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गंगा में जूठा मांसाहारी खाना फेंकने से धार्मिक भावनाएं हो सकती हैं आहत- इलाहाबाद हाई कोर्ट
18-May-2026 9:13 AM
गंगा में जूठा मांसाहारी खाना फेंकने से धार्मिक भावनाएं हो सकती हैं आहत- इलाहाबाद हाई कोर्ट

लीगल मामलों को रिपोर्ट करने वालीं वेबसाइट 'लाइव लॉ' और 'बार एंड बेंच' के मुताबिक़, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि गंगा नदी में नॉन-वेजिटेरियन फ़ूड वेस्ट (जूठा मांसाहारी भोजन) फेंकने से हिन्दू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं.

हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर आयोजित इफ़्तार पार्टी के दौरान मांसाहारी भोजन करने और उसका बचा हुआ कचरा नदी में फेंकने के आरोप हैं.

हालांकि, 15 मई को कोर्ट ने इस मामले में 14 में से आठ अभियुक्तों को ज़मानत दे दी है. उसी दिन अदालत ने यह टिप्पणी भी की.

लाइव लॉ के मुताबिक़, 15 मई को जारी किए गए अलग-अलग आदेशों में जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने पांच अभियुक्तों को, जबकि जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने तीन अभियुक्तों को ज़मानत दी.

लाइव लॉ के मुताबिक़, अपने 16 पन्नों के आदेश में जस्टिस शुक्ला ने कहा कि कथित कृत्य से हिन्दू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं, लेकिन अभियुक्तों ने अपने शपथ पत्रों में "पछतावे" की बात कही है.

बार एंड बेंच के मुताबिक़, अदालत ने कहा, "मौजूदा मामला मुस्लिम समुदाय के लोगों की रोज़ा इफ़्तार पार्टी से जुड़ा है. आरोप है कि इफ़्तार पार्टी के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मांसाहारी भोजन किया और उसका बचा हुआ खाना गंगा नदी में फेंक दिया. अदालत की निष्पक्ष राय में यह तथ्य हिन्दू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला माना जा सकता है." (bbc.com/hindi)


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