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भारत दौरे पर आए ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक रॉब ने कहा है कि भारत और ब्रिटेन भविष्य में मिलकर काम करेंगे.
उन्होंने कोरोना महामारी से लेकर कश्मीर और किसान आंदोलन जैसे कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. रॉब ने कहा कि आने वाली किसी भी महामारी से निपटने के लिए वैक्सीन बनाने पर मिलकर काम करेंगे.
उन्होंने भारत में चल रहे किसान आंदोलन के बारे में पूछे जाने पर इसे 'भारत का घरेलू मुद्दा' बताया.
ब्रितानी विदेश मंत्री ने अपने भारतीय समकक्ष एस.जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की.
इस मुलाक़ात के बाद उनसे बीबीसी संवाददाता रजनी वैद्यनाथन ने बात की और सबसे पहले पूछा कि वैक्सीन को लेकर भारत और ब्रिटेन की नई साझेदारी के मायने क्या हैं?
डोमिनिक रॉब ने जवाब दिया कि भविष्य में ब्रिटेन और भारत के मिलकर काम करने की काफ़ी संभावनाएं हैं.
'भारत को भी वैक्सीन मिले, ऐसे काम कर रहे हैं'
ब्रितानी विदेश मंत्री ने कहा, "शोध से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हम भारत के साथ सहयोग बढ़ाना चाहते हैं ताकि भारत और ब्रिटेन में लोगों का टीकाकरण किया जा सके. साथ ही हम आगे चलकर दुनियाभर के ज़्यादा संवेदनशील देशों को निष्पक्ष ढंग से वैक्सीन मुहैया करवाने पर भी काम कर सकते हैं."
ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का भारत के सीरम इंस्टिट्यूट में बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा रहा है.
डोमिनिक रॉब ने कहा कि वैक्सीन लेने के लिए अभी तक सीरम इंस्टिट्यूट से ब्रिटेन की कोई डील नहीं हुई है.
उन्होंने कहा, "हम लगातार अपने यहां की वैक्सीन की ज़रूरत को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं. शायद आपको मालूम हो कि अभी तक हमें सात सप्लाई मिल चुकी हैं, जिससे ब्रिटेन के अंदर 35 करोड़ वैक्सीन उपलब्ध हो जाएंगी. तो हमारे पास वैक्सीन काफ़ी मात्रा में उपलब्ध है. मगर हमारे भारतीय दोस्त लगातार साथ मिलकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं."
उन्होंने कहा कि वैक्सीन को लेकर "हम सावधानी बरत रहे हैं ताकि हमारी और भारत की ज़रूरतें पूरी हो सकें."
किसान आंदोलन पर क्या बोले डोमिनिक रॉब?
ब्रिटेन के कई सांसदों ने भारत में जारी किसान प्रदर्शनों का मुद्दा उठाने के लिए कहा था. लेकिन ब्रितानी विदेश मंत्री डोमिनिक रॉब ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात के दौरान इस मसले को नहीं उठाया.
हालाँकि उन्होंने बताया कि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से चर्चा में इससे जुड़ी बात ज़रूरी आई.
उन्होंने कहा, "मैंने विदेश मंत्री जयशंकर के साथ भारत सरकार की ओर से लाए जा रहे सुधारों के संदर्भ में बात की थी. ये यहाँ का घरेलू राजनीतिक मामला है. हम समझते हैं कि यहां कई समूह इन सुधारों से सहमत नहीं हैं."
कश्मीर और प्रेस की आज़ादी
डॉमिनिक रॉब ने यह बताने से भी इनकार कर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत में उन्होंने मानवाधिकारों से जुड़ी चिंताओं के बारे में बात की या नहीं.
बीबीसी के इससे जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहाँ ज़ोरदार बहस की परंपरा रही है. निश्चित रूप से यहाँ मानवाधिकार से जुड़े मसले हैं. हम उनके बारे में जानते हैं. उनके बारे में मुझे जानकारी दी गई है.''
उन्होंने कहा, ''हमारे यहाँ कुछ लोगों ने इन मसलों को हमारे सामने उठाया है. मैंने भारत सरकार के अधिकारियों से बात की है. मैंने एस. जयशंकर से इस बारे में इस हफ़्ते बात की थी. लेकिन इसके साथ ही हम मानते हैं कि भारत का लोकतंत्र इस मामले में बहुत अधिक बेजोड़ है. मुझे लगता है कि इसे उस संदर्भ में देखना बहुत अहम है."
डॉमिनिक रॉब ने कहा, "मुझे लगता है असल में आपके बीच जटिल मुद्दों को लेकर स्पष्ट बातचीत हो सकती है और हम ऐसा करने से कतराएंगे नहीं, लेकिन साथ ही हम इन्हें व्यापक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों के आड़े भी नहीं आने देंगे क्योंकि दोनों के बीच बहुत से अवसर हैं. लेकिन हम जटिल मुद्दों से बचकर नहीं निकलेंगे."
रॉब ने बताया कि ब्रिटेन ने भारत के सामने कश्मीर और प्रेस की आज़ादी जैसे मुद्दे उठाए हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी असहमतियों की जगह है.
उन्होंने कहा, "जब हम दोस्तों के साथ समझौते करने की बात करते हैं तो ऐसी भी कई चीज़ें होती हैं जिन पर बात की जानी ज़रूरी है. हमने उन सभी को उठाया है, चाहे वो कश्मीर से जुड़ा हो या कुछ और. मीडिया की आज़ादी से जुड़ा मसला भी. हम अपने भारतीय दोस्तों से भी हमारे साथ ऐसा ही करन की उम्मीद करते हैं."
भारत और ब्रिटेन के बीच कब होगा मुक्त व्यापार समझौता?
डॉमिनिक रॉब ने कहा कि ब्रिटेन और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता होने में अभी कुछ और वक़्त लग सकता है.
उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से मुक्त व्यापार को लेकर बातचीत हमेशा पेचीदा होती है. हम उम्मीद करेंगें कि दोनों पक्ष इस बातचीत को करेंगे. लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि हम संयुक्त पारस्परिक लाभ को 10-20 या 30 साल की अवधि के परिप्रेक्ष्य में देखें. न कि सिर्फ दो या तीन साल के लिए."
उन्होंने कहा, "मुक्त व्यापार समझौता बहुत महत्वपूर्ण है और वहाँ पहुंचने में वक़्त लगेगा. व्यापार में नॉन-टैरिफ से जुड़ी बाधाओं को कम करने का मामला हो या अपने टैरिफ को लेकर अपनाई जाने वाली अप्रोच का, ये सब धीरे-धीरे होगा.''
रॉब ने कहा, ''निश्चित तौर पर अंतिम लक्ष्य एक मुक्त व्यापार समझौता करना है. मुझे लगता है कि दोनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और सही नेतृत्व से यह जल्द हो सकता है.'' (bbc)


