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50 लाख रुपये मुआवजा और परिजन को नौकरी देने की मांग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोरबा, 8 जनवरी। छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी कोरबा में खनन कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी जानलेवा साबित हुई। दीपका मेगा प्रोजेक्ट में की गई भारी ब्लास्टिंग के दौरान खदान से उछला पत्थर राह चलते एक किसान के सिर पर आ गिरा, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया है और खदान प्रबंधन के खिलाफ जोरदार विरोध शुरू हो गया।
मृतक की पहचान रेकी गांव निवासी 60 वर्षीय लखन लाल पटेल के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक वे बुधवार सुबह हरदीबाजार में अपने साढू भाई के घर गए थे। दोपहर करीब तीन बजे पैदल गांव लौटते समय खदान क्षेत्र में तेज धमाके के साथ ब्लास्टिंग हुई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि पत्थर सैकड़ों मीटर दूर तक उछल गए। इसी दौरान एक भारी पत्थर सीधे लखन पटेल के सिर पर आ गिरा और वे वहीं गिर गए। हरदीबाजार के अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हादसे की खबर फैलते ही ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंच गए। आक्रोशित लोगों ने शव को सड़क पर रखकर धरना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लास्टिंग से पहले न तो तय सेफ्टी ज़ोन बनाया गया और न ही खदान के पास स्थित सार्वजनिक सड़क पर आवाजाही रोकी गई। बिना पर्याप्त चेतावनी और सुरक्षा इंतजामों के किए गए धमाके के कारण यह हादसा हुआ। लोगों का कहना है कि यदि नियमों का पालन होता, तो एक निर्दोष जान बचाई जा सकती थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हरदीबाजार थाना क्षेत्र में पुलिस बल के साथ सीआईएसएफ जवानों की तैनाती की गई है। प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है।
हादसे पर दुख जताते हुए एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी शनिष चंद्र ने कहा कि ब्लास्टिंग से पहले सायरन बजाने और क्षेत्र खाली कराने की प्रक्रिया तय है। इस मामले में कहां चूक हुई, इसकी जांच एरिया प्रबंधन द्वारा की जा रही है।
एक पंचायत प्रतिनिधि मुकेश जायसवाल ने बताया कि यह अकेली घटना नहीं है। ब्लास्टिंग से बोरवेल सूख रहे हैं, मकानों में दरारें पड़ रही हैं और सुरक्षा घेरे से बाहर तक पत्थर गिरना आम हो गया है।
वहीं ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने इसे दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही से हुई मौत करार देते हुए माइनिंग सेफ्टी के डीजी और जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। समिति ने मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और एक सदस्य को स्थायी रोजगार देने की मांग दोहराई है।




