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देरी को लेकर राजस्व अधिकारियों को लगाई फटकार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 16 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जमीन सीमांकन के एक मामले में राजस्व विभाग को फटकार लगाते हुए बिलासपुर तहसीलदार को 15 दिनों के भीतर सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान दिया।
मामला बिलासपुर के मंगला क्षेत्र स्थित भाटिया रेजीडेंसी की निवासी सरोज वाजपेयी का है। उन्होंने अपनी निजी भूमि (खसरा नंबर 968/2/सी, रकबा 0.0310 हेक्टेयर) पर निर्माण कार्य शुरू करने के लिए 27 फरवरी 2026 को अतिरिक्त तहसीलदार के समक्ष सीमांकन के लिए आवेदन किया था।
याचिका में बताया गया कि आवेदन दिए जाने के लगभग तीन महीने बाद भी राजस्व विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे परेशान होकर सरोज वाजपेयी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार वाजपेयी ने अदालत को बताया कि मानसून शुरू होने से पहले सीमांकन नहीं होने पर निर्माण कार्य प्रभावित होगा और उन्हें अपूरणीय नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के तहत सीमांकन संबंधी आवेदनों पर निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई करना राजस्व अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैनल अधिवक्ता अमित नायक ने कहा कि लंबित आवेदन के निपटारे के लिए समय-सीमा तय किए जाने पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।
मामले में हाईकोर्ट ने तहसीलदार को निर्देश दिया कि संबंधित भू-स्वामियों को नोटिस जारी कर नियमानुसार सीमांकन की प्रक्रिया पूरी की जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कानूनी बाधा न हो तो आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया समाप्त कर ली जाए।


