रायगढ़
कलेक्टर से मिला विस्थापितों का प्रतिनिधिमंडल
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायगढ़, 1 फरवरी। एनटीपीसी लारा के विरूद्ध जल्द फिर से आंदोलन शुरू होगा। कलेक्टर से विस्थापितों का प्रतिनिधि मंडल मिला।
लारा संघर्ष के अनिल चीकू,अरविंद कुमार प्रधान, हरिकिशन पटेल,नारायण साव,मुरली थवाईत, कौशिक गुप्ता आदि ने बताया कि एनटीपीसी लारा योजना जो कि भारत सरकार की कंपनी है के द्वारा रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लॉक के लारा, कांदागढ़,लोहा खान, बोड़ाझरिया, छपोरा, आरमुड़ा, देवलसुर्रा, झिलंगिटार आदि गांव के हजारों एकड़ किसानों और स्थानीय निवासियों की जमीन अधिग्रहण तत्कालीन कलेक्टर,रायगढ़ के माध्यम से स्थानीय जिला उद्योग केंद्र रायगढ़ के लैंड बैंक योजना के तहत छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास योजना के ली थी।
जिसमें अनुबंधानुसार छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति का सुचारू रूप से लागू करवाया जाना प्राथमिकता थी परंतु ऐसा नहीं हुआ जिसके तारतम्य में विगत दिनों रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को लारा संघर्ष का एक प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन सौंप कर बताया कि एनटीपीसी लारा योजना के द्वारा उद्योग लगाने की सहमति पत्र में 5800 मेगावाट = 4000 मेगावाट ऊर्जा आधारित उद्योग लगाने के लिए स्थानीय स्तर पर लैंड बैंक योजना के तहत में जमीन प्राप्त की थी जिसमें एनटीपीसी के सहमति पत्र के अनुसार विस्थापितों, किसानों और प्रभावित जनों के परिवार के 16 सौ सदस्यों को स्थाई और नियमित रोजगार उपलब्ध करवाना था गौरतलब है कि इस उद्योग के लिए जमीन का अधिग्रहण 2011 में ही हो चुका था और उद्योग के चार दिवारी भी स्थापित हो गई थी। जब विस्थापितों ने सरकारी अनुबंध और छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के तहत अपने स्थाई और नियमित रोजगार के लिए एनटीपीसी प्रबंधन के दरवाजे खटखटाए तो निरंतर झूठे जवाब मिले जिसके कारण इन विस्थापितों के परिवार के युवा पीढ़ी को स्थाई और नियमित रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है।
लारा संघर्ष समिति ने बताया कि एनटीपीसी लारा योजना के लिए 2011 में लगभग जमीन जिला प्रशासन के माध्यम से एनटीपीसी को सौंप दी गई है पर इस उद्योग के प्रबंधन ने तत्कालीन कलेक्टर,रायगढ़ के साथ हुए अनुबंध के विपरीत जाकर छत्तीसगढ़ शासन के पुनर्वास नीति के कंडिका 11.2.3 के अनुसार नियमित रोजगार नहीं उपलब्ध करवा पाने की स्थिति में योग्यता अनुसार रोजगार गारंटी योजना के तहत देय राशि का भुगतान किया जाएगा जो कि एनटीपीसी लारा योजना से नहीं मिल रही जो कि बेरोजगारी भत्ता के रूप में थी और यह राशि अरबों रूपये में हो चुकी है जिसमें परियोजना प्रभावितों को यह राशि बैंक ब्याज दर में बीते लगभग 15 वर्षों के ब्याज सहित मिलनी चाहिए पर एनटीपीसी लारा का प्रबंधन के द्वारा इस देय राशि कर अफरातफरी कर दी गई है क्योंकि जब ही बेरोजगार इस उद्योग के प्रबंधन से मिलने जाते है तो अनभिज्ञता दर्शाई जाती है।जांच के पश्चात् ही पता चलेगा कि बेरोजगारी भत्ता की राशि कहां गई और किस एनटीपीसी लारा या एनटीपीसी रायपुर या नई दिल्ली स्थित अधिकारी और कर्मचारी की मिलीभगत से गायब कर दी गई। जिसकी जांच अविलंब जिला कलेक्टर, रायगढ़ के द्वारा प्रारंभ होने से बेरोजगारों को न्याय मिलेगा।


