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बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह में पीवी सिंधु को भारतीय दल का ध्वजवाहक बनाया गया है. सिंधु को यह ज़िम्मेदारी लगातार दूसरे राष्ट्रमंडल खेलों में दी गई है. इससे पहले 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भी पीवी सिंधु ध्वजवाहक थीं.
हालांकि सिंधु को यह मौका नीरज चोपड़ा के चोटिल होने और राष्ट्रमंडल खेलों से अपना नाम वापस लेने के बाद मिला है.
नीरज चोपड़ा ने ट्वीट कर बताया था कि वो इस बार राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. उन्होंने कहा था कि उन्हें वर्ल्ड चैंपियनशिप में चौथे थ्रो के दौरान आए स्ट्रेन कि वजह से कुछ तकलीफ महसूस हो रही थी और इसकी जांच करने पर एक छोटी चोट के बारे में पता लगा है. जिसके चलते मुझे कुछ हफ़्ते आराम करने की सलाह दी गई है.
राष्ट्रमंडल खेलों में ध्वजवाहक चुने जाने के बाद पीवी सिंधु ने भारतीय ओलंपिक संघ का आभार व्यक्त किया है.
उन्होंने कहा, "ध्वज थाम कर भारतीय दल का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी दिया जाना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है. मैं बेहद खुश हूं और अपनी टीम के सभी साथियों को इन खेलों के लिए शुभकामनाएं देती हूं. मुझे ध्वजवाहक चुनने के लिए मैं भारतीय ओलंपिक संघ को भी धन्यवाद देना चाहती हूं."
इंग्लैंड के बर्मिंघम में इस साल 28 जुलाई से 08 अगस्त तक कॉमनवेल्थ गेम्स होने जा रहे हैं. पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में तीसरे स्थान पर रहे भारत को इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.
आइए जानते हैं कॉमनवेल्थ गेम्स के बारे में बड़ी बातें.
कॉमनवेल्थ गेम्स क्या हैं?
कॉमनवेल्थ गेम्स यानी राष्ट्रमंडल खेल एक अंतरराष्ट्रीय खेल समारोह है. जो हर 4 साल में आयोजित किए जाते हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स को अपना नाम कॉमनवेल्थ नेशंस से मिला है.
ब्रिटिश राज के अधीन आने वाले देशों के बीच खेलों की शुरुआत की गई थी. अब ये ओलंपिक, एशियन गेम्स के बाद तीसरा सबसे बड़ा स्पोर्ट्स इवेंट हैं. पहला कॉमनवेल्थ गेम्स 1930 में कनाडा के शहर हैमिलटन में हुआ था. उस वक्त इसे ब्रिटिश एंपायर गेम्स के नाम से जाना जाता था.
1954 से 1966 तक कॉमनवेल्थ गेम्स को ब्रितानी साम्राज्य और कॉमनवेल्थ गेम्स कहा गया और 1970 और 1974 में इसका नाम ब्रिटेन कॉमनवेल्थ गेम्स रहा.सन 1978 में जाकर कहीं इस रंगारंग खेल प्रतियोगिता का नाम कॉमनवेल्थ गेम्स पड़ा और तब से अबतक ये इसी नाम से जाना जाता है.
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की एंट्री कब हुई?
1934 में दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स यानी ब्रिटिश एंपायर गेम्स लंदन में हुए. इस संस्करण में भारत समेत कुल 16 देशों के 500 एथलीट्स ने हिस्सा लिया. हालांकि, भारत ब्रिटिश झंडे के नीचे खेला क्योंकि तब भारत में अंग्रेज़ों का शासन था.
भारत ने केवल दो स्पर्धाओं कुश्ती और एथलेटिक्स में हिस्सा लिया. 17 देशों के बीच भारत ने एक कांस्य पदक के साथ अपना खाता खोला और वह 12वें यानी अंतिम पायदान पर रहा. पुरुषों के 74 किलो ग्राम वर्ग वाले मुक़ाबले में राशिद अनवर ने भारत को कांस्य पदक दिलाया.
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 कब और कहां होने जा रहे हैं?
इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स इंग्लैंड के बर्मिंघम में 28 जुलाई से 8 अगस्त तक होने जा रहे हैं. 72 देश इसमें हिस्सा लेंगे. 19 खेलों में 283 मेडल इवेंट इस कॉमनवेल्थ गेम्स में हैं और 4500 से ज़्यादा एथलीट इसमें हिस्सा लेंगे.
24 साल के बड़े अंतराल के बाद क्रिकेट की एंट्री कॉमनवेल्थ गेम्स में हो रही है. ऐसा पहली बार होगा जब महिलाओं के लिए क्रिकेट प्रतियोगिता और टी20 क्रिकेट मैच का आयोजन कॉमनवेल्थ गेम्स में होने जा रहा है.
पहला मैच भारत और ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट टीम के बीच 29 जुलाई को खेला जाएगा.
बर्मिंघम में कहां-कहां खेले जाएंगे कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के इवेंट?
एलेक्ज़ेंडर स्टेडियम - एथलेटिक्स, पैरा एथेलेटिक्स, ओपनिंग और क्लोज़िंग सेरेमनी
अरिना बर्मिंघम- जिम्नास्टिक
कैनक चेस फॉरेस्ट- साइकलिंग
कोवेंट्री अरिना- जूडो, रेसलिंग
कोवेंट्री स्टेडियम- रग्बी
एजबेस्टन स्टेडियम- क्रिकेट टी20
ली वैली वेलोपार्क- साइकलिंग
द एनआईसी- बैडमिंटन, बॉक्सिंग, नेटबॉल, टेबल टेनिस, पैरा टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग
सेंडवेल एक्वेटिक्स सेंटर- डाइविंग, स्विमिंग, पैरा-स्विमिंग
स्मिथफील्ड- बास्केटबॉल, बीच बास्केटबॉल, व्हीलचेयर बास्केटबॉल
सटन पार्क- ट्रायथलॉन, पैरा-ट्रायथलॉन
यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम हॉकी और स्क्वैश सेंटर- हॉकी, स्क्वैश
विक्टोरिया पार्क- लॉन बॉल्स, पैरा लॉन बॉल्स
विक्टोरिया स्क्वैयर- एथलेटिक्स
वारविक- साइकलिंग
वेस्ट पार्क- साइकलिंग
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में हिस्सा लेने जा रही भारतीय टीम के बारे में बड़ी बातें
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में कुल 215 खिलाड़ी भारत की तरफ़ से हिस्सा लेने जा रहे हैं. इस टीम में नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू, लवलीना बोरगोहाईं, पीवी सिंधु, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया, निखत जरीन जैसे नाम हैं. भारतीय टीम
रेसलिंग, बॉक्सिंग, हॉकी, बैडमिंटन, वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स, महिला क्रिकेट, टेबल टेनिस जैसे खेलों में हिस्सा लेगी.
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने जा रही 37 सदस्यीय भारतीय टीम का ऐलान किया. इस टीम का नेतृत्व ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर नीरज चोपड़ा करेंगे.
पहला कॉमनवेल्थ गेम्स 1930 में कनाडा के शहर हैमिलटन में हुआ था. उस वक्त इसे ब्रिटिश एंपायर गेम्स के नाम से जाना जाता था. इस पहली प्रतियोगिता के लिए 11 देशों ने कुल 400 एथलीट्स भेजे. महिलाओं ने सिर्फ़ तैराकी के मुक़ाबलों में हिस्सा लिया था. लेकिन इस साल की प्रतियोगिता में भारत नहीं शामिल था.
किन खेलों पर होगी भारत की नज़र?
कॉमनवेल्थ खेलों में भारत को रेसलिंग, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग में अच्छे खासे मेडल मिलते आए हैं. ऐसे में भारतीय टीम को इस बार भी इन खेलों में अधिक संख्या में पदक की उम्मीद होगी. साथ ही नीरज चोपड़ा अब भी ज़बरदस्त फॉर्म में हैं तो वो कॉमनवेल्थ खेलों में जैवलीन में कमाल दिखा सकते हैं.
भारतीय पुरुष हॉकी टीम और बैडमिंटन में भी भारत अपना कमाल दिखा सकता है.
कॉमनवेल्थ गेम्स में अबतक भारत ने कितने पदक जीते हैं?
1934 से लेकर 2018 तक भारत ने कुल 503 मेडल जीते हैं. इनमें 181 गोल्ड, 173 सिल्वर और 149 ब्रॉन्ज़ शामिल है. आज़ादी के बाद से कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने ज़्यादातर एथलेटिक्स में हिस्सा लिया, कई बार भारत को उम्मीदों के हिसाब से कामयाबी नहीं मिली.
लेकिन बाद के सालों में भारत के प्रदर्शन में काफी सुधार देखने को मिला है. साल 2010 में हुए 19वें कॉमनवेल्थ गेम्स की जिम्मेदारी भारत ने संभाली थी. इस संस्करण में भारत ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज़ समेत पहली बार मेडल का शतक बनाते हुए रिकॉर्ड 101 मेडल अपने नाम किए. भारत को इस प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल हुआ था. ऑस्ट्रेलिया 74 गोल्ड और कुल 180 मेडल के साथ इस प्रतियोगिता में पहले स्थान पर था.
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को किस खेल में मिले सबसे ज़्यादा मेडल?
1934 से लेकर अबतक के भारत के आंकड़ों की बात करें तो भारत को सबसे ज़्यादा मेडल शूटिंग में हासिल हुए हैं. इसके बाद भारोत्तोलन और कुश्ती का नंबर आता है. चौथे नंबर पर बॉक्सिंग और पांचवे पर बैडमिंटन है.
भारत को शूटिंग में अबतक कुल 135 मेडल हासिल हुए हैं. इसमें 63 गोल्ड, 44 सिल्वर और 28 ब्रॉन्ज़ है. भारोत्तोलन में भारत को कुल 125 मेडल हासिल हुए हैं, इसमें से 43 गोल्ड, 48 सिल्वर और 34 ब्रॉन्ज़ है. भारत का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल लाने वाले खेल कुश्ती में भारत को अबतक 43 गोल्ड मिल चुके हैं, 37 सिल्वर और 22 ब्रॉन्ज़ मिलाकर कुल 102 मेडल मिल चुके हैं.
कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे सफल भारतीय खिलाड़ी
ओलंपिक्स की ऑफिशियल वेबसाइट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पिस्टल शूटर निशानेबाज जसपाल राणा कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे सफल खिलाड़ी रहे हैं. उन्होंने कुल 15 मेडल हासिल किए हैं. इनमें से 9 गोल्ड, चार सिल्वर और दो ब्रॉन्ज़ हैं. (bbc.com)


