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जर्मन राष्ट्रपति के आवास में सेक्स डॉल आर्ट पर छिड़ी बहस
13-Jun-2026 9:53 PM
जर्मन राष्ट्रपति के आवास में सेक्स डॉल आर्ट पर छिड़ी बहस

जर्मनी के राष्ट्रपति भवन ‘बेलव्यू पैलेस’ को मरम्मत के लिए बंद करने से पहले, वहां एक कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। इस प्रदर्शनी में सुर्खियां बटोरने वाली कांसे की मूर्ति के अलावा भी कई आधुनिक कलाकृतियां हैं।

 डॉयचे वैले पर एलिजाबेथ ग्रेनियर की रिपोर्ट - 

बेहद कामुक पोज में रखी गई हरे रंग की कांसे की यह कलाकृति, असल में एक जापानी सेक्स डॉल के धड़ की नकल है। अपनी इसी बनावट की वजह से यह कलाकृति मीडिया में खूब सुर्खियां बटोर रही है और सोशल मीडिया पर भी सबका ध्यान अपनी तरफ खींच रही है। अलेक्जेंड्रा बिर्केन की बनाई इस मूर्ति का नाम ‘ईवा’ है। यह वहां लगी कई आधुनिक कलाकृतियों में से बस एक है। यह पूरी प्रदर्शनी ‘बेलव्यू पैलेस’ में लगी है, जो जर्मनी के राष्ट्रपति और बड़े सरकारी समारोहों से जुड़ी एक बेहद खास और ऐतिहासिक राजनीतिक जगह है।

दो हफ्तों तक चलने वाली इस अनोखी (पॉप-अप) कला प्रदर्शनी का नाम ‘फ्राइराउम कुंस्ट’ (आर्ट एज फ्री स्पेस) रखा गया है, जो 13 से 28 जून तक चलेगी। प्रदर्शनी के उद्घाटन से पहले मीडिया से बात करते हुए जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रांक-वाल्टर श्टाइनमायर ने कहा, ‘हमें कला की जरूरत है। आजाद कला के बिना कोई भी लोकतंत्र खुद की कमियों को देखने और अपनी आलोचना करने की ताकत खो देता है। आजादी के बिना कोई भी कला, समाज के लिए अपनी अहमियत खो देती है।’

राष्ट्रपति की देखरेख में शहर की ‘एकेडमी ऑफ आर्ट्स’ की ओर से आयोजित की गई इस पॉप-अप प्रदर्शनी को एक तरह से बेलव्यू पैलेस से श्टाइनमायर को दी जाने वाली विदाई के तौर पर देखा जा सकता है। इस खास प्रदर्शनी के लिए बर्लिन की इस ऐतिहासिक इमारत को लगभग पूरी तरह खाली कर दिया गया है। बेलव्यू पैलेस में अब अगले आठ सालों तक मरम्मत का काम चलने वाला है। चूंकि, राष्ट्रपति श्टाइनमायर का दूसरा और आखिरी कार्यकाल अगले साल खत्म हो रहा है, इसलिए मरम्मत पूरी होने से पहले उनके यहां लौटने की कोई उम्मीद नहीं है। वे अब बर्लिन के सेंट्रल रेलवे स्टेशन के पास एक अस्थायी निवास में शिफ्ट होने जा रहे हैं।

लोकतंत्र को कलात्मक आवाज की जरूरत

इस आधुनिक कला प्रदर्शनी में वीडियो और ऑडियो इंस्टॉलेशन, फोटोग्राफी और ऑयल से बनी पारंपरिक पेंटिंग को शामिल किया गया है। इसका असली मकसद लोगों को लोकतंत्र, प्रतिनिधित्व, सत्ता के खेल और सार्वजनिक जीवन के बारे में सोचने को प्रेरित करना है। जर्मनी के संविधान ‘बेसिल लॉ’ में दी गई कला की आजादी, देश की कानूनी व्यवस्था में सबसे मजबूत मौलिक अधिकारों में से एक है।

इस इमारत के अंदर कदम रखने से पहले ही, महल की छत पर लगी क्रिस्टियान आवे की एक बहुत बड़ी कलाकृति दिखाई देती है, जिस पर ‘फ्राइराउम’ (यानी आजाद जगह) लिखा है। यह कलाकृति बाहर से ही संदेश देती है कि इस पूरी प्रदर्शनी का मुख्य मकसद कलाकारों की आजादी की वकालत करना है।

जैसे ही कोई इमारत के मुख्य हॉल (फॉयर) में कदम रखता है, उसे लगातार बार-बार गूंजती हुई ‘हैलो’ की आवाज सुनाई देती है। यह दरअसल कलाकार योखेन गैर्त्स द्वारा साल 1972 में किए गए एक परफॉर्मेंस आर्ट का हिस्सा है, जिसका नाम है ‘रूफेन बिस जुअर एरशॉप्फुंग’ यानी ‘थककर चूर हो जाने तक पुकारना।’

इस परफॉर्मेंस में, कलाकार ने एक खाली और शांत जगह में तब तक लगातार ‘हैलो’ कहा जब तक कि उसकी आवाज ने उसका साथ नहीं छोड़ दिया। इस कलाकृति को अपनी बात रखने या आवाज उठाने की सीमाओं पर एक टिप्पणी के रूप में देखा जा सकता है। खासकर, आज के ऐसे दौर में जहां सोशल मीडिया हर किसी को लगातार ध्यान खींचने की होड़ में धकेलता है। लोकतंत्र के नजरिए से देखें, तो जब देश के नागरिकों की पुकार अनसुनी रह जाती है, तो उनका गुस्सा और निराशा बढ़ती है, और यही निराशा आगे चलकर पूरे समाज को मानसिक रूप से थका देती है।

पेंटिंग में उकेरा ‘पहली महिला राष्ट्रपति’ का सपना

प्रवेश द्वार पर ही स्ट्रीट आर्टिस्ट ‘एल बोचो’ की बनाई एक पेंटिंग लगी है, जिसका नाम ‘डी बुंडेसप्रेसीडेंटिन’ यानी महिला राष्ट्रपति है। यह पेंटिंग एक ऐसी महिला की कल्पना करती है, जो जर्मनी की राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाल रही हो।

कलाकार कारीन जांडर ने राष्ट्रपति श्टाइनमायर का एक छोटा सा पुतला (मिनिएचर) तैयार किया है। उनकी बनाई यह 36 सेंटीमीटर ऊंची मूर्ति राजनीतिक भाषणों वाले कमरे में एक ऊंचे स्टैंड पर रखी गई है।

इसी बीच, ‘ईवा’ नाम की वह विवादित कांसे की मूर्ति यहां आने वाले लोगों को शरीर, जेंडर, सेक्सुअलिटी और महिलाओं को एक वस्तु की तरह देखे जाने जैसे गंभीर मुद्दों पर सोचने को मजबूर करती है। जब राष्ट्रपति भवन जैसे बेहद औपचारिक सरकारी माहौल में निजी और अंतरंग विषय पर बनी कलाकृति को प्रदर्शित किया जाता है, तो वह अजीब सा तनाव पैदा करता है। यह बात समाज में इंसानी शरीरों के प्रदर्शन, उनकी नुमाइंदगी और उन पर समाज के नियंत्रण को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

18वीं सदी का बेलव्यू पैलेस साल 1994 में आधिकारिक तौर पर जर्मनी के राष्ट्रपति का निवास स्थान बना18वीं सदी का बेलव्यू पैलेस साल 1994 में आधिकारिक तौर पर जर्मनी के राष्ट्रपति का निवास स्थान बना

इस प्रदर्शनी में कुछ और भी बहुत मशहूर कलाकारों की कलाकृतियां शामिल हैं, जैसे काथारीना ग्रोसे, वोल्फगांग टिलमन्स और मोनिका बोनविचिनी। 18वीं सदी का बेलव्यू पैलेस, कभी प्रशिया के शाही परिवार का महल हुआ करता था। यह साल 1994 में आधिकारिक तौर पर जर्मनी के राष्ट्रपति का निवास स्थान बना।

आम तौर पर, राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास में आम लोगों को जाने की इजाजत नहीं होती है। इसलिए, इस प्रदर्शनी को इमारत के अंदर की झलक पाने के एक दुर्लभ मौके के तौर पर भी देखा जा रहा है। पिछले महीने जब 35,000 फ्री टिकटों की बुकिंग के लिए वेबसाइट खुली, तो कुछ ही घंटों में वह क्रैश हो गई। फिलहाल, इस शो के सारे टिकट पूरी तरह बिक चुके हैं, लेकिन अगर कुछ लोग अपनी बुकिंग रद्द कराते हैं, तो आखिरी समय पर कुछ स्लॉट खाली हो सकते हैं। (dw.com/hi)


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