रायगढ़
फ्लाई एश नहीं संभाला तो पावर प्लांटों पर गिरेगी गाज
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायगढ़, 16 जनवरी। जिले में वर्षों से पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने फ्लाई एश के निपटान को लेकर अब सख्ती तय मानी जा रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने पावर प्लांटों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि अब केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। शत-प्रतिशत फ्लाई एश यूटीलाइजेशन नहीं हुआ तो सीधे पेनाल्टी लगेगी।
सीपीसीबी ने सभी पावर प्लांटों को तीन साल का एक निश्चित चक्र दिया है। इस त्रिवर्षीय चक्र में हर हाल में सौ फीसदी फ्लाई एश का उपयोग सुनिश्चित करना होगा। इसके साथ ही हर वर्ष कम से कम 80 प्रतिशत यूटीलाइजेशन का लक्ष्य पूरा करना अनिवार्य रहेगा। वर्ष 2026 से इस पूरे सिस्टम का ऑडिट शुरू किया जा रहा है।
रायगढ़ जिले में स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यहां करीब 25 पावर प्लांट संचालित हैं। इन सभी से भारी मात्रा में फ्लाई एश निकलता है, लेकिन उसके उपयोग की व्यवस्था बेहद सीमित है। ईंट-भ_ों में फ्लाई एश का इस्तेमाल नाममात्र का है। अधिकांश राखड़ या तो निचले इलाकों में या बंद खदानों में डंप की जा रही है। यह तरीका पर्यावरण और भूजल दोनों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है, जिस पर भूजल बोर्ड भी चिंता जता चुका है।
सीपीसीबी के निर्देशों के अनुसार अब हर तीन साल में पावर प्लांटों की रिपोर्ट का गहन मूल्यांकन किया जाएगा। वर्ष 2026 में पहला तीन वर्षीय चक्र पूरा हो रहा है। इसके बाद यह जांच की जाएगी कि संबंधित प्लांट ने वास्तव में शत-प्रतिशत फ्लाई एश का उपयोग किया है या नहीं। यदि प्लांट परिसर में या अन्य किसी स्थान पर राखड़ डंप पाई गई, तो प्रति टन के हिसाब से भारी पेनाल्टी लगाई जाएगी।


