राष्ट्रीय
नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे किसानों ने अब भूख हड़ताल करने का फैसला कर लिया है. दिल्ली की सीमाओं पर और अधिक किसान आते जा रहे हैं और एक बार फिर पूरे देश में प्रदर्शन करने की तैयारी की गई है.
दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों के धरने को 18 दिन बीत चुके हैं और अब भी किसानों और सरकार के बीच चल रहे गतिरोध के अंत का कोई संकेत नजर नहीं आ रहा है. स्थिति को देखते हुए किसानों ने अपने आंदोलन को और तीव्र करने का फैसला किया है. इस क्रम में सोमवार 14 दिसंबर को किसानों के प्रतिनिधि संगठनों के नेता एक दिन का उपवास रखेंगे.
आज सिंघु बॉर्डर दिल्ली के संयुक्त किसान मोर्चा के मंच से भारत के किसानों के हक़ के लिए एक दिन का उपवास रख रहा हूँ। संयुक्त किसान मोर्चा के सभी किसान नेता आज भूख हड़ताल पर है।
— हिमांशु तिवारी । Himanshu (@sociohimanshu) December 14, 2020
हमे नहीं चाहिए कॉर्पोरेट राज, हमे चाहिए महात्मा गॉंधी जी का स्वराज। @aslibharat_ @AShukkla pic.twitter.com/gWPiBkLjuQ
उपवास सुबह के आठ बजे से शाम पांच बजे तक चलेगा. किसानों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी उपवास रखने की घोषणा की है. किसानों ने उपवास के साथ साथ एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की है जिसके तहत सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन आयोजित किए हैं.
दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का जमावड़ा बढ़ता ही जा रहा है और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की संभावना है. ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर बैठे पंजाब के किसानों का दिल्ली आने का सिलसिला लगातार चल रहा है. इस बीच राजस्थान से भी किसान संघों का एक बड़ा जत्था दिल्ली की तरफ निकल चुका है. इसमें भी बड़ी संख्या में किसान और एक्टिविस्ट हैं. इन्हें दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए दिल्ली-जयपुर राज्य-मार्ग पर हरियाणा और राजस्थान के बीच की सीमा को सील कर दिया गया है.
दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने केंद्र के तीनों नए कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है जहां पहले से इन कानूनों के खिलाफ दूसरी याचिकाएं सूचित हैं. यूनियन की याचिका में तीनों कानूनों को निरस्त करने की मांग की गई है. केंद्र सरकार किसानों को एमएसपी को सुरक्षित रखने का लिखित आश्वासन देने का प्रस्ताव दे चुकी है, लेकिन किसान चाह रहे हैं कि पहले तीनों कानूनों को निरस्त किया जाए.
तीनों कानून सबसे पहले अध्यादेश के रूप में जून में लाए गए थे और बाद में संसद के मानसून सत्र में इन्हें विधेयक के रूप में पास करवा लिया गया. किसानों का आरोप है कि सरकार ने बिना उनसे सलाह-मशविरा किए कानूनों को लागू कर दिया.
किसान प्रतिनिधियों के साथ कई बार वार्ता कर चुके कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने रविवार को कहा कि तीनों कानून खेती में दीर्घकालिक सुधार ले कर आएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि लिए कि इससे इस समय कुछ मुश्किलें आएंगी लेकिन बिना मुश्किलों के लंबे समय में फायदा नहीं मिलता है.


