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राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के दो तिहाई राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के मुद्दे आप ने जल्द सुनवाई की मांग की है.
रविवार को 'आप' के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा, "सभी विशेषज्ञों से सलाह लेने और (कपिल) सिब्बल की राय जानने के बाद, मैंने राज्यसभा के सभापति (भारत के उपराष्ट्रपति) को एक याचिका भेजी है.''
संजय सिंह ने बताया, ''इसमें अनुरोध किया गया है कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, इन सात सदस्यों की सदस्यता पूरी तरह से समाप्त कर दी जाए. मैंने उपराष्ट्रपति और सभापति से यह भी अनुरोध किया है कि वे इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द करें और इस पर एक न्यायसंगत निर्णय दें.''
संजय सिंह ने कहा है कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के कई फ़ैसले मौजूद हैं और अपने सांसदों के पार्टी छोड़ने के मुद्दे पर क़ानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी.
पार्टी में बिना प्रस्ताव पारित किए विलय नहीं हो सकता- कपिल सिब्बल
शनिवार को आप के राज्य सभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के फ़ैसले पर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था, “मुझे नहीं लगता कि इन 7 लोगों और बीजेपी को संविधान की ज़्यादा समझ है, क्योंकि इन्हें ख़ुद ही शायद पता नहीं होगा कि विलय का मतलब क्या होता है.''
सिब्बल के मुताबिक़, '''संविधान में लिखा है कि सबसे पहले जो राजनीतिक दल है, उसे यह फ़ैसला लेना होगा कि वह किसी पार्टी के साथ विलय करना चाहता है. जैसे आम आदमी पार्टी संगठन के स्तर पर बैठक बुलाकर प्रस्ताव पास करके यह तय करे कि वह विलय करना चाहती है, या फिर दोनों राजनीतिक पार्टियां संगठन स्तर पर प्रस्ताव पास कर फ़ैसला करें कि वे आपस में विलय करना चाहती हैं.''
उन्होंने कहा, ''अगर राजनीतिक पार्टी का विलय हो जाता है और पार्टी के पास 10 सांसद हैं, और ये लोग पार्टी के साथ विलय करने के लिए दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास करते हैं, तो इनका विलय हो सकता है. इसका उल्टा नहीं हो सकता, पार्टी के विलय से पहले ये सांसद किसी दूसरी पार्टी के साथ विलय नहीं कर सकते.''
शुक्रवार को संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर राघव चड्ढा ने कहा था, "हमने तय किया है कि हम, राज्य सभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य संविधान के प्रावधानों के अनुसार बीजेपी में शामिल हो रहे हैं." (bbc.com/hindi)


