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नयी दिल्ली, 9 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आचरण की निंदा करते हुए उन पर संसदीय कार्यवाही में “व्यवस्थित व्यवधान” डालने और संवैधानिक संस्थानों को “जानबूझकर” कमजोर करने का आरोप लगाया।
भाजपा सांसद और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के आचरण से अब यह “पूरी तरह से स्पष्ट” हो गया है कि सार्थक संसदीय चर्चा में कांग्रेस नेता की कोई दिलचस्पी नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया, “उनका उद्देश्य लोकतंत्र के मंदिर को राजनीतिक युद्धक्षेत्र में बदलना है। उनका एकमात्र एजेंडा भारत की प्रगति में बाधा डालना और देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है।”
बलूनी ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी राहुल गांधी और कांग्रेस द्वारा संसदीय कार्यवाही में व्यवस्थित रूप से बाधा डालने और संवैधानिक संस्थाओं को जानबूझकर कमजोर करने की कड़ी निंदा करती है।”
यह मामला सोमवार को लोकसभा के उस समय स्थगित होने के बाद का है जब गांधी की इस मांग को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा कि उन्हें केंद्रीय बजट पर चर्चा शुरू होने से पहले बोलने की अनुमति दी जाए।
गांधी पर निशाना साधते हुए भाजपा के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि लोकसभा में बार-बार बोलने का मौका दिए जाने के बावजूद विपक्ष के नेता अपने “भारत को बदनाम करने” वाले विमर्श पर अड़े हुए हैं।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया, “राहुल गांधी अक्सर अपनी खोखली तर्कशक्ति के उजागर होने के डर से महत्वपूर्ण बहस से बचने के लिए बहाने तलाशते हैं। राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान व्यवधान डालकर, राहुल गांधी ने न केवल संसद की अवमानना की, बल्कि भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति का भी घोर अपमान किया।”
उन्होंने कहा, “भारतीय जनता पार्टी राहुल गांधी और कांग्रेस द्वारा संसद के कामकाज में बार-बार बाधा डालने की कड़ी निंदा करती है और ऐसा आचरण लोकतांत्रिक मानदंडों और संसदीय मर्यादाओं के प्रति घोर अवहेलना को दर्शाता है।”
बलूनी ने कहा कि केंद्रीय बजट सहित “महत्वपूर्ण चर्चाओं” से विपक्षी दल की अनुपस्थिति एक नियमित घटना बन गई है।
उन्होंने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष के आसन पर कागज फाड़ना और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को परेशान करना, जन-केंद्रित मुद्दों के मामले में कांग्रेस की पूर्ण विफलता को उजागर करता है। संसद परिसर के भीतर प्रधानमंत्री के खिलाफ साजिश रचने का दुस्साहस भी निंदनीय है।”
बलूनी ने आगे कहा कि यह “विडंबना की पराकाष्ठा” है कि कांग्रेस, जिसने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, अब राष्ट्रीय सुरक्षा पर देश को उपदेश देने की कोशिश कर रही है।
डोकलाम गतिरोध के दौरान चीनी दूतावास में गांधी की कथित मुलाकातों का जिक्र करते हुए, भाजपा नेता ने दावा किया कि ऐसे कार्यों से भारतीय सशस्त्र बलों से संबंधित मामलों पर बोलने का उनका कोई नैतिक अधिकार नहीं रह जाता है।
बलूनी ने गांधी की विदेश यात्राओं के दौरान भारतीय लोकतंत्र के बारे में “अपमानजनक टिप्पणियां” करने के लिए भी उनकी कड़ी आलोचना की। भाजपा नेता ने आरोप लगाया, “भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए विदेशी शक्तियों से अपील करना वैचारिक दिवालियापन और राष्ट्र-विरोधी मानसिकता का चरम प्रदर्शन है।” (भाषा)


