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(अभिषेक शुक्ला)
गुवाहाटी, 21 फरवरी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित 31 मार्च की समयसीमा तक देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा।
पूर्वोत्तर में पहली बार आयोजित 87वीं सीआरपीएफ दिवस परेड को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां पत्थरबाजी की घटनाओं की संख्या घटकर शून्य हो गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मणिपुर में जातीय हिंसा से निपटने और केवल तीन वर्षों में माओवादियों की कमर तोड़ने के लिए भी सीआरपीएफ को तैनात किया गया।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद देश के 12 राज्यों और कई जिलों में फैल चुका था, और जब केंद्र ने इस खतरे को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया, तो सीआरपीएफ और कोबरा बल के जवानों ने इस प्रयास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गृह मंत्री ने उल्लेख किया कि इतना विशाल, जटिल और कठिन कार्य महज तीन वर्षों में पूरा कर लिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘सीआरपीएफ कर्मियों की बदौलत हम विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि 31 मार्च 2026 तक देश नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।’’
गृह मंत्री ने दुर्गम भूभाग में भीषण गर्मी के बीच छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुटा पहाड़ियों में 21 दिनों के ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ के लिए सीआरपीएफ की प्रशंसा की, जिसमें अप्रैल-मई 2025 में 31 नक्सली मारे गए थे।
उन्होंने कहा कि असाधारण साहस का प्रदर्शन करते हुए, सीआरपीएफ के जवान अत्यधिक उच्च तापमान से तपती पथरीली पहाड़ियों पर उन 21 दिन के अभियान के दौरान एक इंच भी पीछे नहीं हटे और अंततः नक्सलियों के रणनीतिक अड्डे को नष्ट कर दिया।
शाह ने कहा कि सीआरपीएफ और कोबरा बल ने देश को "लाल आतंक" से मुक्त कराने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने बताया कि शनिवार को सीआरपीएफ के 14 जवानों को वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया, पांच जवानों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक मिला और बल की पांच बटालियन को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदकों से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, सीआरपीएफ के महानिदेशक जी पी सिंह और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इससे पहले, सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित 31 मार्च की समय सीमा तक देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा।
शाह ने कहा कि सीआरपीएफ के 86 साल के इतिहास में यह पहली बार है कि इसका स्थापना दिवस समारोह पूर्वोत्तर में, असम में आयोजित किया गया है, जो सभी के लिए और पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा, "2019 में यह निर्णय लिया गया था कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की वार्षिक परेड देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित की जाएगी। और आज, सीआरपीएफ की परेड देश के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक पूर्वोत्तर में आयोजित की जा रही है।"
देश भर की विभिन्न इकाइयों से चुनी गई सीआरपीएफ की आठ टुकड़ियों ने शनिवार को यहां सरुसजाई स्टेडियम में औपचारिक परेड का आयोजन किया। परेड का नेतृत्व 225वीं बटालियन के कमांडेंट दीपक ढोंडियाल ने किया। परेड में भाग लेने वाले दस्ते में उत्तरी सेक्टर की महिला कर्मी, साथ ही उत्तर पश्चिमी सेक्टर, झारखंड, ओडिशा, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), कोबरा यूनिट और पश्चिमी और उत्तर पूर्वी सेक्टरों की टुकड़ियां शामिल थीं।
उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ के बिना भारत की आंतरिक सुरक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। शाह ने कहा कि अपनी स्थापना के बाद से ही, सीआरपीएफ कर्तव्यनिष्ठा के कारण आंतरिक सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ रहा है और नतीजे भी दे रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के 2,270 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है और पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है। गृह मंत्री ने कहा कि कर्तव्यनिष्ठा और बलिदानों के कारण ही सीआरपीएफ जवानों ने अनेक अवसरों पर देश की रक्षा की है।
उन्होंने कहा, "11-12 साल पहले देश में तीन प्रमुख संवेदनशील क्षेत्र थे- जम्मू कश्मीर, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र और पूर्वोत्तर- जो आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी समस्या बन गए थे। आज इन तीनों स्थानों पर शांति स्थापित करने में सफलता प्राप्त हो चुकी है।"
शाह ने कहा, ‘‘ये तीनों क्षेत्र, जो कभी बमबारी, गोलीबारी, नाकाबंदी और विनाश के लिए जाने जाते थे, आज देश के विकास का हिस्सा हैं। विकास का इंजन बनकर, वे पूरे देश के विकास को गति देने में योगदान दे रहे हैं।"
गृह मंत्री ने कहा कि सीआरपीएफ के योगदान के बिना ऐसी शांति संभव नहीं होती।
शाह ने बताया कि सीआरपीएफ की यात्रा 1939 में मात्र दो बटालियन के साथ शुरू हुई थी और आज 248 बटालियन और 3.25 लाख कर्मियों की संख्या के साथ यह दुनिया की सबसे बड़ी सीएपीएफ बन गई है।
उन्होंने कहा कि कोलकाता में वामपंथी चरमपंथियों के हमले में 78 पुलिसकर्मियों के शहीद होने के बावजूद, सीआरपीएफ ने साहस के साथ मोर्चा संभाले रखा।
गृह मंत्री ने उल्लेख किया कि सीआरपीएफ ने संसद पर आतंकवादी हमले को भी विफल कर दिया और 2005 में श्री राम जन्मभूमि पर हुए हमले को नाकाम कर दिया।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में एक भी गोली नहीं चलानी पड़ी और इसे सुनिश्चित करने में सीआरपीएफ ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शाह ने कहा कि सीआरपीएफ, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और विशेष रूप से जम्मू कश्मीर पुलिस के महत्वपूर्ण योगदान के कारण जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं की संख्या घटकर शून्य हो गई है, उद्योग लगाए जा रहे हैं और विकास हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में शांति स्थापित करने में सीआरपीएफ ने अहम भूमिका निभाई है।
गृह मंत्री ने कहा कि अमरनाथ यात्रा हो या महाकुंभ, देश के सांस्कृतिक आयोजनों की सुरक्षा और सफलता सुनिश्चित करने में भी सीआरपीएफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर में सीआरपीएफ के 700 जवान मारे गए, 780 नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में और 540 जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए। उन्होंने कहा, ‘‘इन बलिदानों के बिना, आज इन तीनों संवेदनशील क्षेत्रों को विकास के पथ पर ले जाना असंभव होता। अगर मैं असम की बात करूं, तो 79 जवानों ने असम में शांति स्थापित करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया।’’
सीआरपीएफ की पहली बटालियन का गठन 1939 में ब्रिटिश शासन के तहत क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस (सीआरपी) के रूप में किया गया था। स्वतंत्रता के बाद, 1949 में, प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा इसका नाम बदलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल कर दिया गया। (भाषा)


