रायपुर

भजन 55 में नहीं, बचपन से करना चाहिए- आचार्य वागीश
23-Jan-2026 5:39 PM
भजन 55 में नहीं, बचपन से करना चाहिए- आचार्य वागीश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 23 जनवरी।  गुप्त नवरात्रि पर पुरानी बस्ती  श्रीमहामाया देवी मंदिर में जारी श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन श्री कृष्ण जन्मोत्सव,वामन अवतार, योग माया के रूप में श्री महामाया मातेश्वरी का जन्म उत्सव, बड़े धूमधाम से मनाया गया।  कथा मर्मज्ञ आचार्य वागीश महाराज ने कहा कि प्रभु श्री राम हमारे आदर्श हैं। उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। जहां किसी के भावनाओं विचारों का वध ना हो वही अवध है। 

भगवान के प्रति मल भक्ति अर्थात सकाम भक्ति नहीं होना चाहिए, बल्कि अमल भक्ति अर्थात निष्काम भक्ति होना चाहिए। महाराज श्री ने अर्पण और समर्पण का अंतर बताते हुए कहा कि अर्पण अपनों के लिए अपने परिवार के लिए धन संपत्ति आदि के लिए होता है, किंतु समर्पण केवल प्रभु के प्रति होता है। उन्होंने व्यंग्य किया कि भजन पचपन के उम्र में नहीं, बल्कि बचपन से करना चाहिए। बचपन से किया गया भजन व्यर्थ नहीं जाता।  उन्होंने जा पर कृपा राम की होई ता पर कृपा करें सब कोई को समझाया तथा सत्संग को एक पारसमणी बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से निवेदन किया कि कलयुग केवल नाम अधारा, सुमरी सुमरी नर उतरहि पारा। इसलिए प्रभु का स्मरण ध्यान करना चाहिए।

उन्होंने गजेंद्र मोक्ष की कथा बताते हुए गज का प्रभु के प्रति समर्पण को इंगित किया। उन्होंने पत्रं, पुष्पम, फलम, जलम की व्याख्या करते हुए कहा कि सभी एक वचन है, बहुवचन नहीं है। इसलिए श्रद्धालु जनों कोई जरूरी नहीं की ग्यारह, 51 फल फूल पत्र चढ़ाया जाए। उन्होंने पितरों के फोटो घर में दक्षिण दिशा में रखकर रोज चंदन लगाने पूजा करने का निवेदन किया। उन्होंने इशारा किया कि उनका ऋण इस प्रकार चुकाना चाहिए जैसे बैंक लोन न पटाने पर नोटिस आता है, सूर्य प्रकाश देता है उसका ऋण जल देकर चुकाना चाहिए। उन्होंने सचेत किया लक्ष्मी के पीछे ज्यादा भागने से लक्ष्मी दूर भागती है। सब देव दैत्यों को छोडक़र नारायण के गले में वरमाला लक्ष्मी जी ने डाला। महाराज श्री ने सुनीति व सुरुचि की कथा विस्तार से बताते हुए सुरुचि अपने स्वयं की रूचि के लिए वही सुनीति सुविचार एवं अच्छा आचरण को बताया।

 न्यास समिति के व्यवस्थापक पं विजय कुमार झा एवं अध्यक्ष व्यास नारायण तिवारी ने बताया है कि शुक्रवार को बाल लीला, गोवर्धन पूजा एवं 56 भोग प्रभु को अर्पित किए जाएंगे। नगर वासियों से इस पुण्य फल प्राप्त करने के लिए भागवत ज्ञान यज्ञ में शामिल होने की अपील की है।


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