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कोरबा का घना आरक्षित वन क्षेत्र लेने का इरादा है केंद्र सरकार का
01-Jan-2021 6:04 PM
कोरबा का घना आरक्षित वन क्षेत्र लेने का इरादा है केंद्र सरकार का

  कोयला क्षेत्र की अधिसूचना जारी  

जयश्री नंदी
नई दिल्ली, 1 जनवरी।
 केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में 712 हेक्टेयर जमीन को कोयला खदान बनाने के लिए लेने के लिए अधिसूचना जारी की है। यह जमीन जिले के घने वन क्षेत्र में है जहां पर राज्य सरकार हाथी रिजर्व बनाने की सोच रही है।

24 दिसंबर को प्रकाशित अधिसूचना के मुताबिक केंद्र सरकार 489 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि, और 159 हेक्टेयर दूसरी वन भूमि व राजस्व भूमि लेने की तैयारी कर रही है। 

कोयला खदानों वाले इलाकों में जमीन लेने के लिए कानूनी प्रावधानों के मुताबिक सरकार ने अपने इरादे की अधिसूचना जारी की है। एक्ट का प्रावधान कहता है कि अगर केंद्र सरकार इस बात से संतुष्ट है कि किसी जमीन से कोयला हासिल किया जा सकता है तो वह उस जमीन के अधिग्रहण के अपने इरादे का नोटिस दे सकती है।

लेकिन इस जमीन का वन भूमि से गैरवन भूमि में परिवर्तन नहीं हुआ है और छत्तीसगढ़ सरकार इसे एलिफेंट रिजर्व बनाने का विचार कर रही है।
छत्तीसगढ़ के वन विभाग के प्रमुख, पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी का इस बारे में कहना है- हमने इस जमीन के डायवर्सन की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। उन्होंने कहा कि वे अभी यह भी नहीं कह सकते कि यह जमीन डायवर्ट की जाएगी या नहीं, और की जाएगी तो कब। उन्होंने कहा कि एलीफेंट रिजर्व का विस्तार करना अभी विचाराधीन है।

छत्तीसगढ़ के वन्य प्राणी विभाग के प्रमुख पी.वी. नरसिंह राव का कहना है कि अभी एलीफेंट रिजर्व की अधिसूचना जारी नहीं हुई है इसलिए इसकी सीमाओं पर बात करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पर फैसला लेगी।

छत्तीसगढ़ में पर्यावरण कार्यकर्ता और कानूनी शोधकर्ता पहले ही कुछ हिस्सों में बड़ी जमीनों के अधिग्रहण को लेकर फिक्र जाहिर कर चुके हैं। इसी इलाके में हसदेव अरण्ड क्षेत्र में बड़ी समृद्ध जैव विविधतता वाले जंगल का बड़ा इलाका अधिग्रहण करने के खिलाफ फिक्र जाहिर की जा रही है। इस इलाके में सेंट्रल इंडिया का सबसे घना और बड़ा जंगल फैला हुआ है जिसके एक लाख 70 हजार हेक्टेयर इलाके के नीचे 22 कोल ब्लॉक होना बताया गया है।

सेंट्रल फॉर पॉलिसी रिसर्च नाम के एक थिंक टैंक की कानूनी शोधकर्ता कांची कोहली का कहना है- केंद्र सरकार ने कुछ वन भूमि लेने की अधिसूचना जारी की है जिसके डायवर्सन की प्रक्रिया भी अभी लंबित है। राज्य सरकार इस इलाके को एलीफेंट रिजर्व घोषित करना चाहती है और स्थानीय ग्राम सभाओं ने मंजूरी देने से मना कर दिया है। 

उन्होंने आगे कहा- इससे केंद्र सरकार की इस अधिसूचना की वैधानिकता को लेकर गंभीर कानूनी सवाल खड़े होते हैं जो कि सरकारी वन भूमि अधिग्रहण के बारे में है। लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि केंद्र और राज्य सरकारें हसदेव अरण्ड क्षेत्र के इस इलाके के बारे में अलग-अलग भविष्य सोच रही हैं जो कि संघीय व्यवस्था की असफलता बताता है।

छत्तीसगढ़ बचाव आंदोलन नाम के एक एनजीओ के संयोजक आलोक शुक्ला का कहना है कि सरकार को इस बारे में स्थानीय ग्राम सभाओं से विचार-विमर्श करना चाहिए। उन्होंने कहा-मेरा सोचना है कि इस तरह से जमीन अधिग्रहण करना अधिसूचित क्षेत्रों के लिए पंचायत कानून, पेशा, के पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले इस इलाके के लोगों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श होना चाहिए और राज्य सरकार को केंद्र के इस कदम का विरोध करना चाहिए।  (हिंदुस्तान टाईम्स)


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