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फैमिली कोर्ट को हाई कोर्ट की हिदायत, जरूरतमंद महिलाओं की मदद के लिए बनाएं वकीलों का पैनल
08-Jan-2026 2:04 PM
फैमिली कोर्ट को हाई कोर्ट की हिदायत, जरूरतमंद महिलाओं की मदद के लिए बनाएं वकीलों का पैनल

पति के पक्ष में पारित एकतरफा आदेश रद्द करते हुए दी व्यवस्था
'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 8 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने निर्देश जारी किया है कि राज्य की सभी फैमिली कोर्ट को अब अपना अलग वकीलों का पैनल तैयार करना होगा। अदालत ने उल्लेख किया कि अब केवल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पास भेजकर कोर्ट अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती, बल्कि जरूरत पड़ने पर फैमिली कोर्ट को अपने पैनल से वकील नियुक्त कर तुरंत कानूनी सहायता उपलब्ध करानी होगी।

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि फैमिली कोर्ट द्वारा नियुक्त वकीलों का मानदेय राज्य सरकार के राजस्व से दिया जाएगा। अदालत ने विशेष रूप से यह टिप्पणी की कि यदि कोई पक्ष, खासकर महिला या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति, वकील का खर्च उठाने में असमर्थ है तो उसे तत्काल कानूनी सहायता देना फैमिली कोर्ट का वैधानिक दायित्व है।

हाई कोर्ट ने एक मामले में फैमिली कोर्ट के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सिर्फ यह कह देना कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन करें, पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट की भूमिका केवल मामलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चों को वास्तविक न्याय दिलाना भी है।

हाई कोर्ट ने कहा कि कानूनी सहायता के लिए लिखित आवेदन भी जरूरी नहीं है। यदि कोई पक्ष मौखिक रूप से भी यह कहता है कि वह वकील नहीं कर सकता, तो कोर्ट को तत्काल सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। ऐसा न करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

यह मुद्दा जांजगीर-चांपा की फैमिली कोर्ट में लंबे समय से लंबित एक तलाक प्रकरण की सुनवाई के दौरान सामने आया था। पत्नी ने फैमिली कोर्ट को बताया था कि आर्थिक तंगी के कारण वह वकील नहीं कर सकती और ओडिशा से बार-बार जांजगीर आना भी संभव नहीं है। फैमिली कोर्ट ने उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जाने की सलाह देकर अपना दायित्व पूरा मान लिया। जब महिला वहां नहीं पहुंच सकी, तो फैमिली कोर्ट ने उसे एकतरफा मानते हुए पति के पक्ष में तलाक का आदेश पारित कर दिया।

महिला की अपील पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ फैमिली कोर्ट नियम, 2007 के नियम 14 के तहत प्रत्येक फैमिली कोर्ट को वकीलों का पैनल रखना अनिवार्य है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता दी जा सके। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का तलाक आदेश रद्द करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया है।

 


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