खेल
भारत के बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप का फ़ाइनल हार गए हैं.
डेनमार्क के विक्टर एक्सल्सन ने उन्हें 21-10, 21-15 से हराया.
विक्टर ने पहला गेम 21-10 से जीत लिया. 22 मिनट तक चले इस मुक़ाबले में सेन काफ़ी कोशिशों के बाद भी बढ़त नहीं बना पाए.
गेम की शुरुआत से ही विक्टर ने दमदार खेल दिखाया, जिसके सामने लक्ष्य कहीं टिकते नहीं दिखे. हालांकि उन्होंने वापसी की कोशिश ज़रूर की लेकिन तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी.
मुक़ाबले में डेनमार्क के विक्टर एक्सल्सन का पलड़ा थोड़ा भारी माना जा रहा था. लेकिन लक्ष्य ने दूसरे गेम में उन्हें ज़ोरदार चुनौती दी. दूसरे गेम में एक समय मुक़ाबला बराबरी का दिख रहा था लेकिन लक्ष्य जल्दी ही दबाव में आ गए.
स्मैश से लेकर डिफेंस और कोर्ट कवरेज़ में विक्टर उनसे कहीं आगे नज़र आए. दूसरा गेम 31 मिनट तक खिंचा और विक्टर ने आख़िर में 21-15 से ये गेम जीता.
28 वर्षीय विक्टर ने 2020 में इस ख़िताब को जीता था इसके अलावा बीते साल ओलंपिक में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था. वे मौजूदा समय में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी हैं. उनके अनुभव को लक्ष्य का जोश शायद चुनौती नहीं दे सका.
इससे पहले 20 वर्षीय लक्ष्य सेन ने बर्मिंघम में जारी इस चैंपियनशिप में शनिवार को सेमीफ़ाइनल में मलेशिया के ली ज़ी जिया को हराया. वो ऐसे चौथे भारतीय सिंगल्स खिलाड़ी हैं जो फ़ाइनल में पहुंचे हैं.
उनसे पहले प्रकाश नाथ, प्रकाश पादुकोण और पुलेला गोपीचंद ही फ़ाइनल में जगह बना पाए थे.
पादुकोण और गोपीचंद ही ऐसे भारतीय हैं जो इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता को जीत पाए हैं. साल 1980 में पादुकोण और साल 2001 में गोपीचंद ने यह कारनामा किया था.
वहीं 1947 में प्रकाश नाथ और महिला वर्ग में साइना नेहवाल साल 2015 में फ़ाइनल में हारी थीं. अब इस सूची में लक्ष्य सेन का नाम भी शामिल हो गया है.
साल 2018 में यूथ ओलंपिक में सिलवर मेडल जीतने वाले लक्ष्य सेन बीते छह महीनों से बेहद शानदार प्रदर्शन दिखा रहे हैं.
जनवरी में उन्होंने इंडिया ओपन में सुपर 500 का अपना पहला ख़िताब जीता था और बीते सप्ताह जर्मन ओपन में वो रनर-अप रहे थे.
वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल विजेता लक्ष्य सेन ने डिफ़ेंडिग चैंपियन ली ज़ी जिया को 21-13, 12-21, 21-19 से हराया जो मैच एक घंटा 16 मिनट तक चला. ज़ाहिर है मैच बहुत कड़ा था जिसमें वो दूसरे राउंड में काफ़ी पीछे भी रहे लेकिन तीसरे राउंड में लक्ष्य ने शानदार वापसी की.
ली जी ज़िया की फ़िलहाल इंटरनेशनल रैंकिंग 7 है, जबकि लक्ष्य 11वें स्थान पर मौजूद हैं.
लक्ष्य सेन ने जीत के बाद कहा, "मैं ख़ुश हूं क्योंकि मुझे महत्वपूर्ण पॉइंट्स मिले. यह एक सपना है और अब एक मैच रह गया है तो मैं अपना ध्यान केंद्रित रखूंगा और कल के लिए तैयारी करूंगा."
"मैच समाप्त होने की ओर मैं सिर्फ़ एक-एक पॉइंट के लिए खेल रहा था और बाक़ी कुछ नहीं सोच रहा था. मैं फ़ाइनल में जाना चाहता था. मेरे दिमाग़ में ख़याल आ रहे थे लेकिन मैं बस ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रहा था."
महिला वर्ग में भी बड़ा उलटफेर
महिला वर्ग में ख़िताब दूसरी वरीयता प्राप्त अकाने यामागुची ने अपने नाम किया.
उन्होंने चौथी वरीयता प्राप्त दक्षिण कोरिया की अन से-यंग को 21-15, 21-15 से हराया.
अन से-यंग ने इससे पहले सेमीफ़ाइनल में बड़ा उलटफेर दिखाते हुए विश्व की नंबर एक खिलाड़ी ताइ त्ज़ू-यिंग को 21-19, 21-13 से हराया था.
कौन हैं लक्ष्य सेन?
16 अगस्त, 2001 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा में पैदा होने वाले लक्ष्य सेन वहीं के रहने वाले हैं. क़रीब 5 फ़ीट 11 इंच लंबे सेन ने बैडमिंटन के जाने माने प्रशिक्षकों विमल कुमार, पुलेला गोपीचंद, और योंग सू यू से ट्रेनिंग ले चुके हैं. उन्होंने प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन एकेडमी में भी प्रशिक्षण लिया है.
उनके पिता डीके सेन भी बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुके हैं और वे प्रशिक्षण भी देते हैं. लक्ष्य सेन अपने पिता से भी प्रशिक्षण ले चुके हैं.
लक्ष्य के भाई चिराग सेन भी इंटरनेशनल लेवल पर बैडमिंटन खेलते हैं. (bbc.com)


