खेल
-विमल कुमार
तीसरे वन-डे से पहले टीम इंडिया जब पोर्ट ऑफ स्पेन के क्वींस पार्क ओवल में पहुंची तो शुभमन गिल सबसे पहले बस से उतरे. मैच की पूर्व संध्या पर मीडिया से बातचीत के लिए टीम मैनेजमेंट ने उन्हें ही आगे किया.
गिल ने आते ही इस लेखक से सवाल किया कि ऐसा क्यों है कि जब भी हमारी टीम मैदान में आती है तो बारिश होने लगती है.
मैंने जवाब में कहा कि ये सिर्फ़ महज़ इत्तेफ़ाक ही है कि जब तक 2-3 घंटे टीम इंडिया मैदान में रहती है तब तक बारिश रुकने का नाम ही नहीं लेती है और जैसे ही टीम इंडिया अपने होटल की तरफ रुख़ करती है, कड़ी धूप खिल जाती है.
ये सुनकर गिल खिलखिलाकर हंस पड़ते हैं. उनकी हंसी में एक मासूमियत है. आईपीएल के दौर में अब शायद ही कोई 22 साल का युवा खिलाड़ी पैसे और ग्लैमर की चकाचौंध में अपनी मासूमियत को बरकरार रख पायेगा.
लेकिन, गिल तो हटकर हैं. उनके चलने के, बात करने के और ज़ाहिर सी बात है खेलने के तरीके़ को लेकर ये साफ़ है कि वो कोई मामूली खिलाड़ी नहीं हैं.
मामूली नहीं है तभी तो कोच राहुल द्रविड़ ने चयनकर्ताओं से गुज़ारिश की कि वेस्टइंडीज़ दौरे पर शिखर धवन का साथ देने के लिए उन्हें गिल की ज़रूरत है.
द्रविड़ ने गिल को अंडर 19 और इंडिया ए के दौरों पर बेहद करीब से देखा है लेकिन उनके साथी और बल्लेबाज़ी कोच विक्रम राठौढ़ ने पंजाब के इस खिलाड़ी को बचपन से देखा है.
यही वजह है कि गिल हर दिन अभ्यास सत्र में राठौड़ से क्रिकेट और तकनीक के बारे में चर्चा करते हुए अक्सर मैदान में या नेट्स सेशन में दिख जाते हैं.
कप्तान शिखर धवन ने जैसे ही 3-0 से वेस्टइंडीज़ को हराकर ट्रॉफ़ी जीती तो उन्होंने गिल को ही बुलाया और कहा कि वो युवा खिलाड़ियों के साथ अपनी और टीम की फोटो लें.
लेकिन, यहां भी गिल बहुत ज़्यादा उत्साहित होने और उछलने-कूदने और चीखने -चिल्लाने की बजाए बेहद आराम से ट्रॉफ़ी अपने साथियों को थमाते दिखे. ऐसा लगा मानो गिल को इस बात का आभास है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी महानता का दौर इस वेस्टइंडीज़ दौरे से शुरू हो रहा है.
वेस्ट इंडीज़ बनाम भारत - वनडे सीरिज़
लाइन
पहला वनडे, 22 जुलाई
भारत तीन रन से जीता ( भारत 308/7, वेस्ट इंडीज़ 305/6)
दूसरा वनडे, 24 जुलाई
भारत दो विकेट से जीता (वेस्ट इंडीज़ 311/6, भारत 312/8)
तीसरा वनडे, 27 जुलाई
लेकिन, मैन ऑफ द सीरीज़ बनने वाले गिल इकलौते नहीं हैं जिन्होंने इस सीरीज़ में अपनी छाप छोड़ी है. ऐसा बहुत कम होता है जब टीम के हर खिलाड़ी ने अपना योगदान दिया. टीम तो जीती है साथ ही खिलाड़ियों ने अपना निज़ी खेल भी काफी बेहतर किया.
अब आप देखिये, किसने सोचा था कि अक्सर टेस्ट क्रिकेट में रन देने वाले और आईपीएल में बहुत ज़्यादा पिटाई खाने वाले मोहमम्द सिराज़ खुद को सफेद गेंद में एक बेहतरीन विकल्प के तौर पर पेश करेंगे.
आलम ये रहा कि जब सीरीज़ ख़त्म होने के बाद वेस्टइंडीज़ के कोच फिल सिमंस से मैंने ये सवाल पूछा कि आखिरी दोनों टीमों के बीच कौन-सी बात सबसे बड़ा अंतर थी तो उन्होंने पलक झपकते ही सिराज और गिल का नाम लिया.
अगर सिराज़ ने युवा तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर प्रभावित किया तो शार्दुल ठाकुर ने इस सीरीज़ में वही किया जो वो पिछले कुछ सालों से करते आ रहें हैं. जब हर कोई उनकी रफ़्तार को लेकर हल्के में लेने की कोशिश करता है तो वो बवाल मचा देते हैं.
वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले ठाकुर ने भी खुद को वन-डे क्रिकेट में एक बेहतरीन विकल्प के तौर पर पेश किया है.
इस सीरीज़ के अन्य सितारे
इसके अलावा इस सीरीज़ की सबसे बड़ी खोज रहे हैं दीपक हुड्डा. धवन ने हमें बताया कि कैसे टीम मैनजमेंट धवन से हर मैच में 7-8 ओवर तक फिकवाने की रणनीति पर सोच रही है क्योंकि उनमें योग्यता है. हुड्डा ने पारी में पांच विकेट लिये और कोई अर्धशतक नहीं लगाया लेकिन उन्होंने अपने लिए इस सीरीज़ से काफ़ी कुछ हासिल किया.
आपको सूर्यकुमार यादव के फॉर्म से थोड़ी मायूसी हो सकती है लेकिन शुक्रवार से तो पांच मैचों की टी20 सीरीज़ का आगाज़ हो रहा है और आप ये मानकर चल सकते हैं कि वहां सूर्या का बल्ला चलेगा क्योंकि इंग्लैंड में उन्होंने अकेले अपने बूते मैच जिताये थे.
प्रसिद्ध कृष्णा भी इंग्लैंड के बाद वेस्टइंडीज़ में जूझते दिखे लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि वो ऑस्ट्रेलिया में होने वाले वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के लिए एक्स-फ़ैक्टर साबित हो सकते हैं.
अब तो पैड़ी अप्टन ने भी द्रविड़ के कहने पर भारतीय क्रिकेट में दोबारा शुरुआत की है. अपटन के लिए पहला मैच जीत से शुरू हुआ है.
लेकिन, कुल मिलाकर देखा जाए तो टीम इंडिया ने कैरिबियाई टीम को आखिरी मैच में बुरी तरह से हराकर उनके लिए भी एक सबक छोड़ दिया है. (bbc.com)


