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जिन्हें वेनेजुएला अपने से दूर लगता है, वे जान लें कि उनका टाईम भी आएगा...
सुनील कुमार ने लिखा है
04-Jan-2026 8:07 PM
जिन्हें वेनेजुएला अपने से दूर लगता है, वे जान लें कि उनका टाईम भी आएगा...

दुनिया में शांतिदूत बनकर नोबल शांति पुरस्कार का दावा करने वाला अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प दुनिया का एक सबसे हिंसक राष्ट्रपति साबित हो रहा है। जिस अंदाज में उसने अमरीकी सरकार की दुनिया के गरीब देशों के जाने वाली यूएस-एड मदद को खत्म करने के साथ ही दसियों लाख जिंदगियों को खत्म करने का सिलसिला शुरू कर दिया, वह अपने आपमें उसके नाम को नोबल शांति पुरस्कार की किसी भी लिस्ट से बाहर करने के लिए काफी था। और फिर मानो वह काफी न हो, तो उसने जलवायु परिवर्तन रोकने के वैश्विक अभियान को ग्रीन-धोखाधड़ी बताते हुए उससे हाथ खींच लिए। इससे धरती के तबाह होने का सिलसिला धीमा करने का जो आसार दिख रहा था, वह पूरी तरह खत्म ही हो गया। उसने शांति स्थापित करने के नाम पर पौन बरस तक फिलीस्तीन के गाजा पर इजराइली हमलों को हथियार देना जारी रखा, और फिर फिलीस्तीनियों को अपने ही घर में भूखे बघेर शरणार्थी बनाकर इस युद्ध को रूकवाने का दावा किया, और नोबल शांति पुरस्कार कमेटी के माथे पर मानो बंदूक ही टिका दी। ऐसे ट्रम्प ने दो दिन पहले दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक, वेनेजुएला पर फौजी हमला किया, और वहां के राष्ट्रपति को उसकी पत्नी सहित बेडरूम से उठाकर अमरीका लाने का काम किया। यह इसलिए कि ट्रम्प ने तेल के भंडारों और खदानों पर कब्जा करने के लिए वेनेजुएला पर अमरीका में नशीले सामान भेजने का आरोप लगाते हुए उसके पास के समंदर में पिछले महीनों में अलग-अलग बोट पर कई हमले किए, और दर्जनों लोगों को मार भी डाला। एक हमला तो अमरीकी फौज ने ऐसा किया कि उसमें बोट से बचे हुए तैरते दो लोगों को हवाई हमले से और मार डाला गया, और इसका वीडियो देखकर कई अमरीकी सांसदों ने कहा कि उन्होंने इससे भयानक कोई नजारा पूरी जिंदगी में नहीं देखा।

लेकिन हम पहले भी कई बार इस बात को लिखते आए हैं कि लोगों को अपनी जिंदगी में ही अपना किया हुआ भुगतना पड़ता है। यह बात सिर्फ लोगों पर लागू नहीं होती, देशों पर भी लागू होती है। दर्जनों देशों पर अलग-अलग वक्त पर किए गए अमरीकी हमलों, और उनमें मार डाले गए दसियों लाख लोगों की आह का असर है कि आज निर्वाचित अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प अमरीका के तमाम लोकतांत्रिक संस्थानों को, वहां की लोकतांत्रिक परंपराओं को खत्म कर रहा है। अभी तीन साल और बाकी अपने कार्यकाल में वह कोई भी लोकतांत्रिक इमारत छोड़ेगा, या अमरीकी लोकतंत्र को गाजा के आज के मलबे की तरह बनाकर जाएगा, यह अंदाज लगा पाना अभी आसान नहीं है। जो राष्ट्रपति अपने देश के भीतर संसद, अदालत, सरकार, मीडिया, और विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान, किसी को भी नहीं छोड़ रहा है, हर किसी को तबाह कर रहा है, हर किसी के लिए हिकारत दिखा रहा है, वह राष्ट्रपति नोबल शांति पुरस्कार की उम्मीद भी कर रहा है, बल्कि उसका दावा करते हुए वह हिंसक भी हुआ जा रहा है। जो कहने के लिए दुनिया की 8 बड़ी-बड़ी जंग रूकवाने का दावा नींद में भी बड़बड़ाते रहता है, उसने ईरान पर बुरा हमला किया, और अब वेनेजुएला को एक देश भी मानने से इंकार कर दिया, और उसे अपने ही किसी मुहल्ले की तरह मानकर वहां पर फौजी कार्रवाई की। एक देश के राष्ट्रपति को नींद से सोते हुए उसकी बीवी सहित उठाकर लेकर अमरीका आ जाना, और उसे युद्धबंदी की तरह रखना, उसकी तस्वीरें जारी करना, ट्रम्प के मन में किसी अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए कोई सम्मान नहीं है। एक के बाद एक विकसित और सभ्य देश, संयुक्त राष्ट्र संघ, खुद अमरीका के बहुत से नेता, वेनेजुएला पर इस फौजी कार्रवाई को गैरकानूनी बता रहे हैं, गैरजरूरी तो बता ही रहे हैं। और यह करते हुए ट्रम्प बाकी दुनिया के सामने एक बहुत बुरी मिसाल पेश कर रहा है। इसे देखते हुए यूक्रेन पर रूसी हमले को कैसे गलत करार दिया जा सकेगा, गाजा पर फिलीस्तीनी हमले को भी इसी पैमाने पर सही ठहरा दिया जाएगा, और आज जिस ताइवान के इर्द-गिर्द चीनी फौज घेरा डाले पड़ी है, और लगातार यह जिद कर रही है कि ताइवान चीन का ही एक हिस्सा है, उस चीनी युद्धोन्माद को कैसे नाजायज ठहराया जा सकेगा? ट्रम्प ने अपनी जंगखोर, और विस्तारवादी नीतियों के चलते ऐसी हिंसक मिसालें पेश की हैं कि उसे युद्ध अपराधी आसानी से करार दिया जा सकता है, कोई फर्जी शांति पुरस्कार भी उसे नहीं दिया जा सकता।

हम लगातार इस बात को लिखते आ रहे हैं कि ट्रम्प जैसा घटिया और कमीना इंसान अमरीकी इतिहास में भी दुर्लभ है। वह ऐसा सनकी तानाशाह है जो देश के भीतर और देश के बाहर अपनी मनमानी के नए-नए रिकॉर्ड कायम कर रहा है। जिसने अपने देश के रक्षामंत्री का नाम बदलकर युद्धमंत्री रख दिया है, जिसने फौजी और आर्थिक दोनों किस्म के दबाव डालकर दुनिया के देशों की बांहें मरोड़ी हैं। जिसने योरप जैसे आधी सदी पुराने अमरीका के मजबूत दोस्त को कचरे की तरह फेंक दिया है, और बिना योरप के वह रूस और यूक्रेन के बीच एक मनमाना युद्धविराम करवाने में लगा हुआ है। वह अमरीका के आधी-पौन सदी पुराने दुश्मन रूस को गले लगाकर यह साबित कर रहा है कि चार बरस के लिए चुना गया अमरीकी राष्ट्रपति देश के सदियों के इतिहास की परंपराओं को कचरे की टोकरी में फेंक सकता है, और इन चार बरसों में वह देश के दोस्तों और दुश्मनों की लिस्ट अदला-बदली भी कर सकता है। गनीमत यही है कि आज अमरीका के भीतर भी ट्रम्प की मनमानी के खिलाफ खासा विरोध चल रहा है। यह एक अलग बात है कि अमरीकी संविधान ने ही वहां के राष्ट्रपति को संसद से ऊपर एक ऐसा दर्जा दे रखा है, जहां वह कुछ भी कर सकता है, और संसद विश्वास मत की नौबत आने के पहले तक राष्ट्रपति को नहीं रोक सकती। ट्रम्प ने दुनिया भर में जो हिंसक अस्थिरता फैलाई है, वह भयानक है। दुनिया भर के गरीब देशों को जाने वाली मदद को रोककर उसने करोड़ों लोगों के टीकाकरण को रोक दिया है, और दसियों लाख लोगों का इलाज भी। बिना हथियार उठाए सिर्फ परंपरागत और भरोसेमंद मदद को रोककर ट्रम्प दुनिया का सबसे बड़ा हत्यारा भी साबित होने जा रहा है क्योंकि दुनिया में ऐसी अमरीकी सरकार के हिसाब से कोई तैयारी कभी की नहीं थी।

आज जिन लोगों को वेनेजुएला दूर लग रहा है, उन्हें कोलंबिया और क्यूबा की तरफ देखना चाहिए, उन्हें नाइजीरिया की तरफ देखना चाहिए जहां पर इस्लामी आतंकियों पर ईसाईयों के कत्ल का आरोप लगाते हुए अमरीका ने हवाई हमले करके बहुत से लोगों को मार डाला। लोगों को सीरिया की तरफ देखना चाहिए जहां दो अमरीकी सैनिकों के मारे जाने पर ट्रम्प ने इस्लामी आतंकियों के ठिकाने कहते हुए हवाई हमले किए। जिन लोगों को लगता है कि वे ट्रम्प से बचे हुए हैं, और अमरीका उन पर हवाई हमले नहीं करेगा, उन्हें अमरीका के टैरिफ हमलों, और आर्थिक प्रतिबंधों के बारे में भी सोचना चाहिए। जब तक दुनिया का दादा अपनी बददिमाग गुंडागर्दी पर आमादा रहने दिया जाएगा, तब तक दुनिया के लोगों को यह तय मानना चाहिए कि उनका भी टाईम आएगा। 

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