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समुद्र-तल में 1500 मीटर से 6 किमी की गहराई तक बिछा ऑप्टिकल फाइबर केबल
‘छत्तीसगढ़’ की विशेष रिपोर्ट
15-Feb-2026 4:13 PM
समुद्र-तल में  1500 मीटर से 6 किमी की गहराई तक बिछा ऑप्टिकल फाइबर केबल

चेन्नई से अंडमान-निकोबार तक में डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत हुई,अब लक्षद्वीप लक्ष्य

‘छत्तीसगढ़’  की  विशेष रिपोर्ट : पी. श्रीनिवास राव

पोर्ट ब्लेयर श्री विजयपुरम, 15 फरवरी (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता )।
देश के दूरस्थ द्वीपों को सशक्त डिजिटल नेटवर्क से जोडऩे की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में समुद्र-तल ऑप्टिकल फाइबर केबल सबमरिन आप्टिकल फाइबर( स्ह्रस्नष्ट) परियोजना ने अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में दूरसंचार सेवाओं की तस्वीर बदल दी है। तेज़, स्थिर और विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ द्वीपसमूह अब शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, पर्यटन और व्यापार के साथ 6 किमी की गहराई में समुद्री हलचल से पहले आगाह कर रही है। अफसरों का मानना है कि यह योजना पहले हो जाती तो 2004 की सुनामी से बचा जा सकता था।

अधिकारी बताते हैं कि ऑप्टिकल फाइबर केबल  के माध्यम से अंडमान-निकोबार में डिजिटल कनेक्टिविटी का सशक्त ढांचा तैयार हुआ है, जो भविष्य की बढ़ती डिजिटल आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ द्वीपसमूह को विकास और नवाचार के नए पथ पर आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। इसकी सफलता के बाद अब लक्षद्वीप को डिजिटल कनेक्टिविटी देने का लक्ष्य है।

यह परियोजना यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (Universal Service Obligation Fund) के माध्यम से, केंद्रीय दूरसंचार विभाग द्वारा वित्तपोषित है। नेटवर्क का क्रियान्वयन भारत संचार निगम लिमिटेड ने तकनीकी सहयोग जापान की एन ई सी कॉरपोरेशन के तकनीकी सहयोग से पूरा किया है।

परियोजना के प्रभाव और तकनीकी विशेषताओं पर जानकारी बीएसएनएल की अधिकारी श्रीमती नीमा राय और श्रीमती  ने दी। वह इसके लिए विशेष रूप से पोर्ट ब्लेयर से लांग आयलैंड हमारे दल को जानकारी देने आई थी। उन्होंने बताया कि अगस्त 2020 में इस नेटवर्क को राष्ट्र को समर्पित किया गया। उन्होंने कहा कि समुद्र-तल केबल के प्रारंभ होने से पहले द्वीपों की कनेक्टिविटी मुख्यत: उपग्रह आधारित संपर्क पर निर्भर थी, जिसके कारण सीमित बैंडविड्थ और अधिक विलंबता जैसी चुनौतियां बनी रहती थीं। नई केबल प्रणाली ने इन बाधाओं को काफी हद तक दूर कर दिया है।

यह नेटवर्क चेन्नई से श्री विजयपुरम को जोड़ते हुए आगे स्वरराज द्वीप (हैवलॉक), लॉन्ग आइलैंड, रंगत, लिटिल अंडमान, कार निकोबार, कमोर्टा और ग्रेट निकोबार सहित प्रमुख द्वीपों तक विस्तारित है। उच्च गति और कम विलंबता वाली ब्रॉडबैंड सेवाओं ने डिजिटल संचार को अधिक सुचारु और भरोसेमंद बनाया है।

परियोजना के तहत लगभग 2,308 किलोमीटर लंबी समुद्र-तल ऑप्टिकल फाइबर केबल तथा 62 किलोमीटर स्थलीय केबल बिछाई गई है। कुल मिलाकर 2,370 किलोमीटर से अधिक का नेटवर्क अवसंरचना विकसित की गई है। नेटवर्क को उच्च स्तर की अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था (रेडंडेंसी) के साथ डिज़ाइन किया गया है, जिससे किसी तकनीकी बाधा की स्थिति में सेवाएं निर्बाध बनी रहें।


तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्री गहराई और जोखिम को ध्यान में रखते हुए केबल की संरचना को विभिन्न स्तरों पर सुरक्षित बनाया गया है। तटीय क्षेत्रों में डबल-आर्मर्ड केबल का उपयोग किया गया है, जिसमें स्टील वायर से अतिरिक्त सुरक्षा दी गई है, जबकि गहरे समुद्र में हल्की वजऩ वाली लेकिन उच्च जल-दाब सहन करने वाली केबल बिछाई गई है। प्रणाली की अनुमानित आयु लगभग 25 वर्ष है।

 

 

चेन्नई-श्रीविजयपुरम मुख्य खंड की अंतिम क्षमता 6.4 टेराबिट प्रति सेकंड तक है। वर्तमान में 2म200 गीगाबिट प्रति सेकंड की प्रारंभिक क्षमता सक्रिय की गई है, जिसमें एक चैनल मुख्य ट्रैफिक तथा दूसरा ‘हॉट स्टैंडबाय’ बैकअप के रूप में कार्य करता है। भविष्य में मांग बढऩे पर क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा सकता है।

लंबी दूरी में सिग्नल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मार्ग में लगभग 125 किलोमीटर के अंतराल पर 12 ऑप्टिकल रिपीटर्स स्थापित किए गए हैं। समुद्र-तल केबल प्राथमिक कनेक्टिविटी माध्यम के रूप में कार्यरत है, जबकि त्रस््रञ्ज-16, त्रस््रञ्ज-17 और त्रस््रञ्ज-18 जैसे उपग्रह बैकअप नेटवर्क के रूप में सेवाएं सुनिश्चित करते हैं।

इस तकनीकी उन्नयन का सकारात्मक प्रभाव आम जीवन में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। छात्रों के लिए ऑनलाइन शिक्षा अधिक सुचारु हुई है, टेली-चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के मरीज विशेषज्ञ चिकित्सकों से जुड़ पा रहे हैं, और ई-गवर्नेंस सेवाएं तेज़ी से उपलब्ध हो रही हैं। बेहतर इंटरनेट सुविधा से पर्यटन गतिविधियों तथा स्थानीय व्यवसायों को भी नई गति मिली है।

गौरतलब है कि इस नेटवर्क का उद्घाटन अगस्त 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। यह परियोजना न केवल डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ करती है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास, प्रशासनिक दक्षता और राष्ट्रीय एकीकरण को भी नई मजबूती प्रदान करती है।


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