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इंफाल, 9 फरवरी। मणिपुर के उखरुल जिले में सोमवार दोपहर हथियारबंद बदमाशों द्वारा लिटान सारेइखोंग गांव में कथित तौर पर अन्य घरों में आग लगाये जाने के बाद एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
पहाड़ी गांव के आसपास सशस्त्र समूहों ने हवा में कई गोलियां भी चलाईं, जिससे निवासी जरूरी सामान लेकर पड़ोसी कांगपोकपी जिले के सुरक्षित इलाकों में भागने को मजबूर हो गए।
तांगखुल में रहने वाले कई ग्रामीणों के भी इलाका छोड़ने की खबर है।
इस इलाके में हिंसा की शुरुआत शनिवार रात को लिटान गांव में तंगखुल नागा समुदाय के एक सदस्य पर सात से आठ लोगों द्वारा कथित तौर पर हमला किए जाने के बाद हुई।
पीड़ित पक्ष व लिटान सारेइखोंग के मुखिया के बीच मामला सुलझ गया था और दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से पारंपरिक तरीकों से मामले को सुलझाने का फैसला किया था।
अधिकारियों ने बताया कि रविवार को एक बैठक भी तय की गई थी। हालांकि, बैठक नहीं हो सकी।
इसके बजाय, पास के सिकिबुंग गांव के कुछ ग्रामीणों ने लिटान सारेइखोंग के मुखिया के आवास पर कथित रूप से हमला कर दिया।
खबरों के मुताबिक, ग्रामीणों ने लिटान थाने के पास से गुजरते हुए कई गोलियां भी चलाईं।
अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि रविवार शाम को जिले के लिटान गांव में दो आदिवासी समूहों ने पथराव किया, जिसके कारण प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी।
उन्होंने बताया कि मध्यरात्रि के आसपास लिटान सारेइखोंग में तंगखुल नगा समुदाय के कई मकानों में कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों द्वारा आग लगा दी गई। पास के ही एक इलाके में कुकी समुदाय के कुछ लोगों के मकानों को भी जला दिया गया।
तंगखुल मणिपुर की सबसे बड़ी नगा जनजाति है। लिटान सारेइखोंग कुकी बहुल गांव है।
जिले के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘नुकसान का आकलन किया जा रहा है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।’’
मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सभी समुदायों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने कहा, ‘‘आज सुबह मैंने आरआईएमएस अस्पताल का दौरा किया और उखरुल जिले में हुई दुर्भाग्यपूर्ण लिटान घटना में घायल हुए लोगों से मुलाकात की और उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए सभी आवश्यक चिकित्सा सहायता का आश्वासन दिया।’’
सिंह ने कहा, ‘‘गलतफहमी के कारण हुई इस घटना के बाद हालात अब नियंत्रण में है। मैं सभी समुदायों से संयम बरतने, कानून का पालन करने और शांति एवं सद्भाव बनाए रखने की अपील करता हूं।’’
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो फुटेज में हथियारबंद लोग गांव में मकानों और वाहनों को आग लगाते हुए और उग्रवादी अत्याधुनिक हथियारों से हवा में गोली चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
‘पीटीआई-भाषा’ वीडियो क्लिप की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका।
अधिकारी ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही को रोकने के लिए महादेव, लंबुई और शांगकाई तथा लिटान की ओर जाने वाले अन्य क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।
उन्होंने बताया कि रविवार शाम को सुरक्षा बलों ने लिटान सारेइखोंग गांव में आपस में भिड़े दो आदिवासी समूहों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे।
उखरुल जिले के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि तंगखुल नगा और कुकी समुदायों के सदस्यों के बीच तनाव के कारण गांव में शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका है।
जिला मजिस्ट्रेट आशीष दास ने अधिसूचना में कहा कि रविवार शाम सात बजे से अगले आदेश तक किसी भी व्यक्ति का अपने निवास स्थान से बाहर निकलना प्रतिबंधित है।
इसमें कहा गया है कि यह आदेश सरकारी अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों पर लागू नहीं होगा। (भाषा)


