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ओडिशा के नबरंगपुर में घर को चर्च के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर तनाव
28-Jan-2026 8:22 PM
ओडिशा के नबरंगपुर में घर को चर्च के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर तनाव

कोरापुट, 28 जनवरी। ओडिशा के नबरंगपुर जिले के एक गांव में उस समय तनाव फैल गया, जब ईसाई समुदाय के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें एक ऐसे मकान में प्रार्थना सभा आयोजित करने से रोका गया, जिसका इस्तेमाल चर्च के रूप में किया जा रहा था। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सोमवार को उमरकोट पुलिस थाना क्षेत्र के कपेना गांव में हुई।

ईसाई समुदाय के सदस्यों ने बताया कि 26 जनवरी को सुबह करीब नौ बजे ग्रामीणों के एक समूह ने प्रार्थना सभा में व्यवधान पैदा किया और लगभग 30 ईसाई परिवारों को अपना धर्म त्यागने की चेतावनी दी।

कपेना एक हिंदू बहुल गांव है, जहां कुछ परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया है।

नबरंगपुर के जिलाधिकारी महेश्वर स्वैन ने कहा, “एक परिवार में हिंदू और ईसाई दोनों समुदायों के सदस्य हैं। पिता हिंदू है, जबकि उसका बेटा ईसाई है।”

उन्होंने कहा कि सोमवार को जो घटना हुई, वह सांप्रदायिक तनाव नहीं थी, बल्कि परिवारों के सदस्यों के बीच का विवाद था।

हालांकि, ईसाई परिवारों ने दावा किया कि विरोधी समूह ने लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करके धमकी दी कि अगर वे अपनी धार्मिक प्रथाओं को जारी रखते हैं, तो प्रार्थना कक्ष को ध्वस्त कर दिया जाएगा और परिवारों को गांव से निकाल दिया जाएगा।

स्थानीय निवासी टूना सैंटा ने आरोप लगाया, “जब श्रद्धालुओं ने सवाल किया कि उन्हें प्रार्थना क्यों बंद कर देनी चाहिए, तो ग्रामीणों ने प्रार्थना कक्ष को बाहर से बंद कर दिया और सभी को बाहर जाने के लिए मजबूर किया।”

टूना के मुताबिक, भीड़ ने समुदाय से जुड़े दो लोगों- जलधर सैंटा (17) और मोहन सैंटा (20), पर हमला भी किया।

समुदाय के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने घटना के सिलसिले में उमरकोट पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

हालांकि, पुलिस ने कहा कि उसे कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन उसने स्वीकार किया कि गांव में दो समूहों के बीच तनाव पैदा हो गया था, जिसके मद्देनजर सुरक्षा कर्मियों को तैनात करना पड़ा है।

उमरकोट थाना प्रभारी रमाकांत साईं ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हमें इस घटना के सिलसिले में अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।”

साईं ने बताया, ‘‘सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर एक मकान बनाया गया था। जब परिवार वहां रह रहा था, तब कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन विवाद तब शुरू हुआ, जब ग्रामीणों के एक वर्ग ने मकान को चर्च के रूप में इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘गांव में कोई सांप्रदायिक तनाव नहीं है। हालांकि, एक समुदाय के सदस्यों के मकान को प्रार्थना कक्ष के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर गांव में छोटा-सा विवाद खड़ा हो गया था, जिसे तुरंत सुलझा लिया गया।’’

जिलाधिकारी स्वैन ने बताया कि दोनों समुदायों की सदस्यता वाली एक शांति समिति ने नबरंगपुर के उपजिलाधिकारी प्रकाश कुमार मिश्रा की देखरेख में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए बैठक की।

उन्होंने कहा, ‘‘शांति समिति के फैसले के अनुसार, प्रार्थना कक्ष को स्थानांतरित करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है और दोनों समूहों से अनुरोध किया गया है कि वे इस मुद्दे को सुलझाएं तथा पहले की तरह सद्भाव से रहें।’’ (भाषा)


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