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-इल्मा हसन
मणिपुर के चुराचांदपुर ज़िले में 21 जनवरी की रात एक मैतेई की गोली मारकर हत्या के बाद राज्य में तनाव बढ़ गया है.
पुलिस के अनुसार, मयांगलमबम रिशिकांता सिंह को 21 जनवरी की शाम अगवा किया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई. उनका शव 22 जनवरी की सुबह चुराचांदपुर ज़िले के एक इलाके से बरामद हुआ.
यह इलाक़ा कुकी बहुल माना जाता है. रिशिकांता सिंह की उम्र 38 साल थी. वह मणिपुर के ककचिंग खुनोउ इलाके के रहने वाले थे.
समाचार एजेंसियों के अनुसार, उन्होंने कुकी समुदाय की एक महिला से शादी की थी और कुछ दिन पहले अपनी पत्नी से मिलने के लिए चुराचांदपुर गए थे.
घटना से जुड़ा एक वीडियो 21 जनवरी की रात सोशल मीडिया पर सामने आया. वीडियो में रिशिकांता सिंह ज़मीन पर बैठे हुए दिखाई देते हैं. उनके हाथ बंधे हुए हैं और वह खुद को छोड़ देने की गुहार लगाते हुए सुनाई देते हैं.
वीडियो में इसके बाद गोलियों की आवाज़ आती है. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है.
पुलिस ने क्या बताया?
चुराचांदपुर के ज़िला पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद ही प्रशासन को इसकी जानकारी मिली.
मैतेई संगठनों ने बयान जारी कर कहा है कि रिशिकांता सिंह को चुराचांदपुर जाने की अनुमति मिली थी. उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर सहमति के बाद ही वह वहां गए थे.
मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के चलते आम तौर पर मैतेई और कुकी समुदायों के लोगों को एक-दूसरे के प्रभाव वाले इलाकों में जाने की इजाज़त नहीं होती. कई इलाकों को बफर ज़ोन घोषित किया गया है.
इस घटना के बाद 22 जनवरी को ककचिंग खुनोउ के नागरिकों ने एक संयुक्त कार्रवाई समिति का गठन किया. इलाके में बैठकर धरना दिया जा रहा है.
समिति ने मांग की है कि रिशिकांता सिंह की हत्या के लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें सज़ा दी जाए. समिति ने यह भी मांग की है कि मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी जाए.
समिति का कहना है कि सरकार ऐसे ठोस कदम उठाए जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों.
कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन का बयान
इस बीच 22 जनवरी को कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन ने बयान जारी कर कहा है कि इस घटना या मैतेई की आवाजाही में उसकी कोई भूमिका नहीं रही है. कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन भारत सरकार के साथ सस्पेंशन ऑफ़ ऑपरेशन्स समझौते के तहत है.
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष मई 2023 से जारी है. अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है. बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं.(bbc.com/hindi)


