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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 20 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंबिकापुर के एक अधिवक्ता को बदजुबानी के मामले में राहत दी है। अदालत की गरिमा को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में चल रही अवमानना की कार्रवाई को हाईकोर्ट ने समाप्त कर दिया। वकील द्वारा बिना शर्त माफी मांगने के बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि अदालत ने भविष्य के लिए सख्त चेतावनी भी दी है।
अंबिकापुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ( जेएमएफसी ) ने अधिवक्ता राजवर्धन सिंह के आचरण पर सवाल उठाते हुए मामला हाईकोर्ट को भेजा था। आरोप था कि उन्होंने अदालत की गरिमा के खिलाफ अनुचित व्यवहार और टिप्पणी की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर अवमानना नोटिस जारी किया और जवाब तलब किया।
गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के सामने सुनवाई हुई। 60 वर्षीय अधिवक्ता राजवर्धन सिंह स्वयं अदालत में उपस्थित हुए।
उन्होंने शपथपत्र पेश करते हुए कहा कि वे पिछले 30 वर्षों से वकालत कर रहे हैं। घटना के संबंध में उन्होंने बताया कि वह क्षणिक आवेश में हुई बात थी। उनका किसी न्यायाधीश या अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था।
अधिवक्ता ने अपनी गलती पर गहरा खेद जताया और भविष्य में ऐसी घटना न दोहराने का आश्वासन दिया। उन्होंने बिना किसी शर्त के माफी मांगी।
हाईकोर्ट ने वकील की उम्र, लंबे अनुभव और व्यक्त किए गए पछतावे को ध्यान में रखते हुए उनकी माफी स्वीकार कर ली। इसके साथ ही अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
हालांकि अदालत ने कहा कि आगे इस तरह की हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।


