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नयी दिल्ली, 20 फरवरी। भारत शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल हो गया, जिसका मकसद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को बढ़ावा देने के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक लचीली आपूर्ति शृंखला विकसित करना है।
दोनों पक्षों ने ‘पैक्स सिलिका’ को एक देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने की पहल के रूप में पेश किया। उनका इशारा चीन की ओर माना जा रहा है।
अमेरिका के आर्थिक मामलों के उप मंत्री जैकब हेलबर्ग ने ‘पैक्स सिलिका’ में भारत का स्वागत करते हुए महत्वपूर्ण खनिजों के लिए “अत्यधिक केंद्रित” आपूर्ति शृंखलाओं और “आर्थिक दबाव एवं ब्लैकमेलिंग के खतरों” से उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
हेलबर्ग ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणियां स्पष्ट रूप से चीन पर लक्षित थीं, जो दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर नियंत्रण रखता है, जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और रक्षा सहित कई क्षेत्रों में होता है।
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने ‘पैक्स सिलिका’ में भारत का स्वागत करते हुए कहा कि देश गठबंधन को मजबूती प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा, “अमेरिका-भारत के तकनीकी सहयोग को मजबूत करने वाली नीतियां आने वाले वर्षों में एआई नवाचार और इनके इस्तेमाल को बढ़ावा देंगी। हम विश्वसनीय एआई तकनीक को दुनिया के साथ, खास तौर पर भारत जैसे साझेदारों के साथ साझा कर सकते हैं।”
गोर ने कहा, “और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के शामिल होने से गठबंधन मजबूत होता है। शांति इस उम्मीद से नहीं आती कि विरोधी निष्पक्ष व्यवहार करेंगे। हम सब जानते हैं कि वे ऐसा नहीं करेंगे। शांति ताकत से आती है। भारत इसे समझता है। भारत सीमाओं को मजबूत करने की अहमियत को समझता है।”
उन्होंने कहा, “भारत दुनिया के इस हिस्से को समझता है। वह शक्ति, वह संप्रभुता ही है, जो ‘पैक्स सिलिका’ को और भी मजबूत बनाती है, क्योंकि सच्चाई यही है कि जब शक्ति आपस में जुड़ती है, तो वह कई गुना बढ़ जाती है।”
भारत ने राष्ट्रीय राजधानी के ‘भारत मंडपम’ में ‘एआई इंपैक्ट समिट’ के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में ‘पैक्स सिलिका’ में औपचारिक रूप से शामिल होने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस कार्यक्रम में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, हेलबर्ग और गोर ने शिरकत की।
वैष्णव ने अपने संबोधन में इस आयोजन को एक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह से कहीं अधिक करार दिया।
उन्होंने कहा, “हम सिर्फ एक शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं कर रहे हैं; हम भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।”
वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि शिखर सम्मेलन के जरिये युवा पीढ़ी के लिए नयी नींव और नये अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा, “आज देश के प्रतिभाशाली इंजीनियर दो-नैनोमीटर आकार के दुनिया के सबसे उन्नत चिप डिजाइन कर रहे हैं। सेमीकंडक्टर उद्योग को लगभग दस लाख नये कुशल पेशेवरों की जरूरत होगी और यह भारत के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है।”
‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होने का भारत का फैसला भारत और अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने तथा द्विपक्षीय संबंधों में तनाव के लंबे दौर के बाद इन्हें मजबूत करने के लिए कई अन्य पहल पर आगे बढ़ने के प्रयासों के बीच आया है।
हेलबर्ग ने कहा, “हमने अपनी आर्थिक सुरक्षा की नींव को बहुत लंबे समय से कमजोर होने दिया है। हम खुद को एक ऐसी वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जूझते हुए पाते हैं, जो अत्यधिक केंद्रित है।”
उन्होंने कहा, “हम हमारे मित्रों और सहयोगियों को रोजाना आर्थिक दबाव एवं ‘ब्लैकमेलिंग’ के खतरों का सामना करते हुए देख रहे हैं, जिसके कारण उन्हें अपनी संप्रभुता और अपनी समृद्धि के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।”
हेलबर्ग ने कहा कि अमेरिका और भारत एआई के मामले में नवाचार-समर्थक दृष्टिकोण अपनाने तथा समृद्धि का ठोस आधार प्रदान करने वाली आपूर्ति शृंखला का निर्माण करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।
उन्होंने कहा, “इसलिए आज हम ‘पैक्स सिलिका’ घोषणा पर हस्ताक्षर करके हथियार के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली निर्भरता को न कहते हैं, हम ‘ब्लैकमेलिंग’ को न कहते हैं। हम साथ मिलकर कहते हैं कि आर्थिक सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है।”
हेलबर्ग ने कहा, “लेकिन हमें इन शब्दों के अर्थ को लेकर स्पष्ट होना होगा। कुछ लोग वैश्विक शासन और संप्रभुता जैसे शब्दों का इस्तेमाल एक ही अर्थ में करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे ऑरवेल करते थे।”
उन्होंने कहा, “हम एक नये ढांचे का निर्माण कर रहे हैं, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रसार करती है, एआई की अद्भुत शक्ति को हमारे लोगों के हाथों में सौंपती है और अभूतपूर्व संभावनाओं की लहर को जन्म देती है।”
वहीं, गोर ने कहा कि ‘पैक्स सिलिका’ 21वीं सदी की आर्थिक एवं तकनीकी व्यवस्था को परिभाषित करेगा और भारत इस नयी पहल में अहम भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा, “भारत का ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होना महज प्रतीकात्मक नहीं है। यह रणनीतिक है। यह आवश्यक है। भारत अपार प्रतिभाओं वाला राष्ट्र है, इतनी अपार कि वह प्रतिद्वंद्वियों का मुकाबला कर सकता है।”
गोर ने कहा, “भारत की इंजीनियरिंग संबंधी विशेषज्ञता इस महत्वपूर्ण गठबंधन के लिए आवश्यक क्षमताएं प्रदान करती है। प्रतिभा के अलावा, भारत ने महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण क्षमता हासिल करने की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति की है और यह वह क्षेत्र है, जिसमें हम भी पूरी तरह से सक्रिय हैं।”
अमेरिकी राजदूत ने भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की “व्यापक संभावनाओं” का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “व्यापार समझौते से लेकर ‘पैक्स सिलिका’ और रक्षा सहयोग तक, दोनों देशों के लिए वास्तव में साथ मिलकर काम करने की अपार संभावनाएं हैं। और मेरा लक्ष्य अगले तीन वर्षों में, जब तक मैं यहां हूं, इन संभावनाओं को पूरा भुनाना है।”
गोर ने भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “इस महीने की शुरुआत में हमने अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया। एक ऐसा समझौता, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक रूपरेखा तय करता है। हमने उन बाधाओं को दूर कर लिया है, जो हमें लंबे समय से रोके हुए थीं।”
गोर ने कहा, “यह समझौता केवल व्यापार प्रवाह या शुल्क प्रारूप के बारे में नहीं है। यह दो महान लोकतंत्रों के बीच इस बात का आह्वान है कि हम एक साथ निर्माण करेंगे, न कि केवल एक-दूसरे से खरीदेंगे। और आज हम इस दिशा में अगला कदम उठा रहे हैं।”
उन्होंने ‘पैक्स सिलिका’ को “क्षमताओं का गठबंधन” बताया, जो “दबाव आधारित निर्भरताओं की जगह भरोसेमंद औद्योगिक ठिकानों का सकारात्मक गठबंधन पेश करता है।”
गोर ने कहा, “हम भारत के भविष्य के सह-निर्माता के रूप में (इस गठबंधन में) शामिल होने का स्वागत करते हैं। ‘पैक्स सिलिका’ स्वतंत्र समाज के बारे में है और यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को नियंत्रित करेगा।”
उन्होंने कहा, “यह इस बारे में है कि नवाचार बेंगलुरु और सिलिकॉन वैली में होता है या उन निगरानी राज्यों में, जो अपने लोगों पर नजर रखने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हैं। हम स्वतंत्रता चुनते हैं। हम साझेदारी चुनते हैं। हम शक्ति चुनते हैं। और आज ‘पैक्स सिलिका’ में भारत के प्रवेश के साथ हम जीतना चुनते हैं।”
कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक सुरक्षित, लचीली एवं नवाचार-संचालित आपूर्ति शृंखला बनाने के मकसद पिछले साल दिसंबर में ‘पैक्स सिलिका’ पहल शुरू की गई थी।
पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन 12 दिसंबर को वाशिंगटन में आयोजित किया गया था, जहां भागीदार देशों ने पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे।
इस घोषणा में कच्चे माल से लेकर सेमीकंडक्टर और एआई बुनियादी ढांचा तक, आपूर्ति शृंखलाओं में गहन आर्थिक और तकनीकी सहयोग की एक साझा दृष्टि तथा पारस्परिक समृद्धि एवं सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया है।
‘पैक्स सिलिका’ के सदस्य देशों में ऑस्ट्रेलिया, यूनान, इजराइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ब्रिटेन शामिल हैं।
गोर ने पिछले महीने भारत को इस रणनीतिक गठबंधन में शामिल होने का न्योता दिया था।
‘पैक्स सिलिका’ के प्रमुख उद्देश्यों में से एक, सहयोगी देशों में एआई-संचालित समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक स्थायी आर्थिक व्यवस्था स्थापित करना है। (भाषा)


