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जम्मू-कश्मीर के ईंट भट्ठे में 90 मजदूर कैद, रिहाई की गुहार नहीं सुन रहा प्रशासन
12-Sep-2022 12:12 PM
जम्मू-कश्मीर के ईंट भट्ठे में 90 मजदूर कैद, रिहाई की गुहार नहीं सुन रहा प्रशासन

बंधुआ मजदूरी एक्ट, बाल श्रम कानून का उल्लंघन और लैंगिक शोषण हो रहा पर कार्रवाई नहीं हो रही  
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 12 सितंबर।
जांजगीर-चांपा और बलौदाबाजार के 90 मजदूर जम्मू कश्मीर के बडग़ांव जिले के एक ईंट भ_े में बंधक बना लिए गए हैं। उन्हें थोड़ा सा एडवांस देकर साल भर काम करने के लिए कहा जा रहा है। बच्चों से भी काम लिया जा रहा है और महिलाओं का शोषण हो रहा है। इनमें सभी अनुसूचित जाति के हैं। इन्हें छुड़ाने के लिए बडग़ांव के डिप्टी कमिश्नर और जांजगीर-चांपा जिले के अधिकारियों से संपर्क किया गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

देशभर में बंधुआ मजदूरों की रिहाई और पुनर्वास के लिए काम कर रहे संगठन दिल्ली की नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बांडेड लेबर (एनसीसीईबीएल) के संयोजक निर्मल गोराना ने इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इनमें 21 परिवारों के लोग हैं, जिनके साथ महिलाएं और बच्चे भी हैं। एक परिवार बलौदा बाजार का है, बाकी जांजगीर चांपा जिले से हैं। इन्हें चडूरा थाना क्षेत्र के मगरेपुरा गांव के 191 मार्का ईंट भट्ठे में जबरन काम कराने के लिए रोक कर रखा गया है।  

गोराना ने बताया कि उनके संगठन ने 9 सितम्बर को बडग़ाम डिप्टी कमिश्नर को शिकायत की थी। उन्होंने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। जांजगीर-चांपा जिले के कलेक्टर को भी 9 सितंबर को ई मेल किया गया था, परंतु प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।

बंधुआ मजदूर मायावती ने एनसीसीईबीएल को बताया है कि वे सभी अनुसूचित जाति के मजदूर हैं। मई 2022 में बडग़ाम जिले में उन्हें लाया गया। यहां हमें 10 हजार रुपये एडवांस देकर कर्ज में फंसा लिया गया। महिलाओं और बच्चों को साथ लेकर हमने दिन-रात काम किया और कर्ज उतार दिया। पर भ_े का मालिक हमसे 10 हजार रुपये के एवज  में सालभर काम कराना चाहता है। हमारे काम का कोई हिसाब नहीं दिया जा रहा है। मायावती ने 90 हजार ईंटें बनाईं, जिसकी मजदूरी 81 हजार रुपये हुई। चार माह में कुल 15 हजार रुपये का खर्च मिला, बाकी पैसे देने से मालिक मना कर रहा है। वह छत्तीसगढ़ वापस लौटना चाहती है। एक अन्य महिला सरस्वती देवी बंजारे ने बताया कि वह गर्भवती है और उसे हॉस्पिटल जाना होता है। पैसे नहीं होने के कारण नहीं जा पा रही है। मालिक उसे अस्पताल का खर्च नहीं देता है। मैं भ_े में काम नहीं करना चाहती, मुझसे जबरन काम लिया जा रहा है।

15 साल के एक बालक ने बताया कि उसने अपने परिवार के साथ मिलकर 1.30 लाख ईंट बनाई। 15 हजार रुपये एडवांस मिला था। चार माह में खर्च के लिए 25 हजार रुपये मिले। अब उनकी मजदूरी 1.17 हजार बच जाती है। इसे मांगने पर मालिक ने मारने की धमकी दी। इसलिए उसका भी परिवार घर वापस लौटना चाहता है किंतु मालिक व ठेकेदार भ_े से कहीं नहीं जाने दे रहे हैं। कार्तिकराम ने अब तक 1.32 लाख रुपये का काम कर लिया है किंतु मालिक मेहनत के एवज में मजदूरी का पैसा देने से मना कर रहा है। सुरेश गीतावारे ने कहा कि मजदूर महिलाओं के साथ लैंगिक अपराध हो रहे हैं। हमने पुलिस को भी बुलाया था, पर मालिक ने सब रफा-दफा कर दिया। पुलिस उल्टे पीडि़ता को धमकाकर चली गई। सुरक्षित स्थान न होने के कारण उनका परिवार वापस जाना चाहता है पर मुक्ति नहीं मिल रही।

एनसीसीईबीएल के संयोजक गोराना का कहना है कि छत्तीसगढ़ के इन मजदूरों का अंतर्राज्ज्यीय प्रवासी मजदूर कानून 1979 के तहत दोनों में से किसी भी राज्य ने पंजीयन नहीं किया है। एडवांस के रूप में कर्ज देकर मजदूरों से जबरन काम कराया जा रहा है। मजदूरों को आने जाने और रोजगार चुनने में स्वतंत्रता नहीं होने के कारण यह बंधुआ मजदूरी प्रथा उन्मूलन अधिनियम 1976 और संविधान के आर्टिकल 23 का भी उल्लंघन है। नाबालिग बच्चों से जबरन काम लेना, महिलाओं के साथ लैंगिक अपराध करना और अनुसूचित जाति के लोगों से अत्याचार का यह गंभीर मामला है। ठेकेदार और ईंट भ_ा मालिक के खिलाफ इन कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। गोराना ने कहा कि इन मजदूरों को मुक्त कराने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार तत्काल एक टास्क फोर्स गठित करे और उन्हें मुक्त कराकर न्याय दिलाए।

संगठन ने कहा कि अब तक उन्होंने छत्तीसगढ़ के अनेक मजदूरों को पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली जैसे राज्यों से मुक्त कराया है पर छत्तीसगढ़ सरकार ने किसी भी मुक्त बंधुआ मजदूर को पूरी तरह पुनर्वास की राहत नहीं दी है। इसकी वजह से ये फिर किसी ईंट भ_े या निर्माण के कार्य में लौट जाते हैं। खेतिहर मजदूरों को मौसमी कार्य देना चाहिए। इसके लिए मनरेगा का कारगर क्रियान्वयन होना चाहिए। सरकार बंधुआ मजदूरों को छुड़ाने के लिए टास्क फोर्स गठित करेगी तो एनसीसीईबीएल की टीम पूरा सहयोग करेगी।


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