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उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश में बाल यौन शोषण (पॉक्सो) के आरोपों में एफ़आईआर दर्ज होने पर सरकार और प्रशासन पर कई तरह के आरोप लगाए हैं.
उन्होंने कहा कि यह 'शंकराचार्य नाम की संस्था पर हमला' है. उनका कहना है कि जो शंकराचार्य सत्ता के साथ हैं, उन्हें सारी सुविधाएं दी जा रही हैं और जो सवाल करते हैं उन पर आरोप लगाए जाते हैं.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ये आरोप सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान लगाए.
पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के अलावा 2-3 अज्ञात लोगों पर बाल यौन शोषण के आरोपों में एफ़आईआर दर्ज की है.
प्रयागराज की पॉक्सो अदालत ने शनिवार को झूंसी पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश दिए थे कि वह लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो क़ानून की धाराओं के तहत इन अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करें.
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने और क्या कहा?
उन्होंने कहा कि माघ मेले के दौरान जब वह प्रयागराज में धरने पर बैठे थे, उस वक्त हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे. ऐसे में सारी घटनाएं सीसीटीवी में दर्ज हैं.
उन्होंने यह भी कहा, "वे लड़के कभी हमारे गुरुकुल में नहीं आए, कभी पढ़ाई नहीं की और हमारा उनसे कोई संबंध नहीं है... जब वे कभी यहां आए ही नहीं और इस जगह से उनका कोई संबंध नहीं है, तो कोई उनके साथ कुछ कैसे कर सकता है?"
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि 'भ्रम फैला' रहे हैं कि एक सीडी है. उन्होंने सवाल किया, "उस सीडी को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?" (bbc.com/hindi)


