रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 12 मई। देश में बढ़ती महंगाई अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोर होती स्थिति और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक की चिंता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से ईंधन के सीमित उपयोग और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील के बाद इसका असर अब बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। राजधानी सहित देश के कई शहरों में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की बिक्री में गिरावट दर्ज की जा रही है, जबकि इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) की मांग तेजी से बढऩे लगी है।
ऑटोमोबाइल कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद यह दूसरा बड़ा दौर है जब वाहन बाजार असमंजस और मंदी के माहौल से गुजर रहा है। वाहन विक्रेताओं के अनुसार पहले जहां ग्राहक पेट्रोल और डीजल वाहनों की बुकिंग को लेकर उत्साहित रहते थे, वहीं अब लोग खरीदारी से पहले ईंधन खर्च और भविष्य की लागत को लेकर ज्यादा सोच-विचार कर रहे हैं। इसका सीधा असर बिक्री पर पड़ा है। कई शोरूम में पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री में कमी आई है, जबकि इलेक्ट्रिक स्कूटर और ई-कारों को लेकर लोगों का रुझान बढ़ा है।
व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी से आयात महंगा हो गया है। इसका असर सीधे ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ रहा है। लग्जरी और विदेशी कंपनियों की गाडय़िों के दामों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे मध्यम वर्ग के ग्राहक अब सस्ती और कम खर्च वाली तकनीक की ओर रुख कर रहे हैं।
राजधानी के ई-स्कूटर शो रूम के संचालक यश कानिया ने बताया कि बीते कुछ महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में बढ़ोतरी देखी जा रही है। पहले ईवी का कुल बाजार पेट्रोल स्कूटी और बाइकों के बिक्री का 10 प्रतिशत ही था। भविष्य की स्थितियों को देखते हुए बाजार में उछाल आने की पूरी संभावनाए हैं। आज के दौर में खासकर युवाओं और नौकरीपेशा लोगों में ई-स्कूटर और छोटी इलेक्ट्रिक कारों की मांग तेजी से बढ़ रही है। लोग इसे भविष्य के सुरक्षित और किफायती विकल्प के रूप में देख रहे हैं। सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों पर दी जा रही सब्सिडी और चार्जिंग स्टेशनों के विस्तार ने भी इस बदलाव मांग को बढ़ा रही है।
बढ़ते ईंधन वैश्विक संकट के बीच सीएनजी, इलेक्ट्रिक उपकरणों और सौर ऊर्जा जैसे विकल्पों को लोग अपना रहे है। हैं ताकि बढ़ते ईंधन खर्च से राहत मिल सके। आने वाले समय में ऑटोमोबाइल बाजार तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बढ़ सकता है।
ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर असर
ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर इसका गहरा असर पडऩे लगा है। डीजल की कीमतों और आपूर्ति संकट से माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो रोजमर्रा की चीजों के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है। फल, सब्जियां, किराना सामान और निर्माण सामग्री जैसी चीजों के दाम बढ़ जाएंगे। जिसका आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पडऩे की आशंका है।


