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रामगढ़ पहाड़ के अस्तित्व को खतरा- सिंहदेव
28-May-2026 7:14 PM
रामगढ़ पहाड़ के अस्तित्व  को खतरा- सिंहदेव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अम्बिकापुर, 28 मई । पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केते एक्सटेंशन कोल परियोजना को मिली स्वीकृति पर केंद्र और राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अडानी के एमडीओ वाली एक और कोल परियोजना को आखिरकार मंजूरी दे दी गई है।

राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित इस परियोजना का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा हसदेव अरण्य के संरक्षित और आरक्षित घने वन क्षेत्र में आता है, जहां 1,742.6 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी और करीब 7 लाख पेड़ों की कटाई होगी। उन्होंने कहा कि यह पूरा क्षेत्र सरगुजा के ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ से लगा हुआ है और खदान की स्वीकृति से रामगढ़ के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। सिंहदेव ने कहा कि पहले से संचालित कोल परियोजनाओं के कारण रामगढ़ पहाड़ में दरारें आ रही हैं और चट्टानें टूट रही हैं। ऐसे में नई परियोजना से स्थिति और गंभीर हो सकती है।

टीएस सिंहदेव ने याद दिलाया कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया था कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में नई कोल परियोजनाओं को अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार की ओर से शपथ पत्र देकर नई खदानों को गैरजरूरी बताया गया था। इसके बावजूद केते एक्सटेंशन परियोजना को मंजूरी देना रामगढ़ पहाड़ और वहां स्थित धार्मिक-ऐतिहासिक स्थलों के अस्तित्व के लिए खतरा है। सिंहदेव ने कहा कि उन्होंने लगातार इस परियोजना का विरोध किया और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भी संवैधानिक तरीके से हसदेव अरण्य को बचाने के प्रयास किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार जनहित के बजाय एक निजी कंपनी के हित में काम कर रही है।


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