विचार / लेख
-डॉ. संजय शुक्ला
देश में इन दिनों परीक्षाओं पर सबसे बड़ा सवालिया निशान लग रहा है जिसके चलते जहां छात्र और अभिभावक उद्वेलित हैं वहीं इस मुद्दे पर सियासी पारा भी सरगर्म है। बीते दिनों राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ‘एनटीए’ द्वारा ली गई ‘नीट- यूजी 2026’ परीक्षा रद्द होने का मामला शांत ही नहीं हुआ था कि देश के विभिन्न यूनिवर्सिटीज में प्रवेश के लिए 30 मई को आयोजित ‘सीयूईटी-यूजी’ परीक्षा तकनीकी खामियों की वजह से घंटों बाधित रही। इस तकनीकी अव्यवस्था से जहां ‘एनटीए’ की खूब फजीहत हुई वहीं छात्रों में बेचैनी रही। इधर एनटीए की परीक्षा पर पूरे देश में छात्रों और युवाओं के बीच आक्रोश और आशंका का ज्वार उफान पर था कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ‘सीएसईबी’ के 12वीं परीक्षा के उत्तर पुस्तिकाओं के ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम ‘ओएमएस’ में भारी पैमाने पर गड़बडिय़ों का भांडा फूट गया। सीबीएसई शुरुआत में किसी भी तकनीकी गड़बड़ी से इंकार करते रहा लेकिन जैसे - जैसे सबूत सामने आने लगे तब सरकार ने भी स्वीकार किया कि मूल्यांकन में तकनीकी गड़बडिय़ां हुई है। अलबत्ता सरकार ने ‘ओएसएम’ प्रणाली में हुई चूक तथा इसके लिए कंपनियों ‘वेंडर्स’ चयन में टेंडर प्रक्रिया में हुई कथित विसंगतियों के चलते सरकार ने सीएसईबी के चेयरमैन और सचिव को हटाते हुए मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति गठित कर दिया है।
गौरतलब है कि सीबीएसई की 12 वीं की परीक्षा में इस साल तकरीबन 17 लाख छात्र शामिल हुए थे। इस परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच हाहाकार मच गया क्योंकि उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले थे। इसी के चलते देश भर के चार लाख छात्रों ने कापियों को दोबारा जांचने के लिए आवेदन किया है। छात्रों के मुताबिक उन्हें जो स्कैनिंग कॉपी दी गई वह या तो दूसरे छात्र का था अथवा उसमें से कुछ पन्ने गायब थे। छात्रों का यह भी कहना था कि स्कैनिंग कॉपी साफ नहीं है अथवा यह कई पन्ने कटे हुए हैं लिहाजा ‘ओएमएस’ पर सवाल उठना लाजिमी था। इधर सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि री- इवैल्यूएशन ( कापियों की दोबारा जांच) के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की कापियां फिर से जांची जाएंगी। सरकार के इस फैसले के बाद बोर्ड द्वारा री- इवैल्यूएशन पोर्टल शुरू किया गया है जिसमें हजारों छात्रों ने आवेदन जमा किया है जिसके आंकड़े लाखों तक पहुंचने की उम्मीद है।
दूसरी ओर बात आगामी 21 जून को दोबारा ली जाने वाली नीट परीक्षा की करें तो सरकार इस दिशा में में बेहद चाक- चौबंद नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट में एनटीए को भंग करने संबंधी याचिका की सुनवाई के दौरान एनटीए को नसीहत दिया है कि उसे यूपीएससी से सीखने की जरूरत है वहां कभी भी पेपर लीक नहीं होता। अदालत ने यह भी कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रूकेंगी। इधर केंद्र सरकार ने सुप्रीम अदालत को बताया है कि इस मामले की निगरानी स्वयं प्रधानमंत्री कर रहे हैं। इधर केंद्र सरकार की एक उच्च स्तरीय बैठक में दोबारा ली जाने वाली नीट के प्रश्नपत्रों के प्रिंटिंग प्रेस से परीक्षा केंद्रों तक अत्यंत सुरक्षित और त्वरित डिलीवरी का जिम्मा वायुसेना को सौंपने का प्रस्ताव किया गया है। यदि इस प्रस्ताव पर अमल होता है तब यह देश के इतिहास में पहला मौका होगा जब किसी परीक्षा को फूल प्रूफ कराने के लिए एयरफोर्स के लॉजिस्टिक हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया हो।
गौरतलब है कि बीते 3 मई को ली गई नीट में लगभग 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे जिन्होंने सालों से दिन-रात मेहनत किया था लेकिन एक झटके में उनके मेहनत पर पानी फिर गया। इधर नीट रद्द होने को लेकर देश भर में छात्रों और युवाओं का ग़ुस्सा उबाल पर है और राजस्थान सहित अन्य राज्यों में उग्र प्रदर्शन हुए हैं। आक्रोशित छात्रों का सरकार से सवाल है कि, कुछ लोगों की गलती का सजा लाखों बच्चों को क्यों दिया जा रहा है? छात्रों का यह सवाल पूरी तरह से जायज है। दूसरी ओर नीट रिटेस्ट के चलते अनेक छात्र मानसिक दबाव में हैं इन छात्रों का सिस्टम से भरोसा उठ चुका है। अनेक मनोरोग विशेषज्ञों के अनुसार उनके पास रोज लगभग दर्जन भर नीट के बच्चे आ रहे हैं जिनमें अवसाद के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। ऐसे बच्चों को तुरंत काउंसलिंग की जरूरत है इस दिशा में अभिभावकों को सचेत होना होगा।
बहरहाल मेडिकल दाखिला परीक्षा में पेपर लीक, नकल और फर्जीवाड़े की यह कोई पहली घटना नहीं है बल्कि कालांतर में भी इस प्रकार के अनेक घोटाले हुए हैं। साल 2024 के नीट परीक्षा परिणाम पर छात्रों और अभिभावकों की उंगलियां उठीं थी तब मामला सडक़ से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। देश आज भी मध्यप्रदेश में 2013 में हुआ व्यापम घोटाले को नहीं भूला है। छत्तीसगढ़ में साल 2011का पीएमटी पर्चा लीक कांड, उत्तरप्रदेश में 2021 का आयुष घोटाला इन परीक्षाओं की पवित्रता की पोल खोल रहे हैं। बहरहाल जिस तरह से साल दर साल नीट के पर्चे फूट रहे हैं और अनियमितता उजागर हो रही है उससे यह निश्चित है कि ‘नीट’ पूरी तरह से ‘क्लीन’ नहीं है। दूसरी ओर इस परीक्षा में अनियमितता और अनिश्चितता के चलते जहां केंद्र सरकार की किरकिरी हो रही है वहीं ‘एनटीए’ के साख पर भी पलीता लग रहा है। लिहाजा केंद्र सरकार और एनटीए को परीक्षा को ‘फूल प्रूफ’ बनाने की दिशा में गंभीरता और दृढ़ इच्छाशक्ति प्रदर्शित करने की दरकार है।
दरअसल नीट सहित अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधलियों के मूल में मुख्य रूप से राजनीतिक हस्तक्षेप, कोचिंग माफियाओं की रसूख , धनबल का बढ़ता प्रभाव और विलंबित जांच और न्याय प्रक्रिया ही जिम्मेदार है। देश में अभी तक हुए मेडिकल घोटालों पर गौर करें तो इस मामले में संलिप्त बड़ी मछलियां आजाद हैं जबकि छोटे-मोटे कर्मचारी और अभ्यर्थी ही पकड़ में हैं।अतीत में हुए परीक्षा घोटाले के मामले आज भी अदालतों और जांच एजेंसियों के दफ्तरों में धूल खाते पड़े हैं। सरकार और एजेंसी इन परीक्षाओं की शुचिता और गोपनीयता पर कितना संजीदा है? इसका अंदाजा फाइलों में दफन नीट- यूजी 2024 पेपर लीक मामले को लेकर गठित डॉ. राधाकृष्णन समिति की उस रिपोर्ट से लगाई जा सकती है जिसमें उन्होंने नीट को ‘पेन एंड पेपर टेस्टिंग’ की जगह ‘कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग’ ‘सीबीटी’ मोड पर लेने की सिफारिश किया था। अलबत्ता अब जाकर सरकार ने फैसला किया है कि अगले साल से नीट ऑनलाइन ली जाएगी जो मेहनती छात्रों के लिए राहत भरी खबर है।
विडंबना है कि है कि परीक्षाओं में धांधलियों के बलबूते मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्र अब डॉक्टर बन चुके हैं। अहम सवाल यह कि घोटालों के बलबूते मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्र बतौर डॉक्टर व्यवसायिक और नैतिक रूप से कितना काबिल, दक्ष और संवेदनशील होगा? सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के नीट परीक्षा में हुई कथित धांधली पर एनटीए के वकीलों से कहा था कि सिस्टम की खामियों का लाभ लेकर डॉक्टर बनने वाले लोग समाज के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। वर्तमान परिदृश्य पर गौर करें इन दिनों चिकित्सा जैसे मुकद्दस पेशे में व्यवसायिक कदाचार की खबरें आम है। यह कहना गैर मुनासिब नहीं होगा कि भर्ती परीक्षाओं में जारी धांधली और आर्थिक कदाचरण के चलते व्यवसायिक शुचिता और नैतिकता पर सबसे बड़ा सवालिया निशान लगाया है। आज चिकित्सा से लेकर सरकारी नौकरी सेवा नहीं बल्कि अर्थ उपार्जन और भ्रष्टाचार का जरिया बन चुका है जो देश और समाज के लिए बड़ी चुनौती है।
उपरोक्त विसंगतियों के मद्देनजर अहम सवाल यह कि भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे मामले उन लाखों मेहनती और ईमानदार युवाओं के भविष्य पर कुठाराघात नहीं है जो अपनी मेहनत और लगन के बलबूते इन परीक्षाओं में सफलता के लिए सालों से जुटे रहते हैं? क्या इन परीक्षाओं में धांधली उन अभिभावकों के सपनों को चकनाचूर नहीं कर रहा है जो परिवार का पेट काटकर अपने बच्चों को बड़े शहरों में महंगी कोचिंग दिलाते हैं?शायद इन सवालों का जवाब सरकार, सियासतदानों, अदालतों और जांच एजेंसियों के भी पास नहीं है। संसद के संसदीय समिति के रिपोर्ट के अनुसार 2024 में एनटीए द्वारा ली गई 14 परीक्षाओं में से 5 परीक्षाएं विवादों और अनियमितता से प्रभावित रही। एक अन्य जानकारी के मुताबिक देश में इंजीनियरिंग, मेडिकल, बोर्ड और विभिन्न सरकारी नौकरियों के लिए ली गई 89 परीक्षाओं में पेपर लीक हुआ है अथवा इनमें गड़बडिय़ों के आरोप लगे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बडिय़ों के बाद 48 बार दोबारा परीक्षाएं लेनी पड़ी।?
बिलाशक जब परीक्षाओं के गोपनीयता और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा हो जाए तो यह छात्रों और युवाओं के लिए त्रासदीपूर्ण है। गौरतलब है कि वर्तमान गलाकाट प्रतिस्पर्धा के दौर में अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी कोचिंग दिलाने के लिए अपने खर्च में कटौती कर अथवा कर्ज लेकर अनजान शहर भेज रहा है। वहीं बच्चे भी अपने पालकों की अपेक्षाएं पूरी करने इस अनजान शहर में जी-तोड़ मेहनत करते हैं। सालों मेहनत करने के वाला छात्र नीट की परीक्षा सफलतापूर्वक देने के बाद डॉक्टर बनने का सपना पाले निश्चिंत हो जाता हैं लेकिन जब उस छात्र को पता चलता है कि यह उसका अंतिम इम्तिहान नहीं था! तब उस छात्र के मनोदशा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
विचारणीय है कि केंद्र सरकार ने विभिन्न राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा ली जाने वाली मेडिकल, इंजीनियरिंग सहित अन्य नौकरियों में भर्ती के लिए ली जाने वाली भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और शुचिता कायम रखने के लिए केंद्र सरकार ने साल 2024 में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) विधेयक 2024 पारित किया है। इस कानून का उद्देश्य एनटीए, यूपीएससी और एसएससी द्वारा प्रोफेशनल कोर्सेज और नौकरियों में भर्ती के लिए ली जाने वाली परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी गड़बडिय़ों को रोकना है। छत्तीसगढ़ समेत अनेक राज्यों ने भी अपने राज्य के प्रवेश और नौकरी भर्ती परीक्षाओं के लिए इस कानून को लागू किया है।
कानून के तहत भर्ती परीक्षाओं में किसी भी तरह के अनुचित साधनों के उपयोग करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कारावास और आर्थिक दंड का प्रावधान है। इस कानून के तहत दोषी व्यक्तियों को 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। इस कानून के लागू होने के बाद यह उम्मीद बंधी थी कि प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक जैसे मामलों पर अंकुश लगेगी। लेकिन इस कानून के लिए बावजूद साल दर साल दाखिला परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटना बताती है कि घोटालेबाजों को इस कानून की कोई परवाह नहीं है। अलबत्ता अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं पर उठ रहे उंगलियों के मद्देनजर पेपर लीक मामले में संलिप्त आरोपितों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चला कर उन्हें कठोरतम सजा दी जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके अलावा इस मामले में संलिप्त छात्रों और उनके अभिभावकों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि परीक्षा की शुचिता और विश्वसनीयता कायम रहे।


