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2023 की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप, राज्य सरकार से जवाब तलब
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 28 जनवरी। वर्ष 2023 से चल रही कांस्टेबल भर्ती को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है। अदालत ने अगली सुनवाई तक नए नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार सहित सभी संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है।
सन् 2023 से लगभग 6,000 पदों पर चल रही भर्ती से जुड़े मामले में याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुईं। परीक्षा के आंकड़ों के संकलन का काम सरकार ने टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा था, जिस पर निष्पक्षता से काम न करने और पैसों के लेन-देन के जरिए कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं।
इन आरोपों से आहत सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली जिलों के मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्यंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद, गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव और ईशान सहित अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनकी ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने पक्ष रखा।
27 जनवरी को पार्थ प्रतिम साहू की एकलपीठ में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि सरकारी जांच में स्वयं बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक ने शारीरिक परीक्षा के दौरान गलत डेटा दर्ज होने और गंभीर खामियों की बात स्वीकार की है। इसके अलावा, संबंधित सीसीटीवी फुटेज के हटाए जाने का आरोप भी सामने आ चुका है।
याचिका में पुलिस भर्ती प्रक्रिया नियम 2007 के नियम 7 का हवाला देते हुए कहा गया कि यदि भर्ती में अनियमितता पाई जाती है तो पूरी प्रक्रिया रद्द कर नई भर्ती कराई जानी चाहिए। यह भी आरोप है कि चयन सूची जारी करना और नियुक्ति आदेश देना नियमों के विपरीत है।
याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि यदि किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से जांच कराई जाती है, तो अन्य जिलों में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक कांस्टेबल पदों पर कोई नया नियुक्ति आदेश जारी न किया जाए। इस फैसले को राज्य की पुलिस भर्ती प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


