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भारत के पास कितना सोना है, और किस-किस देश के पास भारत से ज्यादा सोना है?
17-Apr-2026 9:23 PM
भारत के पास कितना सोना है, और किस-किस देश के पास भारत से ज्यादा सोना है?

-सईदुज्जमां

गोल्ड यानी सोना काफी लंबे वक़्त से ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम का हिस्सा रहा है। इसे अनिश्चितता से बचाव और संपत्ति को अलग-अलग रूप में रखने का तरीका माना जाता है।

भारत में सोना घरेलू बचत और खर्च का अहम हिस्सा है, इसलिए यह दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है।

हाल के हफ्तों में सोने की कीमतों में गिरावट आई है। रॉयटर्स के मुताबिक, 28 फरवरी से अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद सोना 10 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है।

पिछले हफ्ते, एक लेख में शशि थरूर ने कहा कि, ‘भारत में गोल्ड यानी सोने की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन उत्पादन अभी भी बहुत कम है।’

भारत में गोल्ड की स्थिति

लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के पास असल में कितना सोना है?

हमने यह सवाल इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद के इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर की प्रमुख प्रोफेसर सुंदरावल्ली नारायणस्वामी से पूछा।

उन्होंने बीबीसी से कहा, ‘कई तरह के आंकड़े हैं, कुछ सही हैं और बाकी अनुमान हैं। आरबीआई के पास करीब 800-820 टन सोना है। आर्थिक रूप से निकाला जा सकने वाला सोना करीब 70-80 टन है।’

आर्थिक रूप से निकाला जा सकने वाला सोना वह होता है जिसे मौजूदा तकनीक से फायदे के साथ माइन किया जा सके, यानी निकाला जा सके।

प्रोफेसर सुंदरावल्ली कहती हैं, ‘भारत में अच्छी गुणवत्ता वाला सोना कम है, इसलिए यहां खनन प्रतिस्पर्धी नहीं है।’

उन्होंने कहा कि, ‘भारतीय घरों में बहुत सारा सोना है। घरों में मौजूद सोने को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं, लेकिन आमतौर पर इसे 25 हज़ार से 27 हज़ार टन माना जाता है।’ जब उनसे इस आंकड़े का आधार पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य अनुमान है, जिसे ज्य़ादातर लोग मानते हैं।

उन्होंने कहा कि, ‘हर साल 600 से 700 टन सोना आयात होता है और निर्यात बहुत कम है, इसलिए यह सोना घरों में जमा हो गया है।’

भारत से आगे कितने देश?

वल्र्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, फरवरी 2026 तक भारत के पास करीब 880 टन आधिकारिक सोना था।

इस मामले में भारत दुनिया में नौवें स्थान पर है। अमेरिका, जर्मनी, आईएमएफ, इटली, फ्रांस, रूस, चीन और स्विट्जऱलैंड भारत से आगे हैं।

हालांकि, आधिकारिक भंडार भारत की सोने की कहानी का केवल एक हिस्सा हैं।

थरूर ने अपने लेख में कहा कि, ‘हमारे पास करीब 500 मिलियन टन गोल्ड ओर यानी सोने का अयस्क(यानी वह पत्थर/मिट्टी जिसमें सोना होता है) है, लेकिन उत्पादन बहुत कम है।’

नेशनल मिनरल इन्वेंटरी के मुताबिक देश में कुल 518।23 मिलियन टन सोने का अयस्क है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सारा सोना आसानी से निकाला जा सकता है। इसमें से 494।50 मिलियन टन निकालना मुश्किल है, जबकि 23।72 मिलियन टन को रिज़र्व माना जाता है।

बचा हुआ संसाधन उसे कहा जाता है, जहां सोना हो सकता है, लेकिन उसे निकालना महंगा और मुश्किल है। वहीं रिजर्व उसे कहा जाता है, जहां से सोना निकालना किफायती और फायदे का सौदा है।

प्राइवेट कंपनियां निवेश क्यों नहीं करना चाहती

प्रोफ़ेसर सुंदरावल्ली नारायणस्वामी के मुताबिक, ‘यह 500 मिलियन टन सोने का अयस्क है, असली सोना नहीं है। औसतन 1-3 ग्राम प्रति टन के हिसाब से इसमें सिर्फ 500-600 टन सोना होगा।’

इंडियन मिनरल्स ईयरबुक 2024 के मुताबिक, 2023-24 में भारत ने सिर्फ 1.6 टन सोने का उत्पादन किया। जबकि दुनिया में साल 2023 में करीब 3,300 टन सोना निकला, जिसमें चीन ने अकेले 375 टन उत्पादन किया।

भारत की क्षमता और उत्पादन के बीच अंतर कई वजहों से है। सोने की खदानों की खोज करना महंगा और जोख़िम भरा है। सरकार के पास सीमित संसाधन और तकनीक है, और निजी कंपनियां भी बिना पक्के सबूत के निवेश नहीं करना चाहतीं।

संतोष मल्होत्रा यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ के सेंटर फ़ॉर डेवलपमेंट में विजिटिंग प्रोफेसर हैं, वे जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर भी रह चुके हैं। प्रोफेसर संतोष ने बीबीसी से कहा, ‘माइनिंग यानी खनन एक महंगा काम है। इसमें लोगों और तकनीक पर बड़ा निवेश चाहिए, जो सरकार के पास नहीं है। निजी कंपनियां भी तभी आती हैं जब उन्हें भरोसा होता है।’

 

भारत आयात पर ज़्यादा निर्भर

कम उत्पादन की वजह से भारत आयात पर निर्भर है। साल 2023-24 में देश ने करीब 3,600 टन कच्चा सोना और 795 टन सोना आयात किया।

अब बात आती है सबसे बड़े हिस्से, यानी भारतीय घरों में मौजूद सोने की।

एसोचैम के मुताबिक भारतीय घरों में करीब 24 हज़ार टन सोना है, जो दुनिया में सबसे ज़्यादा है। भारत में सोना हमेशा से बचत का पसंदीदा तरीका रहा है।

प्रोफेसर सुंदरावल्ली के मुताबिक यह कम अनुमान है और असली संख्या इससे ज्यादा हो सकती है।

कीमत के हिसाब से घर में मौजूद सोने का भंडार बहुत बड़ा है। मॉर्गन स्टैनली के मुताबिक भारतीय घरों में करीब 3।8 ट्रिलियन डॉलर का सोना है, जो देश की जीडीपी का करीब 88।8 फीसदी है।

सोने की खपत के लिहाज से, एमएमटीसी-पीएएमपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और सीईओ समित गुहा ने बीबीसी से कहा, ‘भारत ने 2025 में 710.9 टन सोने की खपत की, जो 2024 के 802.8 टन से 11 फीसदी कम है, लेकिन असली मायने रखने वाला आंकड़ा मूल्य के लिहाज से है। मांग 30 फीसदी बढक़र 7,51,490 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जो एक रिकॉर्ड है।’

सोना खरीदने के तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। गुहा ने कहा, ‘उपभोक्ता सोने से पीछे नहीं हट रहे हैं, वे ऐसे विकल्पों की ओर जा रहे हैं जो उन्हें प्रति रुपये अधिकतम धातु मूल्य दें।’ इसका मतलब है कि अधिक लोग अब गहनों की बजाय बार और सिक्के खरीद रहे हैं।

गुहा के अनुसार, गहनों की मात्रा 24 फ़ीसदी घटकर 430,5 टन रह गई, जबकि बार और सिक्कों की मांग 17 फीसदी बढक़र 280.4 टन हो गई, जो एक दशक से अधिक समय में निवेश की सबसे मजबूत मांग है।

सोना अहम क्यों है

हाल के सालों में दुनियाभर के केंद्रीय बैंक सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के समय सोना सुरक्षित माना जाता है। सोना देश की अर्थव्यवस्था और मुद्रा को भी प्रभावित करता है।

अगर कोई देश ज्यादा सोना निर्यात करता है तो उसकी मुद्रा मजबूत होती है। लेकिन भारत ज़्यादा आयात करता है, इसलिए जब क़ीमत बढ़ती है तो रुपये पर दबाव आता है।

सोना किसी देश की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है और इसका सीधा असर उसकी मुद्रा पर पड़ता है।

किसी देश की आय का एक बड़ा हिस्सा उस देश में उत्पादित या निर्मित वस्तुओं के व्यापार से आता है। इसका मतलब है कि किसी देश के प्रमुख निर्यात, अन्य देशों से होने वाले आयात की तुलना में अधिक राजस्व पैदा करते हैं।

यही सिद्धांत सोने के निर्यात और आयात पर भी लागू होता है। यदि कोई देश अधिक सोना निर्यात करता है, तो उसकी मुद्रा भी मजबूत होती है। हालांकि, भारत सोने का एक बड़ा आयातक है, इसलिए जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत बढ़ती है, भारतीय रुपये का मूल्य घट जाता है।

कुल मिलाकर भारत का सोना तीन हिस्सों में बंटा है। ये है सरकारी भंडार, सोने की खदान, और घरों में रखा सोना।

असल में भारत का ज्यादातर सोना सरकार या खदानों में नहीं, बल्कि लोगों के पास है। इसी वजह से भारत की अर्थव्यवस्था में सोना खास है।

यह सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि लोगों के लिए बचत और सुरक्षा का अहम साधन है। (bbc.com/hindi)


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