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कोच्चि, 13 मार्च । केरल उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित सोने की चोरी के मामले में चल रही जांच में हस्तक्षेप नहीं करेगा क्योंकि इसमें एक सक्षम अधिकारी न्यायिक पर्यवेक्षण के तहत जांच कर रहा है। यह टिप्पणी तब आई जब अदालत सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में एक व्यक्ति की ओर से सीबीआई जांच करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। केरल उच्च न्यायालय की देवस्वोम पीठ ने कहा कि जांचकर्ता राज्य के सर्वश्रेष्ठ जांच अधिकारियों में से एक है और उसके द्वारा जांच की जा रही है।
फिलहाल अदालत के हस्तक्षेप करने या केंद्रीय एजेंसी को जांच का आदेश देने का कोई कारण नहीं है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियुक्त को जमानत देते समय निचली अदालत द्वारा की गई कुछ टिप्पणियां जांच को किसी अन्य एजेंसी को स्थानांतरित करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां चल रही जांच में न्यायिक हस्तक्षेप को स्वतः ही उचित नहीं ठहराती हैं। जांच पहले से ही उसकी निगरानी में चल रही है और न्यायपालिका केवल बाध्यकारी परिस्थितियों में ही हस्तक्षेप करेगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अदालतें किसी मामले के संबंध में आम जनता की धारणा या अटकलों से निर्देशित नहीं हो सकतीं। इसमें कहा गया है कि न्यायपालिका को सार्वजनिक क्षेत्र में प्रचलित कथा के बजाय रिकॉर्ड में रखे गए साक्ष्यों और जांच की प्रगति पर सख्ती से निर्भर रहना चाहिए। सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर एक सप्ताह बाद फिर से विचार किया जाएगा, जिससे अदालत को चल रही जांच की प्रगति की समीक्षा करने का समय मिल सके। सबरीमाला से जुड़ी कथित सोने की चोरी ने हाल के हफ्तों में जनता का काफी ध्यान आकर्षित किया है और कुछ वर्गों से केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच की मांग उठ रही है। हालांकि, केरल हाईकोर्ट की ओर से इस स्तर पर हस्तक्षेप करने में अनिच्छा जताने के कारण, जांच मौजूदा व्यवस्था के तहत जारी रहेगी। एसआईटी की ओर से दायर दो आरोपपत्रों में शामिल 13 आरोपियों में से नौ अब तक जमानत पा चुके हैं। -- (आईएएनएस)


