महासमुन्द

ऑनलाइन से गुस्सा, बुधवार को बंद रहेंगी महासमुंद की दवा दुकानें
19-May-2026 3:42 PM
ऑनलाइन से गुस्सा, बुधवार को बंद रहेंगी महासमुंद की दवा दुकानें

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद,19मई। ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री और बड़े कॉर्पोरेट घरानों की मूल्य निर्धारण प्रिडेटरी प्राइसिंग नीति के विरोध में बुधवार 20 मई को देशव्यापी दवा व्यापार बंद रहेगा। इस हड़ताल का असर महासमुंद में भी देखने को मिलेगा। इस दौरान जिले की सभी 560 दवा दुकानों के शटर बंद रहेंगे। जिला महासमुंद केमिस्ट्स एवं ड्रगिस्ट्स संघ ने इस सिलसिले में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया है।

संगठन का कहना है कि अगर सरकार ने ई-फार्मेसी पर लगाम नहीं लगाई, तो लाखों परिवारों की आजीविका के साथ-साथ आम जनता का स्वास्थ्य भी बड़े खतरे में पड़ जाएगा। दवा विक्रेता संघ के जिला सचिव अरशी अनवर ने नियमों को ताक पर रखकर ऑनलाइन कंपनियां व्यापार कर रही हैं। ई.फार्मेसी पर पूर्ण प्रतिबंध, ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और 28 अगस्त 2018 की अधिसूचना जीएसआर 817 ई को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है।

साथ ही भारी डिस्काउंटिंग पर कहा है कि बड़े कॉर्पोरेट संस्थान भारी.भरकम डिस्काउंट देकर छोटे और मध्यम दवा व्यापारियों को बाजार से बाहर खदेड़ रहे हैं। इस हिंसक मूल्य निर्धारण नीति पर तुरंत रोक लगे। कोरोना काल में आपातकालीन स्थिति के लिए लागू की गई 26 मार्च 2020 की अधिसूचना जीएसआर 220 ई को अब समाप्त किया जाए। क्योंकि अब इसका दुरुपयोग बढ़ गया है।

जिला केमिस्ट्स एवं ड्रगिस्ट्स संघ के सचिव अनवर का कहना है कि देशभर के 12.40 लाख केमिस्ट और उनसे जुड़े करीब 5 करोड़ लोगों की आजीविका आज दांव पर है। केमिस्टों का तर्क है कि वर्तमान ऑफलाइन सिस्टम में एक पंजीकृत फार्मासिस्ट की देखरेख में दवाएं दी जाती हैं। इससे मरीज सुरक्षित रहता है। ई.फार्मेसी सुरक्षा चक्र को तोड़ रही है। मरीजों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए संगठन ने 20 मई को अति आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

केमिस्टों का मानना है बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित इस्तेमाल से शरीर पर दवाओं का असर खत्म होने का खतरा बढ़ गया है। इंटरनेट पर खरीदार और बेचने वाले के बीच कोई सीधा संवाद नहीं होता। दवाओं के गलत इस्तेमाल की संभावना बढ़ जाती है।

नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली ऑनलाइन कंपनियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केमिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के मुताबिक दवाएं कोई आम किराना सामान नहीं हैं।


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