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-इमरान क़ुरैशी
केरल हाईकोर्ट के निर्देश के दस महीने बाद, एक ट्रांसजेंडर दंपति को आख़िरकार अपने बच्चे का बर्थ सर्टिफ़िकेट मिल गया है. इसमें माता-पिता के बजाय उन्हें पैरेंट्स के तौर पर दर्ज़ किया गया है.
जून 2025 में जस्टिस ज़ियाद रहमान एए के ऐतिहासिक फैसले के पीछे इस दंपति (ज़िया और ज़हद) की तीन साल लंबी कानूनी लड़ाई थी. वे अपनी बेटी ज़ाबिया के लिए जेंडर-न्यूट्रल बर्थ सर्टिफ़िकेट चाहते थे.
साल 2023 में यह मामला तब चर्चा में आया था, जब ज़हद और ज़िया (25 साल) ने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें साझा कीं. इनमें ज़हद (24 साल) गर्भवती दिख रहे थे.
ज़हद भारत के पहले ट्रांसजेंडर पुरुष बने, जिन्होंने कोझिकोड के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया.
ज़हद का जन्म महिला के रूप में हुआ था, लेकिन वो सेक्स रीअसाइनमेंट प्रक्रिया के जरिए ट्रांसजेंडर पुरुष बन गए.
वहीं ज़िया का जन्म पुरुष के रूप में हुआ था. दोनों ने जब बच्चा पैदा करने का फ़ैसला किया तो ज़िया ने भी सेक्स रीअसाइनमेंट की प्रक्रिया शुरू की थी.
जब यह दंपति कोझिकोड सिटी कॉरपोरेशन के पास जन्म प्रमाणपत्र के लिए गया था, तो उसमें ज़हद (ट्रांसजेंडर) को मां और ज़िया (ट्रांसजेंडर) को पिता के तौर पर दर्ज़ किया गया था.
जस्टिस रहमान ने कहा कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़े नियम ऐसे बनाए गए हैं, जिनमें ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों को ध्यान में नहीं रखा गया है.
जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (नालसा) और ट्रांसजेंडर एक्ट 2019 के ज़रिये इन अधिकारों को मान्यता दी है.
उन्होंने कहा, “ऐसे मामलों में, जहां ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के हित जुड़े हों, जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं.”
इस फैसले को दो वजहों से ऐतिहासिक माना जा रहा है.
पहली, यह एक ट्रांसजेंडर दंपति को परिवार के रूप में मान्यता देता है. दूसरी, इससे ट्रांसजेंडर समुदाय की उस मांग को मजबूती मिलती है, जिसमें वे बच्चों को गोद लेने के अधिकार की बात करते हैं.
हालांकि बेंगलुरु का एक फैमिली कोर्ट पहले इस तरह का फै़सला दे चुकी है. अदालत ने सिटी कॉरपोरेशन को दो महीने के भीतर नया जन्म प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया था.
दंपति की वकील पद्मा लक्ष्मी ने बीबीसी हिन्दी से कहा,‘’लेकिन हाई कोर्ट की ओर से “फादर-मदर” की जगह “पैरेंट्स” करने निर्देश के बाद इसे लागू करने में दस महीने लग गए.’’
ज़िया ने कहा कि वे और ज़हद बहुत खुश हैं, क्योंकि उनकी पहचान की लड़ाई आख़िरकार सफल हुई है.
उन्होंने कहा, “अब हमें हमारी इच्छा के अनुसार पहचान मिल गई है.” (bbc.com/hindi)


