महासमुन्द

मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान- पदयात्रा में जगह-जगह मनरेगा मजदूरों से चर्चा
22-Jan-2026 3:34 PM
मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान- पदयात्रा   में जगह-जगह मनरेगा मजदूरों से चर्चा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 22जनवरी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आव्हान पर छग कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज की अगुवाई में महासमुंद में मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत पदयात्रा की शुरूआत हुई। ग्राम बंदोरा से शुरू हुई यह पदयात्रा रूमेकेल में समाप्त हुई। इस दौरान जगह-जगह प्रदेशाध्यक्ष श्री बैज सहित कांग्रेस पदाधिकारियों ने मनरेगा मजदूरों से चर्चा की।

सोमवार की सुबह 11 बजे ग्राम बंदोरा से मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत पदयात्रा की शुरूआत हुई। प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज की अगुवाई में निकली यह ऐतिहासिक पदयात्रा रायमुड़ा, झाखरमुड़ा होते रूमेकेल पहुंची। ग्राम रूमेकेल में समापन सभा को संबोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को समाप्त करने की साजिश पर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार मनरेगा को खत्म कर किसान, मजदूर वर्ग के लोगों के अधिकार को छीन रही है। मोदी सरकार की नीतियां सीधे तौर पर मजदूर विरोधी हैं और मनरेगा को समाप्त करना इसी का हिस्सा है। मनरेगा बंद होने का मतलब है, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला है। यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि करोड़ों गरीब परिवारों के जीवन का सहारा है। विश्व की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने का ताना बाना पहले से बना चुकी थी। मनरेगा कानून था काम की गारंटी थी, जिसमें 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती थी। नए प्रावधानों के तहत इसे 60:40 के अनुपात में बांट दिया गया है, यानी राज्यों पर सीधा वित्तीय बोझ डाल दिया गया है। छ.ग. सरकार के पास तो काम होने के बाद भुगतान का पैसा नहीं तो रोजगार कहां प्रारंभ करवा पाएगी।

खल्लारी विधायक व जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव ने मनरेगा का नाम बदलने पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अब नए बदलावों के जरिए मनरेगा के मूल स्वरूप को ही खत्म करना चाहती है। खल्लारी विधायक श्री यादव ने कहा कि महान अर्थशास्त्री और तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 2005 में यूपीए सरकार के तहत मनरेगा जैसी योजनाएं लागू की। जिसमें 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई और अगर समय पर काम नहीं मिलता तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी शामिल था। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान, यही योजना लाखों प्रवासी मजदूरों के लिए जीवन रेखा साबित हुई, जिसने अपने गांवों में लौटे लोगों को रोजगार दिया।

 

इस दौरान प्रमुख रूप से सरायपाली विधायक चातुरी नंद, राष्ट्रीय सचिव महिला कांग्रेस गुंजन सिंग, पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर, पूर्व प्रभारी महामंत्री प्रदेश कांग्रेस अमरजीत चावला, पूर्व जिलाध्यक्ष रश्मि चंद्राकर, मोहित ध्रुव, पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष केशव नायकराम चंद्राकर, दुर्गा सागर, महासमुंद शहर अध्यक्ष गुरमीत चावला, लक्ष्मण पटेल, सेवनलाल चंद्राकर, दाउलाल चंद्राकर, हीरा बंजारे, सृष्टि अमर चंद्राकर, नगरपालिका महासमुंद के अध्यक्ष निखिलकांत साहू, सीटू सलूजा, ब्लाक अध्यक्ष खिलावन साहू, जिला कोषाध्यक्ष निर्मल जैन, मोक्ष प्रधान, सृष्टि ध्रुव, रूपकुमारी ध्रुव, जगन्नाथ खैरवार, रोशन पटेल, अन्नू चंद्राकर, अमन चंद्राकर, मानिक साहू, संतोष साहू, ढेलू निषाद, देवनाथ साहू, लखबीर छाबड़ा, करण दीवान, खेमराज सिन्हा, शंकर पटेल, शाहबाज राजवानी, तुलसी साहु, मधुसूदन, तन्मय पांडा, कमल अग्रवाल, रीना कागजी, केशव चौधरी, थनवार यादव, रमन ठाकुर, लेडगाराम साहू, खिलावन ध्रुव, मयाराम टंडन, बिसराम चौहान, खोम सिन्हा, किशन कोसरिया, गजाधर धीवर, अरूण चंद्राकर, बृजेन हीरा बंजारे, ममता चंद्राकर, गिरधर आवड़े, दिलीप जैन, आलोक नायक, जगत देवदास, शेषराज हरदेव, प्रीतम यादव, गंगाराम पटेल, शिव यादव, राहुल यादव, लालसिंग ध्रुव, परस पटेल, दुष्यंत धु्रव, दीनदयाल साहू, खोरबाहरा, सियाराम यादव, कृष्णकुमार नर्मदा, प्रेमलाल टंडन, शत्रुघन चेलक, राजा गंभीर कुणाल चंद्राकर, अनुराम चंद्राकर, अरिन चंद्राकर, पवन ध्रुव, दिलीप चंद्राकर, देवनाथ साहू, राजू चंद्राकर, फुलसिंह ध्रुव, आशीष दीवान, चंदूलाल साहू, गिरीश पटेल, दुर्गेश यादव, रीमा यादव, अंजोर सिंह ठाकुर, एडिशन ठाकुर, सनत साहू, गणेश महराज, छोटू बघेल, टोमन कागजी, दीपक सिन्हा, मदन पटेल, विवेक पटेल, सौरभ लोधी, तुलसी साहू, देवेश शर्मा, शंकर पटेल, गणेश बरिहा, गैंदसिंह कागजी, धनीराम धु्रव, संतोष पटेल, पतिराम यादव, चंदर सिंह, सियाराम पटेल, हीरा ध्रुव, ललित यादव, ललित बरिहा, अमर सिंह ध्रुव, इंद्रजीत पटेल, सोनूरा खडिय़ा, भारत खडिय़ा, सुंदर ध्रुव, महेश बरिहा, संतोष ध्रुव, कुशल खडिय़ा आदि मौजूद थे।


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