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पदोन्नति अधिकार नहीं, लेकिन उस पर विचार कर्मचारी का मौलिक अधिकार- हाई कोर्ट
29-Jan-2026 12:18 PM
पदोन्नति अधिकार नहीं, लेकिन उस पर विचार कर्मचारी का मौलिक अधिकार- हाई कोर्ट

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 29 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ट्रेसर कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े नियमों पर निर्णय दिया है। अदालत ने कहा कि भले ही पदोन्नति किसी कर्मचारी का मौलिक अधिकार नहीं है, लेकिन पदोन्नति के लिए विचार किया जाना उसका मौलिक अधिकार है। इसलिए राज्य सरकार का दायित्व बनता है कि वह कर्मचारियों के लिए पर्याप्त पदोन्नति के अवसर उपलब्ध कराए।

याचिकाकर्ता भयपाल सिंह कंबर की नियुक्ति वर्ष 2003 में रायपुर नगर निगम में ट्रेसर पद पर हुई थी। उस समय लागू सेवा भर्ती नियम 2007 के तहत ट्रेसर से सहायक ड्राफ्ट्समैन पद पर पदोन्नति का प्रावधान था। बाद में ट्रेसर से उप अभियंता के 5 प्रतिशत पदों पर पदोन्नति का रास्ता भी खोला गया था।

वर्ष 2008 के बाद राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ नगरपालिका (अधिकारी एवं कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्तें) नियम 2018 लागू किए। इन नए नियमों में ट्रेसर पद को ही समाप्त कर दिया गया और साथ ही पदोन्नति से जुड़ा पूरा प्रावधान भी हटा दिया गया। इसके चलते याचिकाकर्ता को पूरी तरह पदोन्नति के अवसर से वंचित होना पड़ा।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय श्रीवास्तव ने हाई कोर्ट में दलील दी कि पदोन्नति पर विचार किया जाना कर्मचारी का मौलिक अधिकार है। राज्य सरकार ऐसे नियम नहीं बना सकती, जिससे किसी पूरे वर्ग को पदोन्नति के अवसर से पूरी तरह वंचित कर दिया जाए। नए नियमों ने ट्रेसर कर्मचारियों के भविष्य को ठप कर दिया है।

राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि नियम बनाना सरकार का विवेकाधीन अधिकार है और कर्मचारियों के हित के आधार पर नियमों में बदलाव के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने सुनवाई करते हुए कहा कि पुराने नियमों में ट्रेसर पद से पदोन्नति का प्रावधान था, जिसे नए नियमों में पूरी तरह खत्म कर दिया गया। इससे कर्मचारी को पदोन्नति पर विचार के अधिकार से वंचित किया गया है।

अदालत ने यह भी कहा कि पदोन्नति कर्मचारी के करियर विकास का अहम हिस्सा होती है और लंबे समय तक पदोन्नति न मिलने से हीन भावना पैदा होती है।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह ट्रेसर पद से पदोन्नति का प्रावधान जोड़ते हुए नियमों में आवश्यक संशोधन करे और याचिकाकर्ता को छह महीने के भीतर पदोन्नति का अवसर प्रदान करे।


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