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अगल-बगल बैठे हैं मंदिर मस्जिद !!
17-Aug-2020 5:55 PM
अगल-बगल बैठे हैं मंदिर मस्जिद !!

आज 17 अगस्त 2020, समय 11.40 राकेश अहिरवार मेरे चैम्बर में दाखिल होते हैं, दोनों आँखे पैदाइश से आधी बनी आयीं हैं। ये दो माह पहिले आये थे, इन्हीं सज्जन के साथ, जिन्हें मैं राकेश का पिता समझता था, उस वक्त एक आँख का ऑपरेशन किया था और 20 हजार रूपये का शुल्क लिया था।

आज दूसरी आँख का ऑपरेशन तय हुआ था।

जिन्हें मैं पिता समझता था, आज पहिली बार बोले डॉ. साहिब मैं इसका पिता नहीं हूँ, मेरा नाम राशिद खान है, इसके पिता कौन थे पता नहीं। मेरे गाँव में रहता है, दृष्टिहीन है, इसकी पत्नी मजदूरी कर पेट पालती है, मेरे संपर्क में आए, मैं इलाज में मदद करता हूँ, आज पैसे कुछ कम हैं, अगर मोहलत मिल जाए।

मैंने क्या किया नहीं लिख रहा, आत्म प्रशंसा होगी, पर मैंने फिर देखी मानवता की दमकती तस्वीर, इंसानियत की बोलती इबारत, भाई चारे का बुलंद नगमा, ये साधारण से दिखने वाले राशिद खान सारे मुल्ला पंडों पर भारी पड़े, और 600 किलोमीटर का सफर कर के आए, बिना दक्षिणा मुझे शास्त्र ज्ञान दे गए, मात्र 3 मिनट में, न पंडाल, न माइक, न भीड़, न उत्सव, न घंटों के प्रवचन।

लीजिये आप भी देव दर्शन कर लीजिये, इबादत पूजा कर लो भाइयों, बगल-बगल बैठे हैं मंदिर मस्जिद !!

-डॉ. अरविंद कुमार दुबे


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