अंतरराष्ट्रीय

वैक्सीन आने तक कोरोना ले लेगा 20 लाख जानें - WHO
26-Sep-2020 10:11 AM (89)

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि दुनियाभर में एक कोरोना वायरस वैक्सीन बनने से पहले COVID-19 से वैश्विक मौतों का आंकड़ा 20 लाख को पार कर सकता है. यू.एन. एजेंसी के आपात कार्यक्रम के प्रमुख माइक रयान ने शुक्रवार को एक ब्रीफिंग में कहा जब तक हम यह सब नहीं करते, 20 लाख लोगों के मौत की संभावना है. चीन में कोरोना वायरस के पता चलने के नौ महीने बाद होने वाली मौतों की संख्या 10 लाख के करीब है. रयान ने कहा कि हाल ही में बढ़ती चिंताओं के बावजूद संक्रमण के लिए युवा लोगों को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए क्योंकि वे दुनिया भर में प्रतिबंध और लॉकडाउन के बाद इसका प्रसार बढ़ा रहे हैं.''

WHO चीन के साथ वैक्सीन से वित्त पोषण योजना में अपनी संभावित भागीदारी के बारे में निरंतर बातचीत कर रहा है, जो कि COVID-19 टीकों को वैश्विक स्तर पर तेजी से और समान पहुंच की गारंटी देने के लिए बनाई गई है. COVID -19 के खिलाफ टीके, उपचार और डायग्नोस्टिक्स के लिए WHO के वरिष्ठ सलाहकार ब्रूस आयलवर्ड ने कहा "हम चीन के साथ चर्चा कर रहे हैं, जैसा कि हम आगे बढ़ सकते हैं." उन्होंने पुष्टि की कि ताइवान ने इस योजना पर हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि डब्ल्यूएचओ का सदस्य नहीं है.

चीन की एक फार्मास्यूटिकल कंपनी ने दावा किया है कि साल 2021 की शुरुआत से अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस वैक्सीन डिट्रिब्यूशन के लिए तैयार हो जाएगी. SinoVac के सीईओ, यिन वेइदॉन्ग ने कहा कि अगर यह ह्यूमन ट्रायल के तीसरे फेज में सफल होती है तो अमेरिका में CoronaVac को बेचने के लिए यूएस फ़ूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन से जल्द आवेदन किया जायेगा.

यिन ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस वैक्सीन प्रायोगिक टीका दिया गया है. उन्होने कहा "शुरुआत में हमारी रणनीति इस वैक्सीन को चीन के लिए और वुहान के लिए डिज़ाइन की थी. इसके तुरंत बाद जून और जुलाई में हमने अपनी रणनीति में बदलाव किया और इसे दुनिया तैयार करने का फैसला किया. शुक्रवार तक भारत में COVID-19 पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 58,18,571 थी, जिसमें 9,70,116 सक्रिय मामले थे. अब तक 47,56,165 लोगो को रिकवर किया गया है.(catch)

यूक्रेन वायुसेना का विमान हुआ हादसे का शिकार, 25 सैनिकों की मौत
26-Sep-2020 10:00 AM (57)

कीव. यूक्रेन (Ukraine) में एक विमान हादसा (Airforce Plane Crash) का शिकार हो गया. इस हादसे में अबतक 25 लोगों के मारे जाने की खबर है. यह विमान यूक्रेन की वायुसेना का है. सूत्रों के मुताबिक इस दुघर्टन में मिलिट्री कैडेट्स समेत 25 लोग (Twenty Two Military Cadets Died) मारे गए हैं. इसके अलावे दो लोगों के बहुत ही गंभीर रूप से घायल होने की सूचना मिली है. यह हादसा यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में खारकीव इलाके में हुई है. यूक्रेन के एक मंत्री ने इस हादसे की पुष्टि की है. उप गृह मंत्री एंटोन गेराशेंको (Deputy Interior Minister Anton Gerashchenko) ने एफपी को जानकारी देते हुए कहा ​कि हादसे में 25 लोग मारे गए हैं जबकि दो घायल हुए हैं.

विमान में 28 लोग थे सवार, दो अभी भी लापता

एंटोन गेराशेंको ने यह बताया कि दो लोग लापता हैं, जिनकी खोज जारी है. उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्ट प्लेन में 28 लोग सवार थे. इनमें से 21 मिलिट्री स्टूडेंट्स थे जबकि 7 विमान के क्रू के सदस्य थे. मंत्री ने बताया कि हादसे की वजह का पता अभी नहीं चल पाया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि वह आज हादसे के इलाके का दौरा करेंगे. राष्ट्रपति ने फेसबुक पर लिखा है कि हम सभी परिस्थितियों और त्रासदी के कारणों की जांच के लिए तत्काल एक आयोग का गठन कर रहे हैं.

खबरों के मुताबिक कि एंटोनोव -26 परिवहन विमान यूक्रेन के समयानुसार रात 8:50 बजे चुहिव एयरफोर्सह वाई अड्डे से दो किलोमीटर की दूरी पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. दुर्घटना के बाद विमान में आग लग गई. आग पर काबू पाने में एक घंटे लगे लेकिन तब तक विमान के अंदर सवार लोग बुरी तरह झुलस चुके थे.(news18)

इमरान की संयुक्त राष्ट्र से अपील, कश्मीर में भेजे शांति सेना
26-Sep-2020 9:45 AM (54)

संयुक्त राष्ट्र, 26 सितंबर (आईएएनएस)| संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र में दिए अपने भाषण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वो कश्मीर में संयुक्त राष्ट्र की सेना भेज कर हस्तक्षेप करे। शुक्रवार को हुए इस सत्र से भारत ने शुरुआत में ही वॉकआउट कर दिया था।

शुक्रवार को खान ने कहा, "सुरक्षा परिषद को कश्मीर में संघर्ष को रोकना चाहिए और अपने प्रस्तावों का कार्यान्वयन करना चाहिए, जैसा कि पूर्वी तिमोर में किया गया था।"

पूर्वी तिमोर मॉडल में इंडोनेशिया द्वारा आक्रमण करने के बाद सुरक्षा परिषद ने अपने प्रस्तावों को लागू करने और 1999 में तिमोर की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और चुनावों की देखरेख करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के तहत एक अंतर्राष्ट्रीय बल को अधिकृत किया था। फिर इसके अगले साल संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों ने तिमोर-लेस्ते में कमान संभाली थी।

2006 में तिमोर में असफल तख्तापलट होने और बड़े पैमाने पर फैली अशांति के बाद फिर से शांति सैनिकों में भेजा था।

1948 में पारित हुए प्रमुख सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 47 मांग करता है कि पाकिस्तान पहले कश्मीर से अपने सैनिकों और नागरिकों को वापस ले। जवाहरलाल नेहरू इस मामले में जनमत संग्रह कराने तैयार हो गए थे लेकिन पाकिस्तान द्वारा प्रस्ताव की शर्त का पालन नहीं करने के कारण जनमत नहीं हो सका था।

इसके बाद भारत ने कश्मीर में चुनाव कराए और बकौल नई दिल्ली यह भारत में इसके शामिल होने की पुष्टि करता है।

वहीं, पुर्तगाली उपनिवेश पूर्वी तिमोर (फ्रेटिलिन) की स्वतंत्रता के लिए एक क्रांतिकारी मोर्चा लड़ रहा था। जब तख्तापलट ने पुर्तगाल में सलाजार शासन को उखाड़ फेंका तो 1975 में फ्रेटिलिन ने स्वतंत्रता की घोषणा की। लेकिन इसके तुरंत बाद ही इंडोनेशिया ने इस पर आक्रमण किया और 1999 तक शासन किया क्योंकि विद्रोहियों ने इंडोनेशिया का समर्थन किया था।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए जनमत संग्रह के बाद 2006 में परेशानी तब पैदा हुई जब संयुक्त राष्ट्र ने अपने शांति सैनिकों को फिर से वहां भेजा।

ऐसे में तिमोर की तरह कश्मीर में वह मॉडल लागू करें तो सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 का पालन करने के लिए कश्मीर से पाकिस्तानियों को हटाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के लिए एमी कोनी बैरेट को नामित कर सकते हैं ट्रंप
26-Sep-2020 9:40 AM (76)

वाशिंगटन, 26 सितम्बर (आईएएनएस)| प्रसिद्ध सोशल कंजर्वेटिव एमी कोनी बैरेट को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सुप्रीम कोर्ट की नई जस्टिस के रूप में नामित करने की संभावना है।

इंटरनेशनल मीडिया ने बताया कि बैरेट लिबरल जस्टिस रूथ बेडर जिन्सबर्ग का स्थान लेंगी, जिनका पिछले शुक्रवार को निधन हो गया था। इस फैसले का एलान व्हाइट हाउस में शनिवार को होने की संभावना है।

उनके नाम पर मुहर लगने को लेकर सीनेट में टकराव देखने को मिल सकती है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव भी नजदीक है।

अगर सबकुछ ठीक रहा तो 48 वर्षीय एमी कोनी बैरेट, रिपब्लिकन राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 2017 में नील गोरसच और 2018 में नील गोरसच औेर 2018 में ब्रेट कवाना के बाद नियुक्त तीसरी जस्टिस होंगी।

डोनाल्ड ट्रम्प के केकेके को एक आतंकवादी समूह घोषित करने के आसार
26-Sep-2020 9:36 AM (169)

वाशिंगटन, 26 सितंबर (स्पूतनिक) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने श्वेत लोगों का समूह कू क्लक्स क्लान (केकेके) को एक आतंकवादी समूह के रूप में घोषित करने की योजना बनाई है। व्हाइट हाउस की एक पूल रिपोर्ट में श्री ट्रम्प के चुनावी अभियान का हवाला देते हुए इसका जिक्र किया गया है।   

रिपोर्ट में श्री ट्रम्प के चुनावी अभियान की प्लेटिनम योजना के बारे में बताया कि केकेके के अलावा दक्षिणपंथी संगठन एंटीफा को भी आतंकवादी समूह नामित करने के अलावा, अश्वेत समुदायों को लगभग 500 अरब डॉलर की पूंजी तक पहुंच बढ़ाना, जूनतींथ को एक संघीय अवकाश घोषित करना और अश्वेत समुदाय के लिए तीस लाख नए रोजगार पैदा करना शामिल है।   
श्री ट्रम्प ने अटलांटा, जॉर्जिया में अपने अभियान के दौरान प्लेटिनम योजना के बारे में बात की, लेकिन केकेके को आतंकवादी समूह घोषित करने या जूनतींथ को एक संघीय अवकाश घोषित करने का जिक्र नहीं किया।

व्हाइट हाउस ने इस मुद्दे पर कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दी है।

ओरेगन सीफूड प्लॉट के 77 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव
26-Sep-2020 9:15 AM (56)

वाशिंगटन, 26 सितम्बर (आईएएनएस)| अमेरिका में ओरेगन सीफूड प्लॉट के 77 कर्मचारी कोरोनावायरस जांच रिपोर्ट में पॉजिटिव पाए गए हैं। समाचार एजेंसी सिंहुआ के रिपोर्ट के मुताबिक, पॉजिटिव कर्मचारी क्लैटसॉप काउंटी में सीफूड प्लांट से हैं।

काउंटी के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को कहा कि प्राइवेट लैब द्वारा इस सप्ताह से नाइट शिफ्ट के 159 कर्मचारियों का जांच किया गया, जिसमें 77 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं।

ओरेगन हेल्थ अथॉरिटी ने पॉजिटिव कर्मचारियों के लिए क्वारंटीन सुविधा की व्यवस्था की है, वहीं अन्य संपर्को का भी पता लगाया जा रहा है।

अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी डे शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के भी जांच कर रही है।

पॉजिटिव मामलों में से कोई भी अस्पताल में भर्ती नहीं है।

कुलभूषण की किस्मत पाकिस्तानी अदालतों के हाथों में
25-Sep-2020 4:30 PM (59)

हमजा अमीर 
इस्लामाबाद, 25 सितम्बर (आईएएनएस)|
पाकिस्तान ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह इस्लामाबाद हाईकोर्ट (आईएचसी) में सुनी जा रही समीक्षा और पुनर्विचार मामले में कुलभूषण जाधव का प्रतिनिधित्व करने के लिए विदेशी वकील रखने की भारत की मांग को स्वीकार नहीं करेगा और जाधव की किस्मत पाकिस्तानी अदालतों के हाथों में छोड़ दिया है।

जाधव को फांसी होगी या नहीं, इस सवाल का जवाब देते हुए, विदेश कार्यालय के प्रवक्ता जाहिद हफीज चौधरी ने एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का एक जिम्मेदार सदस्य होने के नाते पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के न्यायाधीश के फैसले के अनुपालन के अपने दायित्व का पूरी तरह से संज्ञान लेता है।"

उन्होंने कहा, "मैं यह अनुमान नहीं लगा सकता कि मामले में निर्णय क्या होगा, लेकिन मामले में प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार केवल पाकिस्तानी न्यायालयों द्वारा प्रदान किया जा सकता है।"

चौधरी ने कहा कि जाधव ने पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की बात स्वीकार की थी।

उन्होंने कहा, "जब कमांडर जाधव को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था, तो उन्होंने जांच के दौरान पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की बात कबूल की। भारत ने आईसीजे में कमांडर जाधव को कांसुलर एक्सेस देने के मुद्दे को उठाया।

फैसले में, आईसीजे ने वियना कन्वेंशन के तहत कमांडर जाधव को उनके अधिकारों से अवगत कराने, भारतीय कांसुलर अधिकारी के माध्यम से उन्हें कांसुलर एक्सेस प्रदान करने, उनकी कनविक्शन के संबंध में प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार प्रदान करने और एक प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार उपलब्ध कराने तक उनकी फांसी पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे।

प्रवक्ता ने कहा, "पाकिस्तान इन सभी का अनुपालन कर रहा है।"

चौधरी ने भारत पर आईसीजे के फैसले को लागू करने के पाकिस्तान के प्रयासों को विफल करने और जाधव के मामले को पाकिस्तान के खिलाफ प्रचार के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

जाधव का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक भारतीय या एक विदेशी वकील उपलब्ध कराने की नई दिल्ली की मांग के बारे में बात करते हुए, चौधरी ने कहा कि यह भारत को बार-बार बताया गया है कि केवल वही वकील कोर्ट में कमांडर जाधव का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जिनके पास पाकिस्तान में वकालत करने का लाइसेंस है।

उन्होंने कहा, यह आदेश क्षेत्राधिकार के अनुसार है। भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में यह भी फैसला सुनाया है कि विदेशी वकील देश के भीतर वकालत नहीं कर सकते हैं।

प्रवक्ता ने आईसीजे के फैसले को प्रभावी बनाने के लिए भारत सरकार को आगे आने और पाकिस्तान में न्यायालयों के साथ सहयोग करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान सरकार ही है जिसने जाधव के मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

न्यूयॉर्क के एक शहर नाम है 'स्वस्तिक', विरोध होने पर हुई वोटिंग, चौंकाने वाले रहे परिणाम
25-Sep-2020 11:29 AM (181)

न्यूयॉर्क. अमेरिका में न्यूयॉर्क के एक टाउन का नाम 'स्वस्तिक' (Swastika) रखा गया है. हालांकि, यह नाम शहर के संस्थापकों, पुरखों ने संस्कृत (Sanskrit) शब्द के नाम पर स्वस्तिक रखा था, मगर बाद में इसका विरोध होने लगा. इस नाम को विरोधी खेमे के लोगों ने नाजियों के चिन्ह से जोड़ा. इसके बाद इस शहर के नाम को स्वस्तिक ही रखे जाने को लेकर वोटिंग हुई, जिसमें इस नाम के खिलाफ में एक भी वोट नहीं पड़ा और इस तरह से शहर का नाम फिर स्वस्तिक ही रहा. शहर के लोगों का कहना है कि इसके नाम का नाजी के प्रतीक चिन्ह से कोई लेना देना नहीं है. सीएनएन के मुताबिक, शहर के ब्लैक ब्रुक टाउ बोर्ड ने सर्वसम्मति से स्वस्तिक नाम नहीं बदलने के लिए वोट दिया. शहर के संचालन का जिम्मा इसी बोर्ड पर है. ब्लैक ब्रुक के पर्यवेक्षक जॉन डगलस ने इस बात की जानकारी दी.

डगलस के मुताबिक, इस शहर का नाम स्वस्तिक शहर के मूल निवासियों द्वारा 1800 के दशक में रखा गया था और यह संस्कृत के शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ कल्याण होता है. उन्होंने कहा कि हमें इस क्षेत्र के बाहर के उन लोगों के पर तरस आता है, जो हमारे समुदाय के इतिहास के बारे में नहीं जानते और यह नाम देखकर ऑफेंड हो जाते हैं और इसका विरोध करते हैं। मगर हमारे समुदाय के सदस्यों के लिए यह वह नाम है जिसे हमारे पूर्वजों ने चुना था. दरअसल, अप्रैल 2019 में डेनवर शहर के बाहर कोलोराडो शहर के लोगों ने इसका नाम स्वस्तिक से ओल्ड चेरी हिल्स में बदलने के लिए मतदान किया था. यह क्षेत्र कभी डेनवर लैंड स्वस्तिक कंपनी का घर था, यह एक कंपनी थी, जिसने नाजियों द्वारा स्वास्तिक चिन्ह को अपनाने से पहले यह नाम चुना था.

संस्कृत का शब्द स्वस्तिक

संयुक्त राज्य स्मारक मेमोकॉस्ट संग्रहालय के अनुसार, स्वस्तिक शब्द संस्कृत के शब्द स्वस्तिक से लिया गया है, जिसका प्रयोग सौभाग्य या मंगल प्रतीक के संदर्भ में किया जाता है. यह प्रतीक लगभग 7,000 साल पहले दिखाई दिया था और इसे हिंदू, बौद्ध, जैन और अन्य धर्मों में एक पवित्र प्रतीक माना जाता है. यह घरों या मंदिरों की दीवारों को लगा होता है, क्योंकि इसे शुभ माना जाता है. यूरोपीय लोगों ने पुरातात्विक खुदाई के काम के माध्यम से प्राचीन सभ्यताओं के बारे में जब सीखना शुरू किया तब 19 वीं शताब्दी के अंत और 20 वीं शताब्दी के प्रारंभ में यूरोप में यह प्रतीक लोकप्रिय हो गया. नाजी पार्टी ने 1920 में इसे अपने प्रतीक के तौर पर अपनाया था. हालांकि, स्वस्तिक के मूल चिन्ह से अलग है.(news18)

भारत-चीन सीमा विवाद : डोनाल्ड ट्रम्प ने फिर दिया ऑफर, कहा- अगर हम मदद कर सकते हैं, तो...
25-Sep-2020 11:27 AM (57)

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने गुरुवार को उम्मीद जताई कि भारत और चीन (India China Clash) अपने मौजूदा सीमा विवादों को हल करने में सक्षम होंगे, क्योंकि उन्होंने इस संबंध में दो एशियाई दिग्गजों की मदद करने के अपने प्रस्ताव को दोहराया है. ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, 'मुझे पता है कि अब चीन और भारत को कठिनाई हो रही है और बहुत ही कठिन कठिनाई हो रही है. उम्मीद है कि वे इसका हल निकाल पाएंगे. अगर हम मदद कर सकते हैं, तो हम मदद करना पसंद करेंगे.'

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह बयान उस समय आया है, जब भारतीय और चीनी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने लद्दाख में LAC विवाद को सुलझाने के लिए बैठक की. दोनों देशों ने LAC पर और ज्यादा सैनिक न भेजने पर सहमति जताई. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प चीन के साथ एक निष्पक्ष और संतुलित संबंध चाहते हैं, जहां एक देश दूसरे देश के लिए अथवा अन्य देशों की आजीविका के लिए खतरा नहीं बने.

ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र में कहा-‘चीनी वायरस' को दुनिया में फैलाने के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने 2018 में चीन के साथ व्यापार युद्ध शुरू किया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच संबंध बिगड़ गए थे. ट्रम्प ने चीन से व्यापार घाटे को कम करने के लिए कहा था जो कि 2017 में 375.6 अरब अमेरिकी डॉलर था. COVID-19 महामारी के बाद से चीन और अमेरिका के संबंध और भी बिगड़ गए. ट्रम्प बार-बार कोरोनावायरस (Coronavirus) को 'चीनी वायरस' बता रहे हैं और उनका कहना है कि चीन इस महामारी से सही तरह से नहीं निपट पाया, हालांकि चीन इस आरोप से इनकार करता रहा है.(ndtv)

श्रीलंका के राष्ट्रपति ने एलआरटी प्रोजेक्ट के तत्काल निलंबन का आदेश दिया
25-Sep-2020 9:09 AM (52)

कोलंबो, 25 सितंबर (आईएएनएस)| श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने लाइट रेलवे ट्रांजिट (एलआरटी) प्रोजेक्ट को खत्म करने का आदेश दिया है। इसका निर्माण राजधानी कोलंबो में किया जाना था। यह जानकारी स्थानीय इकॉनोमीनेक्स्ट की रिपोर्ट से मिली।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की गुरुवार की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारियों ने बताया कि एलआरटी प्रोजेक्ट जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) द्वारा वित्त पोषित परियोजना थी और इसके प्रभावी परिवहन समाधान नहीं होने के कारण राष्ट्रपति ने इसके तत्काल निलंबन का आदेश दिया।

इकोनॉमीनेक्स्ट ने राष्ट्रपति के सचिव पी.बी. जयसुंदर द्वारा परिवहन मंत्रालय के सचिव को लिखे पत्र के हवाले से बताया कि यह परियोजना बहुत महंगी थी और शहरी कोलंबो परिवहन बुनियादी ढांचे के लिए उचित प्रभावी परिवहन समाधान नहीं था।

इस परियोजना पर अनुमानित 150 करोड़ अमेरिकी डॉलर लागत आने की संभावना थी।

राष्ट्रपति द्वारा परियोजना कार्यालय को तत्काल बंद करने का आदेश देने की भी जानकारी देते हुए जयसुंदर ने लिखा, "शहरी विकास और आवास मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के राष्ट्रीय योजना विभाग के परामर्श से एक उपयुक्त परिवहन समाधान पर काम किया जा सकता है।"

श्रीलंका ने परियोजनाओं के लिए मार्च 2020 में जापान सरकार के साथ 3000 करोड़ येन (28.457 करोड़ अमेरिकी डॉलर) रियायती ऋण पर हस्ताक्षर किए। साथ ही सरकार ने उन इमारतों के बारे में भी चिंता व्यक्त की जो एलआरटी से प्रभावित हो सकती हैं।

कश्मीर में स्वाधीनता के लिए टोरी सांसदों का प्रचार अभियान
25-Sep-2020 9:04 AM (48)

लंदन, 25 सितम्बर (आईएएनएस)| सात टोरी सांसदों के एक समूह ने 'द कंजर्वेटिव फ्रेंड्स ऑफ कश्मीर' नाम के एक समूह को रिलॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य कश्मीर की 'स्वाधानीता' के लिए अभियान चलाना है। इससे टोरी समर्थक ब्रिटिश भारतीयों में नाराजगी पैदी हो गई है। समूह ने हाल ही में ट्वीट किया, "हमने कंजर्वेटिव फ्रेंड्स ऑफ कश्मीर को रि-लॉन्च कर दिया है। हम कश्मीर और जम्मू में मानवाधिकारों के हनन और स्वाधीनता के लिए अभियान चला रहे हैं। कंजर्वेटिव सांसदों और कार्यकर्ताओं के बीच हमारे कारण से समर्थन बढ़ रहा है। हमें और हमारे काम को फॉलो करें।"

इस कदम ने भारत के कंजर्वेटिव फ्रेंड्स ऑफ इंडिया (सीएफआई) को हतोत्साहित कर दिया है, जो ब्रिटिश भारतीयों के बीच पार्टी को बढ़ावा देता है।

इस सप्ताह की शुरूआत में समूह ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के राष्ट्रपति मसूद खान के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट को रीट्वीट किया था, जिसमें कहा गया था, "हम कश्मीर के कंजर्वेटिव फ्रेंड्स को फिर से लॉन्च करने के लिए आपके बहुत आभारी हैं। आपकी आवाज कश्मीर के आहत लोगों के लिए आशा की एक किरण की तरह चमकती है। बेसहारा, पस्त, मताधिकारहीन - वे न्याय के लिए आपकी और आपके सहयोगियों की ओर देखते हैं।"

समूह में टोरी के सांसदों में पॉल ब्रिस्टो (पीटरबरो), जेम्स डेली (ब्यूरी नॉर्थ), जैक ब्रेरेटन (स्टोक ओन ट्रेंट साउथ) और स्टीव बेकर (व्योमबे) शामिल हैं, जो सभी पाकिस्तानी आबादी वाले निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ब्रेरेटन, डेली और ब्रिस्टो ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन कश्मीर (एपीपीजीके) में भी शामिल रहे हैं, जिसकी अध्यक्षता लेबर सांसद डेबी अब्राहम्स ने की थी, जिन्हें 17 फरवरी को दिल्ली एयरपोर्ट पर यह सूचित किए जाने के बाद दुबई भेजा गया था कि उनका ई-वीजा वैध नहीं था। अगले दिन वह पाकिस्तान चली गई और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से मिली थी। बड़ी बात यह है कि इसका सारा खर्चा इस्लामाबाद द्वारा वहन किया गया।

बाद में पता चला कि एपीपीजीके को 18 फरवरी से 22 फरवरी 2020 के बीच पीओके की यात्रा के लिए 31,501 पाउंड (29.7 लाख रुपये) और 33,000 पाउंड (31.2 लाख रुपये) के बीच लाभ भी मिला।

ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी (यूके) के अध्यक्ष कुलदीप शेखावत ने एक मसौदा तैयार करने और उसे कंजर्वेटिव पार्टी के सह-अध्यक्षों को भेजने की योजना बनाई है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि इस पर 200 से अधिक पीआईओ कार्यकर्ता हस्ताक्षर करेंगे।

उन्होंने कहा, "हम कंजर्वेटिव टीम के इस तरह के भारत विरोधी कदम से खुश नहीं हैं। ब्रिटेन को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।"

संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप ने चीन पर बोला हमला, लेकिन क्यों?
24-Sep-2020 6:57 PM (36)

बीजिंग, 24 सितम्बर (आईएएनएस)| 75वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तमाम देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के नेताओं के सामने तथ्यों की अनदेखी कर कोविड-19 महामारी, इंटरनेट सुरक्षा और पारिस्थितिकी पर्यावरण आदि मुद्दों पर अकारण चीन पर आरोप लगाया और मनमाने ढ़ंग से राजनीतिक वायरस फैलाया। संयुक्त राष्ट्र महासभा एक गंभीर मंच है, पर ट्रंप ने इस मंच के जरिए चीन के खिलाफ राजनीतिक हमला किया। सभी मौके पर चीन पर कालिख पोतने की कार्रवाई से न सिर्फ संयुक्त राष्ट्र संघ पर लांछन लगाया गया, बल्कि विश्व शांति भी भंग हुई।

तो ट्रंप ने क्यों इस मंच पर तथ्यों की अनदेखी कर झूठ बोला? सबसे बड़ा उद्देश्य आम चुनाव जीतने के लिए चीन पर जिम्मेदारी थोपना है। ट्रंप ने इसलिए कोरोना वायरस को फिर एक बार चीनी वायरस कहकर बुलाया, क्योंकि वे मतदाताओं में अपना समर्थन बढ़ाना चाहते हैं। ट्रंप के विचार में जितने बड़े मंच पर चीन पर लांछन लगाया जाएगा, अमेरिकी मतदाता उतना ही विश्वास करेंगे। वास्तव में ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा के जरिए नागरिकों को उत्तेजित करना चाहते हैं।

दरअसल, लंबे समय से अमेरिका दुनिया भर में चीन को नुकसान पहुंचाने वाली छवि बनाना चाहता है। इसलिए अमेरिका ने आरोप लगाया कि चीन को कोविड-19 महामारी की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है, चीन इंटरनेट हमला करता है, यहां तक कि चीन पारिस्थितिकी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। अमेरिका दुनिया को बताना चाहता है कि चीन अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा है, चीन को रोकने पर ही सभी समस्याएं ठीक हो सकेंगी। वास्तव में अमेरिका के कथन का दुनिया विश्वास नहीं करती, लेकिन ट्रंप के विचार में जब तक बात करते करेंगे, देर-सबेर लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा।

इसके अलावा, अमेरिका विश्व मंच पर चीन पर दबाव डालने के लिए बहाना और वैधता ढूंढ़ना चाहता है। आने वाले समय में अमेरिका अवश्य ही लगातार पूरी तरह से चीन पर दबाव डालेगा, लेकिन इससे दुनिया में अमेरिका की प्रतिष्ठा कमजोर हो जाएगी। इसलिए चीन पर कालिख पोतने के जरिए अमेरिका अपने राजनीतिक हमले के लिए बहाना ढूंढ़ना चाहता है।

लेकिन इन बेहूदा दलीलों की अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने पहले से ही अपील की है। द लान्सेट, नेचर आदि प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक पत्रिकाओं ने बारांबार महामारी को राजनीतिक बनाने की कार्रवाई का ²ढ़ विरोध किया, लेकिन कुछ राजनीतिज्ञ अपने गिरेबान में नहीं झांकते। जब ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दे रहे थे, तब अमेरिका में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है। इस घड़ी में अमेरिकी सरकार नागरिकों की जान बचाने के बजाय लोगों का ध्यान चीन की ओर आकर्षित करना चाहती है। वास्तव में यह दुनिया के लोगों के साथ धोखा है।

तथ्य सबसे अच्छा सबूत है। महामारी को राजनीतिक बनाना लोगों की इच्छा के विरुद्ध है, राजनीतिक वायरस फैलाना अमेरिका में महामारी की स्थिति बेहतर नहीं बना सकती। महामारी पर जानकारी बढ़ने के चलते अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने सहमति बनाई है कि वायरस मानव जाति का समान दुश्मन है। एकजुट होकर सहयोग करने पर ही महामारी को पराजित कर सकेंगे। कुछ राजनीतिज्ञों की महामारी के जरिए राजनीतिक लाभ उठाने की कुचेष्टा विफल नहीं होगी।

(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

-- आईएएनएस

ट्रंप ने कहा, चुनाव में हारा तो भी चुपचाप नहीं हटूँगा
24-Sep-2020 9:25 AM (70)

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नवंबर में चुनाव हार जाने के बाद भी शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण से इनकार किया है.

डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि चुनाव के नतीजे अमरीकी सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे क्योंकि उन्हें पोस्टल वोटिंग पर शक है.

कई राज्य मेल के ज़रिए मतदान को बढ़ावा दे रहे हैं जिसके पीछे वो कोरोना वायरस से सुरक्षा को वजह बता रहे हैं.

डोनल्ड ट्रंप से एक पत्रकार ने सवाल किया था कि डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन से चुनाव हारने, जीतने या ड्रॉ होने की स्थिति में क्या वो शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण करेंगे.

इस पर डोनल्ड ट्रंप ने कहा, ''मैं मतपत्रों को लेकर शिकायत करता आया हूं और वो एक मुसीबत हैं.''

जब पत्रकार ने कहा कि लोग हंगामा कर रहे हैं तो डोनल्ड ट्रंप ने उन्हें टोकते हुए कहा, ''मतपत्रों से छुटकारा पाएं और बहुत-बहुत शांतिपूर्ण- सत्ता हस्तांतरण नहीं होगा बल्कि वही सरकार जारी रहेगी.''

साल 2016 में भी डोनल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन से चुनाव लड़ते हुए भी नतीजों को स्वीकार ना करने की बात कही थी. हिलेरी क्लिंटन ने इसे अमरीकी लोकतंत्र पर हमला बताया था.

हालांकि, चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप की जीत हुई लेकिन उन्होंने 30 लाख वोट भी खोए जिस पर वो आज भी संदेह जताते हैं.

डेमोक्रेट्स ने क्या कहा

पिछले महीने हिलेरी क्लिंटन ने जो बाइडन से किसी भी स्थिति में हार ना मानने के लिए कहा था.

उन्होंने ऐसी स्थिति का जिक्र किया था जिसमें रिपब्लिकन पार्टी एबसेंटी बैलेट्स (मतदान के दौरान अनुपस्थित मतदाता) को लेकर हंगामा करेगी और नतीजों को चुनौती देने के लिए वकीलों की एक फौज़ इकट्ठा करेगी.

रिपब्लिकन नेताओं ने बुधवार को जो बाइडन पर भी अगस्त में चुनाव से पहले यह कहने को लेकर अशांति फैलाने का आरोप लगाया कि ''क्या किसी का मानना है कि डोनल्ड ट्रंप के जीतने पर अमरीका में कम हिंसा होगी.''

ट्रंप का सुप्रीम कोर्ट को लेकर बयान

इससे पहले बुधवार को, अमरिकी राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश रूथ बेडर गिन्सबर्ग की मृत्यु के बाद खाली हुए पद पर चुनाव से पहले नियुक्ति के अपने फैसले का बचाव किया. साथ ही कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चुनाव अदालत में जाकर ख़त्म होंगे.

जस्टिस रूथ बेडर गिन्सबर्ग की 18 सितंबर को मौत हो गई थी.

ट्रंप ने कहा, ''मुझे लगता है कि ये सुप्रीम कोर्ट में ख़त्म होगा और वहां नौ न्यायाधीशों का होना बहुत ज़रूरी है. ये बेहतर है कि चुनाव से पहले ऐसा कर दिया जाए क्योंकि डेमोक्रेट्स जो घोटाला कर रहे हैं वो अमरीकी सुप्रीम कोर्ट के सामने होगा.''

डोनल्ड ट्रंप ने फिर से इस बात का जिक्र किया कि मेल से होने वाले मतदान में धोखाधड़ी आसान है.

उन्होंने कहा कि वह इस शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के लिए एक महिला उम्मीदवार को नामांकित करेंगे. उनकी जस्टिस रूथ बेडर गिन्सबर्ग की जगह नियुक्ति होगी.

पोस्टल वोटिंग को लेकर हंगामा क्यों

कोरोना वायरस संक्रमण के ख़तरे के चलते इस बार पोस्टल वोटिंग में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है.

पोस्टल वोटिंग में लोग खुद वोट करने नहीं जाते बल्कि डाक के ज़रिए वोट देते हैं.

कमिश्नर ऑफ द फेडरल इलेक्शन कमीशन एलेन वीट्रॉब ने कहा, ''इस साजिश का कोई आधार नहीं है कि मेल से मतदान में धोखाधड़ी होती है.''

पोस्टल बैलेट धोखाधड़ी के अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जैसे कि 2018 में नॉर्थ कैरोलाइना प्राइमरी में. जहां एक रिपब्लिकन उम्मीदवार के मतदान पत्रों से छेड़छाड़ के बाद फिर से मतदान किया गया था.

न्यू जर्सी में इस साल एक मामला आया था जिसमें दो डेमोक्रेटिक काउंसलर्स पर पोस्टल वोटिंग में कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था.

ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस के 2017 के एक अध्ययन के मुताबिक अमरीका में मतदान धोखाधड़ी की दर 0.00004% और 0.0009% के बीच है.

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एक राजनीतिक वैज्ञानिक चार्ल्स स्टीवर्ट के शोध के अनुसार, पोस्टल बैलट के मामले में मतपत्रों के लापता होने की संभावना अधिक होती है.

उन्होंने गणना की है कि 2008 के चुनाव में मेल से किए गए मतदान में खोने वाले मतों की संख्या 76 लाख या उन पांच व्यक्तियों में से एक हो सकती है जिन्होंने अपने मतपत्र पोस्ट किए थे.(bbc)

भारत-चीन सैन्य तनाव के बीच नेपाल की नजर तिब्बती शरणार्थियों पर
24-Sep-2020 9:09 AM (39)

नई दिल्ली, 24 सितम्बर (आईएएनएस)| नेपाल सरकार ने भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव को देखते हुए अपने सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों को तिब्बती शरणार्थियों की आवाजाही पर करीब से नजर रखने का निर्देश दिया है।

इससे पहले नेपाली सेना ने एक समीक्षा की थी, जहां यह स्पष्ट तौर पर कहा गया कि 'भारत और चीन के बीच 'शत्रुता' की स्थिति में ये शरणार्थी सुरक्षा के लिहाज से खतरा होंगे।'

सूत्रों ने कहा कि चीनी सीमा के पीछे गुप्त संचालनों में भारत के विशेष सीमांत बल(एसएफएफ) में कुछ तिब्बती शामिल हैं, जिसके बाद चीन के दबाव में नेपाल ने तिब्बती शरणार्थियों पर नजर रखने का निर्णय लिया है।

इससे पहले, एक एसएफएफ सुबेदार नेइमी तेनजीन पूर्वी लद्दाख के चुसूल में 30 अगस्त को एक ऊंचाई पर कब्जा जमाने के अभियान में शहीद हो गए थे, जिसके बाद इनका ध्यान तिब्बती शरणार्थियों पर गया।

एसएफएफ की स्थापना 1962 भारत-चीन युद्ध के तुरंत बाद भारत की खुफिया ब्यूरो ने की थी। पहले इसका नाम इस्टेबलिस्मेंट 22 था। बाद में इसका नाम एसएसएफ कर दिया गया, यह अब कैबिनेट सचिवालय के दायरे में आता है।

अब चीन नेपाल में तिब्बती शरणार्थियों पर कड़ी नजर रखना चाहता है।

नेपाल चीन के साथ 1236 किलोमीटर लंबे सीमा को साझा करता है। नेपाल में करीब 20,000 तिब्बती शरणार्थी है। इनमें से कई पूर्व डिटेंशन कैंपों में रहते हैं, जिसे स्थायी सेटलमेंट में बदल दिया गया है।

नेपाल और चीन के बीच 2008 से कई सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करने वाले समझौते प्रभावी हैं।

चीन के प्रभाव में आकर नेपाल तिब्बती लोक प्रशासनों पर प्रतिबंध लगाने पर सहमत हो गया था। इसके साथ ही वह तिब्बती समुदाय, इसके नेताओं पर कड़ी निगरानी रखता है।

सूत्रों के अनुसार, "नेपाल में अधिकतर तिब्बतियों के पास रेसिडेंट परमिट नहीं है। वे लोग बैंक खाते भी नहीं खोल सकते और अपनी संपत्ति भी नहीं खरीद सकते।"

प्रवासी भारतीय यूएई से 20 साल बाद स्वदेश के लिए उड़ान भरेगा
23-Sep-2020 7:26 PM (31)

शारजाह, 23 सितंबर (आईएएनएस)| एक प्रवासी भारतीय आखिरकार 20 साल बाद स्वदेश जाने की तैयार में है। शारजाह के अधिकारियों द्वारा 750,000 दिरहम की रियायत दिए जाने के बाद उसकी घर वापसी सुनिश्चित हुई है। गल्फ न्यूज के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में एक भारतीय कामगार थानावेल मथियाझागन का कहना है कि निर्धारित अवधि से ज्यादा रहने के जुर्म में उस पर जुर्माना लगाया गया। जुर्माने की रकम में लगभग 750,000 की राहत मिलने के बाद उसका घर लौटना मुमकिन हुआ।

भारतीय राज्य तमिलनाडु के रहने वाले शख्स का दावा है कि वह पिछले 20 वर्षो में संयुक्त अरब अमीरात में आम माफी के अवसरों का लाभ नहीं उठा सका, क्योंकि गृह राज्य में बने दस्तावेजों में उसके पिता के नाम में मिसमैच था, जिस कारण उसकी पहचान का सत्यापन भारत से नहीं कराया गया और पिता का गलत नाम ही उसके पासपोर्ट पर दर्ज था। भारत में दस्तावेजों में उसके पिता के नाम में स्पेलिंग को लेकर त्रुटि थी।

56 साल के मथियाझागन ने कहा कि उसे मंजूरी न मिलने के कारण का तब अहसास हुआ, जब यूएई में दो सामाजिक कार्यकर्ताओं से उसने कोविड-19 महामारी के दौरान घर लौटने के लिए मदद मांगी और तब उसकी अर्जी पर पुनर्विचार के लिए उसने फिर से अनुरोध किया।

उसने गल्फ न्यूज को बताया कि वह अबू धाबी में नौकरी के लिए भर्ती एजेंट को 120,000 रुपये (6,048 दिरहम) का भुगतान करने के बाद 2000 में यूएई में आया था। यह उसके इम्प्लाइमेंट वीजा परमिट एंट्री पर मुहर से सत्यापित किया जा सकता है। मथियाझागन के पास केवल यह और इसके अलावा पासपोर्ट के अंतिम पृष्ठ की एक प्रति ही दस्तावेज के तौर पर है।

उसने कहा कि एजेंट ने उनका ओरिजनल पासपोर्ट यह दावा करते हुए ले लिया कि मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जारी होने के बाद पासपोर्ट में उनके रेसिडेंस वीजा पर मुहर लग जाएगी।

उसने कहा, "मैंने मेडिकल टेस्ट लिया और अपने रोजगार वीजा का इंतजार किया। लेकिन, एजेंट ने इसमें देरी की और बाद में मुझे पता चला कि कंपनी, जो मुझे नौकरी पर रखने वाली थी, बंद हो गई है।" उन्होंने कहा कि आखिरकार एजेंट ने उनकी कॉल का जवाब देना बंद कर दिया और बाद में उसका पता नहीं चला।

उसने कहा, "मैं अपने मूल स्थान के कुछ लोगों के साथ एक कमरे में रहा। मैं आठ महीने तक बिना किसी नौकरी के साथ रहा। उसके बाद मैं शारजाह आया और कुछ काम करने लगा।"

मथियाझागन ने कहा कि वह अवैध रूप से यूएई में रहकर विभिन्न परिवारों और कंपनियों के लिए पार्ट-टाइम नौकरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते रहे।

उसने दावा किया कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात में पिछले वीजा माफी प्रस्तावों के दौरान घर लौटने की कोशिश की और उन लोगों की बातों में आकर 10,000 से अधिक दिरहम गंवा दिए जिन्होंने दस्तावेजों की मंजूरी के साथ उनकी मदद करने का वादा किया था।

हालांकि, ए.के. महादेवन और चंद्र प्रकाश पी. जिन्होंने अबू धाबी में भारतीय दूतावास के माध्यम से मथियाझागन को ईसी प्राप्त करने में मदद की, ने कहा कि वह महामारी के दौरान भारत से आइडेंटिटी क्लीयरेंस पाने में विफल रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें मथियाझागन के महादेवन से मिलने के बाद अर्जी खारिज होने की वजह पता चली।

त्रिची क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय द्वारा सेंधुरई पुलिस स्टेशन को उनके पहचान सत्यापन के लिए भेजे गए दस्तावेजों में उनके पिता का नाम थंगावेल बताया गया है, जबकि उनके पिता का वास्तविक नाम थनावेल है, कुल मिलाकर अतिरिक्त 'जी' अक्षर ने उनके लिए परेशानी खड़ी कर दी थी।

दोनों ने कहा कि उन्होंने भारतीय दूतावास और मथियाझागन के गांव में स्थानीय विभागों से संपर्क कर गलती को सुधारने और उनके दस्तावेजों को प्रॉसेस करने के लिए संपर्क किया। प्रकाश ने कहा, "यूएई में भारतीय राजदूत पवन कपूर ने इस मामले को हल करने में विशेष रुचि ली।"

महादेवन ने कहा कि वह खुश हैं कि मथियाझागन जल्द ही घर वापसी के लिए उड़ान भरेंगे और अपनी सबसे छोटी बेटी से मिलेंगे, जो उनके यूएई आने के बाद पैदा हुई है।

अगले साल सीजन 6 के साथ 'सुपरगर्ल' का होगा समापन
23-Sep-2020 7:08 PM (54)

लॉस एंजेलिस, 23 सितंबर (आईएएनएस)| मेलिसा बेनोइस्ट स्टारर सुपरहीरो सीरीज, 'सुपरगर्ल', अपने छठे सीजन के साथ समाप्त होगी। उसके छठे सीजन का प्रीमियर साल 2021 में होने की उम्मीद है। बेनोइस्ट ने इसकी पुष्टि करते हुए कि शो का छठा सीजन इसका अंतिम सत्र होगा, उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा, "मैं बहुत उत्साहित हूं कि हमें अपनी इस अद्भुत यात्रा को अंजाम पर पहुंचाने के लिए योजना मिल गई है और मैं इस बात का इंतजार नहीं कर पा रही हूं कि आपको बताऊं कि हमारे पास आपके लिए क्या है। मैं वादा करती हूं कि हम इसे एक यादगार अंतिम सीजन बनाने जा रहे हैं।"

अपने पोस्ट में बेनोइस्ट ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने जो दावा किया था कि लड़कियों पर शो का "अविश्वसनीय प्रभाव" पड़ेगा, वह प्रभाव पड़ा है।

31 वर्षीय अभिनेत्री ने लिखा, "यह कहना एक सम्मान की बात है कि इस प्रतिष्ठित चरित्र का चित्रण एक बड़े पैमाने पर समझा जाएगा। दुनियाभर की युवा लड़कियों पर इस शो के अविश्वसनीय प्रभाव को देखकर हमेशा मैं अवाक रह जाती हूं।"

बेनोइस्ट ने आगे कहा, "उसका मुझ पर भी प्रभाव पड़ा है। उसने मुझे वो ताकत सिखाई है जो मुझे नहीं पता था कि मेरे पास है, वह है सबसे अंधेरे में आशा की तलाश करना। वह बेहतर होने के लिए हम सभी को आगे की ओर ढकेलती है। मेरे जीवन में उसका बेहतर प्रभाव पड़ा है।"

वेरायटी डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम सीजन का प्रोडक्शन इस महीने के अंत में शुरू होगा और सीजन 6 में 20 एपिसोड होंगे।

ब्रिटेन में भारतीय सिख ड्राइवर को तालिबानी बताया, पगड़ी उछाली और पीटा
23-Sep-2020 6:42 PM (44)

लंदन, 23 सितंबर | भारत में जन्मे सिख टैक्सी ड्राइवर को ब्रिटेन में चार लोगों ने उन्हें तालिबानी होने के शक में मारा पीटा. 41 साल के विनीत सिंह ने रविवार की रात दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड में रीडिंग शहर के ग्रोसवेनर कैसीनो से चार लोगों को अपनी टैक्सी में बिठाया. बैठने के कुछ देर बाद उन चारों ने पूछा कि क्या तुम तालिबानी हो? इसके बाद विनीत सिंह को यात्रियों के मौखिक और शारीरिक शोषण का शिकार होना पड़ा. इस घटना की शिकायत के बाद ब्रिटेन की पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

पगड़ी उतरने की कोशिश की

विनीत सिंह ने बताया कि चारों या​त्री गोरे थे. वे जब गाड़ी चला रहे थे तो उनमें से एक यात्री ने उनके सिर पर एक थप्पड़ मारा जबकि एक दूसरे यात्री ने उनकी सीट के पीछे लात मारी और उन्हें धक्का दिया. तीसरे यात्री ने उनकी पगड़ी उतारने की कोशिश की. विनीत ने कहा कि यह एक बहुत बुरा अनुभव है और मैं एक धार्मिक व्यक्ति हूं और पगड़ी मेरे लिए सम्मान का विषय है. उन्होंने कहा कि उन्होंने चारों यात्रियों को पगड़ी के धार्मिक महत्व समझाने की कोशिश की और उनसे ना छूने का आग्रह भी किया. इस घटना से दुखी विनीत को इस बात पर यकीन है कि यह हमला ना सिर्फ नस्लवाद से प्रेरित था बल्कि चारों यात्री घृणा से भरे हुए थे.

विनीत मूल रूप से संगीत के शिक्षक हैं

अपनी पत्नी और बच्चों के साथ टाइलहर्स्ट में रहने वाले विनीत सिंह बर्कशायर के स्लॉफ़ में एक स्कूल में एक संगीत शिक्षक के रूप में काम करते थे. कोरोना वायरस महामारी के चलते उनकी संगीत शिक्षक की नौकरी चली गई. यही वजह है कि उन्हें घर चलाने के लिए टैक्सी चलानी पड़ी.

विनीत सिंह ने कहा कि इस भयावह अनुभव के बाद वे नाइट शिफ्ट में टैक्सी नहीं चलाएंगे. वे अभी भी बहुत डरे हुए हैं. उन्होंने कहा कि चारों यात्री टैक्सी में सवार होने के समय अच्छा बर्ताव कर रहे थे लेकिन धीरे-धीरे वे नस्लवाद के रंगत में रंगते चले गए और उनका व्यवहार हिंसक होता चला गया. (news18)

रेप की सज़ा कितनी भयानक होगी? कैसे कानून बदलने जा रही है पाकिस्तान सरकार?
23-Sep-2020 6:37 PM (41)

इस्लामाबाद, 23 सितंबरलाहौर-सियालकोट हाइवे  पर गैंग रेप की हालिया घटना ने पूरे पाकिस्तान में गुस्से की आग भड़का दी. लोग सड़कों पर उतरे और दोषियों को सख्त सज़ा देने की मांग कर रहे हैं. यहां तक कि अपराधियों को सबके सामने चौराहे पर फांसी पर लटका दिए जाने की मांग की जा रही है. महिला अधिकार (Women Rights) समर्थक संगठनों ने इस गुस्से को जायज़ बताया है, तो पाकिस्तान की इमरान खान सरकार इस मामले में और भयानक कानून बनाए जाने की तरफ बढ़ती दिख रही है. जानिए पूरा माजरा क्या है.

अस्ल में, पाकिस्तान में करीब डेढ़ हफ्ते पहले लाहौर से गुजरांवाला खुद कार चलाकर जा रही एक महिला के साथ सियालकोट हाईवे पर टोल प्लाज़ा के बाद लुटेरों ने पकड़ लिया. महिला और उसके बच्चों को बंदूक की नोक पर खेत में ले जाकर लुटेरों ने बच्चों के सामने महिला के साथ बलात्कार को अंजाम दिया. इससे कुछ ही रोज़ पहले पाकिस्तान में पांच वर्षीय बच्ची के साथ रेप की घटना से पहले ही लोग गुस्से में थे इसलिए नाराज़गी और भड़क गई. अब जानिए​ कि किस तरह की मांगों के बाद पाक सरकार रेप कानून कितना सख्त कर सकती है.

कैसे भड़क रहा है गुस्सा?

भारत में करीब 8 साल पहले जिस तरह निर्भया गैंग रेप केस को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे, तकरीबन उसी तर्ज़ पर पाकिस्तान में लोग नाराज़गी ज़ाहिर कर रहे हैं. एक तरफ, सोशल मीडिया पर #WarAgainstRape और #HangRapistsPublicly जैसी मांगें और विचार रखे जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ सड़कों पर नाराज़गी जताने उमड़ी भीड़ भी दोषियों को खुलेआम फांसी देने की मांग कर रही है.

प्रदर्शकारियों की प्रमुख मांगें यही हैं कि अपराधियों को फौरन सज़ा दी जाए और सख्त भी. वहीं, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह गुस्सा जायज़ है लेकिन साथ ही, पाकिस्तान सरकार को महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून में सुधार भी करने चाहिए. विशेषज्ञों ने इस घटना को सरकार के लिए 'जागने का सही समय' करार दिया है.

पाकिस्तान में कितनी महफूज़ हैं महिलाएं?

वॉर अगेन्स्ट रेप नामक संस्था का कहना है कि पाकिस्तान में अन्य अपराधों की तुलना में रेप के मामलों में फैसलों और सज़ा मिलने की दर बहुत कम है. सिर्फ 10 फीसदी मामलों में ही सज़ा मिल पाती है. रेप केसों में 70 फीसदी गवाह तोड़ दिए जाते हैं. कुल मिलाकर देश बलात्कारियों को बचाने वाला सिस्टम बना चुका है, पीड़ितों को नहीं.

इस संस्था का कहना है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामले में त्वरित न्याय व्यवस्था की ज़रूरत बनी हुई है. वहीं, बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में रेप के 100 में 95-96 मामलों में सज़ा नहीं हो पाती. यह भी कहा गया है कि वास्तविक आंकड़ा और भयानक हो सकता है, यह तो सरकार ने कबूला है कि देश में हर साल 5000 रेप केस सामने आते हैं, जिनमें से सिर्फ 5 फीसदी मामलों में सज़ा मिल पाती है.

रेप कानून में क्या बदलाव चाहती है सरकार?

जनता की मांगों के बाद एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि वो बलात्कारी को सज़ा के तौर पर नपुंसक बनाए जाने के पक्ष में हैं. बीबीसी की ही रिपोर्ट के मुताबिक पाक का केंद्रीय मंत्रिमंडल भी इस बारे में सोच रहा है कि बलात्कारी के लिए खुलेआम फांसी की सज़ा का प्रावधान किया जाए या इंजेक्शन के ज़रिये उसे नपुंसक बनाए जाने का.

किन सुधारों की ज़रूरत है?

जनता के गुस्से और सरकारी स्तर पर कानूनी बदलाव को लेकर बनी हुई कश्मकश के बीच विशेषज्ञ बड़े पैमाने पर सुधारों की बात कह रहे हैं. पाकिस्तान में महिलाओं के सामने ऑनर किलिंग, स्कूल जाते वक्त ईव टीजिंग, जेलों में शोषण, अस्पतालों में मनाही और काम की जगहों पर सेक्सुअल हैरसमेंट के साथ ही रेप में पुलिस के शामिल होने जैसे संकट पेश आते हैं. मानवाधिकार वॉच का कहना है कि पाक को इस पूरे माहौल को बदलना चाहिए.

कई विशेषज्ञ शैक्षणिक स्तर पर व्यापक सुधार की बात कहते हैं तो कुछ केन्या की तर्ज पर लड़कियों के लिए सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग को अनिवार्य किए जाने तक की बात. वहीं, पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार वुसअतुल्लाह खान के मुताबिक बच्चों को गुड टच बैड टच का फर्क समझाने, महिलाओं की इज़्ज़त करने के सबक पढ़ाने, विशेष कोर्ट में ऐसे अपराधों की सुनवाई करने, गवाहों को सुरक्षा देने और रेपिस्टों को बचाने वाली पुलिस को न बचाने जैसे सुधारों की ज़रूरत बताते हैं.(news18)

मून मिशन: 2024 में चांद पर पहली बार कदम रखेगी महिला, मिशन पर 2 लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च
23-Sep-2020 6:25 PM (138)

वॉशिंगटन , 23 सितंबर |अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा एक बार फिर चांद पर इंसान को भेजने की योजना बना रही है. 1972 में पहली बार नासा ने चांद पर इंसान को भेजा था. नासा प्रमुख जिम ब्रिडेनस्टीन  ने बताया कि, 'नासा 2024 में चंद्रमा पर पहली महिला एस्ट्रोनॉट (Female astronaut) को उतारने की योजना बना रहा है. इस मिशन पर एक पुरुष ऐस्ट्रोनॉट भी साथ जाएंगे.' नासा के अनुसार इस मिशन की शुरुआत चांद पर वैज्ञानिक खोज, आर्थिक लाभ और नई पीढ़ी के खोजकर्ताओं को प्रेरणा देने के लिए किया जा रहा है.

नासा प्रमुख जिम ब्रिडेनस्टीन ने ब्रीफिंग में बताया कि, इस मिशन में बजट को लेकर थोड़ी अड़चन है, क्योंकि देश में राष्ट्रपति चुनाव है. अगर अमेरिकी संसद दिसंबर तक प्रारंभिक बजट के तौर पर 23 हजार 545 करोड़ रुपये की मंजूरी देती है, तो हम चांद पर अपने अभियान को अंजाम दे पाएंगे.

उन्होंने बतया कि इस मिशन में नासा चंद्रमा के अनछुए साउथ पोल पर अंतरिक्षयान की लैंडिंग करेगा. यह मिशन 4 साल में पूरा होगा और इस पर करीब 28 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा. ब्रिडेनस्टीन ने कहा, 'इस मिशन में नई तरह की चीजों की खोज होगी. इसमें पहले किए गए वैज्ञानिक शोध से भिन्न शोध किए जाएंगे.' उन्होंने बतया कि 1969 के अपोलो मिशन के समय हमें लगता था कि चांद सूखा है, लेकिन अब हमें पता है कि चांद के साउथ पोल पर भारी मात्रा में पानी मौजूद है. इस वक्त तीन लूनर लैंडर के निर्माण का कार्य चल रहा हैं, जो अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाएगा.

नासा के अनुसार पहला लैंडर ब्लू ओरिजिन अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस की कंपनी बना रही है, दूसरा लैंडर एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और तीसरा लैंडर डाइनेटिक्स कंपनी बना रही हैं. नासा ने अपने इस मिशन को अर्टेमिस नाम दिया है, यह कई चरणों में होगा. पहला चरण मानव रहित ओरियन स्पेसक्राफ्ट से नवंबर 2021 में शुरू होगा. मिशन के दूसरे और तीसरे चरण में एस्ट्रोनॉट चांद के आसपास चक्कर करेंगे और चांद की सतह पर उतरेंगे. जो अपोलो-11 मिशन की तरह एक सप्ताह तक चलेगा और इस दौरान एस्ट्रोनॉट एक सप्ताह तक चांद की सतह पर काम करेंगे.

नासा ने 1969 से 1972 तक अपोलो-11 समेत 6 मिशन चांद पर भेजे

नासा के मुताबिक, अमेरिका ने 1969 से 1972 तक अपोलो-11 समेत 6 मिशन चांद पर भेजे थे. 20 जुलाई 1969 को अपोलो-11 के जरिए पहली बार एस्ट्रोनॉट नील आर्मस्ट्रॉन्ग, एडविन ऑल्ड्रिन चांद की जमीन पर उतरे थे.(news18)

कराची हॉरर : दुष्कर्म के कथित आरोपी ने पीड़िता से की नौकरी की पेशकश
23-Sep-2020 6:19 PM (35)

इस्लामाबाद, 23 सितंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में 22 साल की एक युवती के कथित अपहरण और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म में शामिल तीन आरोपियों में से एक ने पीड़िता को नौकरी की जरूरत होने पर संपर्क करने के लिए एक 'प्रभावशाली' व्यक्ति का फोन नंबर दिया। यह जानकारी पुलिस ने बुधवार को पीड़िता के बयान के हवाले से दिया। जियो टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी कि अपहृत युवती को वापस छोड़ते हुए कथित दुष्कर्म के आरोपी ने उसे एक मोबाइल फोन नंबर दिया और नौकरी की जरूरत पड़ने पर 30,000 रुपये महीने की नौकरी की पेशकश भी की।

पुलिस ने बुधवार को कहा कि मोबाइल नंबर की जांच पूरी हो गई है और संपर्क नंबर 'एक प्रभावशाली व्यक्ति' का है। हालांकि, जांच से पता चला कि इसका इस्तेमाल अपराध होने वाले स्थल पर नहीं किया गया था।

अधिकारियों ने कहा कि उस प्रभावशाली व्यक्ति की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों की भी जांच की गई, लेकिन घटना में उस व्यक्ति के शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला। अधिकारियों ने कहा कि व्यक्ति के बच्चों के डेटा की भी जांच की जा रही है।

इसके अलावा, पुलिस ने पीड़िता के संकेत पर मंगलवार की रात को क्लिफ्टन के एक फ्लैट में भी छापा मारा। हालांकि, इसमें शामिल किसी भी संदिग्ध को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। उन्होंने कहा कि आसपास के अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

अब तक, कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना में शामिल तीन संदिग्धों में से एक की पहचान युवती द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर की गई है।

एक दिन पहले एक काली टोयोटा विगो में तीन लोगों ने रात के करीब 9.30 बजे युवती का अपहरण कर लिया था। तब युवती शहर के अपस्केल इलाके क्लिफ्टन में घर जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थी। उनमें से दो ने बारी-बारी से युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया, जबकि तीसरे ने अपराध में उनका साथ दिया।

पुलिस को घटना की जानकारी तब मिली, जब युवती की बहन ने मंगलवार दोपहर को हेल्पलाइन 15 पर घटना के बारे में उन्हें बताया। उन्होंने युवती का बयान दर्ज किया और आगे की जांच शुरू की।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसे एक फ्लैट में ले जाया गया, जहां संदिग्धों ने उसे यौन हिंसा का शिकार बनाया और दुष्कर्म के बाद वे उसे बदहवास हालत में उसी स्थान पर छोड़ गए, जहां से उसका अपहरण किया था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने युवती के हवाले से बताया, "एक काले विगो में आरोपी मुझे अब्दुल्ला शाह गाजी के मस्जिद के पास से उठाकर एक इमारत की तीसरी मंजिल पर ले गए और मेरे साथ दुष्कर्म किया।" उन्होंने आगे कहा, "उसके बाद वे मुझे क्लिफ्टन मॉल के बाहर छोड़कर चले गए।"

युवती ने घटना के एक दिन बाद मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई और उसे जिन्ना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सेंटर (जेपीएमी) भेज दिया गया, जहां प्रारंभिक रिपोर्टों में दुष्कर्म होने की पुष्टि हुई।

पुलिस ने कहा कि तीनों आरोपियों के खिलाफ पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई है। युवती का डीएनए टेस्ट कराया गया है। पुलिस ने कहा कि वह और उसका परिवार नाम उजागर नहीं होने देना चाहता है।

पुलिस ने कहा, "महिला ने प्रभावशाली संदिग्धों की पहचान कर ली है, वे जल्द ही पकड़े जाएंगे।"

साउथ जॉन के पुलिस प्रमुख उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) जावेद अकबर रियाज ने कहा कि अधिकारियों ने 'संदिग्धों की पहचान कर ली है।'

उन्होंने आगे कहा, "हम पीड़िता के वर्जन पर काम कर रहे हैं। हमने संदिग्धों को गिरफ्तार करने और सबूतों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाने के लिए अपने अधिकारियों को तैनात किए हैं।"

पति ने जमीन बेचकर पत्नी के लिए हाथी खरीदा
23-Sep-2020 5:17 PM (150)

-सुमी खान 

ढाका, 23 सितंबर (आईएएनएस)| पति-पत्नी जीवन में एक-दूसरे के लिए कितना कुछ कर सकते हैं, इसकी एक मिसाल एक बांग्लादेशी व्यक्ति ने पेश की है।

बांग्लादेश में लालमोनिरहाट के पंचग्राम निवासी दुलाल चंद्र रॉय ने अपनी पत्नी तुलसी रानी दासी का सपना पूरा करने के लिए अपनी जमीन बेच दी और उससे हाथी खरीदा है।

दुलाल पेशे से किसान हैं। उसने अपनी जमीन का दो बीघा हिस्सा बेचा और मौलवीबाजार जाकर 16.5 लाख टका में एक हाथी खरीद लिया। वह पिछले हफ्ते 20,000 टके में ट्रक किराए पर लेकर हाथी के साथ घर लौटा है।

उन्होंने कहा, "मैंने जमीन बेच दी और अपनी पत्नी के सपने को पूरा करने के लिए हाथी खरीदा।"

दासी ने कहा कि उसने एक साल पहले एक सपना देखा था जिसमें उसने एक हाथी खरीदा था और वह उसकी देखभाल कर रही थी।

यह पहली बार नहीं है, जब उसने सपने में जानवर देखकर इसे हकीकत में बदला और जानवर खरीदा। कुछ साल पहले तुलसी एक घोड़ा, एक हंस और एक बकरा खरीद चुकी हैं। अब इस हाथी को देखने के लिए आस-पास के इलाकों से लोग इस दंपति के घर पहुंच रहे हैं।

दुलाल ने इस हाथी के लिए 15,000 टका के मासिक वेतन पर महावत भी रखा है।

हाथी देखने आईं राजरहाट क्षेत्र की रहने वाली संतोना रानी ने कहा, "मैंने जिंदगी में पहली बार किसी को अपनी पत्नी का सपना पूरा करने के लिए हाथी खरीदते देखा है।"

दाऊद, लश्कर और जैश के लिए हेराफेरी करने वाले पाकिस्तानी नागरिक खनानी के राज़
23-Sep-2020 11:00 AM (74)

खोजी पत्रकारों ने कई बड़े बैंकों के ज़रिए दुनिया के कई देशों से चलने वाले एक मनी लॉन्ड्रिंग के पेचीदा नेटवर्क का पर्दाफ़ाश किया है.

मनी लॉन्ड्रिंग पर शिकंजा कसने वाली अमरीकी संस्था फ़ाइनेंशियल क्राइम्स एन्फ़ोर्समेंट नेटवर्क (FinCEN) या फ़िनसेन की संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्टों या एसएआर से पाकिस्तान से दुबई और अमरीका तक फैले हेरा-फेरी के एक बड़े नेटवर्क का पता चलता है.

'सस्पिशस एक्टिविटी रिपोर्ट' को संक्षेप में एसएआर कहा जाता है. ऐसी हज़ारों फ़ाइलों को खोजी पत्रकारों की अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल कन्सोर्टियम ऑफ़ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आइसीआइजे) ने खंगाला है जिनसे कई राज़ सामने आए हैं, बीबीसी भी आइसीआइजे से जुड़ी हुई है.

आर्थिक फ़र्जीवाड़े का यह नेटवर्क अल्ताफ़ खनानी नाम का एक पाकिस्तानी नागरिक चला रहा था, जिसे भारत से फ़रार माफ़िया सरगना दाऊद इब्राहिम के पैसों का इंतज़ाम देखने वाले मुख्य व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है.

न्यूयॉर्क के स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की ओर से दाखिल की गई इन एसएआर रिपोर्टों की तहक़ीक़ात अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' ने की है जो आइसीआइजे में शामिल है.

फिनसेन फाइलों के ज़रिए जो गोपनीय दस्तावेज़ सामने आए हैं उनसे यह भी पता चलता है कि कैसे बड़े बैंकों ने अपराधियों को दुनिया भर में पैसों की लेनदेन की अनुमति दे रखी थी.

इसी सिलसिले में एसआर खनानी की वित्तीय गतिविधियों की तफ़सील यह बताती है कि दशकों तक उन्होंने ड्रग माफ़ियाओं के साथ-साथ तालिबान और अल क़ायदा जैसे चरमपंथी संगठनों के लिए भी तक़रीबन 14 से 16 ट्रिलियन डॉलर इधर से उधर किया है. खनानी के इस धंधे को अमरीकी अधिकारियों ने 'मनी लॉन्ड्रिंग ऑर्गेनाइज़ेशन' नाम दिया है जिसे संक्षेप में एमएलओ लिखा गया है.

दुनिया भर में चली तहक़ीक़ात के बाद 11 सितम्बर 2015 को खनानी को पनामा एयरपोर्ट पर गिरफ़्तार करके मयामी की जेल में डाल दिया गया था. फिर जुलाई 2020 में हिरासत ख़त्म होने के बाद निर्वासन के लिए अमरीकी इमिग्रेशन अधिकारियों को सौंप दिया गया था. लेकिन इसके बाद यह साफ़ नहीं हो पाया है कि अमरीकी अधिकारियों ने उन्हें निर्वासित कर पाकिस्तान भेजा है या संयुक्त अरब अमीरात (यूएई).

अमरीका के फ़ॉरेन ऐसेट्स कंट्रोल दफ़्तर (ओएफ़एसी) ने खनानी की गिरफ़्तारी के बाद उन पर प्रतिबंध घोषित करते वक़्त, दाऊद इब्राहिम के साथ उनके रिश्तों के दस्तावेज़ तैयार किए थे.

11 दिसंबर 2015 को जारी किए गए एक नोटिस में ओएफ़एसी कहता है, "खनानी के एमएलओ ने आतंकवादियों, ड्रग तस्करों और आपराधिक संगठनों के लिए विश्व भर में खरबों डॉलर का इंतज़ाम करने के लिए कई वित्तीय संस्थाओं से अपने सम्बन्धों का इस्तेमाल किया. खनानी एमएलओ और अल जूरानी एक्सचेंज के प्रमुख अल्ताफ़ खनानी इस मामले में तालिबान तक के लिए पैसों की हेरा-फेरी में शामिल पाए गए हैं. साथ ही लश्कर-ए-तैबा, दाऊद इब्राहिम, अल-क़ायदा और जैश-ए-मोहम्मद से भी उनके रिश्ते हैं".

खनानी की गिरफ़्तारी को भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियाँ एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देख रही थीं. ख़ास तौर पर इस वजह से क्योंकि ओएफ़एसी ने दाऊद इब्राहिम से सीधे सम्बंध के साथ-साथ लश्कर-ए-तैबा और जैश-ए-मोहम्मद से खनानी के तार सीधे तौर पर जुड़े हुए बताए थे.

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि खनानी पर प्रतिबंधों की घोषणा करने वाली उस मूल नोटिस के जारी होने के ठीक एक साल बाद, 10 अक्टूबर 2016 को, ओएफएसी ने खनानी और खनानी एमएलओ से संबंधित कुछ अन्य लोगों के नाम की लिस्ट जारी की. इस लिस्ट में खनानी के परिवार के कई लोग और कुछ 'संस्थाओं' के नाम शामिल थे जो पाकिस्तान में रहते हुए खनानी और उनके नेटवर्क की मदद कर रहे थे.

इन संस्थाओं की लिस्ट में सबसे ऊपर दुबई स्थित मज़ाक़ा जनरल ट्रेडिंग लिमिटेड कम्पनी का नाम आता है. आज उन प्रतिबंधों के घोषित होने के ठीक 4 साल बाद, फ़िनसेन फ़ाइलें यह बताती हैं कि 'मॉस्को मिरर नेटवर्क' में खनानी एमएलओ की आर्थिक पैठ कितनी गहरी थी.

'मिरर ट्रेडिंग' दरअसल व्यवसाय का एक ऐसा अनौपचारिक तरीक़ा है जिसमें व्यक्ति या संस्था एक जगह से सिक्योरिटी ख़रीद कर बिना किसी आर्थिक लाभ के दूसरी जगह बेच देते हैं. इस तरह रकम के मूल स्रोत और अंतिम गंतव्य स्थान की जानकारी छिपा ली जाती है.

फिनसेन फ़ाइलों में 54 शेल कम्पनियों के नामों वाली 20 पन्ने की एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट शामिल है. शेल कंपनियां उनको कहते हैं जो कोई वास्तविक कारोबार नहीं करती बल्कि ऐसे ही लेन-देन के लिए काग़ज़ों पर खड़ी की जाती हैं.

यह रिपोर्ट कहती है कि 2011 से ही यह 54 कंपनियाँ रूस और यूरोप के बाज़ारों में सालाना खरबों डॉलर तक के हेरफेर में शामिल रही हैं.

फिनसेन इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक़ मज़ाका जनरल ट्रेडिंग कम्पनी को मार्च 2013 से अक्टूबर 2016 के बीच मॉस्को मिरर नेटवर्क संस्थाओं के ज़रिए 49.78 मिलियन डॉलर की रक़म मिली थी. इसके साथ ही मज़ाका ने सिंगापुर की 'आस्क ट्रेडिंग पीटीइ' नाम की एक कंपनी से भी लेनदेन किया था.

यहां रोचक यह भी है कि ओएफएसी ने आतंकवादियों को ग़ैरक़ानूनी पैसा पहुँचने वाली 'खनानी मनी लॉन्ड्रिंग ऑर्गेनाइज़ेशन' की मदद करने की वजह से मज़ाका को प्रतिबंधित कर दिया था.

खनानी और मज़ाका की कहानी में भारतीय कड़ियाँ जुड़ती नज़र आती हैं. लीक दस्तावेज़ों के अनुसार न्यूयॉर्क के जेपी मॉर्गन और सिंगापुर के ओवरसीज़ बैंक के साथ साथ बैंक ऑफ़ बड़ौदा की दुबई शाखा का इस्तेमाल भी मज़ाका जनरल ट्रेडिंग और आस्क ट्रेडिंग पीटीइ के बीच लेन-देन के लिए हुआ था.

इसके अलवा मज़ाका जनरल ट्रेडिंग के खातों की तहक़ीक़ात करने पर नई दिल्ली की 'रंगोली इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड' का नाम सामने आता है. कपड़ों के थोक व्यवसाय में लगी इस कंपनी की स्थापना 2009 में हुई थी.

फ़िनसेन फ़ाइलों में रंगोली इंटरनेशनल के नाम के आगे तक़रीबन 70 लेन-देन दर्ज हैं जो का पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, विजया बैंक और ऑरिएंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स जैसे कई भारतीय बैंकों से होती हुई यूएई पहुँचती थी.

17 जगहों से चल रही इस हेरा-फेरी का आँकड़ा 10.65 मिलियन डॉलर तक जाता है. इसमें एक महत्वपूर्ण लेनदेन 18 जून 2014 को किया गया था जब मज़ाका जनरल ट्रेडिंग को पंजाब नेशनल बैंक के ज़रिए 136,254 डॉलर भेजे गए.

रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़ (आरओसी) के दस्तावेज बताते हैं कि मार्च 2014 के आसपास रंगोली इंटरनेशनल के मुनाफ़े में भारी गिरावट दर्ज की गई थी. इस वक़्त 339.19 करोड़ के राजस्व पर कंपनी ने 74.87 करोड़ रुपए का नुक़सान उठाया था. 2015 के बाद से कंपनी ने आज तक न ही शेयरहोल्डरों की सालाना बैठक बुलाई है और न ही अपनी सालाना बैलेंस शीट ही जमा की है.

कई भारतीय बैंकों ने रंगोली की चूकों पर अलर्ट भी जारी किए हैं. भारतीय यूनियन और कॉर्पोरेशन बैंकों ने वसूली के लिए रंगोली इंटरनेशनल की अचल सम्पत्ति की नीलामी के नोटिस तक जारी किए थे.

इलाहाबाद बैंक ने तो 2015 में ही इस कंपनी को अपने शीर्ष 50 नॉन परफॉर्मिंग एससेट्स की सूची में शामिल कर लिया था.

इंटरनेशनल कन्सोर्टियम ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) की ओर से संपर्क किए जाने पर अल्ताफ़ खनानी के वकील मेल ब्लैक ने कहा, "मिस्टर खनानी ने अपनी ग़लती मान ली है और उसकी लंबी सज़ा जेल में काट चुके हैं. इस दौरान वह अपने परिवार से अलग रहे और उनके भाई की मौत भी हो गई. उनके पास अब कोई पैसा नहीं बचा, सारे अकाउंट फ़्रीज़ कर दिए गए हैं और आगे ओएफ़एसी के ब्लॉक की वजह से उनके दोबारा पैसे कमाने की सारी गुंजाइश ख़त्म हो चुकी है. बीते पाँच सालों से वह किसी भी व्यापरिक गतिविधि में शामिल नहीं रहे हैं. वह आगे क़ानून को मानने वाले एक साधारण नागरिक का जीवन जीना चाहते हैं".

सम्पर्क करने पर रंगोली इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक लव भारद्वाज ने कहा, "2013 से 2014 के बीच के जिन 70 लेन-देन के बारे में आप पूछ रहे हैं, उनका हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं है इसलिए इस बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं होगा".

"हम कपड़ों में व्यापार में हैं और माल बेचने के बाद भुगतान की राशि का हमारे खातों में आना रूटीन बात है. 18 जून 2014 को पंजाब नेशनल बैंक के साथ हुए जिस ट्रांज़ैक्शन की आप बात कर रहे हैं, उसका कोई रिकॉर्ड हमारे पास मौजूद नहीं है. मज़ाका जनरल ट्रेडिंग और अल्ताफ़ खनानी के साथ न ही हमारा कोई व्यापारिक सम्बंध हैं और न ही हम उन्हें जानते हैं".(bbc)

श्रीलंका सुनिश्चित करेगा कि कोई भी देश हिंद महासागर पर हावी न हो: राजपक्षे
23-Sep-2020 10:40 AM (42)

संयुक्त राष्ट्र, 23 सितंबर (आईएएनएस)| श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने कहा है कि उनका देश हिंद महासागर में किसी भी देश को हावी होने देने के खिलाफ है।

मंगलवार को महासभा में रिकॉर्डेड भाषण में उन्होंने कहा, "हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से अहम जगह पर स्थित देश होने के कारण यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है कि हिंद महासागर के क्षेत्र में शांति बनाकर रखी जाए। वहां कोई भी देश किसी पर हावी न हो, न उसका फायदा उठाए। श्रीलंका तटस्थ विदेश नीति का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।"

उन्होंने कहा कि कई देशों के लिए आर्थिक तौर पर महत्वपूर्ण समुद्री लेन होने के कारण 'शक्तिशाली देशों' को हिंद महासागर की तटस्थता का समर्थन करना चाहिए और इसके कीमती समुद्री संसाधनों की रक्षा करनी चाहिए।

हालांकि चीन के कर्ज के जाल में फंसकर श्रीलंका हिन्द महासागर का एक रणनीतिक और अहम बंदरगाह हम्पानाकोटा चीन को सौंप चुका है।

2009 में हुए गृहयुद्ध के अंत में हजारों तमिल नागरिकों की हत्या के कारण संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार निकायों और अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने श्रीलंका की आलोचना की है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने श्रीलंका में हुए तमिलों की हत्या की जांच करने के लिए भी कहा लेकिन श्रीलंका ने इसका विरोध किया।

गोतबाया राजपक्षे ने मंगलवार को कहा, "संगठन की स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सदस्य देशों को संदिग्ध उद्देश्यों के जरिए राजनैतिक शिकार बनाना भी बंद होना चाहिए।"

तमिल टाइगर्स का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "श्रीलंकाई धरती से इसके खात्मे के बावजूद इस आतंकवादी संगठन का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बना हुआ है। वह अपनी निर्मम विचारधारा को आगे बढ़ा रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि कोई भी देश इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा जो अपनी हिंसक विचारधारा को फैला रहा है।"

अमेरिका में कोरोना से मौतें 2 लाख पार
23-Sep-2020 9:48 AM (30)

न्यूयॉर्क, 23 सितंबर (आईएएनएस)| अमेरिका में कोविड-19 के संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा मंगलवार को 200,000 को पार कर गया। यह आंकड़ा जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के सीएसएसई सेंटर ने जारी किया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र में कोरोना से अब तक 200,005 लोगों की मौत हो चुकी है।

सबसे ज्यादा न्यूयॉर्क में 33,092 और न्यूजर्सी में 16,069 मौतें हुई हैं। टेक्सास, कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में मौतों का आंकड़ा 13,000 को पार कर गया है।

महामारी के प्रभाव से बाहर निकली चीनी अर्थव्यवस्था
22-Sep-2020 7:38 PM (78)

बीजिंग, 22 सितम्बर (आईएएनएस)| चीनी राजकीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त में चीन में उपभोक्ता वस्तुओं की कुल खुदरा बिक्री 33 खरब 57 अरब 10 करोड़ युआन तक जा पहुंची, जो पिछले साल की समान अवधि से 0.5 प्रतिशत अधिक है। उपभोक्ता वस्तुओं की कुल खुदरा बिक्री की इस साल में पहली सकारात्मक वृद्धि बनी। सीएनबीसी ने रिपोर्ट जारी कर कहा कि चीनी उपभोक्ताओं के खर्च में बड़ा इजाफा होने से फिर एक बार जाहिर हुआ है कि चीनी अर्थव्यवस्था महामारी के प्रभाव से बाहर निकली है। वाशिंगटन टाइम्स ने रिपोर्ट जारी की कि चीनी लोग फिर से खर्च करने लगे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू खपत बढ़ने से चीन में आर्थिक पुनरुत्थान की एक अन्य बाधा दूर हो गयी है। पुनरुत्थान की शुरूआत में चीन का निर्माण उद्योग तेजी से बहाल होने लगा, लेकिन खपत की बहाली धीमी रही। लेकिन छह महीने बाद जबरदस्त पुनरुत्थान हुआ, और खपत तेजी से बढ़ने लगी।

अब चीन के विभिन्न क्षेत्रों में सामान्य जीवन बहाल हो चुका है। शॉपिंग मॉल, रेस्तरां और व्यायामशालाओं में फिर से भीड़ उमड़ने लगी है। चीन में सभी सिनेमाघर 20 जुलाई से फिर से खुल गये। शुरू में सिनेमाघर में उपस्थिति दर 30 प्रतिशत से कम होने का नियम था। लेकिन अगस्त के मध्य में सिनेमाघर में उपस्थिति दर 50 प्रतिशत तक उन्नत हो गयी। 25 सितंबर से उपस्थिति दर 75 प्रतिशत तक बढ़ायी जाएगी। 20 जुलाई से 20 सितंबर तक कुल 15 करोड़ लोगों ने सिनेमाघरों में फिल्में देखीं और बॉक्स ऑफिस की कमाई 5 अरब 41 करोड़ 60 लाख युआन की रही।

कोविड-19 महामारी से विश्व आर्थिक मंदी आयी। बहुत-से देशों में बेरोजारी दर काफी हद तक बढ़ी, ज्यादातर लोगों को आय नहीं मिल पायी। लेकिन चीन में कई महीनों तक आर्थिक पुनरुत्थान कायम है। इसे उदार नीति के कार्यांवयन से फायदा मिला है। देसी-विदेशी स्थिति में परिवर्तन के अनुसार चीन ने घरेलू आर्थिक चक्र को केंद्र बनाकर देसी-विदेशी आर्थिक चक्र को साथ में बढ़ाने का नया विचार पेश किया। यह बंद चक्र नहीं, बल्कि खुला चक्र है।

चीन में 1.4 अरब लोग रहते हैं और 40 करोड़ से अधिक मध्यम आय वर्ग हैं। चीन का बाजार विशाल है और मांग की बड़ी संभावना है। घरेलू बाजार का सकारात्मक चक्र बढ़ाना आर्थिक रणनीति बनाने में प्राथमिकता है। यह खुलेपन की नीति के विरुद्ध नहीं है। देसी-विदेशी चक्र को साथ में बढ़ाने से विकास में नयी गतिज ऊर्जा का समावेश होगी और नयी उम्मीद जगेगी।

(साभार--चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस