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छत्तीसगढ़ की राजीव न्याय योजना की वजह से चावल नहीं ले रही एफसीआई?
03-Jan-2021 2:33 PM
छत्तीसगढ़ की राजीव न्याय योजना की वजह से चावल नहीं ले रही एफसीआई?

   लेकिन ओडिशा-तेलंगाना में तो...   

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 3 जनवरी।
केन्द्र सरकार भले ही राजीव गांधी न्याय योजना की वजह से छत्तीसगढ़ का चावल लेने से मना कर रही है, लेकिन तेलंगाना और ओडिशा में भी मिलती-जुलती योजना चल रही है। मगर दोनों राज्यों से चावल लेने पर केन्द्र ने रोक नहीं लगाई है। इससे परे छत्तीसगढ़ सरकार न्याय योजना से जुड़े विवाद के निपटारे के लिए कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। हाल यह है कि अब तक एफसीआई ने चावल लेना शुरू नहीं किया है, जिसकी वजह से धान खरीदी संकट पैदा हो गया है।

केन्द्र सरकार ने प्रदेश के किसानों को बोनस देने का आरोप लगाते हुए चावल लेने से मौखिक तौर पर मना कर दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने साफ किया है कि किसानों को बोनस नहीं दिया जा रहा है, बल्कि राजीव गांधी न्याय योजना के जरिए आदान सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इस सिलसिले में शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए खाद्य सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने केन्द्रीय खाद्य सचिव से चर्चा की, और वस्तुस्थिति से अवगत कराया। उन्होंने एफसीआई द्वारा चावल नहीं लेने से प्रदेश में धान खरीद संकट की जानकारी भी दी। 

खाद्य सचिव ने केन्द्र सरकार को पत्र भी भेजा है, और एफसीआई को जल्द से जल्द चावल लेने के लिए आदेशित करने का आग्रह किया है। ताकि धान खरीद से जुड़ी समस्याओं को दुरूस्त किया जा सके। राज्य सरकार अभी भी उम्मीद से है, और खाद्य सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि एक-दो दिनों में केन्द्र सरकार का रूख सामने आ सकता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल से बात कर चुके हैं। लेकिन अभी तक एफसीआई ने चावल लेना शुरू नहीं किया है।  

केन्द्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल ने सीधे-सीधे कहा कि केन्द्र सरकार के रोक के बाद भी छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को धान खरीद पर बोनस दे रही है। इस पर मुख्यमंत्री ने सफाई भी दी है। यह बताया कि धान खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होती है। जबकि राजीव गांधी न्याय योजना के जरिए प्रति एकड़ किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। न सिर्फ धान बल्कि मक्का और गन्ना किसानों को भी प्रोत्साहन राशि दी जाती है। हाल यह है कि चावल नहीं लेने से मीलिंग बंद है, और धान खरीदी भी तकरीबन ठप्प हो गई है। खरीदी केन्द्रों में धान जाम है। धान का उठाव नहीं हो रहा है। 

दूसरी तरफ, राजीव न्याय योजना से मिलती-जुलती योजना तेलंगाना और ओडिशा में भी चल रही है। मगर वहां एफसीआई चावल ले रही है। तेलंगाना सरकार रायतु बंधु योजना चला रही है। इस योजना के जरिए हर किसान को सालाना 8 हजार रूपए दिए जाते हैं, जो कि प्रति फसल 4 हजार रूपए एकड़ है। मगर एफसीआई तेलंगाना सरकार से चावल ले रही है। इस साल करीब साढ़े 14 लाख टन चावल लेने जा रही है।

 इसी तरह ओडिशा में भी कालिया योजना चल रही है। इस योजना के जरिए किसानों को 10 हजार रूपए देने का प्रावधान है। इसके बाद भी एफसीआई ने चावल लेने पर रोक नहीं लगाई है। प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना के तहत साल में तीन बार किसानों को दो-दो हजार रूपए केन्द्र सरकार देती है। इन सबके बाद भी राजीव गांधी न्याय योजना पर आपत्ति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जल्द ही यह विवाद नहीं सुलझा, तो आने वाले दिनों में केन्द्र और राज्य के बीच टकराव बढ़ सकता है। 


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