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किसानों के मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी कर रहे भाजपा नेता अपनी सरकार पर उठे सवालों से निरुत्तर हुए
08-Jan-2021 7:42 PM
किसानों के मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी कर रहे भाजपा नेता अपनी सरकार पर उठे सवालों से निरुत्तर हुए

प्रदेश उपाध्यक्ष मोतीलाल साहू की पत्रकार वार्ता, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक भी शामिल हुए

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 8 जनवरी।
धान खरीदी और किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर इस माह आंदोलन करने जा रही भाजपा के नेताओं को तब जवाब देते नहीं बना जब उनसे पूछा गया कि दिल्ली में आपकी ही सरकार के रहते 57 आंदोलनकारी किसानों की मौत हो गई है, उस पर क्यों मौन हैं और धान पर बोनस देने के अपने वायदे को प्रदेश में भाजपा सरकार क्यों पूरा नहीं कर पाई।

जिला भाजपा कार्यालय में आज जिले के प्रभारी प्रदेश उपाध्यक्ष मोतीलाल साहू की पत्रकार वार्ता आयोजित थी। इस दौरान सवाल जवाब में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक भी शामिल हुए।

साहू ने 13 जनवरी को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में होने वाली धरना और 22 जनवरी को जिला मुख्यालयों में होने वाले प्रदर्शन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का रवैया किसान विरोधी है, उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। पूरे प्रदेश में धान खरीदी बंद होने की स्थिति में है। बीते चुनाव में कांग्रेस किसानों से लुभावने वादे कर सत्ता में आई। उसने अपने घोषणा पत्र में कर्ज माफी के वादे के साथ कोई शर्त नहीं जोड़ी थी पर सरकार आने पर ऋण को अलग-अलग तरह से परिभाषित कर दिया जिससे हजारों किसान इस योजना से बाहर हो गये। किसानों से 2500 रुपये प्रति क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर खरीदने की बात थी पर नहीं दिया गया बल्कि राजीव न्याय योजना में डालकर किश्तों में भुगतान किया जा रहा है। घोषणा पत्र में ऐसी किसी योजना का जिक्र नहीं था। हमने पूछा था कि 2500 रुपये कैसे देंगे तो कांग्रेस नेता कहते थे हमने अध्ययन कर लिया है, सरकार चलाना जानते हैं। अब केन्द्र पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है कि हम पैसा देना चाहते हैं उसमें केन्द्र रुकावट डाल रही है। पहली बार किसानों को धान बेचने से रोकने के लिये गिरदावरी का इस्तेमाल किया गया। राजस्व वालों ने टेबल पर ही रिपोर्ट बना दी जिससे किसानों का 2 लाख एकड़ रकबा कट गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के इलाके में किसानों को आत्महत्या करनी पड़ रही है। कोंडागांव में 100 क्विंटल धान पैदा करने वाले किसान ने आत्महत्या की क्योंकि उसे सिर्फ 10 क्विंटल बेचने की अनुमति मिली।

साहू ने कहा कि भाजपा सरकार के 15 सालों में कभी धान खरीदी की ऐसी अव्यवस्था नहीं देखी गई। कभी उठाव नहीं तो कभी केन्द्र द्वारा बारदाना नहीं दिये जाने का शर्मनाक आरोप लगाया जा रहा है। सच ये है कि इन्होंने धान खरीदी की कोई तैयारी ही नहीं की थी।

उन्होंने कहा कि यह पहली सरकार है जिसने 1000 करोड़ रुपये का धान खराब कर दिया, जिसे एफसीआई में जमा करने की अनुमति केन्द्र सरकार से मिली थी। राज्य सरकार ने पहले सितम्बर तक का फिर दिसम्बर तक समय मांगा, पर विफल रही और पिछले साल का 20 लाख क्विंटल अब तक जमा नहीं किया गया।

इन सवालों पर घिरे भाजपा नेता

प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा नेताओं के वक्तव्य पर ही प्रतिप्रश्न हो गये। साहू को यह जवाब नहीं देते बना कि जब भाजपा छत्तीसगढ़ में किसानों की आत्महत्या पर चिंतित है तो दिल्ली में आंदोलन कर रहे 57 किसानों की मौत पर वहां की उनकी सरकार क्यों नहीं पिघली?  साहू ने कहा कि किसान बिल पर केन्द्र सरकार किसानों से बात कर रही है। नेता प्रतिपक्ष कौशिक का कहना था कि वह केन्द्र का मसला है, उनके स्तर पर देखा जा रहा है।

जब पूछा गया कि छत्तीसगढ़ में भाजपा ने भी 2100 रुपये में धान खरीदी का वायदा किया था, पूरा क्यों नहीं किया। साहू का जवाब था हमने कहा था, प्रयास करेंगे। पत्रकारों ने याद दिलाया कि वह संकल्प पत्र था, प्रयास पत्र नहीं। साहू के पास इसका कोई जवाब नहीं था।

कौशिक से पूछा गया कि अगर पिछले साल छत्तीसगढ़ सरकार पूरा धान जमा नहीं कर पाई तो क्या इस बार उसी का बदला लेने के लिये धान नहीं उठाया जा रहा है। कौशिक ने कहा- नहीं इस बारे में केन्द्र और राज्य सरकार के साथ इस बारे में बात चल रही है।

भाजपा नेताओं से यह भी पूछा गया कि केन्द्र की ओर से आये 9000 करोड़ रुपयों का हिसाब वह प्रदेश सरकार से मांग रही है, वह राशि कब और किस मद में खर्च करने के लिये दी गई थी? भाजपा नेताओं के पास इसका भी जवाब नहीं था।

पत्रकार वार्ता में विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, विधायक रजनीश सिंह, प्रदेश भाजपा महामंत्री भूपेन्द्र सवन्नी और जिला भाजपा अध्यक्ष रामदेव कुमावत भी उपस्थित थे। 


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