राजनांदगांव

15 माह से बिना टेंडर लगाए एक्सटेंशन खेल की जांच की मांग - ओस्तवाल
09-Jun-2026 4:10 PM
15 माह से बिना टेंडर लगाए एक्सटेंशन खेल की जांच की मांग - ओस्तवाल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 9 जून।
शहर कांग्रेस के पूर्व महामंत्री हेमंत ओस्तवाल ने 27 वार्ड का सफाई ठेका 15 माह से बिना टेंडर लगाए एक्सटेंशन के खेल की जांच की मांग कलेक्टर से की।
श्री ओस्तवाल ने कलेक्टर एवं नगरीय प्रशासन संचालक से मांग करते कहा कि नगर पालिक निगम राजनांदगांव में वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग पिछले 15 माह से अधिक लगभग 27 वार्डों का जो एक ही समूह से बिना टेंडर कराए एक्सटेंशन एमआईसी में बढ़ाकर जो शासन के नियम विरूद्ध निगम आयुक्त / स्वास्थ्य अधिकारी एवं कार्यपालन अभियंता आदि  द्वारा जो महिला समूह के सफाई ठेके की आड़ में जो शासन को आर्थिक वित्तीय हानि पहुंचाकर भ्रष्टाचार हो रहा है? और शासन के नियम में एक्सटेंशन कितने माह तक बढ़ाकर दिया जा सकता है और नगर पालिक निगम राजनांदगांव द्वारा सफाई एक्सटेंशन कितने माह से बढ़ाया जा रहा है, उसकी संपूर्ण सफाई ठेके के वार्ड और उक्त समूह जिसको सफाई ठेके का कार्यादेश निगम आयुक्त द्वारा जारी किया गया और संबंधित समूह से जो अनुबंध शासन के नियमानुसार हुआ है।  उस अनुबंध का बिंदुवार पालन निगम आयुक्त एवं संबंधित विभाग प्रमुख अधिकारी, कर्मचारी द्वारा शासन के नियमों का पालन हुआ है या शासन के नियम विरूद्ध उक्त सफाई ठेके का संचालन करवाया जा
रहा है।

 उसकी जांच करवाकर सभी दोषियों के खिलाफ  अपराधिक प्रकरण दर्ज करवाई जाए एवं सफाई ठेके की आड़ में जो निगम को आर्थिक बोझ डाला जा रहा है और चंद नेताओं आदि को जो लाभ पहुंचाने का जो खेल महापौर मधुसूदन यादव के संरक्षण में नियमों को ताक पर रखकर जो कार्य हो रहा है, वह निगम हित में नहीं है एवं जिले के कलेक्टर एवं नगरीय प्रशासन संचालक से अनुरोध है कि जहां एक ओर निगम की आर्थिक स्थिति कमजोर है। जिसका विभागीय मंत्री से लेकर नगरीय प्रशासन के सचिव आदि निगम को आर्थिक रूप से मजबूत करने आम जनता पर टैक्स, किराया आदि माध्यमों से आय बढ़ाने लगातार आम जनता पर टैक्स लगाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सफाई ठेके की आड़ में जिस तरह से चंद नेताओं और महिला समूह की आड़ में वार्डों का ठेका बांटकर जो खेल हो रहा है, उस पर तत्काल रोक लगाते संबंधित सफाई महिला समूह के इनकम टैक्स रिटर्न फाइल और जीएसटी एवं संबंधित कर्मचारियों की पीपीएफ आदि की राशि ठेकेदार द्वारा कितनी राशि जमा करवायी जा रही है और कितनी उक्त ठेकेदारों से पीपीएफ की राशि  बाकी लेना है, उसकी उच्च स्तरीय जांच करवायी जाए।
 


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