अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदें मंगलवार को कमजोर पड़ गईं, जब डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम "लाइफ सपोर्ट पर" है. ट्रंप ने ईरान के जवाब को खारिज करते हुए उसे "कचरा" बताया और कहा कि उन्होंने इसे पूरा पढ़ना भी जरूरी नहीं समझा. दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के चलते 7 अप्रैल से लागू संघर्षविराम पर खतरा मंडराने लगा है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं.
ईरान ने संघर्ष खत्म करने के लिए कई शर्तें रखी हैं, जिनमें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसकी संप्रभुता को मान्यता देना, युद्ध के नुकसान की भरपाई और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शामिल है. दूसरी ओर, अमेरिका चाहता है कि पहले लड़ाई रोकी जाए और बाद में परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दों पर बातचीत हो. इसी बीच, अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात को रोकने के लिए नए प्रतिबंध भी लगाए हैं.
संघर्ष का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति होती है. युद्ध के कारण यहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे तेल की कीमतें 104.50 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. वैश्विक आपूर्ति बाधित होने से ओपेक का उत्पादन भी दो दशक के निचले स्तर पर आ गया है. (dw.com/hi)


