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मुंबई, 20 जनवरी। यहां की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को कारोबारी राज कुंद्रा को जमानत दे दी। कुंद्रा कथित बिटकॉइन घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में अदालत में पेश हुए थे।
धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामलों के विशेष न्यायाधीश आर बी रोटे ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए कुंद्रा को जनवरी में समन जारी किया था।
कुंद्रा अदालत के समक्ष पेश हुए और जमानत याचिका दायर की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।
उनके वकील प्रशांत पाटिल ने कहा कि कुंद्रा ने 2021 से ही ईडी की जांच में सहयोग किया था। पाटिल ने बताया कि मामले से संबंधित सभी दस्तावेज पहले से ही जांच एजेंसी के पास थे, इसलिए उनकी हिरासत की जरूरत नहीं थी।
अदालत ने आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए कहा था कि गवाहों के बयान और अन्य सबूतों से प्रथम दृष्टया ऐसा दिख रहा है कि कुंद्रा और दुबई स्थित कारोबारी राजेश सतीजा पीएमएलए के तहत दंडनीय अपराध में शामिल थे।
केंद्रीय अन्वेषण एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कुंद्रा ने ‘गेन बिटकॉइन पोंजी’ घोटाले के कथित षड्यंत्रकारी अमित भारद्वाज से यूक्रेन में ‘बिटकॉइन माइनिंग फार्म’ स्थापित करने के लिए 285 बिटकॉइन प्राप्त किए थे।
ईडी का दावा है कि चूंकि यह सौदा पूरा नहीं हुआ, इसलिए कुंद्रा के पास अब भी 285 बिटकॉइन हैं, जिनकी मौजूदा कीमत 150 करोड़ रुपये से अधिक है।
आरोपपत्र के अनुसार, कुंद्रा ने दावा किया कि उन्होंने केवल मध्यस्थ की भूमिका निभाई, लेकिन उन्होंने इस दावे को साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया।
आरोपपत्र में कहा गया है कि कुंद्रा और अमित के पिता महेंद्र भारद्वाज के बीच ‘टर्म शीट’ नामक एक समझौता हुआ था, इसलिए कुंद्रा का केवल मध्यस्थ होने का दावा मान्य नहीं है।
ईडी ने कहा कि कुंद्रा को लेन-देन के सात साल बाद भी पांच किस्तों में प्राप्त बिटकॉइन की सटीक संख्या याद है, जिससे यह ‘‘पुष्ट होता है कि उन्होंने वास्तव में वास्तविक मालिक के रूप में बिटकॉइन प्राप्त किये थे। उन्होंने केवल मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाई थी।’’
आरोपपत्र में कहा गया है कि वर्ष 2018 से कई अवसर मिलने के बावजूद, कुंद्रा उन वॉलेट का पता बताने में विफल रहे, जहां 285 बिटकॉइन स्थानांतरित किए गए थे। उन्होंने जानकारी न देने का कारण अपने आईफोन एक्स के क्षतिग्रस्त होने को बताया, जो सबूत नष्ट करने का प्रयास था। (भाषा)


