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डोमेस्टिक इन्सिडेंट रिपोर्ट को बताया अपूर्ण और अस्पष्ट, याचिकाकर्ताओं को राहत
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 28 जनवरी। घरेलू हिंसा अधिनियम से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूरजपुर के जेएमएफसी न्यायालय द्वारा 26 नवंबर 2024 को पारित आदेश को निरस्त कर दिया है। यह आदेश उस आवेदन को खारिज करने से संबंधित था, जिसमें घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत चल रही कार्यवाही को अवैध बताते हुए चुनौती दी गई थी।
याचिका उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी प्रकाश सिंह ने दायर की थी। उनके साथ उनकी मां मंजू सिंह, पिता मंगल देव सिंह और बहन अर्चना सिंह भी संयुक्त याचिकाकर्ता थे। प्रकाश सिंह का विवाह 27 जून 2018 को नम्रता सिंह से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। दंपति के दो बच्चे हैं। याचिका में कहा गया कि पहले बच्चे के जन्म के बाद पत्नी का व्यवहार उनके और परिवार के प्रति हिंसक, अपमानजनक और असहयोगी हो गया। दूसरे बच्चे के जन्म के बाद पत्नी ने बड़े बेटे को अपनी बहन को गोद देने का दबाव बनाया। इस मांग से इनकार करने पर कथित रूप से स्थिति और बिगड़ गई।
याचिकाकर्ता के अनुसार अगस्त 2021 में पत्नी बच्चों को लेकर मायके चली गईं और वापस लौटने से इनकार कर दिया। कई प्रयासों के बाद मार्च 2022 में मध्यस्थता से पत्नी बच्चों के साथ लौटीं, लेकिन शर्त यह रखी गई कि प्रकाश सिंह अपने परिवार से संबंध तोड़कर अलग रहें। याचिका में दावा किया गया कि वापसी के कुछ ही दिनों बाद पत्नी का पूर्ववत व्यवहार फिर शुरू हो गया।
मामले की सुनवाई रमेश सिन्हा और रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने की। अदालत ने 19 अक्टूबर 2022 की डोमेस्टिक इन्सिडेंट रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए कहा कि रिपोर्ट अत्यंत अस्पष्ट और सामान्य प्रकृति की है।
कोर्ट ने पाया कि कथित घरेलू हिंसा से जुड़े आरोपों में घटना की तिथि, समय, स्थान या तरीके का उल्लेख नहीं है। न ही किसी विशेष आरोपी के खिलाफ किसी ठोस कृत्य का विवरण दिया गया है। दहेज मांग, शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी बिना किसी विशिष्ट घटना या मांग के दर्ज किए गए हैं।
खंडपीठ ने माना कि यह रिपोर्ट घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करती। अधिनियम की धारा 9(1)(बी) के तहत संरक्षण अधिकारी का यह वैधानिक दायित्व है कि डोमेस्टिक इन्सिडेंट रिपोर्ट में पूर्ण, सटीक और प्रासंगिक विवरण दर्ज हों। इन तथ्यों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने जेएमएफसी सूरजपुर का आदेश रद्द कर दिया और याचिकाकर्ताओं को राहत प्रदान की।


