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CREDIT-IANS
नई दिल्ली, 18 अगस्त। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और व्हाट्सएप को लेकर विवाद के बीच, सूचना और प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति फेसबुक की जांच करेगी, ताकि नफरत फैलाने वाली सामग्री में हेरफेर की जानकारी मिल सके। समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा, "प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति निश्चित रूप से इन रिपोर्टों के बारे में फेसबुक से सुनना चाहेगी और वे भारत में घृणा-भाषण के बारे में क्या करने का प्रस्ताव रखते हैं।"
Our Parliamentary committee will, in the normal course, consider testimony under the topic “Safeguarding citizens’ rights & prevention of misuse of social/online news media platforms”. The subject is squarely within the IT Cmt’s mandate& @Facebook has been summoned in the past. https://t.co/saoK8B7VCN
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) August 16, 2020
कांग्रेस सांसद के कार्यालय ने कहा कि समिति के अध्यक्ष ने कहा है, "हमारी संसदीय समिति, सामान्य तौर पर, नागरिकों की सुरक्षा के अधिकार विषय के तहत गवाही पर विचार करेगी और सामाजिक/ऑनलाइन समाचार मीडिया प्लेटफार्मो के दुरुपयोग को रोकेगी। यह विषय आईटी समिति के मैन्डेट में है और पूर्व में पेसबुक को समन किया जा चुका है।
"ग्रेस ने बीजेपी और आरएसएस पर भारत में फेसबुक और व्हाट्सएप को नियंत्रित करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि दोनों ने देश में लोकतंत्र पर हमला किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इसकी संदेश सेवा द्वारा कथित उल्लंघन की संयुक्त संसदीय समिति की जांच की मांग की।
भाजपा-RSS भारत में फेसबुक और व्हाट्सएप का नियंत्रण करती हैं।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 16, 2020
इस माध्यम से ये झूठी खबरें व नफ़रत फैलाकर वोटरों को फुसलाते हैं।
आख़िरकार, अमेरिकी मीडिया ने फेसबुक का सच सामने लाया है। pic.twitter.com/PAT6zRamEb
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को ट्वीट किया, "बीजेपी-आरएसएस भारत में फेसबुक और व्हाट्सएप का नियंत्रण करती हैं। इस माध्यम से ये झूठी खबरें व नफरत फैलाकर वोटरों को फुसलाते हैं। आखिरकार, अमेरिकी मीडिया ने फेसबुक का सच सामने लाया है।"
एक वर्चुअव प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, कांग्रेस के प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने रविवार को कहा, "व्हाट्सएप पर 40 करोड़ भारतीय हैं और फेसबुक पर 28 करोड़ से अधिक हैं। इसलिए, वाणिज्यिक लेनदेन, घृणास्पद सामग्री के प्रचार, और बीजेपी के साथ फेसबुक और व्हाट्सएप कर्मचारियों के संबंध की जांच अवश्य होनी चाहिए।"(NAVJIVAN)


