी अपने कथित गढ़ स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में हार गई. उसकी सबसे बड़ी हार नागपुर सीट पर हुई. यहां बीजेपी की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है. पूर्व में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधर राव फडणवीस  इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. गडकरी 1989 में पहली बार इस क्षेत्र से जीते थे और 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ने से पहले चार और जीत दर्ज की थी. 

पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस समेत महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल समेत बीजेपी नेताओं ने पुणे में भी प्रचार किया था, जहां विरोधी गठबंधन ने जीत दर्ज की. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार ने औरंगाबाद और पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की है. (hkhabar.ndtv.com)


03-Dec-2020 8:37 PM 32

चेन्नई, 3 दिसम्बर : जाने माने अभिनेता रजनीकांत के राजनीति में उतरने की खबरों का तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने स्वागत किया है. वहीं उन्होंने रजनीकांत की पार्टी के साथ गठबंधन करने की मंशा भी जाहिर की है. ओ पन्नीरसेल्वम ने गुरुवार को कहा, "हम महान अभिनेता रजनीकांत के राजनीति में उतरने के फैसले का स्वागत करते हैं. राजनीति में कुछ भी हो सकता है. अगर ऐसा कोई चांस होता है तो उनकी पार्टी के साथ गठबंधन भी बन सकता है."

बता दें जाने माने अभिनेता रजनीकांत ने गुरुवार को कहा कि वह जनवरी 2021 में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाएंगे. पार्टी बनाने की घोषणा करके रजनीकांत ने इस संबंध में वर्षों से लगाए जा रहे कयासों पर विराम लगा दिया है. रजनीकांत ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी 2021 विधानसभा चुनाव लड़ेगी और जीत दर्ज करेगी. तमिलनाडु में अगले वर्ष अप्रैल-मई के बीच विधानसभा चुनाव होने हैं. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनका दल ‘‘जनता के भारी सहयोग से चुनाव जीतेगा.’’

रजनीकांत में अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘‘आने वाले विधानसभा चुनाव में ,यकीनन आध्यात्मिक राजनीति का उद्भव होगा. एक चमत्कार होगा.’’ उन्होंने कहा कि इस संबंध में घोषणा 31दिसंबर को की जाएगी.
डॉक्टरों ने राजनीति में प्रवेश पर लगाई थी रोक
रजनीकांत ने सोमवार को ‘रजनी मक्कल मंद्रम’ (आरएमएम) के जिला सचिवों से मुलाकात कर राजनीति में प्रवेश की संभावना पर चर्चा की थी. पिछले महीने रजनीकांत ने कहा था कि 2016 में अमेरिका में उनका गुर्दा प्रतिरोपण हो चुका है और कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर चिकित्सक राजनीति में उनके प्रवेश के खिलाफ हैं.

उल्लेखनीय है कि मंद्रम के गठन को तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टी में तब्दील करने के लिए मददगार कदम के तौर पर देखा गया था. (hindi.news18.com)


03-Dec-2020 4:44 PM 42

चेन्नई, 3 दिसंबर| अभिनेता रजनीकांत ने गुरुवार को कहा कि तमिलनाडु के भाग्य को बदलने का समय आ गया है। राज्य में राजनीतिक और सरकारी बदलाव महत्वपूर्ण है और यह समय की मजबूरी है। अभिनेता ने सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक सरकार के साथ-साथ प्रमुख विपक्षी दल द्रमुक के खिलाफ भी अपना चुनावी बिगुल फूंक दिया।

रजनीकांत ने कहा कि वह जनवरी 2021 में अपनी राजनीतिक पार्टी को सामने लाएंगे और इस संबंध में एक घोषणा 31 दिसंबर, 2020 को की जाएगी।

रजनीकांत ने यहां संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, "तमिलनाडु की किस्मत बदलने का समय आ गया है। राज्य में राजनीतिक और सरकार परिवर्तन महत्वपूर्ण है। यह निश्चित रूप से बदल जाएगा। राजनीतिक परिवर्तन महत्वपूर्ण है और समय की मजबूरी है। यदि अभी नहीं, तो यह कभी संभव नहीं होगा। सब कुछ बदलना होगा। हम सब कुछ बदल देंगे।"

उन्होंने बदलाव लाने के लिए सभी से उनका समर्थन करने की अपील की।

उन्होंने कहा, "मैं बदलाव में सिर्फ एक छोटा सा इंस्ट्रमेंट हूं। अगर मैं जीतता हूं तो यह लोगों की जीत होगी।"

उन्होंने कहा कि 2017 में उन्होंने सभी 234 विधानसभा सीटों पर राजनीति में उतरने और चुनाव लड़ने की घोषणा की थी।

उनके अनुसार, हालांकि डॉक्टरों ने रैलियां आयोजित नहीं करने की सलाह दी थी, अगर उनका जीवन लोगों की भलाई के लिए चला जाता है, तो वे इसके बारे में चिंतित नहीं हैं।

रजनीकांत ने यह भी कहा कि उनकी फिल्म अन्नाथे की 40 प्रतिशत शूटिंग लंबित है, जिसे वह पूरा करेंगे। (आईएएनएस)


02-Dec-2020 6:31 PM 19

नई दिल्ली, 2 दिसम्बर | दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुताबिक इन दिनों केंद्र सरकार उनसे काफी नाराज है। इस नाराजगी का कारण है दिल्ली आए किसानों को बंद करने के लिए दिल्ली के स्टेडियमों को जेल बनाने की इजाजत न देना। इसके साथ ही अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से मांग की है कि एमएसपी की गारंटी को कानून में डाला जाए। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, "जब से मैंने दिल्ली के 9 स्टेडियम को जेल बनाने से रोका है, तब से केंद्र की भाजपा सरकार मुझसे ज्यादा नाराज है। दिल्ली आने पर किसानों को इन स्टेडियमों में डालने की योजना थी। लेकिन हमने यह इजाजत नहीं दी। मेरी केंद्र सरकार से अपील है कि किसानों की सभी मांगे मानी जाएं और एमएसपी की गारंटी को कानून में डाला जाए।"

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, "पूरा देश देख रहा है कि देश का किसान ठंड की रात में आसमान के नीचे सो रहा है। कोई भी देशभक्त यह देखकर चैन की नींद नहीं सो सकता है। यह लड़ाई सिर्फ किसान भाइयों की नहीं है, बल्कि हम सब की लड़ाई है। जरा सोचिए, जो दो वक्त की रोटी हम खाते हैं, वह हमारे किसानों की मेहनत की उगाई हुई होती है। हम सब को इस लड़ाई में अपने किसानों का साथ देना है।"

केजरीवाल ने बुधवार को कहा कि, "मुझे पता है कि स्टेडियम को जेल बनाने के लिए मुझ पर काफी दबाव आया था। किस-किस के फोन नहीं आए थे, लेकिन जिंदगी में कुछ मौके ऐसे भी आते हैं, जब आप अपने जमीर की सुनते हैं, नतीजे की परवाह नहीं करते हैं।"

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि, "अभी कुछ दिन पहले पंजाब के एक किसान सरदार कुलवंत सिंह दिल्ली की सरहद पर बैठे हुए थे और खबर आई कि उनका 22 साल का जवान बेटा सुखवीर सिंह बॉर्डर पर देश के लिए शहीद हो गया। इस सबके बीच जब कुछ लोग आए दिन किसानों को आतंकवादी बुलाते हैं, देशद्रोही कहते हैं, तो मैं सोचता हूं कि बॉर्डर पर इन जवानों पर क्या बीतती होगी, जिनके किसान मां- बाप को आतंकवादी कहा जा रहा है। आज हम सबको भी तय करना होगा कि हम देश के किसानों के साथ हैं या उन्हें आतंकवादी कहने वालों के साथ हैं।"

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि, "मेरी सभी से अपील है कि किसानों का साथ दें। मेरी सभी आम आदमी पार्टी के लोगों से अपील है कि कोई राजनीति नहीं करनी है। सभी पार्टियों के लोगों के साथ मिलके भारतीय बन कर किसानों की सेवा करनी है।"

--आईएएनएस


02-Dec-2020 6:20 PM 19

चंडीगढ़, 2 दिसंबर | भारत में कोविड-19 वैक्सीन का ट्रायल अंतिम चरण में होने के साथ, मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुधवार को कहा कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा मंजूरी मिलते वह पंजाब में वैक्सीन का पहला डोज लेंगे। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा कोविड स्थिति और वैक्सीन को लॉन्च करने की राज्य की तैयारियों पर चर्चा के लिए एक प्रेजेंटेशन के दौरान वर्चुअल कैबिनेट मीटिंग में की।

मीटिंग में कहा गया कि टीकाकरण के लिए भारत सरकार की रणनीति के अनुरूप, पंजाब स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स, बुजुर्गो की आबादी (50 वर्ष से अधिक आयु) के टीकाकरण को तरजीह देगा।

पंजाब के स्वास्थ्य सचिव हुसन लाल ने कहा कि राज्य में 1.25 लाख सरकारी और निजी स्वास्थ्य कर्मचारियों का डेटा संकलित है, जिनका पहले चरण में टीकाकरण किया जाना है।

उन्होंने कहा कि राज्य की आबादी जो लगभग 3 करोड़ है, इसके 23 प्रतिशत (70 लाख) का टीकाकरण प्राथमिकता पर भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाएगा।

उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा के बाद, राज्य ने कुछ अतिरिक्त कोल्ड चेन उपकरणों के लिए केंद्र से अनुरोध किया है, जिनमें वैक्सीन वैन, डीप फ्रीजर, आइस-लाइनड रेफ्रिजरेटर, कोल्ड बॉक्स, वैक्सीन कैरियर, आइस पैक और स्टेबलाइजर्स शामिल हैं।

आईएएनएस


02-Dec-2020 6:17 PM 22

नई दिल्ली, 2 दिसंबर | किसान आंदोलन और कृषि कानूनों को लेकर अब दिल्ली और पंजाब के मुख्यमंत्री के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री आरोप लगा रहे हैं कि दिल्ली सरकार ने इन कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पास नहीं किया। वहीं अरविंद केजरीवाल का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी के दबाव में हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, "कैप्टन साहब आप मुझ पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। बीजेपी के साथ दोस्ती निभा रहे हैं या फिर कोई दबाव है। क्योंकि आपके परिवार पर ईडी के केस चल रहे हैं। आजकल आपके रिश्तेदारों को ईडी के नोटिस भी आ रहे हैं।"

केजरीवाल ने कहा, "पंजाब के मुख्यमंत्री ने मुझ पर आरोप लगाया है कि दिल्ली में मैंने यह काले कानून पास कर दिए। इतने नाजुक मौके पर भी इस तरह की गिरी हुई राजनीति कैप्टन कैसे कर सकते हैं। यह तो तीनों कानून केंद्र के कानून हैं। जिस दिन राष्ट्रपति के तीनों कानूनों पर दस्तखत हुए थे, उसी दिन ये कानून पूरे देश में लागू हो गए। अब यह किसी राज्य सरकार के ऊपर नहीं है कि उसे लागू करेगा या नहीं। अगर राज्य सरकारों पर होता तो पूरे देशभर से किसान बात करने केंद्र सरकार के पास क्यों आते।"

केजरीवाल ने कहा कि, "जब कैप्टन अमरिंदर सिंह को यह बात पता है तो फिर उन्होंने मुझ पर यह झूठे आरोप क्यों लगा रहे हैं। इसका बहुत बड़ा कारण है, जब से हमने दिल्ली के 9 स्टेडियम को जेल बनाने से रोका है तब से केंद्र की भाजपा सरकार मुझसे बहुत ज्यादा नाराज है। केंद्र सरकार का पूरा प्लान था कि जब किसान दिल्ली आएंगे तो उन्हें स्टेडियम में डाल देंगे। हमने स्टेडियम को जेल बनाने की इजाजत नहीं दी तो वह लोग मुझसे बहुत नाराज हैं। मुझे पता है कि स्टेडियम को जेल बनाने के लिए मुझ पर कितना दबाव आया था। किस किस का फोन नहीं आया।"

केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि, "कैप्टन साहब के पास यह बिल रोकने के कई मौके आए। पंजाब के लोग पूछ रहे हैं कि तब कैप्टन साहब ने इन्हें क्यों नहीं रोका। 2019 में केंद्र सरकार ने यह तीनों काले कानून बनाने के लिए कमेटी बनाई थी। उस कमेटी में कैप्टन साहब थे। कैप्टन साहब पंजाब के लोग आपसे पूछ रहे हैं कि आपने उस कमेटी में इस कानूनों को क्यों नहीं रोका। आपने कमेटी में एक बार भी इन कानूनों का विरोध क्यों नहीं किया। आपने बाहर आकर लोगों को क्यों नहीं बताया कि केंद्र सरकार इतने खतरनाक कानून बनाने जा रही है।"

आईएएनएस


02-Dec-2020 6:13 PM 14

नई दिल्ली, 2 दिसंबर | युवा कांग्रेस को आखिरकार एक साल से अधिक समय के बाद आधिकारिक अध्यक्ष मिल गया है। सोनिया गांधी ने बुधवार को बी.वी. श्रीनिवास को कांग्रेस की युवा इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया। विवादों में घिरे केशव चंद यादव के पद से इस्तीफा देने के बाद श्रीनिवास अंतरिम प्रमुख के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे। हालांकि, यादव ने 7 जुलाई, 2019 को अपने त्यागपत्र में कहा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के कारण वह इस्तीफा दे रहे हैं। यादव उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले हैं।

सूत्रों ने कहा कि श्रीनिवास को महामारी और प्रवासी संकट के दौरान उनकी कड़ी मेहनत के लिए इनाम के तौर पर इस पर नियुक्त किया गया है।

वह कर्नाटक के शिमोगा जिले से हैं। इसी जिले के शिकारीपुरा से मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा विधायक हैं।

दिग्गज कांग्रेस नेता अहमद पटेल के निधन के बाद सोनिया गांधी ने यह पहली बड़ी नियुक्ति की है।

--आईएएनएस


02-Dec-2020 12:22 PM 28

मुंबई, 2 दिसंबर| शिवसेना में शामिल हुईं अभिनेत्री से राजनेता बनी उर्मिला मातोंडकर का कहना है कि अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ शाब्दिक लड़ाई में उलझने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। साथ ही कहा कि कंगना जितनी योग्य हैं, उन्हें उससे कहीं अधिक महत्व दिया गया है। आईएएनएस से बात करते हुए उर्मिला ने आगे कहा कि शिवसेना की महिला शाखा मजबूत थी और वह इसी विंग के साथ काम करना पसंद करेगी।

कुछ समय पहले ही कंगना ने उर्मिला को एक 'सॉफ्ट पोर्न स्टार' कहा था, लेकिन उर्मिला का कहना है कि उसकी नई राजनीतिक स्थिति का मतलब यह नहीं है कि वह वापस नहीं आएंगी। उर्मिला ने कहा, "मैं निश्चित तौर पर उनके साथ शाब्दिक लड़ाई में नहीं पड़ना चाहती। ना मैं उनकी प्रशंसक हूं और मुझे लगता है कि हम सभी ने उनके बारे में बहुत ज्यादा बातें की हैं जबकि वो इतने योग्य नहीं हैं। हमारे देश में सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, इसलिए उन्हें वही करना चाहिए जो वे करना चाहते हैं।"

बता दें कि ये विवाद कुछ महीने पहले तब पैदा हुआ जब एक न्यूज चैनल से बात करते हुए कंगना ने उर्मिला के एक इंटरव्यू पर प्रतिक्रिया दी थी। उर्मिला ने कंगना के उस मकसद पर सवाल उठाया था, जिसमें वे बॉलीवुड के कथित 'ड्रग-माफिया' पर आरोप लगा रहीं थीं। इस पर कंगना ने कहा कि उर्मिला उनके संघर्षों का 'मजाक बना रहीं हैं', साथ ही उन्होंने उर्मिला को 'सॉफ्ट पोर्न स्टार' कहकर खारिज कर दिया था।

उर्मिला ने कहा, "मैं बता दूं कि मैंने उनकी आलोचना करने के लिए इंटरव्यू नहीं दिया था, वह उसका एक हिस्सा था और मुझे लगता है कि हमें इसके बारे में और बात नहीं करनी चाहिए।"

यह पूछे जाने पर कि वह किन मुद्दों पर ध्यान देंगी, इस पर उर्मिला ने कहा, "शिवसेना की महिला शाखा वास्तव में मजबूत है, इसलिए मैं उनके साथ काम करके खुश होउंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए काम करुंगी। देश-दुनिया से लोग अपना करियर बनाने के लिए मुंबई और महाराष्ट्र आते हैं। मुझे लगता है कि इन लड़कियों के माता-पिता उन्हें इस राज्य में बहुत विश्वास के साथ भेजते हैं क्योंकि मुंबई दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों में से एक है। इसलिए मुझे मुंबईकर होने पर गर्व है।"

मंगलवार को ही उर्मिला पार्टी प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हुई हैं। पार्टी में आने से पहले ही उन्हें महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) में नामित कर दिया गया था। (आईएएनएस)


01-Dec-2020 7:36 PM 17

आंध्र प्रदेश, 01 दिसम्बर | सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी को उनके पद से हटाने की माँग करने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के वकील जीएस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपील की थी कि जगनमोहन रेड्डी के बयान की हाईकोर्ट के किसी वरिष्ठ न्यायाधीश या सीबीआई से जाँच के आदेश दिए जाएं.

याचिका में दूसरी अपील थी कि जगनमोहन रेड्डी को उनके पद से हटाने के आदेश दिए जाएं क्योंकि उन्होंने इस कुर्सी पर रहते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज के ख़िलाफ़ा सार्वजनिक रूप से बयान दिया है.

जगनमोहने रेड्डी ने छह अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे को पत्र लिखकर कहा था कि लोकतांत्रिक रुप से चुनी गई उनकी सरकार को अस्थिर करने के लिए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है और सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस एनवी रमन्ना इस मामले में मदद कर रहे हैं.

मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एस के कौल, जस्टिस दिनेश महेश्वरी और जस्टिस हृषिकेश रॉय की बेंच ने कहा कि दूसरी माँग क़ानूनी तौैर पर सही नहीं है और जहां तक पहली माँग का सवाल है, ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता को ख़ुद स्पष्ट नहीं है कि वो क्या चाहते हैं. लेकिन जहां तक मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश के बीच बातचीत को सार्वजनिक करने का मामला है, सुप्रीम कोर्ट की एक दूसरी बेंच इस मामले को देख रही है. इसलिए मौजूदा याचिका को ख़ारिज किया जाता है (बीबीसी) 


01-Dec-2020 5:54 PM 16

दिल्ली, 01 दिसम्बर | कांग्रेस के तमाम सूत्र ख़ामोश हैं. कोई कुछ नहीं बोल रहा. कई वरिष्ठ नेता ऑन रिकार्ड तो दूर, ऑफ़ रिकार्ड बात करने से भी परहेज़ कर रहे हैं. आख़िर ऐसा क्यों है कि सूत्रधारों से भरी पार्टी के तमाम सूत्रों ने फ़िलहाल ख़ामोशी अख़्तियार कर ली है?
सोमवार को राहुल गांधी ने असम और तमिलनाडु के पार्टी नेताओं के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए मीटिंग की. हालांकि ये किसी चुनाव से पहले संगठन की आम आंतरिक बैठक थी. पर अमूमन ऐसी आंतरिक बैठकों में क्या कुछ हुआ, किसने किसको क्या बोला, किसका रुख़ कैसा रहा, किसने किसको टोका, किसने किसे क्या समझाने की कोशिश की, कौन किसके साथ खड़ा नज़र आया, किसने किसको चुप रहने का इशारा किया, किसने किसकी बात बीच में काट दी, किसने किसका बचाव किया, किसने किसको निशाने पर लिया... ऐसी कई बातें सूत्रों के हवाले से छनकर आने की कांग्रेस की परंपरा रही है. कई का खंडन आता था, कई का नहीं. और कई को खंडन के लायक भी नहीं माना जाता था.

तो क्या ये परंपरा अब ख़त्म होने जा रही है? या इस पर तात्कालिक विराम भर लगा है? जो भी है, पार्टी के एक नेता आपसी बातचीत में इस बात की तस्दीक करते हैं कि बदली हुई परिस्थिति में सभी एक-दूसरे को नए सिरे से आंकने की कोशिश में हैं.

दरअसल अहमद पटेल की कोरोना वायरस की चपेट में आकर हुई असामयिक मृत्यु ने पार्टी नेताओं को कई स्तर पर झकझोर दिया है. भावनात्मक स्तर पर भी और राजनीतिक स्तर पर भी. पटेल के जाने के बाद पार्टी में एक शून्य पैदा हुआ है. यही शून्य पार्टी के भीतर एक तूफ़ान ला सकता है. ख़ामोशी उसकी पूर्वपीठिका हो सकती है. 

अहमद पटेल की दुखद मौत के बाद पार्टी फ़िलहाल मातम में है. इस बीच ऐसी कोई बड़ी राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं हुई है जिससे पार्टी के भीतर की धार का पता चले. वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा का एक ट्वीट ज़रूर आया जिसमें वे प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ करते नज़र आए. इससे ये क़यास लगाया जाने लगा कि वे बीजेपी की तरफ़ क़दम बढ़ा सकते हैं. लेकिन फिर आनन्द शर्मा ने स्वयं उस ट्वीट को डिलीट कर दूसरा ट्वीट किया. लिखा कि पहले ट्रवीट में वाक्य विन्यास संबंधी कुछ ग़लती हो गई थी सो अर्थ का अनर्थ हो गया. आनन्द शर्मा, ग़ुलाब नबी आज़ाद के साथ उन 23 चर्चित नामों में एक हैं जिन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी. पार्टी नेतृत्व को लेकर कुछ सवाल पूछे थे, सलाह दी थी और आगे की राह जाननी चाही थी. उसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में उन नेताओं को कुछ जवाब भी मिला था. अहमद पटेल ने भी अपने शब्दों में समझाया था. वे न सिर्फ़ गांधी परिवार और उसके नेतृत्व की ढ़ाल बनकर सामने आए बल्कि अंदरूनी असंतोष पर मिट्टी डालकर आगे की राह भी दिखाने की कोशिश की थी.

अब अहमद पटेल नहीं हैं. वे सोनिया गांधी के ऐसे सिपहसालार थे जो पार्टी के असंतुष्टों की सुनते भी थे, उनकी बात आलाकमान के सामने रखते भी थे और दोनो पक्षों को समझाते भी थे. अब वो संबल ख़त्म हो गया है. तो अब क्या? इस सवाल पर भी तमाम सूत्र ख़ामोश हैं.

दरअसल, अहमद पटेल की असामयिक मृत्यु ने पार्टी के सामने दो स्थितियां पैदा की हैं. या तो तमाम असंतुष्ट अब गांधी परिवार की सर्वसत्ता को स्वीकार लें या फिर अपनी अपनी राह लें. क्योंकि सबों को एक सूत्र में पिरोना वाले शख़्स का साया उठ गया है. अगर किसी को राहुल गांधी के नेतृत्व से शिकायत है तो क्या अब वे सीधे सोनिया गांधी के पास जाएंगे? निश्चित रूप से नहीं.

तो समय की ज़रूरत है ख़ामोशी. असंतोष के पुराने रुख़ों और बयानों को नया धार देना अभी मुनासिब नहीं. जिन बातों को पार्टी नेतृत्व द्वारा पहले ‘दिल पर नहीं लिया गया' था, वह जख़्म कुरद सकता है. उस ज़ख्म को जड़ से मिटाने का फ़ैसला लिया जा सकता है. इसलिए पहले से चढ़ाकर रखी गई प्रत्यंचा को अभी ढ़ीला छोड़ना ही बुद्धिमानी है.

कुल मिलाकर ये कि अब असंतुष्ट कांग्रेसजन अलग राग अलापना बंद कर दें. अब जो फ़ैसला लेना है वह राहुल गांधी को ही लेना है. पहले कई सूत्र दावा करते रहे हैं कि तमाम फ़ैसले वही लेते हैं. सोनिया गांधी की अंतरिम अध्यक्षता तो एक ढाल मात्र रहा है. अब सोनिया गांधी से सबसे विश्वस्त सिपहसालार और राजनीतिक सलाहकार के न होने से कई फ़ैसलों में उनकी सलाह की कमी नज़र आ सकती है. जिन्होंने राहुल गांधी को साधने की कोशिश की थी, वे ख़ुद सध सकते हैं. इसलिए अब उनके सामने की राह यही है कि वे किसी भी तरह के बग़ावती तेवर को छोड़ें और गांधी परिवार की छत्रछाया में एकजुटता का भरोसा दिलाने की कोशिश में जुट जाएं. 

हां, जिन असंतुष्टों के पास अपना जनाधार है वह तब भी अलग राह लेने की सोच सकते हैं. मतलब जिन नेताओं ने पहले कभी बड़ी चुनावी क़ामयाबी हासिल की हो और जिन नेताओं ने किसी राज्य में सत्ता चलायी हो, उनके तेवर अलग हो सकते हैं. वे गांधी परिवार की छत्रछाया से निकलकर अलग मोर्चा बनाने की सोच सकते हैं. लेकिन जो ‘पूरी तरह से राज्यसभा धारी' हैं उनके लिए फ़ैसला मुश्किल होगा. ख़ासतौर पर तब, जब राज्यसभा जाने का कोई वैकल्पिक दरवाज़ा खुला न हो. किसी दूसरी पार्टी के लिए उनकी उपादेयता न हो. और अपनी पार्टी में एकजुट दबाव समूह बनाए रखने के लिए कोई नेतृत्व न हो. ऐसे में मन मसोसकर रह जाने के अलावा कोई चारा नहीं.

49 साल कांग्रेस को देने वाले जनार्दन द्विवेदी, अहमद पटेल के चले जाने पर कहते हैं कि  “यह अत्यंत दुखद और असामयिक है. अब कांग्रेस को दूसरा अहमद पटेल नहीं मिलेगा.“ उनकी कही दूसरी पंक्ति बहुत कुछ कह जाती है. न तो असंतुष्टों को ‘कारगर तरीक़े से' कंधा देने वाला कोई मिलेगा और न ही गांधी परिवार के फ़ैसलों में ‘एक हद तक' उनको आत्मसात कर चलने को प्रेरित करने वाला कोई मिलेगा. कुल मिलाकर ये कि अब पूरा दारोमदार गांधी के नेतृत्व पर है. वो भी दो चुनावों में पार्टी का चेहरा बन चुके राहुल गांधी के नेतृत्व पर. अब वे अपनी उपलब्धियों और नाक़ामियों के ख़ुद ज़िम्मेदार होंगे.

पार्टी के कुछ सूत्र इस पर सहमति जताते हैं पर ख़ामोशी अख़्तियार रखते हैं.(khabar.ndtv.com)


01-Dec-2020 4:23 PM 19

मुंबई, 1 दिसंबर। एक्ट्रेस से पॉलिटिशियन बनी उर्मिला मातोंडकर ने तकरीबन 20 महीने बाद राजनीति की दूसरी पारी की शुरुआत कर दी है. उर्मिला मंगलवार को शिवसेना में शामिल हो गईं. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे , युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले यानी 27 मार्च 2019 को कांग्रेस में शामिल हुई उर्मिला ने मुंबई नार्थ सीट से चुनाव लड़ा था. हालांकि, कड़ी मेहनत के बावजूद एक्ट्रेस चुनाव हार गईं. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए 10 सितंबर 2019 को पार्टी छोड़ दी थी.

राज्यपाल बीएस कोश्यारी के कोटे से नामांकन के लिए 11 अन्य लोगों के नाम भी तीन पार्टी महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार ने भेजे हैं. राज्यपाल को अभी 12 नामों की सूची को मंजूरी देनी है. उर्मिला के शिवसेना में शामिल होने की अटकलें कई महीनों से लगाई जा रही थीं, लेकिन इसकी पुष्टि अब हुई है.


शिवसेना को क्या फायदा?
जानकारों के मुताबिक, शिवसेना उर्मिला मातोंडकर के रूप में हिंदी और अंग्रेजी वोटरों के बीच ऐसी सशक्‍त महिला की छवि देखती है जो एक अच्‍छी वक्‍ता होने के साथ राष्‍ट्रीय स्‍तर पर पार्टी की बात रखने में सहज हो. उर्मिला मराठी वोटरों के भी उतने ही करीब हैं. भविष्‍य में उर्मिला को पार्टी प्रवक्‍ता भी बनाया जा सकता है.

कांग्रेस को भी नहीं है ऐतराज
शिवसेना के इस फैसले पर कांग्रेस ने भी कोई ऐतराज नहीं जताया. इस कदम के बचाव में शिवसेना ने कहा कि उर्मिला कांग्रेस से इस्‍तीफा दे चुकी हैं. कांग्रेस प्रवक्‍ता सचिन सावंत ने भी कहा, 'उर्मिला पिछले साल पार्टी छोड़ चुकी हैं.'

इन फिल्मों से मिली शोहरत
एक्ट्रेस के तौर पर उर्मिल मातोंडकर पहली बार 1991 की फिल्म 'नरसिम्हा' में दिखी थीं. इसके बाद 1995 में आई रंगीला फिल्म से उनको शोहरत मिली. 1997 में जुदाई और 1998 में सत्या में उर्मिला के अभिनय को बहुत सराहा गया. इन तीनों फिल्मों को फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिये नामित किया गया था.

2016 में हुई थी शादी
उर्मिला मातोंडकर ने 2016 में अपने से 9 साल छोटे कश्मीरी बिजनेसमैन मोहसिन अख्तर मीर से शादी की थी. मोहसिन जोया अख्तर के डायरेक्शन में बनी फिल्म 'लक बाय चांस' में काम कर चुके हैं. इसमें वे फरहान अख्तर के साथ मॉडलिंग करते दिखाई दिए थे. (news18.com)


29-Nov-2020 8:19 PM 26

दिल्ली, 29 नवम्बर | हैदराबाद निकाय चुनाव जीतकर तेलंगाना में सियासी बढ़त हासिल करने की कोशिश में बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है. गृह मंत्री अमित शाह ने भी रविवार को रोड शो करके बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की. रोड शो से पहले शाह ने भाग्यलक्ष्मी मंदिर में पूजा भी की. रोड शो के बाद अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह भरोसा जताया कि बीजेपी हैदराबाद निकाय चुनाव में बहुमत हासिल करेगी. उन्होंने कहा कि हैदराबाद का अगला मेयर बीजेपी से होगा.

अमित शाह ने कहा कि मैं बीजेपी को अपार समर्थन दिखाने के लिए हैदराबाद के लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं. मैं रोड शो के बाद आश्वस्त हूं कि इस बार बीजेपी अपनी सीटें बढ़ाने या अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए नहीं लड़ रही है, लेकिन इस बार हैदराबाद के मेयर हमारी पार्टी से होंगे.

अमित शाह ने कहा कि हैदराबाद में जिस प्रकार का कॉरपोरेशन टीआरएस और मजलिस के नेतृत्व में चला है, वो हैदराबाद को विश्व का आईटी हब बनाने में सबसे बड़ा रोड़ा है. बारिश में शहर में पानी भरने से करीब 60 लाख लोग परेशान हुए. मजलिस के इशारों पर अवैध निर्माण होता है, इससे पानी की निकासी रुकती है.

अमित शाह ने कहा कि मैं हैदराबाद की जनता को विश्वास दिलाता हूं कि एक बार बीजेपी को मौका दीजिए, हम सारे अवैध निर्माण का हटाकर पानी की निकासी सुचारू करेंगे. अमित शाह ने कहा कि आईटी सेक्टर में निवेश से हैदराबाद को बहुत फायदा हो रहा है. पीएम मोदी ने युवाओं के लिए बहुत सारे अवसर पैदा किए हैं और यह विदेशी निवेशकों द्वारा भारत में दिखाए गए विश्वास को दर्शाता है.

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी ने 'वर्क फ्रॉम होम' का रास्ता खोल दिया है. हैदराबाद में काम करने वाले आईटी पेशेवरों को इस कदम से सबसे अधिक फायदा होने वाला है. अमित शाह ने टीआरएस और असुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि केसीआर और मजलिस ने 100 दिन की योजना का वादा किया था, इसका हिसाब हैदराबाद की जनता मांगती है. 5 साल में कुछ भी किया हो तो यहां की जनता के सामने रखिए. सिटिजन चार्टर का वादा किया था, उसका क्या हुआ?

हैदराबाद को निजाम संस्कृति से करेंगे मुक्त

अमित शाह ने कहा कि हम हैदराबाद को नवाब, निज़ाम संस्कृति से मुक्त करने और यहां एक मिनी-इंडिया बनाने जा रहे हैं. हम हैदराबाद को एक आधुनिक शहर में बनाना चाहते हैं, जो निज़ाम की संस्कृति से मुक्त हो.

रोहिंग्या पर ओवैसी को दिया जवाब

गृह मंत्री ने रोहिंग्या के मुद्दे पर ओवैसी को निशाने पर लिया. अमित शाह ने कहा कि ओवैसी लिखकर दें, रोहिंग्या को बाहर निकाला जाएगा. लेकिन जब कानून लाते हैं तो संसद में लोग हल्ला करने लगते हैं. उन्होंने कहा कि रोहिंग्या पर जब वह कार्रवाई करते हैं तो ये लोग (विपक्षी दल) शोर मचाने लगते हैं. ओवैसी एक बार लिखकर दें कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या को निकाल दें, फिर मैं कुछ करता हूं. असल में ओवैसी ने कहा था कि अगर हैदराबाद अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या रहते हैं तो अमित शाह कार्रवाई क्यों नहीं करते. ओवैसी की इसी टिप्पणी का अमित शाह ने जवाब दिया

बता दें कि हैदराबाद निकाय के 150 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए 1 दिसंबर को मतदान होंगे, जबकि मतगणना 4 दिसंबर को होगी. अमित शाह ने हैदराबाद निकाय चुनाव के लिए प्रचार के आखिरी दिन यह रोड शो किया. अमित शाह हैदरबाद नगर निगम चुनाव (GHMC) के चुनाव लिए सिकंदराबाद में रोड शो किया. इसे देखते हुए बीजेपी ने टीआरएस से नगर पालिका की सत्ता हासिल करने के लिए वोटिंग से पहले शुक्रवार को शहर भर में सक्रिय रूप से प्रचार किया था, जहां यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रोड शो किया था.

 का न होकर प्रधानमंत्री का हो गया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने इस चुनाव में इतने नेताओं को बुलाया है, अब बस डोनाल्ड ट्रंप का आना ही बाकी रह गया है. वह भी आ जाएं तो भी कुछ नहीं होगा. क्योंकि उनका भी हाथ थामकर पीएम मोदी ने कहा था कि अबकी बार ट्रंप सरकार लेकिन वह भी नहीं बचे और गड्ढे में गिर गए.

क्यों अहम है हैदराबाद

असल में, हैदराबाद निकाय चुनाव फिलहाल, राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया है. इस पर देश भर की निगाहें हैं. ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव को 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट भी माना जा रहा है. लिहाजा, बीजेपी इस चुनाव को हैदराबाद में अपनी मौजूदगी कायम करने और तेलंगाना में सियासी आधार बढ़ाने के मौके के तौर पर देख रही है. 
बता दें कि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम देश के सबसे बड़े नगर निगमों में से एक है. यह नगर निगम चार जिलों को कवर करता है जिनमें हैदराबाद, रंगारेड्डी, मेडचल-मलकजगिरी और संगारेड्डी आते हैं. इस पूरे इलाके में 24 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं और तेलंगाना के 5 लोकससभा सीटें आती हैं.(aajtak.in)


29-Nov-2020 8:03 PM 32

नई दिल्ली, 29 नवम्बर | पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से आए हजारों किसान रविवार को भी सिंधु और टीकरी बॉर्डर पर जबरदस्त प्रदर्शन  कर रहे हैं. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा आग्रह किए जाने के बावजूद किसान बॉर्डर से टस से मस होने के लिए तैयार नहीं है. रविवार को किसान संगठनों ने फैसला किया है कि बुराड़ी पहुंचे किसान भी वापस सिंधु बॉर्डर लौटेंगे. इसी बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर  ने चौथी बार किसानों से बातचीत का प्रस्ताव भेजा है.

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक तोमर ने कहा, 'सरकार ने चौथी बार 3 दिसंबर को मिलने का प्रस्ताव दिया है. इसके लिए पहले से ही बातचीत चल रही है, किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि सरकार इसके लिए तैयार नहीं है. सरकार बातचीत के लिए तैयार है, किसान यूनियनों को इसके लिए माहौल बनाना चाहिए. उन्हें आंदोलन छोड़ना चाहिए और वार्ता का चयन करना चाहिए.'

Govt has proposed to meet on Dec 3 for fourth time. So, talks are already going on, nobody should think govt isn't ready for it. Govt is open for talks,farmers' unions should create atmosphere for it. They should leave agitation & choose talks:Union Agriculture Min Narendra Tomar pic.twitter.com/Peo8J4X2D2

— ANI (@ANI) November 29, 2020

सरकार की शर्त को बताया अपमानजनक

दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के नेता बलदेव सिंह सिरसा ने कहा- 'सरकार ने यह शर्त रखी थी कि हम हाईवे खाली कर बुराड़ी जाएं. शर्त अपमानजनक है. हम बुराड़ी मैदान में नहीं जाएंगे, क्योंकि वह ओपन जेल है. इसका सबूत भी है हमारे पास.' उत्तराखंड के तेजिंदर सिंह विर्क की अगुआई में किसान दिल्ली के जंतर-मंतर जाना चाहते थे. दिल्ली के प्रशासन और पुलिस ने उनके साथ धोखा किया. उन्हें जंतर-मंतर न ले जाकर बुराड़ी पार्क में कैद कर दिया.

बता दें कि दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर किसानों के हुजूम को देखते हुए भारी संख्या में सिक्योरिटी फोर्स को तैनात किया गया है. कई दिनों से जारी आंदोलन में लगातार किसानों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. किसानों के इस प्रदर्शन के कारण दिल्ली के लोगों को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.(hindi.news18.com)


29-Nov-2020 7:48 PM 25

चेन्नई ,29 नवम्बर | अगले साल तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव  होने हैं. ऐसे में साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत ने राजनीति में अपनी एंट्री को लेकर बड़ा बयान दिया है. रजनीकांत सोमवार को यानी कल अपनी पार्टी रजनी मक्कल मंडरम के जिला सचिवों से मुलाकात करने जा रहे हैं. खास बात है कि इस मुलाकात में यह तय किया जाएगा कि रजनी आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे या नहीं. हालांकि, रजनी की टीम के सूत्रों ने बताया है कि अब तक साफ नहीं है कि यह मीटिंग ऑनलाइन या प्रत्यक्ष रूप से होगी.

रजनीकांत ने कहा, 'मैं रजनी मक्कल मंडरम से चर्चा करूंगा और सही समय आने पर अपने राजनीतिक मत की घोषणा करूंगा.' खास बात यह है कि रजनी बीते दो सालों से राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय बने हुए हैं, लेकिन अभी तक उनकी राजनीति में आधिकारिक एंट्री नहीं हुई है. बीते साल साउथ के एक और दिग्गज एक्टर कमल हासन और रजनी ने साथ में काम करने की इच्छा जताई थी. जिसके बाद दोनों की पार्टियों में गठबंधन की खबरें सामने आने लगी थीं.

कुछ समय पहले लैटर आया था सामने

बीते महीने रजनीकांत के नाम से एक पत्र सामने आया था. जिसमें कहा गया था कि रजनी की राजनीति में एंट्री टल सकती है. पत्र में बताया गया था कि डॉक्टर महामारी के दौरान अभियान और रजनी के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं. हालांकि, रजनी ने यह साफ किया है कि पत्र उनका नहीं था, लेकिन डॉक्टर की सलाह सही है. गौरतलब है कि तमिलनाडु के वैल्लूर जिले में अभिनेता के लिए पोस्टर तक लग गए थे. इन पोस्टर्स में रजनी को अपने फैसले पर एक बार फिर विचार करने की बात कही जा रही थी.

बीजेपी के साथ ही चुनाव लड़ेगी AIADMK

आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. कुछ दिनों पहले गृहमंत्री अमित शाह ने चेन्नई का दौरा किया था. इसके बाद राज्य के डिप्टी सीएम ओ पन्नीरसेल्वम ने साफ कर दिया था कि आगामी चुनावों में AIADMK-BJP साथ चुनाव लड़ेंगे. खास बात है कि बीजेपी भी रजनीकांत को अपनी ओर लाने के लिए काफी समय से कोशिश कर रही है, लेकिन शाह के दौरे में दोनों की मुलाकात नहीं हुई.(hindi.news18.com)


29-Nov-2020 7:12 PM 21

पटना,29 नवम्बर | बिहार की एक सीट पर होने वाले राज्यसभा चुनाव  की लड़ाई दिलचस्प होती दिख रही है. लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान  के निधन से खाली हुए इस सीट से जहां बीजेपी ने बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और पार्टी के कद्दावर नेता सुशील कुमार मोदी को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन की तरफ से भी इस सीट को लेकर अपने प्रत्याशी उतारे जाने के कयास लगने लगे हैं.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बिहार से राज्यसभा सीट पर महागठबंधन चिराग पासवान की मां रीना पासवान को अपना समर्थन देकर उम्मीदवार बनाना चाहता है. दरअसल चिराग पासवान पर महागठबंधन पिछले कई दिनों से नजर बनाए हुए हैं ऐसे में इस मौके को वह अपने हाथ से गंवाना नहीं चाह रहा है क्योंकि बिहार से खाली हुई है सीट रामविलास पासवान के परिवार के खाते में थी, ऐसे में उनके निधन के बाद इस बात की उम्मीद जताई जा रही थी कि उनकी पत्नी रीना ही एनडीए के खाते से राजसभा जा सकती हैं, लेकिन ऐन वक्त पर इस सीट से बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी को पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया.

हालांकि सूत्रों की मानें तो इस को लेकर राजद द्वारा अब चिराग की मां के नाम पर समर्थन किए जाने की बात सामने आ रही है लेकिन लोजपा की तरफ से अभी इसको लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोजपा नेता राम विलास पासवान के निधन के बाद खाली हुई राज्‍यसभा सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व  पूर्व डिप्‍टी सीएम सुशील कुमार मोदी को राज्‍यसभा उम्‍मीदवार बनाया है. इसके बाद अब सुशील मोदी 2 दिसंबर को राज्यसभा के लिए नामांकन करने वाली हैं. जानकारी के मुताबिक, इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित बीजेपी के कई बड़े चेहरे शामिल होंगे.(hindi.news18.com)


29-Nov-2020 6:56 PM 46

नई दिल्ली ,29 नवम्बर | कृषि कानून के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के किसानों के दिल्ली चलो अभियान को लेकर दो मुख्यमंत्रियों के बीच तनातनी हो गई है. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए बयान में सीएम खट्टर ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कोरोना वायरस की वजह से अगर कोई खतरनाक स्थिति पैदा होती है तो इसके लिए पंजाब सरकार जिम्मेदार होगी. खट्टर ने कहा कि इस बारे में मैंने पंजाब के मुख्यमंत्री से बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मेरी फोन कॉल रिसीव नहीं की. बाद में जब मैंने उन्हें प्रमाण दिखाया तो उनकी बोलती बंद हो गई.

10 बार भी फोन करें खट्टर तो बात नहीं करूंगा : अमरिंदर

जबकि पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने एएनआई से कहा है कि खट्टर झूठ कह रहे है कि उन्होंने मुझे पहले फोन किया है और मैंने उस पर रेस्पॉन्ड नहीं किया. लेकिन अभी तो उन्होंने (खट्टर ने) हमारे किसानों के साथ जो किया, उसके बाद तो वह मुझे दस बार भी कॉल करें तो मैं उनसे बात नहीं करने वाला.

If any dangerous situation arises due to coronavirus, Punjab govt will be responsible for it. I tried to speak to Punjab CM on this matter but he denied of receiving any call. Later when I showed the proof, he was left speechless: Haryana CM Manohar Lal Khattar. https://t.co/HgpciIa9kj pic.twitter.com/GgjKUWl5iu

— ANI (@ANI) November 29, 2020

Khattar is lying that he tried calling me earlier & I did not respond. But now, after what he has done to my farmers, I'll not speak to him even if he calls me 10 times: Punjab CM Captain Amarinder Singh (file photo) pic.twitter.com/0T7ufZUISZ

— ANI (@ANI) November 28, 2020

खट्टर ने कहा - पंजाब सरकार ने प्रोटेस्ट की इजाजत कैसे दी?

हरियाणा के सीएम खट्टर ने अपने एक अन्य बयान में कहा है कि जिस तरह की भाषा वह (अमरिंदर सिंह) इस्तेमाल कर रहे हैं वह किसी मुख्यमंत्री पर सूट नहीं करती. हमने तो कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका के कारण तय किया है कि किसी को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं देंगे. मैं तो आश्चर्यचकित हूं कि पंजाब ने ऐसे समय में किसानों को प्रोटेस्ट करने की इजाजत कैसे दे दी. सीएम खट्टर ने कहा कि मैं कभी आंसू गैस और वॉटर कैनन के इस्तेमाल के पक्ष में नहीं हूं जैसा कि फोर्स ने किया.

'किसानों से माफी मांगें खट्टर, तभी होगी बात'

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने पूछा है कि हरियाणा की पुलिस हमारे किसानों को क्यों रोक रही है? क्यों उन्हें उन पर आंसू गैस छोड़ने पड़े? अमरिंदर सिंह ने कहा कि मैंने पीएम और कृषि मंत्री से बात की है, इसलिए मैं खट्टर से बात क्यों नहीं कर सकता हूं? लेकिन वो इसमें विफल रहे है और अब मुझे इसके लिए दोषी ठहरा रहे हैं. मैं सीएम खट्टर से क्यों नहीं बात करूंगा, लेकिन पहले वो उन किसानों से माफी मांगें, जिन पर उन्होंने हमले करवाए.(news18.com/)